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केंद्र सरकार ने UPSC और SSC भर्ती प्रक्रिया को तेज, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं।

UPSC और SSC भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े सुधार, अब तेज और पारदर्शी होगी सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
UPSC SSC भर्ती सुधार
UPSC SSC Recruitment Reforms

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने UPSC और SSC के जरिए होने वाली सरकारी भर्तियों को अधिक तेज, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई अहम सुधार किए हैं। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि इन बदलावों के चलते UPSC की भर्ती प्रक्रिया का चक्र 15 महीने से घटकर करीब 13 महीने रह गया है।

 

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को बनाया गया आसान

 

UPSC ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मॉड्यूलर ऑनलाइन एप्लीकेशन पोर्टल शुरू किया है। इससे अभ्यर्थियों को आवेदन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में आसानी होगी और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ पारदर्शिता भी बढ़ी है।

 

AI और फेस ऑथेंटिकेशन से बढ़ेगी सुरक्षा

 

नई व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सत्यापन और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। AI आधारित सत्यापन से सिविल सेवा परीक्षा में अभ्यर्थियों के प्रयासों की जांच में मदद मिलेगी, जबकि फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल फर्जी उम्मीदवार या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर परीक्षा देने की संभावना को रोकने के लिए किया जा रहा है।

 

उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था

 

UPSC ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रोविजनल आंसर की जारी करने और उस पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था भी शुरू की है। इससे अभ्यर्थियों को प्रश्नों और उत्तरों को लेकर अपनी आपत्ति आयोग के सामने रखने का अवसर मिलेगा।

 

भर्ती प्रक्रिया का समय घटाने पर जोर

 

केंद्र सरकार के अनुसार, इन सुधारों का प्रमुख उद्देश्य सरकारी भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध, सुरक्षित और उम्मीदवारों के लिए अधिक भरोसेमंद बनाना है। UPSC और SSC दोनों के जरिए बड़ी संख्या में केंद्रीय सरकारी पदों पर भर्ती होती है, इसलिए प्रक्रिया में तकनीकी सुधारों का सीधा असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) ने 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 11,403 कस्टमर सर्विस एसोसिएट (पूर्व में क्लर्क) पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन 1 अगस्त 2026 से शुरू हो गए हैं।   11 बैंकों में होगी नियुक्ति   आईबीपीएस की इस भर्ती के माध्यम से देश के 11 भागीदार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कस्टमर सर्विस एसोसिएट (CSA) के पद भरे जाएंगे। बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक स्नातक उम्मीदवार इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।   स्नातक उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन   भर्ती के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) पास उम्मीदवार आवेदन के पात्र हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर सकेंगे।   21 अगस्त तक भर सकेंगे फॉर्म   आईबीपीएस के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और 21 अगस्त 2026 की रात 11:59 बजे तक जारी रहेगी। उम्मीदवारों को अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है।   अक्टूबर में प्रीलिम्स, दिसंबर में होगी मुख्य परीक्षा   भर्ती प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन प्रारंभिक परीक्षा 10 और 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जाएगी। प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को 27 दिसंबर 2026 को होने वाली मुख्य परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मार्च 2027 में अनंतिम आवंटन (Provisional Allotment) किया जाएगा।   महत्वपूर्ण तिथियां एक नजर में   आधिकारिक अधिसूचना जारी: 1 अगस्त 2026 ऑनलाइन आवेदन शुरू: 1 अगस्त 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2026 प्रारंभिक परीक्षा: 10 और 11 अक्टूबर 2026 मुख्य परीक्षा: 27 दिसंबर 2026 अनंतिम आवंटन: मार्च 2027 बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए यह वर्ष की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक मानी जा रही है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर परीक्षा की तैयारी शुरू कर सकते हैं।

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1733 पदों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदन हुए अमान्य, तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी गलतियों के कारण कार्रवाई   रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के तहत जमा किए गए 59,457 ऑनलाइन आवेदन रद्द कर दिए हैं। आयोग ने बताया कि ये आवेदन विभिन्न तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी कारणों से अमान्य किए गए हैं। इस भर्ती के माध्यम से झारखंड की जेलों में 1733 कक्षपाल (वार्डर) पदों पर नियुक्ति की जानी है।   सबसे ज्यादा आवेदन अधूरे रहने के कारण रद्द   JSSC के अनुसार, बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं की।   41,526 अभ्यर्थियों ने सिर्फ रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन अंतिम आवेदन जमा नहीं किया। 14,403 अभ्यर्थियों ने आवेदन तो भरा, लेकिन परीक्षा शुल्क जमा नहीं किया। 2,378 अभ्यर्थियों ने शुल्क जमा किया, लेकिन फोटो और हस्ताक्षर अपलोड नहीं किए। 1,150 अभ्यर्थियों के एक से अधिक आवेदन पाए गए, जिनमें पहले जमा किए गए आवेदन रद्द कर दिए गए।   1733 कक्षपाल पदों पर होनी है नियुक्ति   झारखंड सरकार की अधियाचना के आधार पर JSSC ने कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। यह भर्ती जेल विभाग में खाली पड़े 1733 पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही है।   अभ्यर्थियों को आयोग की सलाह   आयोग ने अभ्यर्थियों से कहा है कि भविष्य में आवेदन करते समय सभी चरणों को ध्यानपूर्वक पूरा करें। रजिस्ट्रेशन के बाद आवेदन जमा करना, शुल्क भुगतान और जरूरी दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य है।   भर्ती प्रक्रिया आगे जारी रहेगी   आवेदन जांच पूरी होने के बाद अब योग्य अभ्यर्थियों की सूची के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रद्द किए गए आवेदनों के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।  

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