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Jurel’s Calm Finish Seals RR Win Over RCB

IPL 2026: वैभव के तूफान के बीच ध्रुव जुरेल की समझदारी बनी जीत की असली वजह

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Dhruv Jurel playing composed IPL innings for Rajasthan Royals during tense chase against RCB in 2026 match
Dhruv Jurel Calm Batting RR vs RCB IPL 2026

राजस्थान रॉयल्स की लगातार चौथी जीत के पीछे सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज़ी नहीं, बल्कि संयम और रणनीति का शानदार संतुलन भी था। जहां एक ओर वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया, वहीं दूसरी ओर ध्रुव जुरेल की शांत और समझदारी भरी बल्लेबाज़ी ने टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया।

वैभव का तूफान, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ रन चेज़ के दौरान वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाज़ी ने मैच को एकतरफा बनाना शुरू कर दिया था। उनकी विस्फोटक पारी ने गेंदबाज़ों को बैकफुट पर ला दिया और ऐसा लगा कि मैच जल्द खत्म हो जाएगा।

लेकिन जैसे ही वैभव आउट हुए, मुकाबले ने अचानक करवट ले ली।

मैच में आया टर्निंग पॉइंट

कृणाल पांड्या ने लगातार दो विकेट लेकर मैच को फिर से रोमांचक बना दिया। पहले वैभव और फिर शिमरन हेटमायर का विकेट गिरने से राजस्थान दबाव में आ गया।

इसके बाद रियान पराग के आउट होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई।

जुरेल की 'कमांडर' जैसी पारी

ऐसे मुश्किल समय में ध्रुव जुरेल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने बिना घबराए परिस्थिति के अनुसार अपनी बल्लेबाज़ी को ढाला।

  • पावरप्ले में तेज़ 27 रन (10 गेंद)
  • 18 गेंदों पर 40 रन बनाकर मजबूत आधार
  • बाद में संयमित खेल दिखाते हुए टीम को संभाला

जुरेल की पारी में आक्रामकता और समझदारी का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला।

जडेजा के साथ साझेदारी बनी जीत की कुंजी

रविंद्र जडेजा ने जुरेल का अच्छा साथ निभाया। दोनों ने मिलकर बिना जोखिम लिए पारी को आगे बढ़ाया और लक्ष्य को सुरक्षित तरीके से हासिल किया।

यह साझेदारी ताकत से ज्यादा रणनीति और समझदारी पर आधारित थी।

राजस्थान रॉयल्स की जीत का असली हीरो

इस मुकाबले में जहां वैभव सूर्यवंशी ने चमक बिखेरी, वहीं ध्रुव जुरेल ने यह साबित किया कि बड़े मैच सिर्फ आक्रामकता से नहीं, बल्कि धैर्य और समझदारी से जीते जाते हैं।

उनकी यह पारी राजस्थान रॉयल्स की जीत की सबसे अहम कड़ी साबित हुई और टीम की जीत की लय को बरकरार रखा।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IPL 2026
वैभव सूर्यवंशी शतक से चूके, 78 रन की पारी के बाद बड़ा शॉट बना वजह

मुंबई, एजेंसियां। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के 15 साल के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ अपनी आतिशी बल्लेबाजी से सुर्खियां तो बटोरीं, लेकिन उनके आउट होने के तरीके ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 गेंदों पर 78 रन बनाने वाले वैभव एक बेहद साधारण शॉट खेलकर उस समय आउट हो गए जब उनकी टीम एक ऐतिहासिक स्कोर की ओर बढ़ रही थी। मैच के बाद खुद खिलाड़ी ने भी स्वीकार किया कि उनकी इस लापरवाही की वजह से टीम के खाते में 10 से 20 रन कम जुड़े, जो अंत में टीम के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते थे।   विराट के हाथों में थमाया कैच और थमी रनों की रफ्तार राजस्थान की पारी के 9वें ओवर में जब वैभव पूरी तरह सेट हो चुके थे और मैच का रुख तय कर चुके थे, तब उन्होंने क्रुणाल पांड्या की गेंद पर एक अनावश्यक और खराब शॉट खेला। गेंद सीधे विराट कोहली के हाथों में गई और वैभव की आक्रामक पारी का असमय अंत हो गया। उन्होंने अपनी इस पारी में 8 चौके और 7 छक्के जरूर लगाए, लेकिन उनके इस गैर-जिम्मेदाराना विकेट ने मिडिल ऑर्डर पर अचानक दबाव बढ़ा दिया।   विशेषज्ञों और कमेंटेटर्स का मानना है कि यदि वे क्रीज पर थोड़ा और संयम दिखाते, तो राजस्थान की जीत और भी बड़ी हो सकती थी। मोहम्मद कैफ और सबा करीम जैसे दिग्गजों ने स्पष्ट किया कि वैभव से इस मैच में शतक की उम्मीद थी, लेकिन एक 'लूज शॉट' ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। वैभव ने खुद स्वीकार किया कि जब वह गलत शॉट खेलकर आउट होते हैं, तो उन्हें गहरा अफ़सोस होता है क्योंकि इससे टीम को नुकसान पहुंचता है।   दिग्गजों को निशाना बनाने की जिद पड़ सकती है भारी वैभव की बल्लेबाजी शैली को लेकर पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान और हरभजन सिंह ने एक अलग थ्योरी पेश की है। उनका दावा है कि वैभव जानबूझकर जसप्रीत बुमराह, जोश हेजलवुड और भुवनेश्वर कुमार जैसे बड़े कद वाले गेंदबाजों को टारगेट करते हैं। यह 'अति-आक्रामकता' किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए भविष्य में जोखिम भरी साबित हो सकती है। इरफान पठान ने कहा कि गेंदबाज अब उनसे डरने लगे हैं, लेकिन यह रणनीति हमेशा सफल नहीं होती। जसप्रीत बुमराह की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ना या हेजलवुड के एक ओवर में लगातार प्रहार करना सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन अनुभवी गेंदबाजों के सामने ऐसी 'बिंदास' शैली अक्सर जल्दी विकेट गंवाने का कारण बनती है। दिग्गजों का मानना है कि बड़े गेंदबाजों के खिलाफ ऐसी आक्रामकता दिखाने के चक्कर में वे अक्सर अपनी पारी को लंबा नहीं खींच पाते।   आंकड़ों का मायाजाल और परिपक्वता का अभाव आंकड़े बताते हैं कि वैभव ने आईपीएल के 11 मैचों में 230 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से 452 रन बनाए हैं। इस सीजन के केवल 4 मैचों में ही वे 18 छक्के जड़ चुके हैं, जो उन्हें लीग की छक्का सूची में शीर्ष पर रखता है। हालांकि, इन बड़े नंबरों के पीछे वह परिपक्वता अभी भी नजर नहीं आ रही है जिसकी उम्मीद एक सलामी बल्लेबाज से की जाती है। उनके नाम अब तक कुल 36 चौके और 42 छक्के दर्ज हैं, लेकिन जब तक वे अपनी पारी को बड़े शतकीय स्कोर में तब्दील करने की क्षमता विकसित नहीं करते, तब तक ये छोटी-बड़ी आक्रामक पारियां टीम के लिए पूर्ण रूप से संतोषजनक नहीं होंगी। उनकी प्रैक्टिस और मैच की परिस्थितियों के बीच तालमेल की कमी उनके 'डिसमिसल' में साफ झलकती है।   शोहरत के बीच एकाग्रता की चुनौती वैभव सूर्यवंशी का यह सार्वजनिक अफ़सोस उनकी टीम के लिए एक चिंता का विषय है। 15 साल की कच्ची उम्र में मिली यह अत्यधिक शोहरत कहीं उनकी एकाग्रता को भंग न कर दे, इसे लेकर उनके कोच और टीम मैनेजर रोमी भिंडर लगातार उन्हें सतर्क कर रहे हैं। उनके पिता ने भी उन्हें गेम पर फोकस करने की सलाह दी है। मैदान पर उनकी शैली कभी-कभी आत्मविश्वास के बजाय गैर-जिम्मेदारी की ओर झुकती दिखाई देती है। आगामी मुकाबलों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वैभव अपनी इन गलतियों से सीख लेकर लंबी पारियां खेल पाते हैं, या फिर 'लूज शॉट' खेलकर आउट होने का यह सिलसिला उनके करियर के लिए एक बड़ा रोड़ा साबित होगा। 

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दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 को लेकर भारत में अनिश्चितता बढ़ गई है। टूर्नामेंट शुरू होने में महज दो महीने बचे हैं, लेकिन अभी तक भारत में इसके मीडिया ब्रॉडकास्ट राइट्स नहीं बिके हैं। ऐसे में भारतीय फुटबॉल फैंस के सामने लाइव मैच देखने को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। क्यों नहीं मिल रहे खरीदार? रिपोर्ट्स के मुताबिक, FIFA ने शुरुआत में 2026 और 2030 वर्ल्ड कप के लिए संयुक्त मीडिया राइट्स की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर रखी थी। बाद में इसे घटाकर 35 मिलियन डॉलर तक किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई बड़ा ब्रॉडकास्टर आगे नहीं आया। क्रिकेट का दबदबा बना बड़ी वजह भारत में खेल प्रसारण बाजार में Board of Control for Cricket in India (BCCI) और International Cricket Council (ICC) के क्रिकेट इवेंट्स का दबदबा है। ब्रॉडकास्टर्स पहले ही क्रिकेट के राइट्स पर भारी निवेश कर चुके हैं, जिससे उनके पास फुटबॉल जैसे महंगे टूर्नामेंट खरीदने के लिए बजट सीमित हो गया है। कमाई का गणित भी बना अड़चन क्रिकेट के मुकाबले फुटबॉल मैचों में विज्ञापन के लिए कम ब्रेक मिलते हैं, जिससे ब्रॉडकास्टर्स को कम रेवेन्यू मिलता है। यही वजह है कि कंपनियां इस डील को फायदे का सौदा नहीं मान रही हैं। टाइमिंग भी बड़ा फैक्टर इस बार वर्ल्ड कप अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में खेला जाएगा। ऐसे में भारत में मैच देर रात या सुबह तड़के प्रसारित होंगे, जिससे टीवी व्यूअरशिप और एड रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। मार्केट में कम हुआ कॉम्पिटिशन Viacom18 और Star India के मर्जर के बाद JioStar के रूप में बाजार में खिलाड़ियों की संख्या कम हो गई है। Sony Sports, Eurosport और Fan Code जैसे प्लेटफॉर्म भी इस महंगे सौदे से दूरी बनाए हुए हैं। क्या भारत में नहीं दिखेगा वर्ल्ड कप? फिलहाल स्थिति साफ नहीं है, लेकिन अगर जल्द कोई डील नहीं होती, तो भारत में FIFA World Cup 2026 का लाइव टेलीकास्ट मुश्किल हो सकता है। हालांकि, टूर्नामेंट के नजदीक आते-आते आखिरी समय में कोई समझौता हो सकता है।  

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India and Bangladesh cricket team captains shaking hands before a bilateral match, symbolizing renewed sporting ties.India Bangladesh Cricket Relations 2026
भारत-बांग्लादेश क्रिकेट : बिगड़े रिश्तों को सुधारने की कोशिश, BCB का BCCI को खास संदेश

भारत और Bangladesh के बीच हालिया तनाव के बाद अब क्रिकेट कूटनीति में नई पहल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड यानी Bangladesh Cricket Board (BCB) ने Board of Control for Cricket in India को पत्र लिखकर रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है। BCCI को भेजा गया विशेष संदेश BCB ने अपने पत्र में साफ संकेत दिया है कि बांग्लादेश की टीम भारत दौरे के लिए तैयार है। साथ ही, उसने भारत को इस साल के अंत में बांग्लादेश आकर द्विपक्षीय सीरीज़ खेलने का न्योता भी दिया है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र के तहत भारत का बांग्लादेश दौरा प्रस्तावित है, जिससे इस घटनाक्रम का महत्व और भी बढ़ गया है। तनाव के बाद सुलह की कोशिश हाल के महीनों में दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों में खटास आ गई थी। Kolkata Knight Riders द्वारा Mustafizur Rahman का आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट खत्म किए जाने के बाद विवाद बढ़ा। इसके जवाब में बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत आने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते International Cricket Council ने उसे टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। इस घटनाक्रम से बांग्लादेश क्रिकेट को बड़ा नुकसान हुआ, जिसके बाद अब बोर्ड ने रिश्ते सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नई व्यवस्था, नई रणनीति बांग्लादेश में हाल ही में क्रिकेट प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ है। पूर्व कप्तान Tamim Iqbal को अंतरिम समिति का प्रमुख बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत BCB अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने और विवादों से दूर रहने की रणनीति अपना रहा है। ICC तक पहुंचा मामला वहीं, पूर्व बोर्ड प्रमुख Aminul Islam Bulbul ने अपने पद से हटाए जाने के बाद ICC का दरवाजा खटखटाया है, जिससे बांग्लादेश क्रिकेट में प्रशासनिक उथल-पुथल भी सामने आई है। बांग्लादेश का यह कदम साफ संकेत देता है कि वह भारत के साथ क्रिकेट रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना चाहता है। अब नजर BCCI के रुख पर होगी कि वह इस प्रस्ताव को किस तरह देखता है। यदि दोनों बोर्ड सहमत होते हैं, तो आने वाले समय में फैंस को एक और रोमांचक द्विपक्षीय सीरीज़ देखने को मिल सकती है।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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