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Jharkhand T20 League
झारखंड टी-20 लीग में धनबाद के 8 खिलाड़ियों का चयन, जिले में खुशी की लहर

रांची। झारखंड टी-20 क्रिकेट लीग के लिए आयोजित प्लेयर ऑक्शन में धनबाद के आठ प्रतिभाशाली क्रिकेटरों का चयन विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों में हुआ है। इस उपलब्धि ने धनबाद के क्रिकेट जगत में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। खिलाड़ियों के चयन को जिले में क्रिकेट के बढ़ते स्तर और युवा प्रतिभाओं की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन (डीसीए) ने भी इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।   इन खिलाड़ियों को मिला मौका झारखंड टी-20 लीग के लिए चयनित खिलाड़ियों में कुनैन कुरैशी, श्रेष्ठ, राहुल प्रसाद, अनुराग सिंह सेंगर, प्रतीक रंजन, सिद्धार्थ सिन्हा, युवराज सिंह और आर्यमन लाला शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपने प्रदर्शन और मेहनत के दम पर क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है। इसी का परिणाम है कि विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों ने उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाया है।   खिलाड़ियों की मेहनत का मिला पुरस्कार धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव विनय कुमार सिंह ने सभी चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर बेहतर प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रतिष्ठित टी-20 लीग में जगह बनाना किसी भी युवा क्रिकेटर के लिए बड़ी उपलब्धि होती है और यह जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।   डीसीए ने जताया गर्व डीसीए सचिव ने कहा कि संगठन हमेशा से युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। भविष्य में भी खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि चयनित खिलाड़ी लीग में शानदार प्रदर्शन कर धनबाद का नाम रोशन करेंगे।   अब प्रदर्शन पर टिकी निगाहें झारखंड टी-20 लीग राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा मंच माना जाता है। ऐसे में धनबाद के इन आठ खिलाड़ियों से जिले के खेल प्रेमियों को काफी उम्मीदें हैं। सभी की नजर अब उनके प्रदर्शन पर रहेगी, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर नई पहचान बनाने की कोशिश करेंगे।

Unknown जून 1, 2026 0
Vaibhav Suryavanshi
वैभव सूर्यवंशी होंगे झारखंड के हेल्थ एंबेसडर, अमिताभ बच्चन भी हुए फैन

रांची। बिहार के वैभव सूर्यवंशी जल्द ही झारखंड के हीरो बनने जा रहे हैं। झारखंड का स्वास्थ्य विभाग उन्हें राज्य का हेल्थ एंबेसडर बनाने जा रहा है। उधर, मिलेनियम स्टार अमिताभ बच्चन बिहार के 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के फैन हो गए हैं। उन्होंने X पर वैभव की तारीफ करते हुए लिखा- ‘15 साल की उम्र का अद्भुत सूर्या। इस उम्र में तो हम गुल्ली-डंडा भी ठीक से नहीं खेल पा रहे थे।’ दरअसल, सिर्फ अमिताभ बच्चन ही नहीं, आज पूरी दुनिया वैभव की दिवानी हो गई है। चाहे वह क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर हों या युवराज सिहं, या फिर माइकल वान या कोई भी। ऐसे में वैभव का झारखंड से जुड़ना बड़ी बात है।  वैभव सूर्यवंशी ने IPL-2026 में शुक्रवार को 440 गेंद में अपने 1000 रन पूरे किए। वे IPL में सबसे कम गेंद में हजार रन बनाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने आंद्रे रसेल का रिकॉर्ड ध्वस्त किया, जिन्होंने हजार रन बनाने के लिए 545 गेंद खेली थीं। इससे पहले एक सीजन में 65 छक्के लगाकर उन्होंने क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। क्रिस गेल ने 2012 में 59 छक्के लगाए थे। IPL 2026 में वैभव ने कुल 72 छक्के लगाए हैं। इस सीजन में सबसे ज्यादा रन भी वैभव सूर्यवंशी के ही नाम है। वैभव बनेंगे झारखंड स्वास्थ्य विभाग के ब्रांड एंबेसडर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने वैभव सूर्यवंशी को झारखंड स्वास्थ्य विभाग का ब्रांड एंबेसडर बनाने की घोषणा की है। उन्होंने X पर लिखा, वैभव, भले ही तुम्हारी टीम मैच हार गई हो, लेकिन तुम करोड़ों भारतीयों का दिल जीत चुके हो। मैं स्वयं क्रिकेट का खिलाड़ी रहा हूं, लेकिन इतनी कम उम्र में बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाजों का जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता से सामना करते हुए लगातार धुनाई करना, यह असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है। तुमने केवल अपना नाम ही नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, बिहार और पूरे हिंदुस्तान का नाम रोशन किया है। इसके लिए तुम्हें दिल से बधाई देता हूं। जल्द ही मैं तुम्हें झारखंड में सम्मानित करूंगा। क्रिकेट जगत में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और अद्भुत प्रतिभा से पूरे देश को प्रभावित करने वाले युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी(Vaibhav Suryavanshi) को झारखंड सरकार सम्मानित करने जा रही है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वैभव सूर्यवंशी को झारखंड स्वास्थ्य विभाग का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा।   मात्र 15 वर्ष की आयु में वैभव सूर्यवंशी(Vaibhav Suryavanshi) ने जिस साहस, अनुशासन और प्रतिभा का परिचय दिया है, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने वैभव को युवा ऊर्जा और संघर्ष की जीवंत मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि वैभव की विस्फोटक बल्लेबाजी ने न केवल देश को गौरवान्वित किया है, बल्कि करोड़ों युवाओं को प्रेरित भी किया है। फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली का देंगे संदेश डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) की सकारात्मक सोच ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी प्रभावित किया है। अब झारखंड स्वास्थ्य विभाग उनके साथ मिलकर युवाओं के बीच महत्वपूर्ण संदेश जैसे बेहतर स्वास्थ्य और फिटनेस (Health & Fitness), अनुशासन और खेल भावना (Discipline & Sportsmanship), सकारात्मक जीवनशैली (Positive Lifestyle)पहुंचाएगा।

Unknown मई 30, 2026 0
vinesh phogat
एशियन गेम्स ट्रायल में शामिल होंगी विनेश फोगाट, सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उन्हें 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल में भाग लेने की इजाजत दी है। हालांकि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विनेश फोगाट से कई कड़े सवाल भी पूछे और साफ कहा कि “आपके नाम कई उपलब्धियां हैं, लेकिन देश पहले है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश को चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी, जिसे रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि ट्रायल तुरंत होने वाले हैं, इसलिए फिलहाल उन्हें रोका नहीं जा रहा है, लेकिन मामले में कई गंभीर सवाल हैं जिनका जवाब देना होगा।   कोर्ट ने उठाए कई सवाल सुनवाई के दौरान विनेश की ओर से कहा गया कि वह सिर्फ ट्रायल में हिस्सा लेने का मौका चाहती हैं। उनकी वकील ने कोर्ट से कहा कि “एक महिला खिलाड़ी, जो एक साल पहले मां बनी है, सिर्फ चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति मांग रही है।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिसंबर 2024 में विनेश ने ब्रेक लिया, इसके बाद उन्होंने डोपिंग टेस्ट में हिस्सा नहीं लिया और अपनी लोकेशन की जानकारी भी नहीं दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि फरवरी 2026 से एशियन गेम्स की चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, जिसमें खिलाड़ियों को चार प्रतियोगिताओं में भाग लेना था, लेकिन विनेश ने इनमें हिस्सा नहीं लिया।   ‘नियम सबके लिए बराबर’ कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि खेल संघों के नियम लंबे समय से लागू हैं और सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होते हैं। जजों ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा इन नियमों को “बहिष्करणकारी” बताना उचित नहीं लगता। अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 जून को होगी। फिलहाल विनेश फोगाट को ट्रायल में उतरने की अनुमति मिलने से उनके समर्थकों में उत्साह है, जबकि खेल प्रशासन और चयन प्रक्रिया को लेकर बहस भी तेज हो गई है।

Unknown मई 29, 2026 0
Birsa Munda Athletics Stadium
रिकॉर्ड बन रहे, खिलाड़ी चमक रहे, फिर भी खाली क्यों है रांची का स्टेडियम?

रांची। राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में इन दिनों 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता आयोजित हो रही है। देशभर के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी यहां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ट्रैक पर रिकॉर्ड बन रहे हैं और खिलाड़ी बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद 35 हजार दर्शक क्षमता वाला स्टेडियम ज्यादातर समय खाली नजर आता है।   यह स्थिति केवल एक प्रतियोगिता में कम भीड़ का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड में एथलेटिक्स के प्रति लोगों की सीमित रुचि और खेल संस्कृति की चुनौतियों को भी सामने लाती है।   क्रिकेट-हॉकी से मजबूत जुड़ाव, एथलेटिक्स में कमी झारखंड में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। क्रिकेट, फुटबॉल और हॉकी जैसे खेलों में राज्य के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। यही कारण है कि जब भी इन खेलों की बड़ी प्रतियोगिताएं होती हैं, तो हजारों दर्शक स्टेडियम पहुंचते हैं। लोगों का अपने स्थानीय खिलाड़ियों से भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत रहता है। इसके विपरीत एथलेटिक्स में यह जुड़ाव अभी तक विकसित नहीं हो पाया है। कई प्रतिभाशाली एथलीट संसाधनों की कमी, वैज्ञानिक प्रशिक्षण के अभाव और आर्थिक परेशानियों के कारण आगे नहीं बढ़ पाते। खिलाड़ियों की डाइट, मॉनिटरिंग और लगातार सपोर्ट सिस्टम जैसी बुनियादी जरूरतें आज भी चुनौती बनी हुई हैं।   प्रचार-प्रसार और खेल संस्कृति की कमी झारखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मधुकांत पाठक का कहना है कि एथलेटिक्स को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है। उनके मुताबिक क्रिकेट की तुलना में एथलेटिक्स का मैनेजमेंट और आर्थिक ढांचा अभी कमजोर है। समर वेकेशन के कारण कई छात्र और स्थानीय खिलाड़ी भी प्रतियोगिता देखने नहीं पहुंच सके। वहीं अंतरराष्ट्रीय एथलीट रामचंद्र सांगा का मानना है कि एथलेटिक्स में अभी बहुत काम करने की जरूरत है। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और लगातार प्रशिक्षण मिलेगा, तभी राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना पाएंगे और दर्शकों का जुड़ाव बढ़ेगा।   खेल व्यवस्था पर भी उठे सवाल विशेषज्ञों का मानना है कि एथलेटिक्स के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने से आम लोगों को प्रतियोगिता की जानकारी तक नहीं मिल पाती। स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी एथलेटिक्स को लेकर वह माहौल नहीं बन पाया है, जो क्रिकेट या हॉकी में दिखाई देता है। स्पष्ट है कि रांची के खाली स्टैंड्स सिर्फ दर्शकों की बेरुखी नहीं, बल्कि खेल व्यवस्था, संसाधनों की कमी और कमजोर खेल संस्कृति की कहानी भी बयान करते हैं। जब तक खिलाड़ियों को मजबूत आधार और स्थानीय पहचान नहीं मिलेगी, तब तक ट्रैक पर रिकॉर्ड बनते रहेंगे, लेकिन स्टैंड्स खाली ही नजर आएंगे।

Unknown मई 25, 2026 0
Dhruv Jurel playing composed IPL innings for Rajasthan Royals during tense chase against RCB in 2026 match
IPL 2026: वैभव के तूफान के बीच ध्रुव जुरेल की समझदारी बनी जीत की असली वजह

राजस्थान रॉयल्स की लगातार चौथी जीत के पीछे सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज़ी नहीं, बल्कि संयम और रणनीति का शानदार संतुलन भी था। जहां एक ओर वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी ने मुकाबले को रोमांचक बना दिया, वहीं दूसरी ओर ध्रुव जुरेल की शांत और समझदारी भरी बल्लेबाज़ी ने टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया। वैभव का तूफान, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ रन चेज़ के दौरान वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाज़ी ने मैच को एकतरफा बनाना शुरू कर दिया था। उनकी विस्फोटक पारी ने गेंदबाज़ों को बैकफुट पर ला दिया और ऐसा लगा कि मैच जल्द खत्म हो जाएगा। लेकिन जैसे ही वैभव आउट हुए, मुकाबले ने अचानक करवट ले ली। मैच में आया टर्निंग पॉइंट कृणाल पांड्या ने लगातार दो विकेट लेकर मैच को फिर से रोमांचक बना दिया। पहले वैभव और फिर शिमरन हेटमायर का विकेट गिरने से राजस्थान दबाव में आ गया। इसके बाद रियान पराग के आउट होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई। जुरेल की 'कमांडर' जैसी पारी ऐसे मुश्किल समय में ध्रुव जुरेल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने बिना घबराए परिस्थिति के अनुसार अपनी बल्लेबाज़ी को ढाला। पावरप्ले में तेज़ 27 रन (10 गेंद) 18 गेंदों पर 40 रन बनाकर मजबूत आधार बाद में संयमित खेल दिखाते हुए टीम को संभाला जुरेल की पारी में आक्रामकता और समझदारी का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। जडेजा के साथ साझेदारी बनी जीत की कुंजी रविंद्र जडेजा ने जुरेल का अच्छा साथ निभाया। दोनों ने मिलकर बिना जोखिम लिए पारी को आगे बढ़ाया और लक्ष्य को सुरक्षित तरीके से हासिल किया। यह साझेदारी ताकत से ज्यादा रणनीति और समझदारी पर आधारित थी। राजस्थान रॉयल्स की जीत का असली हीरो इस मुकाबले में जहां वैभव सूर्यवंशी ने चमक बिखेरी, वहीं ध्रुव जुरेल ने यह साबित किया कि बड़े मैच सिर्फ आक्रामकता से नहीं, बल्कि धैर्य और समझदारी से जीते जाते हैं। उनकी यह पारी राजस्थान रॉयल्स की जीत की सबसे अहम कड़ी साबित हुई और टीम की जीत की लय को बरकरार रखा।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Rishabh Pant and Sanjiv Goenka in heated argument on field after IPL 2026 match loss.
IPL 2026: हार के बाद मैदान पर गरमाया माहौल, ऋषभ पंत और संजिव गोयनका के बीच तीखी बहस ने खींचा ध्यान

IPL 2026 के एक मुकाबले के बाद लखनऊ सुपर जायंट्स के खेमे में तनाव खुलकर सामने आ गया। लखनऊ सुपर जायंट्स को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन मैच के बाद जो दृश्य देखने को मिला, उसने क्रिकेट फैंस को हैरान कर दिया। मैदान पर ही टीम के मालिक संजिव गोयनका और कप्तान ऋषभ पंत के बीच तीखी बहस होती नजर आई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में गोयनका काफी नाराज दिखाई दे रहे हैं और उनका बातचीत का अंदाज भी बेहद सख्त नजर आया। मैच का हाल: लखनऊ की कमजोर बल्लेबाजी पड़ी भारी इस मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम केवल 141 रन ही बना सकी। जवाब में दिल्ली कैपिटल्स ने यह लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया। लखनऊ के गेंदबाजों ने भी 20 अतिरिक्त रन (16 वाइड और 4 लेग बाई) देकर टीम की मुश्किलें और बढ़ा दीं। मैच के बाद कप्तान ऋषभ पंत ने हार की वजह बताते हुए कहा कि कम स्कोर के कारण दबाव बढ़ गया और अतिरिक्त रन टीम पर भारी पड़े। फैंस का गुस्सा: ‘मैदान पर नहीं, ड्रेसिंग रूम में होनी चाहिए थी बात’ इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि इस तरह सार्वजनिक रूप से कप्तान से बहस करना खेल भावना के खिलाफ है। उनका कहना है कि टीम से जुड़ी बातों को ड्रेसिंग रूम तक सीमित रखना चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब संजिव गोयनका का ऐसा रवैया चर्चा में आया हो। इससे पहले भी वह एक अन्य कप्तान के साथ इसी तरह के व्यवहार को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। टीम बॉन्डिंग पर असर या वापसी का मौका? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस विवाद का असर लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम बॉन्डिंग पर पड़ेगा, या फिर ऋषभ पंत आने वाले मैचों में अपने प्रदर्शन से जवाब देंगे। IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में टीम के अंदर का माहौल जीत-हार पर गहरा असर डालता है।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
भारतीय क्रिकेट टीम और जिम्बाब्वे के बीच टी20 मैच का प्रतीकात्मक दृश्य
जुलाई के बाद जिम्बाब्वे दौरे पर जाएगी  टीम इंडिया, खेलेगी तीन मैचों की टी20 सीरीज

मुंबई,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के जिम्बाब्वे दौरे का आधिकारिक एलान कर दिया है। टीम इंडिया जुलाई 2026 में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज खेलेगी। यह दौरा इंग्लैंड के दौरे के बाद होगा और टीम की तैयारी तथा युवा खिलाड़ियों को अवसर देने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।   मैचों का शेड्यूल और स्थल तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब मैदान में खेले जाएंगे। पहला टी20 मैच 23 जुलाई को होगा, जबकि बाकी दो मैच 25 और 26 जुलाई को आयोजित होंगे। इस तरह टीम इंडिया लगातार दो दिन मैच खेलते हुए जिम्बाब्वे की चुनौती का सामना करेगी।   पिछला दौरा और अनुभव टीम इंडिया आखिरी बार 2024 में जिम्बाब्वे गई थी, जब दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली गई थी। पिछला दौरा भारतीय खिलाड़ियों के लिए सीखने और नई रणनीतियों को आज़माने का अवसर रहा था।   युवा खिलाड़ियों को मिलेगा मौका इस सीरीज को युवा खिलाड़ियों को मौका देने और भविष्य की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टी20 वर्ल्ड कप 2028 और ओलंपिक 2028 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए टीम कॉम्बिनेशन पर काम किया जाएगा। साथ ही बेंच स्ट्रेंथ को परखने और टीम में नई प्रतिभाओं को शामिल करने का भी अवसर मिलेगा।   BCCI का उद्देश्य BCCI का मानना है कि यह दौरा भारतीय टीम को लगातार अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने और रणनीति पर काम करने का प्लेटफॉर्म देगा। युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच तालमेल मजबूत करने के साथ ही टीम इंडिया आगामी टी20 टूर्नामेंट्स में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार होगी।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
IPL मैच में लखनऊ और दिल्ली टीम के खिलाड़ियों का मुकाबला
IPL 2026: लखनऊ और दिल्ली में होगी टक्कर, आज किसका बजेगा डंका?

नई दिल्ली,एजेंसियां। IPL  के पांचवें मुकाबले में आज Lucknow Super Giants (LSG) और Delhi Capitals (DC) आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में शाम 7:30 बजे खेला जाएगा। दोनों टीमों के लिए यह मैच बेहद अहम है, क्योंकि पिछले सीजन दोनों ही प्लेऑफ में जगह बनाने से चूक गई थीं। LSG की कप्तानी ऋषभ पंत कर रहे हैं, जबकि DC की कमान अक्षर पटेल के हाथों में है। मैच आज लखनऊ में 7:30 PM IST पर खेला जाएगा।   LSG की ताकत: विस्फोटक बैटिंग और तेज गेंदबाजी लखनऊ की टीम इस बार काफी मजबूत नजर आ रही है। टॉप ऑर्डर में एडेन मार्करम, निकोलस पूरन और मिचेल मार्श जैसे मैच विनर मौजूद हैं। वहीं गेंदबाजी में मोहम्मद शमी, मयंक यादव, एनरिक नॉर्टजे और आवेश खान जैसे तेज गेंदबाज विपक्षी बल्लेबाजों के लिए चुनौती बन सकते हैं। खासकर होम ग्राउंड का फायदा LSG के पक्ष में जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लखनऊ की पेस बैटरी मैच का रुख बदल सकती है।   DC की ताकत: संतुलित बैटिंग और मजबूत स्पिन अटैक दिल्ली कैपिटल्स की टीम कागज पर ज्यादा संतुलित दिखाई देती है। केएल राहुल, पृथ्वी शॉ और पथुम निसांका टॉप ऑर्डर को मजबूती देते हैं, जबकि डेविड मिलर, ट्रिस्टन स्टब्स और नीतीश राणा मिडिल ऑर्डर में गहराई लाते हैं। हालांकि मिचेल स्टार्क की गैरमौजूदगी तेज गेंदबाजी को थोड़ा कमजोर करती है, लेकिन कुलदीप यादव और अक्षर पटेल की स्पिन जोड़ी लखनऊ की पिच पर असरदार साबित हो सकती है। Reddit और प्रीव्यू चर्चाओं में भी DC को “more balanced side” कहा जा रहा है।   हेड-टू-हेड और पिच रिपोर्ट क्या कहती है? अब तक दोनों टीमें 7 बार भिड़ चुकी हैं, जिसमें दिल्ली ने 4 और लखनऊ ने 3 मैच जीते हैं। यानी रिकॉर्ड थोड़ा DC के पक्ष में है। वहीं इकाना की पिच को लेकर रिपोर्ट्स कहती हैं कि यहां शुरुआत में गेंदबाजों को मदद मिल सकती है, लेकिन बाद में बल्लेबाज खुलकर रन बना सकते हैं। ड्यू फैक्टर की वजह से टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है। हालिया प्रीव्यू के अनुसार 175+ स्कोर प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है।   किसका पलड़ा भारी? अगर होम एडवांटेज और पेस अटैक को देखें तो LSG थोड़ी आगे दिखती है। लेकिन अगर संतुलन और हेड-टू-हेड रिकॉर्ड देखें तो DC भी कम नहीं। कुल मिलाकर मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है। मेरा मैच कॉल: LSG को हल्का edge, लेकिन यह मैच आखिरी ओवर तक जा सकता है।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
Sourav Ganguly  discussing cricket leadership and coaching approach during a match or event
गांगुली की दो टूक सलाह: ‘रूखे होने की जरूरत नहीं’

भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर नेतृत्व शैली और व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर को लेकर बेबाक राय रखते हुए साफ संदेश दिया है कि आक्रामकता जरूरी है, लेकिन उसमें रूखापन नहीं होना चाहिए। एक इंटरव्यू के दौरान सौरव गांगुली ने कहा कि गौतम गंभीर एक स्वाभाविक प्रतिस्पर्धी हैं और जीत के लिए उनका जुनून काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए रूखा या कठोर व्यवहार जरूरी नहीं है। गांगुली ने कहा कि उन्होंने गंभीर के साथ खेला है और वह जानते हैं कि वह एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उनका आक्रामक रवैया कई बार विवादों का कारण बन जाता है। टीम कल्चर को लेकर की तारीफ जहां एक ओर गांगुली ने गंभीर के व्यवहार पर सुझाव दिया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने उनकी कोचिंग स्टाइल की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि गंभीर टीम में “टीम फर्स्ट” का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, जहां व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज्यादा सामूहिक सफलता पर जोर दिया जाता है। ICC जीत के बाद बढ़ी जिम्मेदारी गौतम गंभीर हाल ही में भारत को ICC Champions Trophy 2025 और ICC T20 World Cup 2026 जिताने वाले पहले हेड कोच बने हैं। इन सफलताओं ने उन्हें एक मजबूत कोच के रूप में स्थापित किया है, लेकिन गांगुली के मुताबिक असली परीक्षा अभी बाकी है। 2027 वर्ल्ड कप और टेस्ट क्रिकेट होगी असली चुनौती गांगुली का मानना है कि 2027 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाला वनडे वर्ल्ड कप गंभीर के लिए असली कसौटी होगा, जहां परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण होंगी। साथ ही उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पिच पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने के बजाय संतुलित विकेट पर खेलना बेहतर होगा। उनका मानना है कि अच्छी पिच बेहतर परिणाम लाती है और टीम के प्रदर्शन को भी निखारती है। आने वाले दौरे पर नजरें IPL 2026 के बाद भारतीय टीम अफगानिस्तान और आयरलैंड के खिलाफ सीरीज खेलेगी, इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर लंबी व्हाइट-बॉल सीरीज होगी। यह दौर गंभीर के लिए अपनी रणनीति और नेतृत्व को और मजबूत करने का मौका होगा।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 6, 2026 0