मैकाय, एजेंसियां। बांग्लादेश के खिलाफ पहले टेस्ट में मिली चौंकाने वाली 9 विकेट की हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। दूसरे टेस्ट के लिए तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड को अंतिम एकादश में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बोलैंड पहले टेस्ट में टीम का हिस्सा होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना सके थे।
डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने पैट कमिंस, मिशेल स्टार्क और जोश हेजलवुड के साथ तीन तेज गेंदबाजों को उतारा था। बोलैंड और हेजलवुड के बीच अंतिम स्थान के लिए करीबी मुकाबला था, जिसमें हेजलवुड को मौका मिला। उन्होंने मैच में शानदार गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट लिए और टेस्ट क्रिकेट में अपने 300 विकेट भी पूरे किए।
पहले टेस्ट में हार के बाद ऑस्ट्रेलिया टीम प्रबंधन परिस्थितियों और गेंदबाजी संयोजन पर फिर से विचार कर रहा है। मैकाय में होने वाले दूसरे टेस्ट में बोलैंड को मौका मिलने की संभावना इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि वह टीम के 13 सदस्यीय दल में बने हुए हैं। हालांकि, अभी अंतिम एकादश की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट के लिए जेक वेदराल्ड को टीम से बाहर कर मैथ्यू रेनशॉ को शामिल किया है। वेदराल्ड ने पहले टेस्ट में 23 और 0 रन बनाए थे। वहीं रेनशॉ ने पिछले शेफील्ड शील्ड सत्र में 49.90 की औसत से 499 रन बनाए थे।
बांग्लादेश ने डार्विन में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से हराकर दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। दूसरा टेस्ट 22 अगस्त से मैकाय में खेला जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह मुकाबला सीरीज बचाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
गॉल, एजेंसियां। भारत ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में 165 रन से शानदार जीत दर्ज कर दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। भारत की जीत के हीरो युवा स्पिनर मानव सुथार रहे, जिन्होंने मैच में कुल 10 विकेट लेकर श्रीलंका की दूसरी पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई। श्रीलंका की दूसरी पारी 206 रन पर सिमटी 372 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम दूसरी पारी में 206 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत की ओर से मानव सुथार ने दूसरी पारी में 6/55 का शानदार प्रदर्शन किया। पहली पारी में उन्होंने चार विकेट लिए थे, जिससे उनके मैच में कुल 10 विकेट हो गए। भारत ने रखा था 372 रन का लक्ष्य भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए थे। देवदत्त पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली। श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर खत्म होने के बाद भारत को बढ़त मिली। दूसरी पारी में भारत ने 193 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा। ऋषभ पंत ने भी मचाया धमाल भारत की दूसरी पारी में ऋषभ पंत ने 66 रन की तेज पारी खेली। इसी दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के पूरे करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड बनाया। पंत की आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को बड़ा लक्ष्य खड़ा करने में मदद की। भारत WTC अंक तालिका में पांचवें स्थान पर इस जीत से भारत को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 अभियान में महत्वपूर्ण अंक मिले हैं। हालांकि भारत अभी अंक प्रतिशत के आधार पर पांचवें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया इस समय तालिका में शीर्ष पर बना हुआ है।
श्रीलंका के खिलाफ गाले टेस्ट में ऋषभ पंत ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से एक साथ कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। दूसरी पारी में 69 गेंदों पर 66 रन की तेजतर्रार पारी खेलने वाले पंत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने शुभमन गिल को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। पंत की यह पारी सिर्फ WTC के आंकड़ों के लिहाज से खास नहीं रही। उन्होंने इसी पारी के दौरान टेस्ट क्रिकेट में अपने 100 छक्के भी पूरे किए और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए। वह टेस्ट इतिहास में इस मुकाम तक पहुंचने वाले केवल चौथे बल्लेबाज हैं। WTC में गिल को पछाड़कर नंबर-1 गाले टेस्ट की दूसरी पारी में 66 रन बनाने के बाद पंत के WTC करियर के रन 2885 तक पहुंच गए। इसके साथ ही उन्होंने शुभमन गिल के 2867 रन के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। भारत के लिए WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में अब पंत शीर्ष पर हैं। गिल दूसरे स्थान पर हैं, जबकि रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा, विराट कोहली और यशस्वी जायसवाल भी इस सूची में शामिल हैं। पंत और गिल के बीच अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में WTC में भारत की ओर से सबसे पहले 3000 रन पूरे करने की दौड़ भी दिलचस्प हो गई है। टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय गाले में पंत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के पूरे करना भी रही। वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं। पंत ने यह रिकॉर्ड केवल 51वें टेस्ट में बनाया और दुनिया में सबसे तेजी से 100 टेस्ट छक्के पूरे करने वाले बल्लेबाज भी बने। उनसे पहले बेन स्टोक्स, ब्रेंडन मैकुलम और एडम गिलक्रिस्ट यह उपलब्धि हासिल कर चुके थे। टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्कों के मामले में बेन स्टोक्स 138 छक्कों के साथ शीर्ष पर हैं। ब्रेंडन मैकुलम 107 छक्कों के साथ दूसरे और पंत 100 छक्कों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। गाले में दोनों पारियों में बनाए 105 रन श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में पंत ने 39 रन बनाए थे। इसके बाद दूसरी पारी में उन्होंने 69 गेंदों पर 66 रन की तेज पारी खेली। इस तरह गाले टेस्ट में पंत ने दोनों पारियों को मिलाकर कुल 105 रन बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत को दूसरी पारी में तेजी से रन बनाने और श्रीलंका के सामने बड़ा लक्ष्य रखने में मदद की। पंत की खासियत यही रही है कि वह टेस्ट क्रिकेट में भी जरूरत के मुताबिक आक्रामक बल्लेबाजी कर सकते हैं। 100 टेस्ट छक्कों का आंकड़ा इस शैली की सबसे बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है। पंत के रिकॉर्ड ने बढ़ाई गिल से मुकाबले की दिलचस्पी शुभमन गिल और ऋषभ पंत दोनों ही भारतीय टेस्ट क्रिकेट के अहम बल्लेबाज हैं। WTC में रन बनाने के मामले में दोनों के बीच लगातार प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। पंत के नंबर-1 बनने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों में से कौन सबसे पहले 3000 WTC रन पूरे करता है। गाले टेस्ट की इस उपलब्धि ने पंत के नाम एक साथ दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड जोड़ दिए हैं। उनका प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि टेस्ट क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी अब मैच की दिशा बदलने का बड़ा हथियार बन चुकी है।
गाले, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट के चौथे दिन ध्रुव जुरेल के एक लो कैच को लेकर विवाद खड़ा हो गया। श्रीलंका की दूसरी पारी के 22वें ओवर में लाहिरू उदारा ने मानव सुथार की गेंद पर बाहर की ओर शॉट खेला, जिसे गली में खड़े जुरेल ने जमीन के बेहद करीब जाकर पकड़ लिया। मैदानी अंपायर ने फैसले के लिए तीसरे अंपायर की मदद ली और रिप्ले देखने के बाद उदारा को आउट करार दिया। गेंद जमीन से लगी या नहीं, इसी पर विवाद रिप्ले में कैच लेते समय गेंद के जमीन के करीब होने के कारण विवाद शुरू हुआ। कुछ पूर्व क्रिकेटरों और प्रशंसकों का मानना था कि गेंद जुरेल के हाथ में जाने से पहले जमीन को छू सकती थी। वहीं, उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीसरे अंपायर ने कैच को सही मानते हुए बल्लेबाज को आउट दिया। श्रीलंकाई खेमे में भी नाराजगी उदारा के आउट होने के फैसले के बाद श्रीलंकाई बल्लेबाज भी फैसले से संतुष्ट नजर नहीं आए। सोशल मीडिया पर भी कैच के वीडियो और तस्वीरों को लेकर जमकर बहस हुई। विवाद ने एक बार फिर लो कैच के मामलों में तकनीक और तीसरे अंपायर के फैसले की भूमिका पर चर्चा छेड़ दी है। भारत जीत के करीब कैच विवाद के बावजूद भारत ने चौथे दिन मुकाबले पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। भारत ने श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा और दिन का खेल खत्म होने तक मेजबान टीम को 84/4 पर रोक दिया। श्रीलंका को जीत के लिए 288 रन और चाहिए, जबकि भारत को आखिरी दिन सिर्फ छह विकेट हासिल करने हैं।