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Sanju Samson’s Heroic Comeback Leads India to T20 Glory

‘प्लेइंग XI में जगह नहीं’, फिर भी बने टीम के हीरो: संजू सैमसन की दमदार वापसी ने भारत को बनाया T20 वर्ल्ड चैंपियन

surbhi मार्च 9, 2026 0
Sanju Samson celebrating after scoring crucial runs during India’s T20 World Cup 2026 victory campaign
Sanju Samson T20 World Cup 2026 Hero

 

ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की ऐतिहासिक जीत के पीछे कई खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा, लेकिन ओपनर संजू सैमसन की कहानी सबसे खास रही। टूर्नामेंट की शुरुआत में प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने वाले सैमसन ने जब मौका मिला तो लगातार तीन अर्धशतक जड़कर टीम इंडिया को खिताब तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार चार मैच जीतकर ट्रॉफी अपने नाम की। हालांकि सुपर-8 चरण में दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के बाद टीम इंडिया की खिताबी उम्मीदों पर सवाल उठने लगे थे। ऐसे में संजू सैमसन की दमदार बल्लेबाजी ने टीम को फिर से मजबूती दी।

 

प्लेइंग XI को लेकर उठा था सवाल

टूर्नामेंट के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान सूर्यकुमार यादव से पूछा गया था कि क्या संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलेगा। इस सवाल पर सूर्यकुमार ने उल्टा पत्रकारों से ही सवाल कर दिया था।

उन्होंने कहा था, “आप ही बताइए कि उन्हें किसकी जगह खिलाऊं। क्या मैं अभिषेक शर्मा को बाहर कर दूं या तिलक वर्मा की जगह संजू को शामिल कर लूं?”

सूर्यकुमार का यह बयान उस समय सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था। लेकिन बाद में हालात ऐसे बने कि संजू सैमसन को मौका मिला और उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को जवाब दे दिया।

 

लगातार तीन मैचों में शानदार बल्लेबाजी

प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने के बाद जब संजू सैमसन को बतौर ओपनर मौका मिला तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से भुनाया।

वेस्टइंडीज के खिलाफ करो-या-मरो मुकाबले में सैमसन ने शानदार नाबाद 97 रन बनाकर टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 89 रन की मैच जिताऊ पारी खेली।

फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी उन्होंने 89 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इन तीनों पारियों ने भारत की जीत की नींव रख दी।

 

टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने सैमसन

संजू सैमसन ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिर्फ 5 मैचों में 321 रन बनाए। उनके लगातार शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ भी चुना गया।

उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारत की जीत की कहानी लिख दी और उन्हें टूर्नामेंट के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।

 

कप्तान सूर्यकुमार ने की तारीफ

संजू सैमसन की शानदार वापसी पर कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सैमसन अपनी मेहनत का फल पा रहे हैं।

दरअसल, टूर्नामेंट से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था, जिसके कारण उन्हें शुरुआती मैचों में टीम से बाहर रखा गया था। ग्रुप स्टेज में भी वह सिर्फ नामीबिया के खिलाफ खेले, जब अभिषेक शर्मा की तबीयत खराब हो गई थी।

फाइनल से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार यादव ने कहा था, “मुझे लगता है कि कड़े फैसले हेड कोच और मैं मिलकर लेते हैं।”

 

संघर्ष से सफलता तक

संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि क्रिकेट में मौके का सही इस्तेमाल कितना अहम होता है। प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने के बावजूद उन्होंने धैर्य बनाए रखा और मौका मिलते ही अपनी बल्लेबाजी से टीम को विश्व चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी यह वापसी भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक याद की जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बन सकता है इतिहास, मेसी-रोनाल्डो समेत ये 3 खिलाड़ी खेलेंगे छठा विश्व कप

दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 की शुरुआत 11 जून 2026 से होने जा रही है। इस बार टूर्नामेंट सिर्फ मुकाबलों के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए भी चर्चा में है। फुटबॉल के तीन दिग्गज खिलाड़ी — Cristiano Ronaldo, Lionel Messi और Guillermo Ochoa — इतिहास में पहली बार छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं। इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन United States, Canada और Mexico में संयुक्त रूप से किया जाएगा। साथ ही पहली बार 48 टीमें इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा फीफा वर्ल्ड कप बनने जा रहा है। अब तक कोई खिलाड़ी नहीं खेल पाया 6 वर्ल्ड कप फुटबॉल इतिहास में अब तक किसी भी खिलाड़ी ने छह फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लिया है। सबसे ज्यादा पांच वर्ल्ड कप खेलने का रिकॉर्ड फिलहाल छह खिलाड़ियों के नाम दर्ज है। इस सूची में: Lionel Messi Cristiano Ronaldo Lothar Matthäus Antonio Carbajal Andrés Guardado Rafael Márquez शामिल हैं। अब 2026 में मेसी, रोनाल्डो और ओचोआ के पास इस रिकॉर्ड को नई ऊंचाई तक ले जाने का मौका होगा। 2006 से शुरू हुआ मेसी और रोनाल्डो का सफर Cristiano Ronaldo ने अपना पहला वर्ल्ड कप 2006 में जर्मनी में खेला था। इसके बाद वह 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में भी पुर्तगाल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। रोनाल्डो अब तक वर्ल्ड कप में 22 मुकाबले खेल चुके हैं, जिनमें उन्होंने 8 गोल और 2 असिस्ट दर्ज किए हैं। हालांकि वह अभी तक पुर्तगाल को विश्व कप ट्रॉफी नहीं दिला सके हैं। वहीं Lionel Messi ने भी 2006 में वर्ल्ड कप डेब्यू किया था। उन्होंने 2010, 2014, 2018 और 2022 में अर्जेंटीना के लिए खेला। मेसी ने 2022 में अर्जेंटीना को विश्व कप जिताकर अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा किया। उन्होंने अब तक वर्ल्ड कप में 26 मैचों में 13 गोल और 8 असिस्ट दर्ज किए हैं। ओचोआ भी रच सकते हैं इतिहास Guillermo Ochoa भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब हैं। मैक्सिको के अनुभवी गोलकीपर ने 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। 2026 में वह छठा वर्ल्ड कप खेलकर फुटबॉल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। ओचोआ अब तक 152 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं और उन्हें मैक्सिको के सबसे भरोसेमंद गोलकीपर्स में गिना जाता है। क्यों खास होगा FIFA World Cup 2026? FIFA World Cup 2026 कई वजहों से ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार: 48 टीमें हिस्सा लेंगी तीन देशों में टूर्नामेंट आयोजित होगा और संभवतः पहली बार खिलाड़ी छह वर्ल्ड कप खेलते नजर आएंगे ऐसे में दुनियाभर के फुटबॉल फैंस की नजरें इन दिग्गज खिलाड़ियों पर टिकी रहेंगी।  

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IPL- राजस्थान ने लखनऊ को 7 विकेट से हराया, सूर्यवंशी ने 93 रन बनाए, जुरेल का अर्धशतक

जयपुर, एजेंसियां। IPL में मंगलवार को राजस्थान रॉयल्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 7 विकेट से हरा दिया। जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में टॉस हारकर बैटिंग करने उतरी लखनऊ ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 220 रन बनाए। जवाब में राजस्थान ने 19.1 ओवर में 3 विकेट खोकर टारगेट हासिल कर लिया।   राजस्थान की उम्मीदें बरकरार इस जीत के साथ राजस्थान के 13 मैचों में 14 पॉइंट्स हो गए हैं और टीम की प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीदें बरकरार हैं। वहीं, लखनऊ पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है।   सूर्यवंशी ने 7 चौके और 10 छक्के लगाए राजस्थान के वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 38 गेंदों में 93 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 7 चौके और 10 छक्के शामिल रहे। कप्तान यशस्वी जायसवाल ने भी शानदार शुरुआत दिलाते हुए 23 गेंदों में 43 रन बनाए। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए 75 रन की तेज साझेदारी हुई। ध्रुव जुरेल ने जिम्मेदारी संभालते हुए नाबाद 53 रन बनाए और टीम को जीत तक पहुंचाया। डोनोवन फरेरा ने भी अंत में 10 गेंदों में 16 रन की उपयोगी पारी खेली। लखनऊ की गेंदबाजी पूरी तरह बेअसर नजर आई। आकाश सिंह सबसे महंगे साबित हुए, जिन्होंने 3 ओवर में 54 रन दिए। मोहसिन खान और आकाश सिंह को एक-एक विकेट मिला। मार्श-इंग्लिस के बीच पहले विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी लखनऊ के लिए मिचेल मार्श शतक से सिर्फ 4 रन दूर रह गए और 57 गेंदों में 96 रन बनाकर रन आउट हुए। उनकी पारी में 11 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। जोश इंग्लिस ने 29 गेंदों में 60 रन ठोके। उन्होंने 7 चौके और 3 छक्के लगाए। इंग्लिस और मार्श के बीच पहले विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी हुई। निकोलस पूरन ने 11 गेंदों में 16 रन बनाए, जबकि कप्तान ऋषभ पंत ने 23 गेंदों में 35 रन की तेज पारी खेली। आखिरी ओवरों में लगातार रन आउट के कारण लखनऊ की टीम 230 के पार नहीं पहुंच सकी। राजस्थान की ओर से यश राज पुंजा सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 4 ओवर में 35 रन देकर 2 विकेट लिए। जोफ्रा आर्चर को एक विकेट मिला। वहीं, लखनऊ के दो बल्लेबाज रन आउट हुए।

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IPL- हैदराबाद प्लेऑफ में पहुंची, चेन्नई को 5 विकेट से हराया ईशान का अर्धशतक, कमिंस को 3 विकेट

चेन्नई, एजेंसियां। चेपॉक में सोमवार को खेले गए IPL 2026 के मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से हरा दिया। चेन्नई ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 180 रन बनाए। जवाब में हैदराबाद ने 19 ओवर में 5 विकेट खोकर टारगेट हासिल कर लिया। इसी जीत के साथ हैदराबाद की टीम प्लेऑफ के लिए क्वालिफाई कर गई हैं। वहीं, चेन्नई की टीम के लिए टॉप-4 में पहुंचना काफी मुश्किल है।   ईशान ने 70 रन की पारी खेली हैदराबाद की जीत के हीरो ईशान किशन रहे, जिन्होंने 47 गेंदों में 70 रन की शानदार पारी खेली। उनके अलावा हेनरिक क्लासन ने 26 गेंदों में 47 रन बनाकर रनचेज को मजबूती दी। अंत में सलील अरोड़ा (10) और आर स्मरण (5) ने तेजी से रन बनाकर मैच खत्म किया। चेन्नई की ओर से मुकेश चौधरी ने 2 विकेट लिए, जबकि अकील हुसैन, नूर अहमद और अंशुल कम्बोज को 1-1 सफलता मिली।    ब्रेविस ने 44 रन बनाए चेन्नई की शुरुआत शानदार रही, संजू सैमसन ने सिर्फ 13 गेंदों में 27 रन ठोक दिए। इसके बाद कार्तिक शर्मा ने 19 गेंदों पर 32 रन की तेज पारी खेली, जबकि डेवाल्ड ब्रेविस ने 27 गेंदों में 44 रन बनाकर पारी को संभाला। अंत में शिवम दूबे ने 26 रन का योगदान दिया। ब्रेविस और शिवम के बीच पांचवें विकेट के लिए 59 रन की साझेदारी हुई। गेंदबाजी में पैट कमिंस सबसे सफल रहे। उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 28 रन देकर 3 बड़े विकेट झटके। साकिब हुसैन ने 2 विकेट लिए, जबकि ईशान मलिंगा और प्रफुल हिंगे को 1-1 सफलता मिली।

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