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Manchester City Crush Chelsea 3-0

Premier League: Manchester City का दबदबा, Chelsea को 3-0 से हराकर Arsenal की टेंशन बढ़ाई

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Manchester City players celebrate a goal against Chelsea during a Premier League match.
Manchester City Beats Chelsea 3-0

इंग्लिश प्रीमियर लीग के खिताबी मुकाबले में Manchester City ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Chelsea को 3-0 से करारी शिकस्त दी। इस जीत के साथ सिटी ने टाइटल रेस को और रोमांचक बना दिया है और लीडर Arsenal पर दबाव बढ़ा दिया है।

दूसरे हाफ में सिटी का तूफान

पहले हाफ में मुकाबला संतुलित नजर आया, लेकिन दूसरे हाफ में मैनचेस्टर सिटी ने पूरी तरह मैच पर कब्जा कर लिया।
निकोल ओ’रेली ने 51वें मिनट में पहला गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद रायन चेरकी की शानदार प्लेमेकिंग के दम पर मार्क गुएही ने 57वें मिनट में दूसरा गोल दागा।

68वें मिनट में Jérémy Doku ने तीसरा गोल कर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया।

टाइटल रेस में बढ़ा रोमांच

कोच Pep Guardiola की टीम अब आर्सेनल से सिर्फ 6 अंक पीछे है और उनके पास एक मैच का अतिरिक्त फायदा भी है। ऐसे में दोनों टीमों के बीच होने वाला मुकाबला इस सीजन के खिताब का फैसला कर सकता है।

लगातार तीन बड़ी जीत (आर्सेनल और लिवरपूल के खिलाफ कप मुकाबले सहित) ने सिटी की फॉर्म और आत्मविश्वास को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

Chelsea की मुश्किलें बढ़ीं

इस हार के साथ चेल्सी की चैंपियंस लीग में जगह बनाने की उम्मीदों को झटका लगा है। टीम पिछले 7 मैचों में सिर्फ एक जीत दर्ज कर पाई है और अब टॉप-5 से 4 अंक पीछे है।

Tottenham पर मंडराया रेलिगेशन का खतरा

दूसरी ओर, Tottenham Hotspur की स्थिति और खराब हो गई है। सुंदरलैंड के खिलाफ 1-0 की हार के बाद टीम रेलिगेशन जोन के और करीब पहुंच गई है।

नॉर्दी मुकिएले के गोल ने स्पर्स को सीजन की 16वीं हार थमा दी। अब टीम सेफ्टी जोन से 2 अंक पीछे है और सिर्फ 6 मैच बाकी हैं।

सीजन के अंतिम चरण में बढ़ा रोमांच

प्रीमियर लीग अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। एक तरफ मैनचेस्टर सिटी की वापसी ने खिताबी जंग को दिलचस्प बना दिया है, तो दूसरी ओर टॉटेनहम के सामने रेलिगेशन से बचने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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28 जुलाई को हो सकता है श्रीलंका टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान, चयन समिति की बैठक पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच अगले महीने से शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान 28 जुलाई को होने की संभावना है। बीसीसीआई की चयन समिति इसी दिन बैठक कर सकती है, जिसमें खिलाड़ियों के चयन के साथ-साथ टीम संयोजन और सपोर्ट स्टाफ से जुड़े अहम मुद्दों पर भी चर्चा होगी। क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है, क्योंकि कई युवा खिलाड़ियों के भविष्य और कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों की वापसी को लेकर भी फैसला लिया जा सकता है।    फिटनेस रिपोर्ट और हालिया प्रदर्शन पर होगा चयन   सूत्रों के मुताबिक, चयनकर्ता खिलाड़ियों के हालिया प्रदर्शन और फिटनेस रिपोर्ट को प्राथमिकता देंगे। ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर की फिटनेस पर विशेष नजर रहेगी, जबकि घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी मौका मिल सकता है। चयन समिति श्रीलंका की स्पिन-अनुकूल परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए टीम में अतिरिक्त स्पिन विकल्प शामिल करने पर भी विचार कर सकती है।    सपोर्ट स्टाफ पर भी हो सकता है बड़ा फैसला   रिपोर्ट के अनुसार, चयन बैठक केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगी। बीसीसीआई टीम के सपोर्ट स्टाफ के प्रदर्शन की भी समीक्षा करेगा। सहायक कोच रयान टेन डोशेट, बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक और अन्य सहयोगी स्टाफ के कामकाज पर चर्चा होगी। यदि बोर्ड को किसी बदलाव की जरूरत महसूस होती है, तो टीम घोषणा के साथ या उसके बाद इस संबंध में भी आधिकारिक फैसला लिया जा सकता है।    सीरीज पर रहेगी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की नजर   भारत के लिए यह टेस्ट सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में चयनकर्ता अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के बीच संतुलन बनाकर टीम चुनना चाहेंगे। टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद कप्तान, संभावित प्लेइंग इलेवन और नए चेहरों को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी।

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भारत-जिम्बाब्वे तीसरा टी20 आज, क्लीन स्वीप के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया

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अभिषेक शर्मा ने रचा इतिहास, भारतीय ओपनर के रूप में टी20 में बनाया सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन का रिकॉर्ड

हरारे, एजेंसियां। भारत के युवा ऑलराउंडर अभिषेक शर्मा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में गेंद से शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने अपने 4 ओवर के स्पेल में केवल 17 रन देकर 3 विकेट झटके और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय ओपनर द्वारा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उनके शानदार स्पेल की बदौलत जिम्बाब्वे की टीम 220 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 129 रन पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 90 रन से जीतकर सीरीज पर 2-0 से कब्जा जमा लिया।   बल्लेबाजी के बाद गेंद से भी दिखाया दम   अभिषेक शर्मा इस मुकाबले में बल्लेबाजी से बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने शानदार वापसी की। उन्होंने अपने स्पेल में तीन महत्वपूर्ण विकेट चटकाकर जिम्बाब्वे को बड़े लक्ष्य का पीछा करने से पहले ही बैकफुट पर धकेल दिया। उनकी कसी हुई गेंदबाजी के चलते मेजबान टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही और 129 रन पर सिमट गई।   ऑलराउंड प्रदर्शन से बढ़ा टीम का भरोसा   अभिषेक शर्मा का यह रिकॉर्ड उनके ऑलराउंडर के रूप में बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। भारतीय टीम प्रबंधन लंबे समय से उन्हें ऐसे खिलाड़ी के रूप में तैयार कर रहा है जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंद से भी मैच का रुख बदल सके। जिम्बाब्वे दौरे पर उनका प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है और अब तीसरे टी20 में क्लीन स्वीप के इरादे से उतरेगा।

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दक्षिण अफ्रीका के तैराक चाड ले क्लोस का 19वां पदक जीतने के बाद का ऐतिहासिक क्षण
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तैराक चाड ले क्लोस ने रचा इतिहास, बने पुरुष वर्ग के सबसे सफल एथलीट

ग्लासगो, एजेंसियां। दक्षिण अफ्रीका के स्टार तैराक चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुष वर्ग में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले एथलीट बनकर नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। ले क्लोस ने यह उपलब्धि पुरुषों की 4x100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले स्पर्धा में दक्षिण अफ्रीका को कांस्य पदक दिलाने के बाद हासिल की।   19वां कॉमनवेल्थ पदक जीतकर बनाया रिकॉर्ड   34 वर्षीय चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना 19वां पदक जीतते हुए पुरुष वर्ग में सबसे सफल एथलीट बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले वह 18 पदकों के साथ संयुक्त रूप से रिकॉर्ड पर थे। अब वह इस रिकॉर्ड को अकेले अपने नाम कर चुके हैं।   लंबे समय से बना रहे हैं दबदबा   चाड ले क्लोस पिछले एक दशक से कॉमनवेल्थ गेम्स में दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े सितारों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 2014, 2018 और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीते थे। तैराकी की बटरफ्लाई स्पर्धाओं में उनका दबदबा लंबे समय तक रहा है।   रिले मुकाबले में मिली ऐतिहासिक उपलब्धि   ग्लासगो 2026 में पुरुषों की 4x100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले में दक्षिण अफ्रीका की टीम ने कांस्य पदक जीता। इस पदक के साथ ही चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ इतिहास में अपना नाम सबसे सफल पुरुष एथलीटों की सूची में सबसे ऊपर दर्ज करा लिया।   ओलंपिक चैंपियन भी रह चुके हैं ले क्लोस   चाड ले क्लोस का करियर बेहद शानदार रहा है। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में 200 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा वह कई विश्व चैंपियनशिप और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुके हैं।   कॉमनवेल्थ इतिहास में दर्ज हुआ नाम   ले क्लोस की यह उपलब्धि उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के महानतम खिलाड़ियों की सूची में शामिल करती है। उनके लगातार प्रदर्शन और लंबे करियर ने उन्हें तैराकी जगत में एक अलग पहचान दिलाई है।   आगे भी जारी रखना चाहते हैं सफर   रिकॉर्ड बनाने के बाद भी चाड ले क्लोस का लक्ष्य खेल में बने रहना और दक्षिण अफ्रीका के लिए और पदक जीतना है। उनकी उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है।  

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