हरियाणा में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) ग्रुप डी 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही 19 जून 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
जो उम्मीदवार भविष्य में चपरासी, हेल्पर, चौकीदार और अन्य ग्रुप डी पदों पर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए CET परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। इस परीक्षा के स्कोर के आधार पर ही विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में भर्ती की जाएगी।
ग्रुप डी के अधिकांश पदों के लिए उम्मीदवारों को निम्न योग्यताएं पूरी करनी होंगी:
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हरियाणा में ग्रुप डी स्तर की आने वाली सभी भर्तियों में शामिल होने के लिए CET 2026 एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। ऐसे में इच्छुक उम्मीदवार समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
हरियाणा में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) ग्रुप डी 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही 19 जून 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जो उम्मीदवार भविष्य में चपरासी, हेल्पर, चौकीदार और अन्य ग्रुप डी पदों पर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए CET परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। इस परीक्षा के स्कोर के आधार पर ही विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में भर्ती की जाएगी। कौन कर सकता है आवेदन? ग्रुप डी के अधिकांश पदों के लिए उम्मीदवारों को निम्न योग्यताएं पूरी करनी होंगी: किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना जरूरी। 10वीं में हिंदी या संस्कृत विषय का अध्ययन किया होना चाहिए। आवेदन की अंतिम तिथि 3 जुलाई 2026 तक उम्मीदवार की आयु 18 से 42 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को हरियाणा सरकार के नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। महत्वपूर्ण तिथियां विवरण तारीख आवेदन शुरू 19 जून 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 3 जुलाई 2026 फीस जमा करने की अंतिम तिथि 6 जुलाई 2026 परीक्षा मोड ऑफलाइन (OMR आधारित) कुल प्रश्न 100 कुल अंक 100 परीक्षा अवधि 1 घंटा 45 मिनट प्रश्नों का स्तर 10वीं स्तर पास होने के लिए कितने अंक जरूरी? सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 40 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। आवेदन कैसे करें? सबसे पहले One Time Registration (OTR) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरा करें। रजिस्ट्रेशन के बाद HSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। विज्ञापन संख्या 05/2026 के सामने दिए गए "Apply Online" लिंक पर क्लिक करें। व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरें। फोटो, हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित शुल्क जमा कर आवेदन फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंट सुरक्षित रखें। आवेदन शुल्क पुरुष उम्मीदवार सामान्य वर्ग/अन्य राज्यों के उम्मीदवार: ₹500 हरियाणा के आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार: ₹250 महिला उम्मीदवार हरियाणा की सामान्य, ईडब्ल्यूएस और आरक्षित वर्ग की सभी महिला अभ्यर्थी: ₹250 जरूरी दस्तावेज 10वीं की मार्कशीट पासपोर्ट साइज फोटो हस्ताक्षर जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) निवास प्रमाण पत्र अन्य आवश्यक दस्तावेज हरियाणा में ग्रुप डी स्तर की आने वाली सभी भर्तियों में शामिल होने के लिए CET 2026 एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। ऐसे में इच्छुक उम्मीदवार समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
कभी सफलता की पहचान थी छह अंकों वाली सैलरी, अब उठ रहे हैं सवाल एक समय था जब हर महीने 1 लाख रुपये या उससे अधिक कमाना आर्थिक सफलता की पहचान माना जाता था। यह अच्छी नौकरी, स्थिर भविष्य और आरामदायक जीवन का प्रतीक समझा जाता था। लेकिन अब तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह धारणा कमजोर पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में बेंगलुरु के एक आईटी प्रोफेशनल के अतिरिक्त आय के लिए टैक्सी चलाने की खबर ने देशभर के लाखों नौकरीपेशा लोगों का ध्यान खींचा। यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि शहरी भारत के उस वर्ग की चिंता को दर्शाती है जो अच्छी कमाई के बावजूद आर्थिक सुरक्षा को लेकर असमंजस में है। बढ़ती आय के साथ और तेजी से बढ़ रहे खर्च देश के बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे में रहने की लागत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में देखने को मिला है: घरों का किराया और प्रॉपर्टी की कीमतें बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल खर्च बीमा प्रीमियम वाहन और होम लोन की ईएमआई दैनिक जीवन की बढ़ती लागत नतीजतन, वेतन बढ़ने के बावजूद अधिकांश परिवारों के पास बचत के लिए अपेक्षाकृत कम पैसा बच रहा है। ज्यादा कमाई, लेकिन कम आर्थिक संतोष विशेषज्ञों का मानना है कि आज की पीढ़ी अपने माता-पिता की तुलना में कहीं अधिक कमाई कर रही है, लेकिन आर्थिक रूप से खुद को उतना सुरक्षित महसूस नहीं करती। ईएमआई, स्कूल फीस, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, स्वास्थ्य बीमा और अन्य जिम्मेदारियों के बाद आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। यही वजह है कि अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। साइड इनकम का बढ़ता ट्रेंड बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल की तरह अब कई नौकरीपेशा लोग अतिरिक्त कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं। आज बड़ी संख्या में लोग: फ्रीलांसिंग कर रहे हैं ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं कंसल्टिंग सेवाएं दे रहे हैं निवेश और ट्रेडिंग कर रहे हैं छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं इनमें से अधिकांश लोग आर्थिक संकट में नहीं हैं, बल्कि बढ़ती आकांक्षाओं और खर्चों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या समस्या सैलरी की है या बढ़ती उम्मीदों की? विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि केवल महंगाई ही समस्या नहीं है, बल्कि जीवनशैली की अपेक्षाएं भी काफी बदल गई हैं। आज का शहरी मध्यम वर्ग एक साथ कई लक्ष्य हासिल करना चाहता है: अपना घर खरीदना बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं लेना नियमित छुट्टियां मनाना नई तकनीक और गैजेट्स खरीदना निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग करना इन सभी जरूरतों को एक ही आय के जरिए पूरा करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया ने भी बढ़ाया दबाव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने लोगों की जीवनशैली और सफलता की परिभाषा बदल दी है। लक्जरी घर, विदेश यात्राएं, महंगी कारें और हाई-एंड लाइफस्टाइल अब लगातार लोगों की स्क्रीन पर दिखाई देती हैं। इससे कई बार लोग अपनी तुलना समाज के सबसे संपन्न वर्ग से करने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक असंतोष का एक कारण यह भी है कि सफलता का पैमाना लगातार बदल रहा है। आर्थिक असुरक्षा केवल मानसिक नहीं, वास्तविक भी है आज के शहरी परिवारों के सामने कई वित्तीय जिम्मेदारियां एक साथ मौजूद हैं। उन्हें: घर की लागत संभालनी है बच्चों की उच्च शिक्षा की योजना बनानी है बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनना है रिटायरमेंट फंड तैयार करना है मेडिकल आपात स्थितियों के लिए बचत करनी है इसी वजह से अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक असुरक्षा की भावना बनी रहती है। बदल गया है मिडिल क्लास का सपना मध्यम वर्ग के सपने आज भी वही हैं—स्थिर नौकरी, अपना घर, बच्चों की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित रिटायरमेंट। लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज आर्थिक सुरक्षा केवल अधिक कमाने से नहीं, बल्कि बेहतर वित्तीय योजना, अनुशासित बचत और समझदारी से निवेश करने से मिलेगी। 1 लाख रुपये महीना आज भी भारत के अधिकांश लोगों के लिए एक बड़ी आय मानी जाती है। लेकिन बड़े शहरों में बढ़ती महंगाई, जीवनशैली के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल अच्छी सैलरी ही आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दे सकती है? आज के भारत में जवाब शायद "नहीं" है। अब आर्थिक सफलता केवल कमाई पर नहीं, बल्कि उस कमाई को संभालने और बढ़ाने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने 18 और 19 अप्रैल 2026 को आयोजित परीक्षा में हिस्सा लिया था, वे अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। 3,155 उम्मीदवार अगले चरण के लिए चयनित इस भर्ती परीक्षा के तहत कुल 39,192 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे। आयोग ने इनमें से 3,155 उम्मीदवारों को अगले चरण यानी इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। यह रिजल्ट पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किया गया है, जिसमें चयनित उम्मीदवारों के रोल नंबर शामिल हैं। 981 पदों पर होनी है भर्ती इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 981 पदों को भरा जाएगा। लिखित परीक्षा के बाद अब चयनित उम्मीदवारों को इंटरव्यू चरण में शामिल होना होगा, जो अंतिम चयन के लिए निर्णायक होगा। ऐसे करें रिजल्ट डाउनलोड उम्मीदवार निम्नलिखित स्टेप्स से अपना रिजल्ट देख और डाउनलोड कर सकते हैं— सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाएं होमपेज पर “NOTICE BOARD” सेक्शन पर क्लिक करें “UPHESC Assistant Professor Result 2026” लिंक चुनें स्क्रीन पर रिजल्ट पीडीएफ खुल जाएगा इसे डाउनलोड कर भविष्य के लिए प्रिंट निकाल लें जल्द जारी होगी इंटरव्यू की तारीख UPESSC ने बताया है कि चयनित उम्मीदवारों को जल्द ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इंटरव्यू की तारीख आयोग की वेबसाइट पर अलग से जारी की जाएगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट चेक करते रहें। परीक्षा प्रक्रिया और चयन यह परीक्षा 18 और 19 अप्रैल 2026 को विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी। पूरी चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पर आधारित है। अंतिम चयन इंटरव्यू प्रदर्शन और मेरिट के आधार पर किया जाएगा। उम्मीदवारों में बढ़ी उत्सुकता रिजल्ट जारी होने के बाद चयनित उम्मीदवारों में खुशी और उत्साह का माहौल है, जबकि इंटरव्यू से पहले तैयारी तेज हो गई है। आयोग की ओर से यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने की तैयारी की जा रही है ताकि खाली पदों को भरा जा सके।