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Ovarian Cancer Myths Explained

हर ओवेरियन सिस्ट कैंसर नहीं होती! जानिए महिलाओं में फैली 5 बड़ी गलतफहमियों की सच्चाई

surbhi जून 19, 2026 0
Doctor explaining ovarian cancer myths and symptoms to women during a health awareness consultation.
Ovarian Cancer Myths and Facts

भारत समेत दुनिया भर में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद ओवेरियन कैंसर सबसे गंभीर और आम कैंसरों में गिना जाता है। यह बीमारी अंडाशय (Ovary) से शुरू होती है और समय पर पहचान न होने पर जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि, आज भी ओवेरियन कैंसर को लेकर महिलाओं के बीच कई गलत धारणाएं प्रचलित हैं, जिनकी वजह से सही समय पर जांच और इलाज में देरी हो सकती है।

आइए जानते हैं ओवेरियन कैंसर से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई।

मिथक 1: ओवेरियन कैंसर सिर्फ अधिक उम्र की महिलाओं को होता है

बहुत सी महिलाओं का मानना है कि यह बीमारी केवल बुजुर्ग महिलाओं को होती है। जबकि सच्चाई यह है कि उम्र बढ़ने के साथ जोखिम जरूर बढ़ता है, लेकिन कम उम्र की महिलाएं भी इसकी शिकार हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी उम्र की महिला में ओवेरियन कैंसर विकसित हो सकता है। इसलिए केवल उम्र के आधार पर खतरे को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

मिथक 2: HPV या Pap Smear टेस्ट से ओवेरियन कैंसर का पता चल जाता है

यह एक आम गलतफहमी है। HPV टेस्ट और Pap Smear मुख्य रूप से सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा कैंसर) की जांच के लिए किए जाते हैं।

फिलहाल ऐसा कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है, जो शुरुआती अवस्था में ओवेरियन कैंसर की सटीक पहचान कर सके। इसलिए इन टेस्टों को ओवेरियन कैंसर की जांच मानना गलत है।

मिथक 3: टैल्कम पाउडर से ओवेरियन कैंसर होता है

कई वर्षों से टैल्कम पाउडर और ओवेरियन कैंसर के संबंध को लेकर बहस चल रही है। कुछ पुरानी रिसर्च में संभावित संबंध की बात कही गई थी, लेकिन हाल की बड़ी स्टडी में दोनों के बीच कोई मजबूत वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी भी शोध जारी है और केवल टैल्कम पाउडर को कैंसर का कारण मान लेना सही नहीं होगा।

मिथक 4: केवल अल्ट्रासाउंड या CA-125 टेस्ट से कैंसर की पुष्टि हो जाती है

अल्ट्रासाउंड और CA-125 ब्लड टेस्ट महत्वपूर्ण जांच हैं, लेकिन अकेले इनके आधार पर ओवेरियन कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती।

CA-125 का स्तर कई अन्य सामान्य स्थितियों में भी बढ़ सकता है, जबकि कुछ कैंसर मरीजों में यह सामान्य भी रह सकता है। अंतिम पुष्टि के लिए बायोप्सी और पैथोलॉजी जांच की आवश्यकता होती है।

मिथक 5: हर ओवेरियन सिस्ट कैंसर बन जाती है

यह सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक है। अधिकांश ओवेरियन सिस्ट सामान्य (Benign) होती हैं और कई मामलों में बिना इलाज के अपने आप ठीक भी हो जाती हैं।

डॉक्टर सिस्ट का आकार, महिला की उम्र, लक्षण और अन्य जांच रिपोर्टों के आधार पर तय करते हैं कि सर्जरी की जरूरत है या नहीं। हर सिस्ट कैंसर में नहीं बदलती।

क्यों जरूरी है सही जानकारी?

ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे पेट फूलना, पेट दर्द, भूख कम लगना या बार-बार पेशाब आने जैसे हो सकते हैं। इसलिए किसी भी लगातार बने रहने वाले लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

समय पर पहचान और सही जानकारी ही इस गंभीर बीमारी से बचाव और सफल इलाज की सबसे बड़ी कुंजी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Monsoon Health Tips: बारिश में बीमारियों से बचाएंगे ये 4 इम्युनिटी बूस्टर काढ़े, घर पर मिनटों में करें तैयार

नई दिल्ली, एजेंसियां। मानसून का मौसम राहत के साथ-साथ कई मौसमी बीमारियां भी लेकर आता है। इस दौरान खांसी, जुकाम, वायरल संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत रखना बेहद जरूरी है। आयुर्वेद में काढ़े को प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर माना गया है, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने की क्षमता देने में सहायक हो सकता है। घर में उपलब्ध कुछ सामान्य जड़ी-बूटियों और मसालों से आसानी से पौष्टिक काढ़ा तैयार किया जा सकता है।   तुलसी-अदरक का काढ़ा   सबसे सरल और लोकप्रिय काढ़ा तुलसी और अदरक से बनता है। इसके लिए दो कप पानी में 10-12 तुलसी की पत्तियां और एक इंच अदरक डालकर करीब 10 मिनट तक उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तो हल्का ठंडा होने पर एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें।   आंवला, तुलसी और अदरक का मिश्रण अगर शरीर में कमजोरी या थकान महसूस हो रही हो, तो आंवला, तुलसी और अदरक का काढ़ा लाभदायक माना जाता है। दो कप पानी में एक आंवला, अदरक और तुलसी डालकर 15 मिनट तक उबालें। अंत में शहद मिलाकर सुबह या शाम इसका सेवन किया जा सकता है।   मुलेठी और तुलसी का काढ़ा गले की खराश, खांसी और जुकाम से राहत पाने के लिए मुलेठी और तुलसी का काढ़ा उपयोगी माना जाता है। मुलेठी, तुलसी और पानी को 10-15 मिनट तक उबालें और बाद में शहद मिलाकर पीएं।   दालचीनी, लौंग और अदरक का काढ़ा दालचीनी, लौंग और अदरक से तैयार काढ़ा श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने और संक्रमण से बचाव में सहायक माना जाता है। तीन कप पानी में इन सभी सामग्री को 10 मिनट तक उबालें और स्वाद के लिए गुड़ या शहद मिलाएं।   हालांकि, आयुर्वेदिक काढ़े स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं, लेकिन इनका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को कोई पुरानी बीमारी है, गर्भावस्था है या नियमित दवाएं चल रही हैं, तो काढ़े का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

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हीट स्ट्रोक को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी, 5 लक्षणों से करें पहचान, जानिए क्या करें और क्या नहीं

भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच हीट स्ट्रोक यानी लू लगने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाती है। कई लोग इसे सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। गंभीर स्थिति में मरीज कोमा तक में जा सकता है। गुरुग्राम स्थित मारेंगो एशिया हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. दीक्षा गोयल के अनुसार, यदि लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। क्या होता है हीट स्ट्रोक? जब शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम अत्यधिक गर्मी के कारण काम करना बंद कर देता है, तब हीट स्ट्रोक की स्थिति पैदा होती है। इस दौरान शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक पहुंच सकता है, जिससे दिमाग, हृदय और अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। हीट स्ट्रोक के 5 प्रमुख लक्षण 1. शरीर का तापमान तेजी से बढ़ना शरीर का तापमान 102 से 105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है। 2. त्वचा का लाल और गर्म होना त्वचा गर्म, लाल और सूखी हो सकती है। कुछ मामलों में पसीना भी दिखाई दे सकता है। 3. मानसिक स्थिति में बदलाव मरीज भ्रमित हो सकता है, बड़बड़ाने लग सकता है या बेहोश भी हो सकता है। 4. पसीना आना बंद होना कई बार शरीर पसीना निकालना बंद कर देता है, जिससे शरीर का तापमान और बढ़ जाता है। 5. तेज और मजबूत नाड़ी दिल की धड़कन सामान्य से अधिक तेज महसूस हो सकती है। हीट स्ट्रोक से हो सकती हैं ये गंभीर जटिलताएं विशेषज्ञों के अनुसार, हीट स्ट्रोक के कारण: दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और मरीज कोमा में जा सकता है। मांसपेशियों के टूटने से शरीर में विषैले तत्व बढ़ सकते हैं। शरीर में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो सकता है। किडनी, लिवर, फेफड़े और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। हीट स्ट्रोक होने पर तुरंत क्या करें? मरीज को धूप या गर्म वातावरण से हटाकर ठंडी जगह पर ले जाएं। शरीर पर ठंडा पानी डालें और हवा करें। बर्फ के पानी में भीगा तौलिया शरीर पर रखें और समय-समय पर बदलते रहें। गर्दन, बगल और जांघों के पास बर्फ या कोल्ड पैक लगाएं। जितनी जल्दी हो सके इमरजेंसी मेडिकल सहायता के लिए संपर्क करें। विशेषज्ञों के अनुसार, लक्षण शुरू होने के 30 मिनट के भीतर शरीर का तापमान कम करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। हीट स्ट्रोक में क्या नहीं करना चाहिए? 1. बुखार की दवा न दें पैरासिटामोल या अन्य बुखार कम करने वाली दवाएं हीट स्ट्रोक में फायदेमंद नहीं होतीं और नुकसान पहुंचा सकती हैं। 2. जबरन पानी या कोई तरल पदार्थ न पिलाएं यदि मरीज की चेतना प्रभावित हो चुकी है, तो तरल पदार्थ सांस की नली में जा सकते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। कैसे करें बचाव? दोपहर के समय तेज धूप में निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय टोपी, छाता या सनस्क्रीन का उपयोग करें। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें।

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Morning Walk
फिट और हेल्दी रहना है? हर सुबह की सैर से कम हो सकता है इन बीमारियों का खतरा

नई दिल्ली, एजेंसियां। आज की व्यस्त जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण कई लोग कम उम्र में ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञ नियमित शारीरिक गतिविधि को स्वस्थ जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। हर सुबह करीब 30 मिनट की मॉर्निंग वॉक न केवल शरीर को सक्रिय रखती है, बल्कि कई बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में मदद कर सकती है।   दिल और डायबिटीज के लिए फायदेमंद तेज कदमों से की गई सुबह की सैर हृदय की धड़कन और रक्त संचार को बेहतर बनाती है। नियमित वॉक से उच्च रक्तचाप और खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है, जिससे हृदय रोगों का खतरा घट सकता है। इसके अलावा, पैदल चलने से शरीर की मांसपेशियां रक्त में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा के रूप में करती हैं, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कम हो सकता है।   वजन नियंत्रण और मानसिक स्वास्थ्य में सहायक यदि जिम जाने का समय नहीं है, तो मॉर्निंग वॉक एक सरल और प्रभावी विकल्प हो सकता है। नियमित तेज चाल से चलने पर अतिरिक्त कैलोरी खर्च होती है और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, जिससे वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। वहीं, सुबह की ताजी हवा और प्राकृतिक वातावरण तनाव कम करने में भी सहायक माने जाते हैं। पैदल चलने से एंडोर्फिन जैसे "फील-गुड" हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे तनाव, चिंता और उदासी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।   जोड़ों और हड्डियों को भी मिलता है लाभ नियमित मॉर्निंग वॉक से जोड़ों की लचक बनाए रखने और मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद मिलती है। सुबह की हल्की धूप शरीर को विटामिन-डी प्राप्त करने में भी सहायक हो सकती है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।   हालांकि, किसी भी नई व्यायाम दिनचर्या की शुरुआत करने से पहले, विशेष रूप से यदि पहले से कोई बीमारी हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहता है। नियमित मॉर्निंग वॉक स्वस्थ जीवनशैली का प्रभावी हिस्सा बन सकती है।

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