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Why Rajasthan Royals picked Riyan Parag as captain

IPL 2026: रियान पराग ही क्यों बने राजस्थान रॉयल्स के कप्तान? कोच कुमार संगकारा ने खोला राज

surbhi मार्च 20, 2026 0
Riyan Parag leading Rajasthan Royals with coach Kumar Sangakkara before IPL 2026
Riyan Parag Rajasthan Royals Captain IPL 2026

Indian Premier League 2026 के आगाज से पहले राजस्थान रॉयल्स ने बड़ा फैसला लेते हुए संजू सैमसन के बाद टीम की कमान रियान पराग को सौंप दी है। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में चर्चा तेज कर दी, जिस पर अब टीम के हेड कोच कुमार संगकारा ने खुलकर अपनी बात रखी है।

खराब प्रदर्शन के बाद बड़े बदलाव

IPL 2025 में राजस्थान रॉयल्स का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। टीम ने केवल 4 मैच जीते, जबकि 10 मुकाबलों में हार झेलनी पड़ी और अंक तालिका में 9वें स्थान पर रही। इसी खराब प्रदर्शन के बाद फ्रेंचाइजी ने टीम संयोजन और नेतृत्व दोनों में बड़े बदलाव करने का निर्णय लिया।

टीम को संतुलित करने पर फोकस

कुमार संगकारा के अनुसार, इस बार टीम ने अपनी कमजोरियों पर खास काम किया है।

  • स्पिन विभाग को मजबूत करने के लिए रवि बिश्नोई को शामिल किया गया
     
  • ऑलराउंडर विकल्प बढ़ाने के लिए रवींद्र जडेजा और सैम करन को टीम में जोड़ा गया
     

इन बदलावों से टीम को संतुलन और लचीलापन मिलने की उम्मीद है, खासकर विदेशी खिलाड़ियों के चयन में।

रियान पराग को कप्तान क्यों चुना गया?

कप्तानी के फैसले पर संगकारा ने साफ कहा कि यह पूरी तरह योग्यता और नेतृत्व क्षमता के आधार पर लिया गया निर्णय है। उन्होंने बताया कि रियान पराग को उन्होंने किशोर उम्र से देखा है और अब उनमें काफी परिपक्वता आ चुकी है।

संगकारा के मुताबिक,

  • पराग में टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता है
     
  • दबाव में निर्णय लेने की समझ विकसित हुई है
     
  • वे एक जिम्मेदार खिलाड़ी और इंसान के रूप में उभरे हैं
     

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चयन में किसी क्षेत्रीय पहचान या अन्य बाहरी कारकों का कोई असर नहीं था।

चयन प्रक्रिया रही कड़ी

राजस्थान रॉयल्स ने नए कप्तान के चयन के लिए कई खिलाड़ियों पर विचार किया और एक सख्त इंटरव्यू प्रक्रिया अपनाई। अंत में टीम मैनेजमेंट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि रियान पराग ही इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

आगे की राह

टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ को भरोसा है कि रियान पराग की कप्तानी में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। संगकारा ने कहा कि योजना बनाना जरूरी है, लेकिन असली सफलता मैदान पर प्रदर्शन से तय होगी। टीम का फोकस अब खिलाड़ियों के बीच तालमेल और आत्मविश्वास बढ़ाने पर है।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IPL- 2026: CSK की हार के बाद BCCI का बड़ा एक्शन, ऋतुराज समेत पूरी टीम पर जुर्माना

नई दिल्ली, एजेंसियां। CSK का IPL 2026 अभियान गुजरात टाइटंस के खिलाफ करारी हार के साथ लगभग खत्म हो गया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में चेन्नई को 89 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम को एक और बड़ा झटका लगा, जब BCCI ने कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और पूरी टीम पर भारी जुर्माना लगा दिया।   धीमी ओवर गति पर लगा जुर्माना BCCI ने बताया कि चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात के खिलाफ मैच में तय समय के भीतर ओवर पूरे नहीं किए। यह इस सीजन दूसरी बार था जब टीम स्लो ओवर रेट की दोषी पाई गई। IPL आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के तहत कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ पर 24 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सिर्फ कप्तान ही नहीं, बल्कि प्लेइंग इलेवन और इम्पैक्ट प्लेयर सहित बाकी खिलाड़ियों पर भी छह लाख रुपये या मैच फीस का 25 प्रतिशत, जो भी कम हो, का जुर्माना लगाया गया है।   गुजरात ने हर विभाग में किया दबदबा मैच में Gujarat Titans ने शानदार प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी में Sai Sudharsan ने 84 रन, Shubman Gill ने 64 रन और Jos Buttler ने नाबाद 57 रन बनाए। गुजरात ने 20 ओवर में 229 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में चेन्नई की पूरी टीम 13.4 ओवर में 140 रन पर ऑलआउट हो गई। गेंदबाजी में Mohammed Siraj, Kagiso Rabada और Rashid Khan ने तीन-तीन विकेट लेकर CSK की बल्लेबाजी ध्वस्त कर दी।   CSK की सबसे बड़ी हारों में शामिल यह हार IPL इतिहास में चेन्नई सुपर किंग्स की सबसे बड़ी हारों में से एक बन गई। इससे पहले 2013 में Mumbai Indians ने CSK को 60 रन से हराया था। अब प्लेऑफ में पहुंचने की चेन्नई की उम्मीदें भी लगभग खत्म हो चुकी हैं।

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विस्फोटक पारी के बाद वैभव सूर्यवंशी ने जीता दिल, संजीव गोयनका की पत्नी के पैर छूकर लिया आशीर्वाद

Vaibhav Suryavanshi ने सिर्फ अपनी बल्लेबाजी से ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और संस्कार से भी क्रिकेट फैंस का दिल जीत लिया। Rajasthan Royals और Lucknow Super Giants के बीच खेले गए अहम मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव ने तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 38 गेंदों में 93 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 10 छक्के और 7 चौके शामिल रहे। वैभव की इस धमाकेदार पारी की बदौलत राजस्थान रॉयल्स ने 220 रनों का बड़ा लक्ष्य 19.1 ओवर में हासिल कर लिया और मुकाबला 7 विकेट से अपने नाम कर लिया। लेकिन मैच खत्म होने के बाद जो दृश्य देखने को मिला, उसने सोशल मीडिया पर अलग ही चर्चा छेड़ दी। मैच के बाद दिखे वैभव के संस्कार मुकाबला खत्म होने के बाद Sanjiv Goenka खुद मैदान पर पहुंचे और वैभव सूर्यवंशी की शानदार बल्लेबाजी की तारीफ की। इसी दौरान जब संजीव गोयनका की पत्नी वहां पहुंचीं, तो वैभव ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया और फिर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह पल कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल media पर वायरल हो गया। फैंस वैभव की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। कई लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और सम्मान की खूबसूरत मिसाल बताया। राजस्थान की प्लेऑफ उम्मीदें बरकरार इस जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स ने प्लेऑफ की रेस में खुद को मजबूती से बनाए रखा है। टीम फिलहाल अंक तालिका में चौथे स्थान पर बनी हुई है। लक्ष्य का पीछा करते हुए वैभव के अलावा Dhruv Jurel ने नाबाद 53 रन और Yashasvi Jaiswal ने 43 रनों की अहम पारी खेली। अब राजस्थान के लिए अगला मुकाबला बेहद अहम होने वाला है। टीम को 24 मई को Mumbai Indians के खिलाफ हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी, तभी प्लेऑफ का टिकट लगभग पक्का हो सकेगा। सोशल मीडिया पर छाए वैभव वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी के साथ-साथ उनका व्यवहार भी चर्चा का विषय बन गया है। क्रिकेट फैंस का मानना है कि इतनी कम उम्र में मैदान पर आक्रामक खेल और मैदान के बाहर विनम्रता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।  

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