मैनचेस्टर, एजेंसियां । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज (4 जुलाई) मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा। पहले टी20 मुकाबले के बारिश की वजह से रद्द होने के बाद अब दोनों टीमें सीरीज में पहली जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी। मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे शुरू होगा।
पहले मैच की तरह दूसरे टी20 पर भी मौसम का साया बना हुआ है। मौसम विभाग ने मैनचेस्टर में रुक-रुक कर बारिश की संभावना जताई है। यदि मौसम साफ रहा तो दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
इंग्लैंड ने दूसरे टी20 के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में दो अहम बदलाव किए हैं। तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की टीम में वापसी हुई है, जबकि जॉश टंग टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करेंगे। दूसरी ओर भारतीय टीम अपनी पिछली संयोजन के साथ उतर सकती है और बल्लेबाजों से बड़ी पारी की उम्मीद होगी।
पहला मुकाबला बेनतीजा रहने के कारण फिलहाल सीरीज 0-0 से बराबरी पर है। ऐसे में आज का मैच जीतने वाली टीम पांच मैचों की सीरीज में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर लेगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भारत के शीर्ष बल्लेबाजों और इंग्लैंड की मजबूत गेंदबाजी पर टिकी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
गॉल, एजेंसियां। भारत ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट के चौथे दिन अपनी दूसरी पारी में 193 रन पर ऑलआउट होकर मेजबान टीम के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा है। भारत ने पहली पारी में श्रीलंका को 284 रन पर समेटकर 178 रन की बढ़त हासिल की थी। इसके बाद दूसरी पारी में 193 रन जोड़कर भारत ने कुल बढ़त 371 रन तक पहुंचाई। पंत ने खेली तूफानी पारी भारत की दूसरी पारी में ऋषभ पंत ने 66 रन की तेजतर्रार पारी खेलकर टीम की बढ़त को बड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। वहीं देवदत्त पडिक्कल ने 44 और केएल राहुल ने 35 रन बनाए। पंत की पारी के दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के पूरे कर इतिहास भी रचा। श्रीलंका के सामने गॉल में रिकॉर्ड लक्ष्य 372 रन का लक्ष्य गॉल में श्रीलंका के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। इस मैदान पर अब तक सफलतापूर्वक हासिल किया गया सबसे बड़ा लक्ष्य 344 रन है, जिसे पाकिस्तान ने 2022 में श्रीलंका के खिलाफ हासिल किया था। ऐसे में श्रीलंका को जीत के लिए गॉल में नया रिकॉर्ड बनाना होगा। भारतीय गेंदबाजों ने पहले ही बना दिया दबाव भारत को पहली पारी में बड़ी बढ़त दिलाने में मानव सुथार और रवींद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी ने अहम भूमिका निभाई। सुथार ने चार विकेट, जबकि जडेजा ने तीन विकेट झटके। जडेजा ने इस दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 350 विकेट भी पूरे किए। श्रीलंका ने लक्ष्य का पीछा शुरू करते हुए शुरुआती झटके भी झेले और चौथे दिन के खेल में 36 रन पर तीन विकेट गंवा दिए थे। इससे भारत की जीत की संभावना और मजबूत हुई है।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश टी20 लीग 2026 में लखनऊ फाल्कन्स ने अपनी पहली जीत दर्ज कर ली है। 17 अगस्त को खेले गए मुकाबले में लखनऊ ने नोएडा सुपर किंग्स को 3 विकेट से हराया। नोएडा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 19.5 ओवर में 136 रन बनाए, जिसके जवाब में लखनऊ ने 19.2 ओवर में 7 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। भुवनेश्वर कुमार ने गेंद से किया प्रभावित लखनऊ फाल्कन्स के कप्तान भुवनेश्वर कुमार ने गेंद से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने 4 ओवर में सिर्फ 17 रन देकर 1 विकेट हासिल किया और एक मेडन ओवर भी डाला। उनकी इकॉनमी 4.25 रही। भुवनेश्वर ने नोएडा के बल्लेबाज कार्तिक सिद्धू को 23 रन के निजी स्कोर पर आउट किया। नोएडा की बल्लेबाजी लड़खड़ाई नोएडा सुपर किंग्स की शुरुआत खराब रही और टीम ने शुरुआती ओवरों में ही लगातार विकेट गंवाए। बॉबी यादव ने 29 रन और कार्तिक सिद्धू ने 23 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन पूरी टीम 19.5 ओवर में 136 रन पर सिमट गई। लखनऊ की ओर से अभिनंदन सिंह ने 4 विकेट और नवनीत कुमार ने 3 विकेट लिए। आराध्या यादव की अर्धशतकीय पारी ने दिलाई जीत 137 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए लखनऊ फाल्कन्स ने भी लगातार विकेट गंवाए, लेकिन आराध्या यादव ने 42 गेंदों में 51 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम की जीत की नींव रखी। इसके बाद समीर चौधरी ने नाबाद 28 रन बनाकर लखनऊ को 19.2 ओवर में लक्ष्य तक पहुंचा दिया। लखनऊ को मिली पहली जीत इस जीत के साथ लखनऊ फाल्कन्स ने टूर्नामेंट में अपना खाता खोल लिया। मुकाबले के प्लेयर ऑफ द मैच अभिनंदन सिंह रहे, जिन्होंने 3.5 ओवर में 30 रन देकर 4 विकेट चटकाए।
मेलबर्न, एजेंसियां। बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन में पहला टेस्ट 9 विकेट से गंवाने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे टेस्ट के लिए अपनी टीम में बड़ा बदलाव किया है। सलामी बल्लेबाज जेक वेदराल्ड को 13 सदस्यीय टीम से बाहर कर दिया गया है, जबकि उनकी जगह बाएं हाथ के बल्लेबाज मैथ्यू रेनशॉ को शामिल किया गया है। वेदराल्ड का खराब प्रदर्शन पड़ा भारी डार्विन टेस्ट में वेदराल्ड ऑस्ट्रेलिया की दोनों पारियों में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। उन्होंने पहली पारी में 23 रन बनाए, जबकि दूसरी पारी में बिना खाता खोले आउट हो गए। बांग्लादेश के खिलाफ इस प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें दूसरे टेस्ट की टीम से बाहर कर दिया। वेदराल्ड ने अब तक ऑस्ट्रेलिया के लिए छह टेस्ट खेले हैं और उनका टेस्ट औसत करीब 20.36 है। लगातार खराब प्रदर्शन के कारण उनकी जगह पर सवाल उठ रहे थे। तीन साल बाद रेनशॉ की वापसी मैथ्यू रेनशॉ करीब तीन साल बाद ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीम में वापस लौटे हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। हालिया शेफील्ड शील्ड सीजन में रेनशॉ ने छह मैचों में 499 रन, 49.90 की औसत से बनाए थे। रेनशॉ ने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2023 में भारत के खिलाफ खेला था। अब उनके पास बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी को मजबूती देने का मौका होगा। लाबुशेन को फिलहाल बरकरार रखा वेदराल्ड के अलावा ऑस्ट्रेलियाई टीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मार्नस लाबुशेन भी टीम में बने हुए हैं, हालांकि उनके प्रदर्शन पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहले टेस्ट में लाबुशेन दोनों पारियों में मिलाकर सिर्फ 32 रन बना सके थे। कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने संकेत दिया है कि लाबुशेन को अब बड़ी पारी खेलकर खुद को साबित करना होगा। 22 अगस्त से खेला जाएगा दूसरा टेस्ट ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच सीरीज का दूसरा और आखिरी टेस्ट 22 अगस्त 2026 से मैके के ग्रेट बैरियर रीफ एरिना में खेला जाएगा। पहला टेस्ट जीतकर बांग्लादेश ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब ऑस्ट्रेलिया के सामने सीरीज बराबर करने की चुनौती है।