T20 क्रिकेट में भारत एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब पहुंच गया है। मौजूदा चैंपियन भारतीय टीम अब ICC Men's T20 World Cup 2026 के फाइनल में पहुंच चुकी है और खिताब बचाने के साथ नया रिकॉर्ड बनाने से सिर्फ एक जीत दूर है।
रविवार, 8 मार्च को India national cricket team का सामना New Zealand national cricket team से Narendra Modi Stadium, Ahmedabad में होगा। अगर भारत यह मैच जीत जाता है तो वह T20 वर्ल्ड कप का खिताब लगातार दूसरी बार जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन जाएगी।
भारतीय टीम के पास एक और बड़ा मौका है। अगर टीम फाइनल जीतती है तो वह T20 वर्ल्ड कप के इतिहास में तीन बार ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन जाएगी।
भारत ने इससे पहले ICC Men's T20 World Cup 2007 और ICC Men's T20 World Cup 2024 में खिताब जीता था। फिलहाल भारत दो-दो खिताब के साथ West Indies men's cricket team और England men's cricket team के बराबर है।
टीम की कप्तानी इस बार स्टार बल्लेबाज Suryakumar Yadav कर रहे हैं और उनके नेतृत्व में भारत पूरे टूर्नामेंट में मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया है।
भारत का पहला मुकाबला United States men's national cricket team से Mumbai में हुआ। इस मैच में टीम को कड़ी टक्कर मिली, लेकिन कप्तान सूर्यकुमार यादव की 49 गेंदों में नाबाद 84 रन की पारी ने भारत को 29 रन से जीत दिला दी।
इसके बाद Namibia national cricket team के खिलाफ Delhi में खेले गए मैच में Ishan Kishan (61 रन) और Hardik Pandya (52 रन) की शानदार बल्लेबाजी से भारत ने 209 रन बनाए और मुकाबला आसानी से जीत लिया।
ग्रुप चरण के सबसे चर्चित मुकाबले में भारत ने Pakistan national cricket team को Colombo में करारी शिकस्त दी। ईशान किशन की 77 रन की पारी और गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन से पाकिस्तान की टीम सिर्फ 114 रन पर सिमट गई।
इसके बाद Netherlands national cricket team के खिलाफ Shivam Dube के 66 रन और Varun Chakaravarthy की शानदार गेंदबाजी से भारत ने एक और जीत दर्ज की।
सुपर-8 चरण में भारत को एकमात्र हार South Africa national cricket team के खिलाफ मिली। हालांकि Jasprit Bumrah ने 3 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन भारत की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और टीम 111 रन पर ऑलआउट हो गई।
हार के बाद भारत ने शानदार वापसी की। Zimbabwe national cricket team के खिलाफ Abhishek Sharma की तेज 55 रन की पारी और हार्दिक पंड्या के अर्धशतक से भारत ने 256 रन का बड़ा स्कोर बनाया।
इसके बाद West Indies men's cricket team के खिलाफ Sanju Samson की 50 गेंदों में नाबाद 97 रन की पारी ने टीम को जीत दिलाई।
सेमीफाइनल में भारत ने England men's cricket team को रोमांचक मुकाबले में हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया। इस मैच में Sanju Samson ने 89 रन की अहम पारी खेली, जबकि Jasprit Bumrah ने डेथ ओवरों में कसी हुई गेंदबाजी कर इंग्लैंड की टीम को रोक दिया।
अब पूरा देश फाइनल मुकाबले का इंतजार कर रहा है, जहां भारतीय टीम के पास इतिहास रचने और T20 क्रिकेट में अपनी बादशाहत साबित करने का सुनहरा मौका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईपीएल 2026 में बांग्लादेशी पेसर मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के रिश्तों में खटास आ गई थी। इसके कारण भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की टीम हिस्सा नहीं ले पाई थी। अब बांग्लादेश ने रिश्तों को सुधारने की पहल शुरू कर दी है। BCB ने BCCI को लिखी चिट्ठी नई सरकार बनने के बाद BCB ने BCCI को पत्र लिखा है, जिसमें भारत और बांग्लादेश के पुराने क्रिकेट संबंधों का जिक्र किया गया है और रिश्ते सामान्य करने की ख्वाहिश जताई गई है। BCCI और BCB सूत्रों के अनुसार, इस पत्र में दोनों बोर्ड के बीच पहले जैसे बेहतर रिश्ते बहाल करने पर जोर दिया गया है। दांव पर सीरीज और अहम टूर्नामेंट बांग्लादेश के बदले हुए रुख के पीछे मुख्य वजह आगामी वनडे और टी20 सीरीज है। भारत और बांग्लादेश के बीच यह सीरीज सितंबर 2026 में खेली जानी है, जो पिछले साल स्थगित हुई थी। आईपीएल और टी20 वर्ल्ड कप विवाद की वजह से सीरीज खतरे में पड़ गई थी। एशिया कप का संकट इसके अलावा एशिया कप 2027 की मेजबानी बांग्लादेश को ही करनी है। अगर BCCI के साथ संबंध सुधरते नहीं हैं, तो टीम इंडिया बांग्लादेश दौरे से मना कर सकती है, जिससे टूर्नामेंट बांग्लादेश (और पाकिस्तान) से बाहर आयोजित करना पड़ सकता है। इससे BCB को आर्थिक और प्रतिष्ठात्मक नुकसान होगा।
नई दिल्ली,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का खड़गपुर से रिश्ता सिर्फ नौकरी या क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रिश्ता इंसानियत, अपनापन और वफादारी की मिसाल भी बन गया। ‘कैप्टन कूल’ के नाम से मशहूर धोनी ने अपने प्रोफेशनल जीवन की शुरुआत पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में की थी। इसी दौरान स्टेशन के पास मौजूद थॉमस टी स्टॉल उनकी पसंदीदा जगह बन गई थी। घंटों चाय की दुकान पर बैठते थे धोनी थॉमस के परिवार के मुताबिक, नौकरी और रेलवे क्रिकेट के बीच धोनी अक्सर अपने दोस्तों के साथ इस दुकान पर घंटों बैठते, चाय पीते और बातचीत करते थे। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यही शांत और साधारण युवक आगे चलकर विश्व क्रिकेट का सबसे सफल कप्तान बनेगा। कामयाबी के बाद भी नहीं भूले पुराने रिश्ते समय बीतने के साथ धोनी ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर भारतीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया। 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी खड़गपुर से उनका जुड़ाव कायम रहा। थॉमस की मुश्किल घड़ी में बने सहारा जब थॉमस को गंभीर ब्रेन स्ट्रोक आया और वे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे, तब धोनी ने अपने करीबी दोस्त रॉबिन के जरिए लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। परिवार का दावा है कि इलाज में भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई। इतना ही नहीं, जब थॉमस की चाय दुकान पर तोड़फोड़ का खतरा मंडराया, तब भी धोनी ने रेलवे अधिकारियों से बात कर दुकान को बचाने में मदद की।
मुंबई,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के जिम्बाब्वे दौरे का आधिकारिक एलान कर दिया है। टीम इंडिया जुलाई 2026 में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। यह दौरा इंग्लैंड के दौरे के बाद होगा और टीम की तैयारी तथा युवा खिलाड़ियों को अवसर देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। मैचों का शेड्यूल और स्थल तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब मैदान में खेले जाएंगे। पहला टी20 मैच 23 जुलाई को होगा, जबकि बाकी दो मैच 25 और 26 जुलाई को आयोजित होंगे। इस तरह टीम इंडिया लगातार दो दिन मैच खेलते हुए जिम्बाब्वे की चुनौती का सामना करेगी। पिछला दौरा और अनुभव टीम इंडिया आखिरी बार 2024 में जिम्बाब्वे गई थी, जब दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली गई थी। पिछला दौरा भारतीय खिलाड़ियों के लिए सीखने और नई रणनीतियों को आज़माने का अवसर रहा था। युवा खिलाड़ियों को मिलेगा मौका इस सीरीज को युवा खिलाड़ियों को मौका देने और भविष्य की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टी20 वर्ल्ड कप 2028 और ओलंपिक 2028 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए टीम कॉम्बिनेशन पर काम किया जाएगा। साथ ही बेंच स्ट्रेंथ को परखने और टीम में नई प्रतिभाओं को शामिल करने का भी अवसर मिलेगा। BCCI का उद्देश्य BCCI का मानना है कि यह दौरा भारतीय टीम को लगातार अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने और रणनीति पर काम करने का प्लेटफॉर्म देगा। युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच तालमेल मजबूत करने के साथ ही टीम इंडिया आगामी टी20 टूर्नामेंट्स में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार होगी।