कांग्रेस ने घोषित किए राज्यसभा उम्मीदवार
आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपने छह उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में अलग-अलग राज्यों से नेताओं को मैदान में उतारा गया है।
घोषित उम्मीदवारों में तेलंगाना से अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी को टिकट दिया गया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ से फूलो देवी नेताम, हरियाणा से करमवीर सिंह बौद्ध, हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा और तमिलनाडु से एम क्रिस्टोफर तिलक को उम्मीदवार बनाया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद इन नामों की घोषणा की गई। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि संबंधित राज्यों के लिए उम्मीदवारों को अंतिम रूप दे दिया गया है।
तेलंगाना में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होने जा रहा है। मौजूदा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी और केआर सुरेश रेड्डी का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है।
राज्य में फिलहाल कांग्रेस की सरकार होने और विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल के कारण अभिषेक मनु सिंघवी के दोबारा राज्यसभा पहुंचने की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पूर्व विधायक वेम नरेंद्र रेड्डी ने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी समेत कई नेताओं का धन्यवाद किया।
निर्वाचन आयोग के अनुसार राज्यसभा की 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव 16 मार्च को आयोजित किए जाएंगे। यह चुनाव देश के 10 राज्यों-महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार-में होंगे।
इन चुनावों की जरूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि इन राज्यों से चुने गए कई मौजूदा सांसदों का कार्यकाल इस साल समाप्त हो रहा है।
सीटों के हिसाब से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 7 सीटों पर मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार में 6-6 सीटें खाली हो रही हैं। ओडिशा में 4, असम में 3 और छत्तीसगढ़, हरियाणा तथा तेलंगाना में 2-2 सीटों के लिए चुनाव होंगे। हिमाचल प्रदेश में एक सीट पर मतदान कराया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है और पार्टी यहां अपनी सीटें बढ़ाने की कोशिश करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भोपाल, एजेंसियां। मध्य प्रदेश की चर्चित त्विषा शर्मा हत्या मामला में भोपाल जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति Samarth Singh को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब इस दौरान समर्थ सिंह से मामले के विभिन्न पहलुओं पर गहन पूछताछ करेगी। कोर्ट ने त्विषा शर्मा के परिजनों की मांग पर आरोपी का पासपोर्ट जब्त करने का भी आदेश दिया है, ताकि वह देश छोड़कर फरार न हो सके। जबलपुर से हिरासत में लिया गया था आरोपी भोपाल पुलिस के अनुसार, समर्थ सिंह को जबलपुर में हिरासत में लिया गया था। बताया गया कि वह जबलपुर कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था, लेकिन अदालत ने आत्मसमर्पण की अनुमति नहीं दी। इसके बाद भोपाल पुलिस और जबलपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे हिरासत में ले लिया गया। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि आरोपी से दहेज हत्या, घटना वाली रात की परिस्थितियों और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर पूछताछ की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर जांच में यह सामने आता है कि फरारी के दौरान किसी ने आरोपी की मदद की थी, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। CCTV फुटेज से बढ़ा सस्पेंस इस बीच त्विषा शर्मा के आखिरी मेकअप का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में वह ससुराल के पास स्थित एक ब्यूटी पार्लर में सामान्य और शांत दिखाई दे रही हैं। पुलिस ने इस फुटेज को जांच के लिए जब्त कर लिया है। इसके अलावा कटारा हिल्स स्थित घर की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जहां से त्विषा का शव बरामद हुआ था। मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेशी पुलिस समर्थ सिंह को मीडिया से बचाते हुए पहले मेडिकल जांच के लिए जेपी अस्पताल ले गई। इसके बाद उसे सीधे भोपाल जिला अदालत में पेश किया गया। अदालत परिसर में भी आरोपी को पीछे के गेट से अंदर ले जाया गया।
Narendra Modi शनिवार को देशभर के 51 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी के अपॉइंटमेंट लेटर वितरित करेंगे। यह 19वां रोजगार मेला होगा, जिसका आयोजन सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया जाएगा। इस दौरान प्रधानमंत्री युवाओं से संवाद भी करेंगे। 47 शहरों में होगा रोजगार मेला सरकार के मुताबिक इस बार रोजगार मेला देश के 47 शहरों में आयोजित किया जा रहा है। चयनित युवाओं को: Indian Railways Ministry of Home Affairs स्वास्थ्य विभाग वित्तीय सेवा विभाग उच्च शिक्षा विभाग सहित कई सरकारी संस्थानों और मंत्रालयों में नियुक्ति दी जाएगी। अब तक 12 लाख युवाओं को मिल चुके हैं नियुक्ति पत्र सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 18 रोजगार मेलों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें करीब 12 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि रोजगार मेला युवाओं को तेजी से सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की बड़ी पहल है। सोशल मीडिया पर क्या बोले पीएम मोदी? Narendra Modi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि सरकार युवाओं को सशक्त बनाने और उनके बेहतर भविष्य के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि रोजगार मेले के जरिए देशभर के युवाओं को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिल रहा है। अक्टूबर 2022 में शुरू हुई थी योजना रोजगार मेले की शुरुआत 22 अक्टूबर 2022 को हुई थी। उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराना है। लोकसभा चुनाव से पहले 12 फरवरी 2024 को आयोजित 12वें रोजगार मेले में सबसे ज्यादा 1 लाख नियुक्ति पत्र बांटे गए थे। वहीं 2025 में रोजगार मेलों के जरिए 11 लाख नियुक्तियों का आंकड़ा पार किया गया था। 18वें रोजगार मेले में महिलाओं पर दिया था जोर 19वें रोजगार मेले से पहले आयोजित 18वें रोजगार मेले में प्रधानमंत्री ने 61 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए थे। तब उन्होंने कहा था कि: महिला स्वरोजगार दर में 15% की बढ़ोतरी हुई है कई स्टार्टअप में महिलाएं डायरेक्टर की भूमिका निभा रही हैं गांवों में भी महिलाएं रोजगार गतिविधियों का नेतृत्व कर रही हैं प्रधानमंत्री ने यह भी बताया था कि उस रोजगार मेले में 8 हजार से ज्यादा महिलाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए थे।
Central Bureau of Investigation (CBI) ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे की एक महिला एक्सपर्ट को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक आरोपी महिला Manisha Sanjay Havaldar ने फिजिक्स के प्रश्नपत्र लीक कर चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए थे। CBI का दावा है कि आरोपी महिला National Testing Agency (NTA) की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त थीं और उन्हें भौतिकी प्रश्नपत्र तक पूरी पहुंच हासिल थी। अप्रैल में शेयर किए गए थे प्रश्न CBI के अनुसार, मनीषा हवलदार पुणे के Seth Hiralal Sarraf Prashala में कार्यरत हैं। जांच में सामने आया है कि उन्होंने अप्रैल महीने में कुछ प्रश्न सह-आरोपी Manisha Mandhare के साथ साझा किए थे। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान यह पाया गया कि शेयर किए गए सवाल वास्तविक NEET-UG 2026 फिजिक्स प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। इससे पहले CBI ने 16 मई को मनीषा मंधारे को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया था। कई शहरों में छापेमारी पेपर लीक नेटवर्क की जांच के तहत CBI ने New Delhi, Jaipur, Gurugram, Nashik, Pune, Latur और अहिल्यानगर समेत कई जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक स्टेटमेंट और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार CBI प्रवक्ता के मुताबिक इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में पेपर लीक के मूल स्रोत का भी पता चल गया है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ बिचौलिये छात्रों से लाखों रुपये लेकर उन्हें विशेष कोचिंग क्लासों में भेजते थे, जहां कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र साझा किए जाते थे। 21 जून को होगी दोबारा परीक्षा NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। हालांकि पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। अब NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।