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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तैराक चाड ले क्लोस ने रचा इतिहास, बने पुरुष वर्ग के सबसे सफल एथलीट

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दक्षिण अफ्रीका के तैराक चाड ले क्लोस का 19वां पदक जीतने के बाद का ऐतिहासिक क्षण
Chad Le Clos Commonwealth Games 2026 Record Most Decorated Male Athlete

ग्लासगो, एजेंसियां। दक्षिण अफ्रीका के स्टार तैराक चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुष वर्ग में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले एथलीट बनकर नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। ले क्लोस ने यह उपलब्धि पुरुषों की 4x100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले स्पर्धा में दक्षिण अफ्रीका को कांस्य पदक दिलाने के बाद हासिल की।

 

19वां कॉमनवेल्थ पदक जीतकर बनाया रिकॉर्ड

 

34 वर्षीय चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना 19वां पदक जीतते हुए पुरुष वर्ग में सबसे सफल एथलीट बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले वह 18 पदकों के साथ संयुक्त रूप से रिकॉर्ड पर थे। अब वह इस रिकॉर्ड को अकेले अपने नाम कर चुके हैं।

 

लंबे समय से बना रहे हैं दबदबा

 

चाड ले क्लोस पिछले एक दशक से कॉमनवेल्थ गेम्स में दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े सितारों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 2014, 2018 और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीते थे। तैराकी की बटरफ्लाई स्पर्धाओं में उनका दबदबा लंबे समय तक रहा है।

 

रिले मुकाबले में मिली ऐतिहासिक उपलब्धि

 

ग्लासगो 2026 में पुरुषों की 4x100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले में दक्षिण अफ्रीका की टीम ने कांस्य पदक जीता। इस पदक के साथ ही चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ इतिहास में अपना नाम सबसे सफल पुरुष एथलीटों की सूची में सबसे ऊपर दर्ज करा लिया।

 

ओलंपिक चैंपियन भी रह चुके हैं ले क्लोस

 

चाड ले क्लोस का करियर बेहद शानदार रहा है। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में 200 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा वह कई विश्व चैंपियनशिप और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुके हैं।

 

कॉमनवेल्थ इतिहास में दर्ज हुआ नाम

 

ले क्लोस की यह उपलब्धि उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के महानतम खिलाड़ियों की सूची में शामिल करती है। उनके लगातार प्रदर्शन और लंबे करियर ने उन्हें तैराकी जगत में एक अलग पहचान दिलाई है।

 

आगे भी जारी रखना चाहते हैं सफर

 

रिकॉर्ड बनाने के बाद भी चाड ले क्लोस का लक्ष्य खेल में बने रहना और दक्षिण अफ्रीका के लिए और पदक जीतना है। उनकी उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जा रहा है। मैच में जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, जिसके बाद भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरेगी।   सीरीज पर कब्जा जमाने के इरादे से उतरी टीम इंडिया   पहला टी20 मुकाबला जीतकर 1-0 की बढ़त बना चुकी भारतीय टीम के पास आज सीरीज अपने नाम करने का सुनहरा मौका है। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम इंडिया जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी, जबकि मेजबान जिम्बाब्वे की नजर वापसी कर सीरीज 1-1 से बराबर करने पर है। IND Vटॉस के बाद सिकंदर रजा ने कहा कि शुरुआती ओवरों में पिच से गेंदबाजों को मदद मिलने की उम्मीद है, इसलिए पहले गेंदबाजी का फैसला लिया गया। वहीं श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है और बड़ा स्कोर खड़ा करने का प्रयास करेगी।   दोनों टीमों के लिए अहम मुकाबला   भारतीय बल्लेबाजों पर अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने की जिम्मेदारी होगी, जबकि जिम्बाब्वे के गेंदबाज शुरुआती विकेट लेकर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। यदि भारत यह मुकाबला जीतता है तो तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर लेगा, वहीं जिम्बाब्वे के लिए सीरीज में बने रहने के लिए जीत दर्ज करना बेहद जरूरी होगा। क्रिकेट प्रशंसकों की नजर अब इस रोमांचक मुकाबले पर टिकी है, जहां दोनों टीमें जीत के इरादे से मैदान में उतरी हैं।

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ग्लासगो (स्कॉटलैंड)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के युवा मुक्केबाज जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 55 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा के प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। उन्होंने शुक्रवार को मेजबान स्कॉटलैंड के एरॉन कलन को 5-0 से एकतरफा मुकाबले में हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई।   22 वर्षीय भारतीय मुक्केबाज पूरे मुकाबले में अपने प्रतिद्वंद्वी पर पूरी तरह हावी रहे। पहले राउंड में जदुमणि को सभी पांच जजों ने पूरे 10 अंक दिए। दूसरे राउंड में भी उन्होंने अपना दबदबा कायम रखा और अंततः सर्वसम्मत निर्णय से मुकाबला अपने नाम कर लिया।   अब रविवार शाम को प्री-क्वार्टर फाइनल में जदुमणि का मुकाबला पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रहमान से होगा। रहमान को शुरुआती दौर में बाई मिली थी, जिसके कारण वह सीधे अंतिम-16 में पहुंचे हैं। इस मुकाबले की विजेता टीम क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित करेगी।   पिछले वर्ष नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में 50 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले जदुमणि इस सीजन में 55 किलोग्राम वर्ग में खेल रहे हैं। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में रिंग में उतरने वाले वह पहले भारतीय मुक्केबाज भी बने।   भारत ने इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 14 सदस्यीय दल उतारा है, जिसमें सात पुरुष और सात महिला मुक्केबाज शामिल हैं। वहीं, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन सेमीफाइनल में बाई मिलने के कारण कम से कम कांस्य पदक पहले ही पक्का कर चुकी हैं।   शनिवार को भारत का अभियान आगे बढ़ेगा, जब पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच का सामना कनाडा के अल-अहमदीह केओमा से होगा। इसके अलावा बाउल्स और आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक में भी भारतीय खिलाड़ी पदक की उम्मीदों के साथ चुनौती पेश करेंगे।  

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