राजनीति

Vijay Sparks 3-Way TN Fight

तमिलनाडु चुनाव में नया मोड़: DMK-AIADMK की जंग बनी त्रिकोणीय, विजय ने बदली सियासी तस्वीर

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Actor Vijay enters Tamil Nadu politics, creating triangular contest with DMK and AIADMK leaders
Vijay TVK Tamil Nadu Politics

 

50 साल पुरानी राजनीति में बड़ा बदलाव

तमिलनाडु की राजनीति में इस बार ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों से चली आ रही दो दलों की सीधी टक्कर अब त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गई है।

M. K. Stalin की Dravida Munnetra Kazhagam और Edappadi K. Palaniswami की All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam के बीच अब अभिनेता से नेता बने Vijay की एंट्री ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।

विजय की पार्टी TVK बनी ‘गेम चेंजर’

Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरते ही बड़ा प्रभाव डाला है।

युवाओं और शहरी वोटर्स के बीच पार्टी को तेजी से समर्थन मिल रहा है। अनुमान है कि TVK 15-20% तक वोट शेयर हासिल कर सकती है, जो किसी नई पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

युवा और महिला वोटर्स पर खास फोकस

TVK ने अपने चुनावी अभियान में युवाओं और महिलाओं को केंद्र में रखा है।

पार्टी ने रोजगार, इंटर्नशिप और वित्तीय सहायता जैसे वादे किए हैं। साथ ही महिलाओं के लिए हर महीने ₹2500 की सहायता, मुफ्त गैस सिलेंडर और शादी से जुड़े लाभ देने का ऐलान किया है।

DMK और AIADMK के सामने नई चुनौती

Dravida Munnetra Kazhagam अपनी सरकार के काम और कल्याण योजनाओं के दम पर मैदान में है, जबकि All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठा रही है।

लेकिन TVK की एंट्री ने दोनों दलों के वोट बैंक में सेंध लगा दी है, जिससे मुकाबला और ज्यादा रोमांचक हो गया है।

कई सीटों पर ‘किंगमेकर’ बन सकती है TVK

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही Tamilaga Vettri Kazhagam सीधे तौर पर सरकार न बना पाए, लेकिन कई सीटों पर उसका प्रदर्शन नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

दक्षिणी जिलों और चेन्नई जैसे शहरी इलाकों में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।

क्या खत्म होगी द्विदलीय राजनीति?

कुछ सर्वे बताते हैं कि अभी भी बड़ी संख्या में मतदाता इसे DMK बनाम AIADMK की लड़ाई मानते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में यह चुनाव पूरी तरह बदल चुका है।

तमिलनाडु की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है, जहां तीसरी ताकत निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

राजनीति

View more
Actor Vijay enters Tamil Nadu politics, creating triangular contest with DMK and AIADMK leaders
तमिलनाडु चुनाव में नया मोड़: DMK-AIADMK की जंग बनी त्रिकोणीय, विजय ने बदली सियासी तस्वीर

  50 साल पुरानी राजनीति में बड़ा बदलाव तमिलनाडु की राजनीति में इस बार ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों से चली आ रही दो दलों की सीधी टक्कर अब त्रिकोणीय मुकाबले में बदल गई है। M. K. Stalin की Dravida Munnetra Kazhagam और Edappadi K. Palaniswami की All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam के बीच अब अभिनेता से नेता बने Vijay की एंट्री ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। विजय की पार्टी TVK बनी ‘गेम चेंजर’ Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरते ही बड़ा प्रभाव डाला है। युवाओं और शहरी वोटर्स के बीच पार्टी को तेजी से समर्थन मिल रहा है। अनुमान है कि TVK 15-20% तक वोट शेयर हासिल कर सकती है, जो किसी नई पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। युवा और महिला वोटर्स पर खास फोकस TVK ने अपने चुनावी अभियान में युवाओं और महिलाओं को केंद्र में रखा है। पार्टी ने रोजगार, इंटर्नशिप और वित्तीय सहायता जैसे वादे किए हैं। साथ ही महिलाओं के लिए हर महीने ₹2500 की सहायता, मुफ्त गैस सिलेंडर और शादी से जुड़े लाभ देने का ऐलान किया है। DMK और AIADMK के सामने नई चुनौती Dravida Munnetra Kazhagam अपनी सरकार के काम और कल्याण योजनाओं के दम पर मैदान में है, जबकि All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठा रही है। लेकिन TVK की एंट्री ने दोनों दलों के वोट बैंक में सेंध लगा दी है, जिससे मुकाबला और ज्यादा रोमांचक हो गया है। कई सीटों पर ‘किंगमेकर’ बन सकती है TVK विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही Tamilaga Vettri Kazhagam सीधे तौर पर सरकार न बना पाए, लेकिन कई सीटों पर उसका प्रदर्शन नतीजों को प्रभावित कर सकता है। दक्षिणी जिलों और चेन्नई जैसे शहरी इलाकों में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। क्या खत्म होगी द्विदलीय राजनीति? कुछ सर्वे बताते हैं कि अभी भी बड़ी संख्या में मतदाता इसे DMK बनाम AIADMK की लड़ाई मानते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में यह चुनाव पूरी तरह बदल चुका है। तमिलनाडु की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है, जहां तीसरी ताकत निर्णायक भूमिका निभा सकती है।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
Udit Raj reacting to Tej Pratap Yadav statement on Rahul Gandhi during political debate in Delhi

राहुल गांधी पर बयान से बढ़ा विवाद, उदित राज का तेज प्रताप यादव पर तीखा पलटवार

RSS volunteers conducting door-to-door meetings in West Bengal ahead of assembly elections

बंगाल चुनाव: RSS की ‘डोर-टू-डोर’ रणनीति, 1.75 लाख बैठकों के जरिए माहौल बनाने की कोशिश

Election officials seizing cash and gold in Tamil Nadu amid poll code violation controversy

Tamil Nadu Election: ₹1,200 करोड़ से ज्यादा कैश-गोल्ड जब्त, पीएम मोदी पर MCC उल्लंघन के आरोप; 700 नागरिकों ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

Mamata Banerjee reacting to PM Modi’s jhalmuri video, sparking political controversy in West Bengal
‘10 रुपये का नोट जेब में? यह नौटंकी है’– ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर तंज, ‘झालमुरी’ वीडियो पर सियासी घमासान

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच सियासत अब ‘झालमुरी’ वीडियो पर गरमा गई है। नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोला है और इसे “नौटंकी” करार दिया है। क्या है पूरा मामला? प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वे झाड़ग्राम की एक साधारण दुकान पर रुककर मशहूर बंगाली स्नैक झालमुरी खरीदते और खाते नजर आए। वीडियो में पीएम दुकानदार को पैसे देने पर जोर देते दिखे, जबकि दुकानदार मना करता रहा। ममता का हमला–‘कैमरे पहले से तैयार थे’ इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि यह “अचानक” कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री बिना कार्यक्रम के अचानक रुके, तो वहां कैमरे पहले से कैसे मौजूद थे? यह सब पहले से प्लान किया गया था।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के पॉकेट में 10 रुपये का नोट! क्या कोई इस पर विश्वास करेगा? यह सिर्फ नौटंकी है।” खान-पान की राजनीति पर भी निशाना ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी पर लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है और किसी पर भी प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। ऐसे में छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े राजनीतिक हमले का रूप ले रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Tej Pratap Yadav speaking to media, criticizing Congress leadership and backing Priyanka Gandhi

कांग्रेस नेतृत्व पर सियासी घमासान: तेज प्रताप यादव बोले–‘राहुल गांधी से नहीं चल पाएगी पार्टी, प्रियंका गांधी को मिले कमान’

political leaders

‘टोपी’ वाले बयान से सियासत गरम–BJP अध्यक्ष नितिन नवीन का अखिलेश यादव पर तंज, ममता बनर्जी पर भी तीखा हमला

bengal elections

इस बार AI और बॉडी कैम की निगरानी में होगा बंगाल चुनाव

Raghav Chadha speaking in Rajya Sabha after removal from deputy leader post
राज्यसभा में राघव चड्ढा का तंज: ‘हटाया गया हूं, फिर भी मौजूद हूं’–AAP नेतृत्व पर उठाए सवाल

  पार्टी से पद से हटाए जाने के बाद संसद में बोले चड्ढा नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में अपनी ही पार्टी पर तंज कसते हुए राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी। हाल ही में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने सदन में कहा कि उनकी पार्टी के नेता और नए डिप्टी लीडर दोनों ही उपस्थित नहीं हैं, जबकि वह खुद “हटाए जाने के बावजूद” सदन में मौजूद हैं। संसद में क्या बोले राघव चड्ढा? राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा: “जिस पार्टी से मैं आता हूं, उसके नेता सदन में मौजूद नहीं हैं। नए डिप्टी लीडर भी मौजूद नहीं हैं। मैं हाल ही में हटाया गया डिप्टी लीडर हूं, लेकिन मैं यहां मौजूद हूं।” उनका यह बयान सीधे तौर पर AAP नेतृत्व और नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल पर कटाक्ष माना जा रहा है। डिप्टी चेयरमैन को दी बधाई, रिश्ते को बताया ‘खट्टा-मीठा’ चड्ढा ने यह टिप्पणी उस दौरान की जब वे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार चुने जाने पर बधाई दे रहे थे। उन्होंने अपने और हरिवंश सिंह के रिश्ते को “खट्टा-मीठा” बताते हुए कहा कि जब वे विषय से भटकते हैं तो उन्हें डांट पड़ती है, लेकिन सही तरीके से बोलने पर उन्हें सराहना भी मिलती है। AAP में अंदरूनी खींचतान के संकेत हाल ही में AAP ने राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया था। इस फैसले के पीछे पार्टी के अंदर मतभेदों की चर्चा भी सामने आई थी। पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि क्या संसद में जनता के मुद्दे उठाना कोई गलती है? चड्ढा ने उठाए थे ये सवाल चड्ढा ने कहा था कि उन्होंने संसद में हमेशा जनता के मुद्दों को उठाया, लेकिन अब उनके बोलने पर रोक लगाने की बात कही जा रही है। उन्होंने पूछा, “क्या जनता की आवाज उठाना अपराध है?” राजनीतिक मायने क्या हैं? राघव चड्ढा का यह बयान AAP के अंदर चल रही संभावित खींचतान को उजागर करता है। संसद में दिया गया उनका तंज आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर की राजनीति को और चर्चा में ला सकता है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Indian Parliament session with heated debate over women reservation bill and delimitation issue

महिला आरक्षण बिल को बड़ा झटका, परिसीमन विवाद में फंसा प्रस्ताव; संसद में पास नहीं हो सका कानून

West Bengal map

बंगाल चुनाव 2026: पहले चरण में दागी और धनी उम्मीदवारों का दबदबा, BJP के 70% प्रत्याशी दागी, TMC सबसे अमीर

TMC councillor joins BJP in Jalpaiguri ahead of West Bengal elections amid political tensions

बंगाल चुनाव: उत्तर बंगाल में TMC को झटका, पूर्वी रॉय प्रधान BJP में शामिल

0 Comments

Top week

Indian Parliament discussing Women’s Reservation Bill and delimitation during special session in New Delhi
राष्ट्रीय

महिला आरक्षण पर मंथन: 16–18 अप्रैल के विशेष सत्र में क्या होगा, और क्यों नाराज़ हैं दक्षिण के राज्य?

surbhi अप्रैल 16, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?