IPL 2026 का रोमांच अपने चरम पर है और आज का मुकाबला बेहद खास होने वाला है। Sanju Samson पहली बार Chennai Super Kings के लिए मैदान पर उतरेंगे-वो भी अपनी पुरानी टीम Rajasthan Royals के खिलाफ। भावनात्मक होगा मुकाबला संजू सैमसन के लिए यह मैच सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पल भी है। उन्होंने 11 साल तक राजस्थान रॉयल्स का प्रतिनिधित्व किया और टीम के प्रमुख बल्लेबाज रहे। अब वही खिलाड़ी चेन्नई की जर्सी में अपने पुराने साथियों के खिलाफ खेलते नजर आएंगे। वहीं, Ravindra Jadeja भी इस बार राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बनकर अपनी पूर्व टीम के खिलाफ उतरेंगे, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। नई कप्तानी की शुरुआत इस मैच में Riyan Parag राजस्थान रॉयल्स के फुल-टाइम कप्तान के रूप में अपना पहला IPL मैच खेलेंगे। दूसरी ओर, चेन्नई की कप्तानी Ruturaj Gaikwad के हाथों में है, जिनसे टीम को मजबूत शुरुआत की उम्मीद होगी। धोनी नहीं खेलेंगे MS Dhoni चोट के कारण शुरुआती मैचों में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे चेन्नई की टीम संयोजन में बदलाव देखने को मिल सकता है। मैच से जुड़ी जरूरी जानकारी मैच: राजस्थान रॉयल्स vs चेन्नई सुपर किंग्स तारीख: 30 मार्च 2026 स्थान: गुवाहाटी, बारसापारा क्रिकेट स्टेडियम समय: शाम 7:30 बजे (टॉस 7:00 बजे) लाइव कहां देखें? टीवी पर: स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क ऑनलाइन स्ट्रीमिंग: JioHotstar ऐप और वेबसाइट
Indian Premier League 2026 के आगाज से पहले राजस्थान रॉयल्स ने बड़ा फैसला लेते हुए संजू सैमसन के बाद टीम की कमान रियान पराग को सौंप दी है। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में चर्चा तेज कर दी, जिस पर अब टीम के हेड कोच कुमार संगकारा ने खुलकर अपनी बात रखी है। खराब प्रदर्शन के बाद बड़े बदलाव IPL 2025 में राजस्थान रॉयल्स का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। टीम ने केवल 4 मैच जीते, जबकि 10 मुकाबलों में हार झेलनी पड़ी और अंक तालिका में 9वें स्थान पर रही। इसी खराब प्रदर्शन के बाद फ्रेंचाइजी ने टीम संयोजन और नेतृत्व दोनों में बड़े बदलाव करने का निर्णय लिया। टीम को संतुलित करने पर फोकस कुमार संगकारा के अनुसार, इस बार टीम ने अपनी कमजोरियों पर खास काम किया है। स्पिन विभाग को मजबूत करने के लिए रवि बिश्नोई को शामिल किया गया ऑलराउंडर विकल्प बढ़ाने के लिए रवींद्र जडेजा और सैम करन को टीम में जोड़ा गया इन बदलावों से टीम को संतुलन और लचीलापन मिलने की उम्मीद है, खासकर विदेशी खिलाड़ियों के चयन में। रियान पराग को कप्तान क्यों चुना गया? कप्तानी के फैसले पर संगकारा ने साफ कहा कि यह पूरी तरह योग्यता और नेतृत्व क्षमता के आधार पर लिया गया निर्णय है। उन्होंने बताया कि रियान पराग को उन्होंने किशोर उम्र से देखा है और अब उनमें काफी परिपक्वता आ चुकी है। संगकारा के मुताबिक, पराग में टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता है दबाव में निर्णय लेने की समझ विकसित हुई है वे एक जिम्मेदार खिलाड़ी और इंसान के रूप में उभरे हैं उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चयन में किसी क्षेत्रीय पहचान या अन्य बाहरी कारकों का कोई असर नहीं था। चयन प्रक्रिया रही कड़ी राजस्थान रॉयल्स ने नए कप्तान के चयन के लिए कई खिलाड़ियों पर विचार किया और एक सख्त इंटरव्यू प्रक्रिया अपनाई। अंत में टीम मैनेजमेंट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि रियान पराग ही इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त हैं। आगे की राह टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ को भरोसा है कि रियान पराग की कप्तानी में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। संगकारा ने कहा कि योजना बनाना जरूरी है, लेकिन असली सफलता मैदान पर प्रदर्शन से तय होगी। टीम का फोकस अब खिलाड़ियों के बीच तालमेल और आत्मविश्वास बढ़ाने पर है।
भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे Sanju Samson एक बार फिर सुर्खियों में हैं। टी20 विश्व कप 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद अब उनकी नजर IPL 2026 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि पर टिकी है। अगर सैमसन इस सीजन में 5000 रन पूरे कर लेते हैं, तो वह MS Dhoni के खास क्लब में शामिल हो जाएंगे। टी20 वर्ल्ड कप में मैच विनर बने सैमसन टी20 विश्व कप 2026 में सैमसन ने भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। वेस्टइंडीज के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 97 रन इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 89 रन न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में 89 रन इन पारियों ने उन्हें टीम का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज साबित कर दिया। IPL में इतिहास रचने के करीब अब IPL 2026 में सैमसन एक खास रिकॉर्ड के बेहद करीब हैं। अब तक उन्होंने 2013 से 2025 के बीच 177 मैचों में 4,704 रन बनाए हैं, जिसमें 3 शतक 26 अर्धशतक शामिल हैं उन्हें 5000 रन के आंकड़े तक पहुंचने के लिए सिर्फ 296 रन की जरूरत है। धोनी के क्लब में एंट्री का मौका IPL इतिहास में विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में 5000 रन का आंकड़ा अभी तक केवल MS Dhoni ही छू पाए हैं, जिन्होंने 2008 से 2025 के बीच 278 मैचों में 5,439 रन बनाए हैं। हालांकि KL Rahul के नाम भी 5000+ रन हैं, लेकिन उन्होंने हर मैच में विकेटकीपिंग नहीं की, इसलिए यह उपलब्धि अलग मानी जाती है। CSK की जर्सी में दिखेंगे सैमसन इस बार सैमसन के लिए यह उपलब्धि और भी खास हो सकती है, क्योंकि IPL 2026 में वह Chennai Super Kings की ओर से खेलते नजर आएंगे। दिलचस्प बात यह है कि यही वह टीम है, जहां MS Dhoni ने अपने करियर के सबसे यादगार पल दिए। ऐसे में सैमसन अगर इस टीम के लिए खेलते हुए 5000 रन पूरे करते हैं, तो यह उनके करियर का एक ऐतिहासिक मोमेंट होगा। राजस्थान से चेन्नई तक का सफर सैमसन लंबे समय तक Rajasthan Royals का हिस्सा रहे और 2021 में टीम की कप्तानी भी संभाली। उनकी अगुवाई में टीम 2022 में फाइनल तक पहुंची थी। 2025 सीजन के बाद उन्होंने टीम से अलग होने का फैसला किया, जिसके बाद चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें ट्रेड के जरिए अपने साथ जोड़ लिया। क्या टूटेगा रिकॉर्ड? अब सबकी नजर IPL 2026 पर है-क्या सैमसन इस सीजन में 5000 रन का आंकड़ा छूकर धोनी के खास क्लब में शामिल हो पाएंगे? अगर उनका फॉर्म जारी रहा, तो यह सिर्फ समय की बात लगती है।
IPL 2026 से पहले एक बड़े फैसले ने क्रिकेट फैंस को चौंका दिया था-भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज Sanju Samson का Rajasthan Royals से अलग होना। अब सैमसन ने खुद इस फैसले के पीछे की वजह साफ कर दी है। एक बातचीत में सैमसन ने खुलकर कहा कि उन्होंने टीम इसलिए छोड़ी क्योंकि उन्हें लगा कि राजस्थान रॉयल्स के साथ उनका सफर पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि टीम में मेरा समय खत्म हो गया है, इसलिए आगे बढ़ने का फैसला किया।” 8 साल का लंबा सफर, टीम के सबसे बड़े सितारों में शामिल संजू सैमसन ने 2018 से 2025 तक लगातार राजस्थान रॉयल्स का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले भी वह 2013 से 2015 तक टीम का हिस्सा रहे थे। इस दौरान उन्होंने कुल 11 सीजन खेले और टीम के सबसे ज्यादा मैच खेलने और रन बनाने वाले खिलाड़ियों में अपना नाम दर्ज कराया। बीच में उन्होंने 2016-2017 के दौरान Delhi Capitals (तब दिल्ली डेयरडेविल्स) के लिए भी खेला, लेकिन उनकी पहचान सबसे ज्यादा राजस्थान रॉयल्स के साथ ही बनी। अब नई पारी चेन्नई सुपर किंग्स के साथ IPL 2026 में सैमसन अब Chennai Super Kings की जर्सी में नजर आएंगे। यह बदलाव नवंबर 2025 में एक ट्रेड डील के तहत हुआ था, जिसने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा बटोरी थी। सैमसन ने इस नई शुरुआत को लेकर उत्साह भी जताया। उनका कहना है कि हर खिलाड़ी के करियर में एक समय ऐसा आता है जब उसे आगे बढ़ना होता है, और उन्होंने भी वही किया। पुरानी टीम के खिलाफ खेलना होगा भावनात्मक राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेलने को लेकर सैमसन ने कहा कि यह उनके लिए पहली बार होगा और निश्चित रूप से भावनात्मक पल रहेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मैदान पर उतरते ही वह भावनाओं को अलग रखकर सिर्फ खेल पर ध्यान देंगे। मैच से पहले और बाद में पुराने साथियों से मिलने की खुशी जरूर होगी, लेकिन खेल के दौरान उनका फोकस पूरी तरह अपनी नई टीम पर रहेगा। “नई शुरुआत, नया उत्साह” सैमसन ने कहा कि यह उनके करियर की एक नई यात्रा है, जिसे वह पूरे जोश और सकारात्मकता के साथ अपनाना चाहते हैं। राजस्थान रॉयल्स के साथ बिताए गए वर्षों को उन्होंने सम्मान और प्यार के साथ याद किया, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि अब वह आगे बढ़ चुके हैं और नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं।
ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की ऐतिहासिक जीत के पीछे कई खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा, लेकिन ओपनर संजू सैमसन की कहानी सबसे खास रही। टूर्नामेंट की शुरुआत में प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने वाले सैमसन ने जब मौका मिला तो लगातार तीन अर्धशतक जड़कर टीम इंडिया को खिताब तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार चार मैच जीतकर ट्रॉफी अपने नाम की। हालांकि सुपर-8 चरण में दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के बाद टीम इंडिया की खिताबी उम्मीदों पर सवाल उठने लगे थे। ऐसे में संजू सैमसन की दमदार बल्लेबाजी ने टीम को फिर से मजबूती दी। प्लेइंग XI को लेकर उठा था सवाल टूर्नामेंट के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान सूर्यकुमार यादव से पूछा गया था कि क्या संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलेगा। इस सवाल पर सूर्यकुमार ने उल्टा पत्रकारों से ही सवाल कर दिया था। उन्होंने कहा था, “आप ही बताइए कि उन्हें किसकी जगह खिलाऊं। क्या मैं अभिषेक शर्मा को बाहर कर दूं या तिलक वर्मा की जगह संजू को शामिल कर लूं?” सूर्यकुमार का यह बयान उस समय सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था। लेकिन बाद में हालात ऐसे बने कि संजू सैमसन को मौका मिला और उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को जवाब दे दिया। लगातार तीन मैचों में शानदार बल्लेबाजी प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने के बाद जब संजू सैमसन को बतौर ओपनर मौका मिला तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से भुनाया। वेस्टइंडीज के खिलाफ करो-या-मरो मुकाबले में सैमसन ने शानदार नाबाद 97 रन बनाकर टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 89 रन की मैच जिताऊ पारी खेली। फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी उन्होंने 89 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इन तीनों पारियों ने भारत की जीत की नींव रख दी। टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने सैमसन संजू सैमसन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिर्फ 5 मैचों में 321 रन बनाए। उनके लगातार शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ भी चुना गया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत की जीत की कहानी लिख दी और उन्हें टूर्नामेंट के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। कप्तान सूर्यकुमार ने की तारीफ संजू सैमसन की शानदार वापसी पर कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सैमसन अपनी मेहनत का फल पा रहे हैं। दरअसल, टूर्नामेंट से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था, जिसके कारण उन्हें शुरुआती मैचों में टीम से बाहर रखा गया था। ग्रुप स्टेज में भी वह सिर्फ नामीबिया के खिलाफ खेले, जब अभिषेक शर्मा की तबीयत खराब हो गई थी। फाइनल से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार यादव ने कहा था, “मुझे लगता है कि कड़े फैसले हेड कोच और मैं मिलकर लेते हैं।” संघर्ष से सफलता तक संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि क्रिकेट में मौके का सही इस्तेमाल कितना अहम होता है। प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने के बावजूद उन्होंने धैर्य बनाए रखा और मौका मिलते ही अपनी बल्लेबाजी से टीम को विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी यह वापसी भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक याद की जाएगी।
T20 क्रिकेट में भारत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब पहुंच गया है। मौजूदा चैंपियन भारतीय टीम अब ICC Men's T20 World Cup 2026 के फाइनल में पहुंच चुकी है और खिताब बचाने के साथ नया रिकॉर्ड बनाने से सिर्फ एक जीत दूर है। रविवार, 8 मार्च को India national cricket team का सामना New Zealand national cricket team से Narendra Modi Stadium, Ahmedabad में होगा। अगर भारत यह मैच जीत जाता है तो वह T20 वर्ल्ड कप का खिताब लगातार दूसरी बार जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन जाएगी। तीसरा खिताब जीतकर बना सकता है नया रिकॉर्ड भारतीय टीम के पास एक और बड़ा मौका है। अगर टीम फाइनल जीतती है तो वह T20 वर्ल्ड कप के इतिहास में तीन बार ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन जाएगी। भारत ने इससे पहले ICC Men's T20 World Cup 2007 और ICC Men's T20 World Cup 2024 में खिताब जीता था। फिलहाल भारत दो-दो खिताब के साथ West Indies men's cricket team और England men's cricket team के बराबर है। टीम की कप्तानी इस बार स्टार बल्लेबाज Suryakumar Yadav कर रहे हैं और उनके नेतृत्व में भारत पूरे टूर्नामेंट में मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है। टूर्नामेंट की शुरुआत में कड़ी चुनौती भारत का पहला मुकाबला United States men's national cricket team से Mumbai में हुआ। इस मैच में टीम को कड़ी टक्कर मिली, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार यादव की 49 गेंदों में नाबाद 84 रन की पारी ने भारत को 29 रन से जीत दिला दी। इसके बाद Namibia national cricket team के खिलाफ Delhi में खेले गए मैच में Ishan Kishan (61 रन) और Hardik Pandya (52 रन) की शानदार बल्लेबाजी से भारत ने 209 रन बनाए और मुकाबला आसानी से जीत लिया। पाकिस्तान पर बड़ी जीत ग्रुप चरण के सबसे चर्चित मुकाबले में भारत ने Pakistan national cricket team को Colombo में करारी शिकस्त दी। ईशान किशन की 77 रन की पारी और गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन से पाकिस्तान की टीम सिर्फ 114 रन पर सिमट गई। इसके बाद Netherlands national cricket team के खिलाफ Shivam Dube के 66 रन और Varun Chakaravarthy की शानदार गेंदबाजी से भारत ने एक और जीत दर्ज की। सुपर-8 में लगा झटका सुपर-8 चरण में भारत को एकमात्र हार South Africa national cricket team के खिलाफ मिली। हालांकि Jasprit Bumrah ने 3 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन भारत की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और टीम 111 रन पर ऑलआउट हो गई। दमदार वापसी से सेमीफाइनल में जगह हार के बाद भारत ने शानदार वापसी की। Zimbabwe national cricket team के खिलाफ Abhishek Sharma की तेज 55 रन की पारी और हार्दिक पंड्या के अर्धशतक से भारत ने 256 रन का बड़ा स्कोर बनाया। इसके बाद West Indies men's cricket team के खिलाफ Sanju Samson की 50 गेंदों में नाबाद 97 रन की पारी ने टीम को जीत दिलाई। इंग्लैंड के खिलाफ यादगार सेमीफाइनल सेमीफाइनल में भारत ने England men's cricket team को रोमांचक मुकाबले में हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया। इस मैच में Sanju Samson ने 89 रन की अहम पारी खेली, जबकि Jasprit Bumrah ने डेथ ओवरों में कसी हुई गेंदबाजी कर इंग्लैंड की टीम को रोक दिया। अब पूरा देश फाइनल मुकाबले का इंतजार कर रहा है, जहां भारतीय टीम के पास इतिहास रचने और T20 क्रिकेट में अपनी बादशाहत साबित करने का सुनहरा मौका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।