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Amaravati Declared Permanent Capital of Andhra Pradesh

अमरावती बनी आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी, लोकसभा से बिल पास

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Parliament session where Amaravati is declared Andhra Pradesh’s permanent capital in 2026.
Amaravati Declared Permanent Capital of Andhra Pradesh

आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक बहस के बीच बड़ा फैसला सामने आया है। लोकसभा ने बुधवार को अमरावती को राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी घोषित करने वाला आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 बहुमत से पारित कर दिया।

इस महत्वपूर्ण बिल को भाजपा, कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का समर्थन मिला, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने इसका विरोध किया।

कांग्रेस ने समर्थन के साथ रखी मांग

लोकसभा में बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का पूरा समर्थन करती है, लेकिन साथ ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग भी दोहराई।
उन्होंने कहा कि अमरावती का विकास बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद की तरह किया जाना चाहिए, साथ ही विशाखापत्तनम, तिरुपति और कुरनूल जैसे अन्य शहरों का भी संतुलित विकास जरूरी है।

टीडीपी और केंद्र का रुख

टीडीपी सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने सदन से अपील की कि इस बिल को सर्वसम्मति से पारित किया जाए, ताकि राज्य को एक स्थायी राजधानी मिल सके।
वहीं भाजपा सांसद सीएम रमेश ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहली बार संसद किसी विशेष स्थान को राज्य की राजधानी घोषित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से अब राजधानी को लेकर किसी तरह का भ्रम या बदलाव नहीं होगा।

वाईएसआर कांग्रेस का विरोध

दूसरी ओर, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इस विधेयक का विरोध करते हुए किसानों के मुद्दे उठाए।
पार्टी सांसद पी. वी. मिथुन रेड्डी ने कहा कि अमरावती के विकास के लिए करीब 34,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी और प्रभावित किसानों से कई वादे किए गए थे, लेकिन अब तक उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि किसानों को मुआवजा देने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए।

क्या है महत्व?

इस बिल के पास होने से:

  • अमरावती को स्थायी राजधानी का दर्जा मिल गया
  • राज्य में लंबे समय से चल रहा राजधानी विवाद खत्म होने की उम्मीद
  • निवेश और विकास को मिल सकता है बढ़ावा
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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A student wearing a Tulsi mala and tilak outside a school in Purulia amid a dispute over religious symbols and transfer certificate allegations.
तुलसी की माला और तिलक को लेकर विवाद: छात्रा को टीसी देने का आरोप, स्कूल ने किया इनकार

पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के एक स्कूल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि 11वीं की एक छात्रा के तुलसी की माला पहनने और माथे पर तिलक लगाने पर स्कूल प्रबंधन ने आपत्ति जताई और बाद में उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) भेज दिया। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। परिवार ने लगाए गंभीर आरोप छात्रा के परिवार का कहना है कि वह नियमित रूप से तुलसी की माला पहनकर और माथे पर तिलक लगाकर स्कूल जाती थी। इसी बात पर स्कूल अधिकारियों ने आपत्ति जताई और परिवार को स्कूल बुलाया गया। परिजनों का आरोप है कि बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला और अगले ही दिन छात्रा का ट्रांसफर सर्टिफिकेट व्हाट्सऐप के जरिए भेज दिया गया। परिवार ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षिका पर भी लगाए आरोप छात्रा की मां का आरोप है कि एक शिक्षिका बार-बार उनकी बेटी की तुलसी की माला और तिलक पर आपत्ति जताती थीं तथा माला नहीं पहनने की सलाह देती थीं। स्कूल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार स्कूल प्रशासन ने कहा कि छात्रा को अब तक आधिकारिक रूप से ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। प्रबंधन का दावा है कि तुलसी की माला पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है और किसी छात्र को धार्मिक प्रतीकों के कारण निशाना नहीं बनाया गया। स्कूल का कहना है कि मामला केवल विद्यालय के अनुशासन और नियमों के पालन से जुड़ा है तथा सभी छात्रों पर समान नियम लागू होते हैं। पुलिस कर रही है जांच छात्रा के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि विवाद धार्मिक प्रतीकों को लेकर था या स्कूल के अनुशासन से जुड़े किसी अन्य मुद्दे के कारण उत्पन्न हुआ। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।  

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हावड़ा के बालुहाटी में इंडियन ऑयल स्टेशन पर गैस रिसाव, समय रहते काबू; बड़ा हादसा टला

हावड़ा: पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बालुहाटी इलाके में स्थित इंडियन ऑयल के एक स्टेशन पर गैस रिसाव की घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। समय रहते अधिकारियों की कार्रवाई से स्थिति पर काबू पा लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। वाल्व खुलने से शुरू हुआ गैस रिसाव प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गैस पाइपलाइन का वाल्व अचानक खुल जाने से तेज दबाव के साथ गैस का रिसाव शुरू हो गया। रिसाव इतना तेज था कि गैस ऊंचाई तक निकलती हुई दिखाई दे रही थी, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस और अधिकारी स्थानीय लोगों ने तुरंत घटना की सूचना प्रशासन और इंडियन ऑयल के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही डोमजूर थाना पुलिस और इंडियन ऑयल की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने तत्काल गैस पाइपलाइन का वाल्व बंद कर रिसाव पर नियंत्रण पा लिया। कुछ देर तक बना रहा अफरा-तफरी का माहौल गैस रिसाव के कारण कुछ समय तक स्टेशन परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा। हालांकि, समय पर कार्रवाई होने से किसी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने कहा- स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में इंडियन ऑयल और प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि गैस रिसाव पूरी तरह रोक दिया गया है और स्थिति अब सामान्य है। उन्होंने कहा कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E25) को देशभर में लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की जाएगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि सरकार फिलहाल E25 पर परीक्षण करा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।   वाहन कंपनियों से भी होगी चर्चा   केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से परामर्श किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि E25 ईंधन सभी मानकों पर सुरक्षित और व्यवहारिक साबित हो, तभी इसे लागू किया जाएगा।   E20 पर भी सरकार ने दी सफाई   सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही इंजन खराब होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सही तरीके से मेंटेन किए गए वाहनों में ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई है। सरकार का कहना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण की दिशा में हर कदम वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही उठाया जाएगा।   सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। हालांकि E25 को लागू करने का निर्णय केवल परीक्षण और तकनीकी मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

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