IPL 2026 से पहले शुभमन गिल पर सबसे बड़ी नजरें टिकी हैं। बतौर बल्लेबाज उन्होंने गुजरात टाइटंस के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन अब असली परीक्षा उनकी कप्तानी की है।
2022 में हार्दिक पांड्या की अगुवाई में खिताब जीतने वाली टीम, अब गिल के नेतृत्व में दूसरी ट्रॉफी की तलाश में है। 2025 सीजन में टीम प्लेऑफ तक पहुंची, लेकिन निर्णायक मौकों पर चूक गई। ऐसे में 2026 गिल के लिए “मेक या ब्रेक” सीजन माना जा रहा है।
कप्तानी में गिल के सामने क्या चुनौती?
शुभमन गिल अब पहले से ज्यादा परिपक्व खिलाड़ी बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कप्तानी का अनुभव उन्हें मिला है, लेकिन IPL में उन्हें अभी खुद को एक सफल लीडर के रूप में स्थापित करना बाकी है।
इस सीजन में उनसे उम्मीद होगी कि वह न सिर्फ रन बनाएंगे, बल्कि टीम को मुश्किल परिस्थितियों में सही फैसलों से आगे भी ले जाएंगे।
गुजरात टाइटंस की ताकत
GT की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत टॉप ऑर्डर बैटिंग है:
गेंदबाजी में भी टीम काफी संतुलित दिखती है:
स्पिन विभाग में भी विविधता है, जिससे टीम अलग-अलग परिस्थितियों में रणनीति बदल सकती है।
टीम की कमजोरियां
अगर शुरुआती बल्लेबाज जल्दी आउट होते हैं, तो टीम दबाव में आ जाती है। यही कमजोरी पिछले सीजन में भी सामने आई थी।
नजर रखने वाले खिलाड़ी
क्या गिल दिला पाएंगे दूसरा खिताब?
IPL 2026 में गुजरात टाइटंस के पास संतुलित टीम है, लेकिन उनकी सफलता काफी हद तक शुभमन गिल की कप्तानी पर निर्भर करेगी। अगर गिल अपने नेतृत्व और बल्लेबाजी दोनों में संतुलन बना पाए, तो टीम खिताब की प्रबल दावेदार बन सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Indian Premier League 2026 का रोमांच अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है और आज का मुकाबला प्लेऑफ की तस्वीर बदल सकता है। शनिवार को Punjab Kings और Lucknow Super Giants के बीच सीजन का 68वां मैच खेला जाएगा। यह मुकाबला लखनऊ के इकाना स्टेडियम में होगा, जहां पंजाब के लिए जीत बेहद जरूरी मानी जा रही है। पंजाब के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति पंजाब किंग्स ने इस सीजन की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। टीम ने शुरुआती 7 मुकाबलों में से 6 मैच जीतकर पॉइंट्स टेबल में मजबूत पकड़ बना ली थी। लेकिन इसके बाद टीम लगातार 6 मुकाबले हार गई और अब प्लेऑफ की उम्मीदें मुश्किल में फंस गई हैं। आज अगर पंजाब हारता है तो उसकी प्लेऑफ की राह लगभग बंद हो सकती है। वहीं जीत मिलने पर टीम की उम्मीदें जिंदा रहेंगी, हालांकि उसे बाकी मैचों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा। दूसरी ओर Lucknow Super Giants पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है। ऐसे में लखनऊ बिना किसी दबाव के मैदान पर उतरेगी और पंजाब के लिए चुनौती और भी कठिन हो सकती है। हेड टू हेड में पंजाब का पलड़ा भारी आईपीएल इतिहास में दोनों टीमें अब तक 7 बार आमने-सामने आ चुकी हैं। इनमें पंजाब ने 4 मुकाबले जीते हैं, जबकि लखनऊ को 3 मैचों में जीत मिली है। एक मुकाबला टाई भी रहा है। इस सीजन की पहली भिड़ंत में पंजाब ने अपने घरेलू मैदान पर लखनऊ को हराया था। ऐसे में टीम एक बार फिर उसी प्रदर्शन को दोहराना चाहेगी। इकाना स्टेडियम की पिच रिपोर्ट लखनऊ के इकाना स्टेडियम की पिच बाकी मैदानों से अलग मानी जाती है। यहां बड़े स्कोर बनाना आसान नहीं होता और बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। स्पिन गेंदबाजों को पिच से अच्छी मदद मिलती है शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग मिल सकती है बड़े शॉट लगाना आसान नहीं रहता टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है मौसम का हाल लखनऊ में मौसम गर्म और सूखा रहने की संभावना है। दिनभर तेज धूप और लू का असर रहेगा। शाम को मैच शुरू होने के बाद भी उमस और गर्मी बनी रह सकती है। हालांकि अच्छी बात यह है कि बारिश की कोई संभावना नहीं है और मैच बिना रुकावट पूरा होने की उम्मीद है। संभावित प्लेइंग 12 Lucknow Super Giants मिचेल मार्श, जोश इंग्लिस, निकोलस पूरन, आयुष बडोनी, Rishabh Pant (कप्तान और विकेटकीपर), अब्दुल समद, शाहबाज अहमद, मोहसिन खान, मयंक यादव, आकाश सिंह, प्रिंस यादव, दिग्वेश सिंह राठी Punjab Kings प्रियांश आर्या, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कोनोली, Shreyas Iyer (कप्तान), शशांक सिंह, सूर्यांश शेडगे, अजमतुल्लाह ओमरजई, हरप्रीत बरार, जेवियर बार्टलेट, लॉकी फर्ग्यूसन, Arshdeep Singh, Yuzvendra Chahal
Indian Premier League 2026 में प्लेऑफ की जंग जितनी रोमांचक होती जा रही है, उतनी ही दिलचस्प ऑरेंज कैप और पर्पल कैप की रेस भी हो गई है। गुरुवार को Gujarat Titans ने Chennai Super Kings को 89 रन से हराकर सिर्फ प्लेऑफ की अपनी स्थिति मजबूत नहीं की, बल्कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों लीडरबोर्ड पर कब्जा भी जमा लिया। ऑरेंज कैप की रेस में गुजरात टाइटंस का दबदबा Shubman Gill और Sai Sudharsan ने CSK के खिलाफ शानदार ओपनिंग साझेदारी करते हुए ऑरेंज कैप की रेस को और रोमांचक बना दिया। मैच से पहले: साई सुदर्शन – 554 रन शुभमन गिल – 552 रन मैच के दौरान गिल ने 37 गेंदों में 64 रन बनाकर कुछ देर के लिए ऑरेंज कैप अपने नाम कर ली। लेकिन बाद में साई सुदर्शन ने 53 गेंदों में 84 रन की शानदार पारी खेलकर फिर नंबर-1 स्थान हासिल कर लिया। IPL 2026 ऑरेंज कैप टॉप-5 Sai Sudharsan – 638 रन Shubman Gill – 616 रन Vaibhav Suryavanshi – 579 रन Mitchell Marsh – 563 रन Heinrich Klaasen – 555 रन विराट कोहली और क्लासन पर रहेंगी नजरें शुक्रवार को Royal Challengers Bengaluru और Sunrisers Hyderabad के मुकाबले में ऑरेंज कैप की रेस फिर बदल सकती है। इन बल्लेबाजों पर खास नजर रहेगी: Virat Kohli – 542 रन Heinrich Klaasen – 555 रन Abhishek Sharma – 507 रन Ishan Kishan – 490 रन पर्पल कैप की रेस भी हुई दिलचस्प गेंदबाजी में Kagiso Rabada ने CSK के खिलाफ 3/32 का शानदार स्पेल डालकर पर्पल कैप की रेस में बड़ी छलांग लगाई। अब: Kagiso Rabada – 24 विकेट Bhuvneshwar Kumar – 24 विकेट दोनों बराबरी पर पहुंच गए हैं। हालांकि बेहतर इकॉनमी रेट होने की वजह से पर्पल कैप अभी भी Bhuvneshwar Kumar के पास है। गुजरात के गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन CSK के खिलाफ गुजरात के तीन गेंदबाजों ने तीन-तीन विकेट झटके: Mohammed Siraj – 3 विकेट Kagiso Rabada – 3 विकेट Rashid Khan – 3 विकेट इस प्रदर्शन के बाद: Rashid Khan – 19 विकेट के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गए Mohammed Siraj – 17 विकेट के साथ टॉप-7 में शामिल हो गए पर्पल कैप टॉप गेंदबाज Bhuvneshwar Kumar – 24 विकेट Kagiso Rabada – 24 विकेट Anshul Kamboj – 21 विकेट Rashid Khan – 19 विकेट Jofra Archer / Kartik Tyagi – 18 विकेट प्लेऑफ से पहले और रोमांचक होगी रेस अब लीग स्टेज के आखिरी मुकाबलों में: ऑरेंज कैप की रेस में बल्लेबाजों के बीच कांटे की टक्कर होगी पर्पल कैप के लिए गेंदबाजों की जंग और तेज होगी हर मैच के साथ लीडरबोर्ड बदलने की संभावना बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। CSK का IPL 2026 अभियान गुजरात टाइटंस के खिलाफ करारी हार के साथ लगभग खत्म हो गया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में चेन्नई को 89 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम को एक और बड़ा झटका लगा, जब BCCI ने कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और पूरी टीम पर भारी जुर्माना लगा दिया। धीमी ओवर गति पर लगा जुर्माना BCCI ने बताया कि चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात के खिलाफ मैच में तय समय के भीतर ओवर पूरे नहीं किए। यह इस सीजन दूसरी बार था जब टीम स्लो ओवर रेट की दोषी पाई गई। IPL आचार संहिता के अनुच्छेद 2.22 के तहत कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ पर 24 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सिर्फ कप्तान ही नहीं, बल्कि प्लेइंग इलेवन और इम्पैक्ट प्लेयर सहित बाकी खिलाड़ियों पर भी छह लाख रुपये या मैच फीस का 25 प्रतिशत, जो भी कम हो, का जुर्माना लगाया गया है। गुजरात ने हर विभाग में किया दबदबा मैच में Gujarat Titans ने शानदार प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी में Sai Sudharsan ने 84 रन, Shubman Gill ने 64 रन और Jos Buttler ने नाबाद 57 रन बनाए। गुजरात ने 20 ओवर में 229 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में चेन्नई की पूरी टीम 13.4 ओवर में 140 रन पर ऑलआउट हो गई। गेंदबाजी में Mohammed Siraj, Kagiso Rabada और Rashid Khan ने तीन-तीन विकेट लेकर CSK की बल्लेबाजी ध्वस्त कर दी। CSK की सबसे बड़ी हारों में शामिल यह हार IPL इतिहास में चेन्नई सुपर किंग्स की सबसे बड़ी हारों में से एक बन गई। इससे पहले 2013 में Mumbai Indians ने CSK को 60 रन से हराया था। अब प्लेऑफ में पहुंचने की चेन्नई की उम्मीदें भी लगभग खत्म हो चुकी हैं।