हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेले जाने वाले दूसरे टी20 मुकाबले में टीम इंडिया के कप्तान श्रेयस अय्यर के पास एक खास रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका है। अय्यर अगर इस मैच में टॉस जीतते हैं तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में लगातार सबसे ज्यादा टॉस जीतने वाले कप्तानों में नया रिकॉर्ड बना सकते हैं।
भारतीय टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर के पास जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में लगातार 9वां अंतरराष्ट्रीय टॉस जीतकर 88 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने का ऐतिहासिक मौका है। उन्होंने अपने शुरुआती 8 कप्तानी मैचों में टॉस जीतकर इंग्लैंड के दिग्गज वैली हैमंड के 88 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी।
श्रेयस अय्यर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में कप्तान के रूप में अपनी पहली जीत दर्ज की। भारत ने हरारे में खेले गए मुकाबले में जिम्बाब्वे को हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1 - 0 की बढ़त बना ली है।
दूसरे टी20 में भारतीय टीम की कोशिश होगी कि जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम कर ले। वहीं जिम्बाब्वे की टीम वापसी करते हुए मुकाबला बराबर करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ा हुआ है।
यह सीरीज श्रेयस अय्यर के लिए कप्तानी को मजबूत करने का बड़ा मौका है। बल्लेबाजी के साथ-साथ कप्तानी में भी उनका प्रदर्शन भारतीय टीम के भविष्य की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ग्लासगो, एजेंसियां। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। झंडू कुमार के ब्रॉन्ज पदक से खाता खोलने के बाद अब भारतीय खिलाड़ियों की नजर तैराकी, बॉक्सिंग और जिम्नास्टिक्स में बेहतर प्रदर्शन कर और पदक जीतने पर है। शनिवार को होने वाले मुकाबलों में कई भारतीय खिलाड़ी अपनी चुनौती पेश करेंगे। तैराकी में श्रीहरि नटराज पर रहेंगी निगाहें भारत के स्टार तैराक श्रीहरि नटराज तैराकी स्पर्धा में अपनी चुनौती पेश करेंगे। उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। भारतीय टीम को उम्मीद है कि तैराकी में मजबूत प्रदर्शन के साथ पदक की दौड़ में जगह बनाई जा सकती है। बॉक्सिंग में भारतीय मुक्केबाज दिखाएंगे दम कॉमनवेल्थ गेम्स के बॉक्सिंग मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाज रिंग में उतरेंगे। भारत को बॉक्सिंग में हमेशा मजबूत दावेदार माना जाता रहा है और इस बार भी खिलाड़ियों से पदक की उम्मीद है। जिम्नास्टिक्स में भी भारत की चुनौती भारतीय जिम्नास्टिक खिलाड़ी टीम और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। जिम्नास्टिक्स में कठिन मुकाबलों के बीच भारतीय खिलाड़ियों का लक्ष्य फाइनल दौर में जगह बनाना और पदक की उम्मीद बनाए रखना है। झंडू कुमार के पदक से बढ़ा आत्मविश्वास पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार द्वारा जीते गए ब्रॉन्ज पदक ने भारतीय दल का मनोबल बढ़ाया है। उनके पदक के बाद अब अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। भारत की नजर पदक तालिका में आगे बढ़ने पर भारतीय दल कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कई खेलों में हिस्सा ले रहा है। आने वाले दिनों में बॉक्सिंग, तैराकी, जिम्नास्टिक्स समेत अन्य स्पर्धाओं में अच्छे प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा।
ग्लासगो (स्कॉटलैंड)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के युवा मुक्केबाज जदुमणि सिंह मंडेंगबाम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 55 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा के प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। उन्होंने शुक्रवार को मेजबान स्कॉटलैंड के एरॉन कलन को 5-0 से एकतरफा मुकाबले में हराकर अंतिम-16 में जगह बनाई। 22 वर्षीय भारतीय मुक्केबाज पूरे मुकाबले में अपने प्रतिद्वंद्वी पर पूरी तरह हावी रहे। पहले राउंड में जदुमणि को सभी पांच जजों ने पूरे 10 अंक दिए। दूसरे राउंड में भी उन्होंने अपना दबदबा कायम रखा और अंततः सर्वसम्मत निर्णय से मुकाबला अपने नाम कर लिया। अब रविवार शाम को प्री-क्वार्टर फाइनल में जदुमणि का मुकाबला पाकिस्तान के मुक्केबाज सुमामा रहमान से होगा। रहमान को शुरुआती दौर में बाई मिली थी, जिसके कारण वह सीधे अंतिम-16 में पहुंचे हैं। इस मुकाबले की विजेता टीम क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित करेगी। पिछले वर्ष नोएडा में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में 50 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले जदुमणि इस सीजन में 55 किलोग्राम वर्ग में खेल रहे हैं। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में रिंग में उतरने वाले वह पहले भारतीय मुक्केबाज भी बने। भारत ने इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 14 सदस्यीय दल उतारा है, जिसमें सात पुरुष और सात महिला मुक्केबाज शामिल हैं। वहीं, ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन सेमीफाइनल में बाई मिलने के कारण कम से कम कांस्य पदक पहले ही पक्का कर चुकी हैं। शनिवार को भारत का अभियान आगे बढ़ेगा, जब पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच का सामना कनाडा के अल-अहमदीह केओमा से होगा। इसके अलावा बाउल्स और आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक में भी भारतीय खिलाड़ी पदक की उम्मीदों के साथ चुनौती पेश करेंगे।
Mayank Yadav Comeback: भारतीय टीम के युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव ने करीब 21 महीने बाद टीम इंडिया की जर्सी में शानदार वापसी करते हुए जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया। लगातार चोटों से जूझने के बाद मैदान पर लौटे मयंक ने न सिर्फ मैच की पहली ही गेंद पर विकेट चटकाया, बल्कि चार ओवर में सिर्फ 18 रन देकर दो विकेट हासिल किए और 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार भी अपने नाम किया। मैच के बाद उन्होंने अपने कठिन दौर और वापसी के सफर पर खुलकर बात की। चोटों से जूझते हुए की दमदार वापसी आईपीएल 2024 में 150 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी कर सुर्खियां बटोरने वाले मयंक यादव को उसी साल भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिला था। उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ तीन टी20 मुकाबले खेले, लेकिन इसके बाद लगातार चोटों ने उनके करियर की रफ्तार थाम दी। आईपीएल 2025 में वह केवल दो मैच खेल सके, जबकि 2026 सीजन में भी सिर्फ चार मुकाबलों तक सीमित रहे। लंबे रिहैब और फिटनेस संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें जिम्बाब्वे दौरे पर टीम इंडिया में वापसी का मौका मिला। '22-23 साल की उम्र में इतना कुछ देखना पड़ा' मैच के बाद मीडिया से बातचीत में मयंक यादव ने अपने संघर्ष को याद करते हुए कहा, "खुद को मोटिवेटेड रखना बहुत मुश्किल था। लगभग दो साल का यह गैप मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। मैं सिर्फ 22-23 साल का था और इतनी कम उम्र में मुझे बहुत कुछ देखना पड़ा। लेकिन बचपन से देश के लिए खेलने का सपना था। यही सोच मुझे लगातार प्रेरित करती रही कि एक दिन फिर भारत के लिए खेलूंगा और पहले जैसा प्रदर्शन करूंगा।" मयंक का यह बयान बताता है कि चोटों से लड़ाई सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद कठिन होती है। स्पीड नहीं, टीमवर्क पर रहता है फोकस जिम्बाब्वे दौरे पर मयंक यादव के साथ युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव और अशोक शर्मा भी टीम का हिस्सा हैं। तीनों अपनी तेज रफ्तार गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मयंक का कहना है कि उनके बीच गति की नहीं, बल्कि रणनीति की चर्चा होती है। उन्होंने कहा, "हम स्पीड के बारे में ज्यादा बात नहीं करते। हमारी बॉन्डिंग काफी अच्छी है। पहले ओवर के बाद मैंने जो मदद पिच से महसूस की, उसे अशोक और प्रिंस के साथ साझा किया। हमने चर्चा की कि बल्लेबाजों पर लगातार दबाव कैसे बनाया जाए।" पहले ही ओवर में दिलाई सफलता मयंक यादव ने मैच की पहली गेंद पर ही विकेट लेकर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने अपने चार ओवर के स्पेल में सिर्फ 18 रन खर्च किए और दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। जिम्बाब्वे की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन ही बना सकी। वेस्ली मधेवेरे ने सबसे अधिक 39 रन बनाए। भारत ने आसानी से दर्ज की जीत 126 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 14वें ओवर में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें चार चौके और चार छक्के शामिल रहे। ईशान किशन ने 35 रन जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने 28 रन बनाकर भारत की जीत सुनिश्चित की। संघर्ष के बाद मिली सफलता लगातार चोटों और लंबे इंतजार के बाद मयंक यादव की यह वापसी भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छी खबर है। उन्होंने साबित कर दिया कि मुश्किल दौर चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, अगर आत्मविश्वास और मेहनत बनी रहे तो वापसी हमेशा संभव होती है। आने वाले मुकाबलों में भी उनसे ऐसी ही तेज और प्रभावी गेंदबाजी की उम्मीद रहेगी।