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Neeraj Chopra Medal List and Achievements

Neeraj Chopra Medals: Asian Games से Olympics तक, नीरज चोपड़ा ने अब तक जीते कितने Gold और Silver मेडल?

surbhi अगस्त 1, 2026 0
Neeraj Chopra celebrating his international medals across Olympics, World Championships, Asian Games and Commonwealth Games
Neeraj Chopra International Medals

Neeraj Chopra: भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े सितारों में शामिल नीरज चोपड़ा ने पिछले एक दशक में जेवलिन थ्रो की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। जूनियर स्तर से लेकर ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स तक नीरज ने लगभग हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है।

हाल ही में ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी नीरज ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 85.83 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उनके अंतरराष्ट्रीय पदकों की सूची में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई।

13 बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में पदक

उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, नीरज चोपड़ा अब तक कुल 13 बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स में पदक जीत चुके हैं। इन प्रतियोगिताओं में दो ओलंपिक, दो विश्व चैंपियनशिप, एक डायमंड लीग फाइनल, दो कॉमनवेल्थ गेम्स, दो एशियन गेम्स, एक एशियन चैंपियनशिप, एक साउथ एशियन गेम्स, एक अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप और एक अंडर-20 एशियन चैंपियनशिप शामिल हैं।

इन उपलब्धियों के आधार पर नीरज ने 9 गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल अपने नाम किए हैं, जबकि डायमंड लीग फाइनल में भी उन्होंने पहला स्थान हासिल किया है। यही निरंतरता उन्हें भारत के सबसे सफल मौजूदा एथलीटों में शामिल करती है।

2016 में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर

नीरज चोपड़ा के बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पदक जीतने का सिलसिला साल 2016 से शुरू हुआ। इसी साल उन्होंने अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में 86.48 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीता।

इसके बाद 2016 साउथ एशियन गेम्स में उन्होंने 82.23 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। 2017 एशियन चैंपियनशिप में 85.23 मीटर के प्रदर्शन के साथ उन्होंने एक और गोल्ड अपने नाम किया।

हालांकि उनके करियर में सबसे बड़ा मोड़ टोक्यो ओलंपिक 2020 में आया, जहां नीरज ने 87.58 मीटर का थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

ओलंपिक में गोल्ड और सिल्वर

ओलंपिक जैसे सबसे बड़े खेल मंच पर नीरज की उपलब्धियां भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक रही हैं। उनके नाम 1 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल है।

टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतने के बाद नीरज ने ओलंपिक स्तर पर भारत की उम्मीदों को और मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने सिल्वर मेडल के साथ अपनी पदक सूची को और समृद्ध किया।

विश्व चैंपियनशिप में भी शानदार रिकॉर्ड

विश्व चैंपियनशिप में भी नीरज चोपड़ा ने भारत को बड़ी सफलता दिलाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने इस प्रतियोगिता में 1 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीता है।

विश्व स्तर की इस प्रतियोगिता में लगातार पदक जीतना उनके शानदार प्रदर्शन और लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहने की क्षमता को दर्शाता है।

Asian Games में दो गोल्ड

एशियन गेम्स में नीरज का रिकॉर्ड और भी शानदार है। उन्होंने इस प्रतियोगिता में 2 गोल्ड मेडल जीते हैं।

एशिया के सबसे बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में नीरज का दबदबा यह बताता है कि वह सिर्फ वैश्विक स्तर पर ही नहीं, बल्कि महाद्वीपीय स्तर पर भी लंबे समय से अपनी श्रेष्ठता कायम रखने में सफल रहे हैं।

Commonwealth Games में भी गोल्ड और सिल्वर

कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा के नाम 1 गोल्ड और 1 सिल्वर है।

हालांकि, 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में उनसे गोल्ड की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन इस बार उन्हें सिल्वर से संतोष करना पड़ा। ग्लासगो में नीरज ने 85.83 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो किया।

श्रीलंका के रुमेश थारंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। वहीं भारत के यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

नीरज चोपड़ा के अंतरराष्ट्रीय मेडल

उपलब्ध कराई गई सामग्री के अनुसार नीरज चोपड़ा का पदक रिकॉर्ड इस प्रकार है:

  • ओलंपिक: 1 गोल्ड, 1 सिल्वर
  • विश्व चैंपियनशिप: 1 गोल्ड, 1 सिल्वर
  • कॉमनवेल्थ गेम्स: 1 गोल्ड, 1 सिल्वर
  • एशियन गेम्स: 2 गोल्ड
  • एशियन चैंपियनशिप: 1 गोल्ड
  • साउथ एशियन गेम्स: 1 गोल्ड
  • अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप: 1 गोल्ड
  • अंडर-20 एशियन चैंपियनशिप: 1 सिल्वर

नीरज की उपलब्धियां क्यों हैं खास?

नीरज चोपड़ा की खासियत सिर्फ पदकों की संख्या नहीं है, बल्कि अलग-अलग स्तर की प्रतियोगिताओं में लंबे समय तक शीर्ष प्रदर्शन करना भी है। जूनियर स्तर पर विश्व चैंपियन बनने से लेकर ओलंपिक चैंपियन और विश्व चैंपियन बनने तक उनका सफर भारतीय एथलेटिक्स के लिए प्रेरणादायक रहा है।

2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल के बावजूद नीरज ने एक बार फिर यह दिखाया कि बड़े मंच पर वह लगातार पदक जीतने की क्षमता रखते हैं। 85.83 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो उनके मौजूदा स्तर को भी दर्शाता है।

भारत के लिए नीरज की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के वैश्विक मंच पर मजबूत होने की कहानी भी है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी उनकी नजरें अपने पदकों की संख्या बढ़ाने और भारत के लिए नए रिकॉर्ड बनाने पर होंगी।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला, खेलों को बढ़ावा देने के लिए ₹36,441 करोड़ की विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना को मंजूरी

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने देश में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक करीब ₹36,441 करोड़ के बजट प्रावधान को मंजूरी दी गई है। सरकार का लक्ष्य देश में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए मजबूत ढांचा तैयार करना है।   खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण और समर्थन   विस्तारित खेलो इंडिया योजना के तहत देशभर में उभरते खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और आधुनिक खेल सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा। योजना का फोकस जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर रहेगा।   खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर   सरकार इस योजना के माध्यम से खेल मैदानों, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य खेल सुविधाओं के विकास पर ध्यान देगी। ग्रामीण और छोटे शहरों के खिलाड़ियों को भी बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए खेल ढांचे को मजबूत किया जाएगा।   ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी को मिलेगा बढ़ावा   खेलो इंडिया योजना का विस्तार भारत के खिलाड़ियों को ओलंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके तहत प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विशेषज्ञ कोचिंग और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की सुविधा दी जाएगी।   युवाओं में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल   केंद्र सरकार का कहना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। विस्तारित खेलो इंडिया योजना से देश में खेल संस्कृति को और मजबूत करने तथा नए खिलाड़ियों को आगे आने का अवसर मिलेगा।   भारत को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में कदम   विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े बजट के साथ खेलो इंडिया योजना का विस्तार भारत के खेल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना और भारत को वैश्विक खेल शक्ति के रूप में स्थापित करना है।

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Hockey Jersey Controversy: केसरिया जर्सी पर उठे सवालों से नाराज कप्तान हरमनप्रीत सिंह, बोले- इसे विवाद का नाम क्यों दिया जा रहा?

भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह तक पहुंच गया है। जर्सी के रंग को लेकर कुछ पूर्व खिलाड़ियों और हॉकी से जुड़े लोगों की आपत्तियों के बीच कप्तान ने साफ कहा है कि टीम का पूरा ध्यान आगामी हॉकी विश्व कप पर होना चाहिए। उन्होंने जर्सी के रंग को लेकर उठ रहे सवालों को अनावश्यक विवाद बताते हुए फैंस से टीम का समर्थन करने की अपील की है। नई जर्सी के रंग को लेकर क्यों मचा विवाद? भारतीय हॉकी टीम लंबे समय से नीले रंग की जर्सी में मैदान पर उतरती रही है। लेकिन आगामी विश्व कप से पहले टीम के लिए नई जर्सी लॉन्च की गई है, जिसका प्रमुख रंग केसरिया है। जर्सी के रंग में बदलाव के बाद सोशल मीडिया और हॉकी जगत में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने भी जर्सी के रंग को लेकर सवाल उठाए। इसी बीच भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। हरमनप्रीत सिंह ने कहा- इसे कंट्रोवर्सी क्यों कहा जा रहा? हरमनप्रीत सिंह ने नई जर्सी को लेकर हो रही चर्चा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जर्सी बदलना कोई पहली बार होने वाली बात नहीं है। उनके मुताबिक, टीम के खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ के साथ चर्चा के बाद ही जर्सी को लेकर फैसला किया गया है। कप्तान ने संकेत दिया कि जब टीम के भीतर इस बदलाव को लेकर बातचीत और सहमति हुई है, तो इसे विवाद का रूप देना उचित नहीं है। उनका जोर इस बात पर रहा कि जर्सी का रंग चाहे जो हो, मैदान पर टीम का लक्ष्य भारत का प्रतिनिधित्व करना और अच्छा प्रदर्शन करना है। 'ब्लू हो या पीला, हम भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं' हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि टीम पहले भी अलग-अलग रंगों की जर्सी में खेल चुकी है। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात जर्सी का रंग नहीं, बल्कि भारत के लिए मैदान पर प्रदर्शन करना है। कप्तान ने इस बात पर भी जोर दिया कि टीम विश्व कप खेलने जा रही है और ऐसे समय में खिलाड़ियों को विवादों में उलझाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि फैंस का समर्थन खिलाड़ियों को सकारात्मक ऊर्जा देगा। फैंस से की टीम का समर्थन करने की अपील हरमनप्रीत सिंह ने भारतीय हॉकी फैंस से अपील की कि वे टीम को सकारात्मक संदेश दें और विश्व कप के लिए रवाना होने से पहले खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि टीम टूर्नामेंट में जीतने के इरादे से जा रही है। परिणाम खिलाड़ियों के हाथ में नहीं होता, लेकिन मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और पूरी मेहनत करना उनके नियंत्रण में है। कप्तान के मुताबिक, टीम को भरोसा है कि भारत के करोड़ों हॉकी प्रशंसकों का समर्थन उनके साथ रहेगा। विश्व कप से पहले टीम का फोकस प्रदर्शन पर नई जर्सी को लेकर चल रही बहस के बीच हरमनप्रीत सिंह का संदेश स्पष्ट है कि भारतीय टीम का ध्यान अब विश्व कप में अपने प्रदर्शन पर होना चाहिए। खिलाड़ियों के लिए टूर्नामेंट से पहले सकारात्मक माहौल और देशवासियों का समर्थन महत्वपूर्ण है। जर्सी का रंग आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बना रहता है या नहीं, यह अलग बात है, लेकिन भारतीय टीम के लिए असली चुनौती विश्व कप के मैदान पर अपने प्रदर्शन से जवाब देना होगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह भी यही चाहते हैं कि विवाद से ज्यादा चर्चा टीम के खेल और उसके प्रदर्शन की हो।  

surbhi अगस्त 1, 2026 0
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भारत के सितंबर दौरे पर बांग्लादेश ने बढ़ाई सक्रियता, BCB ने सरकार से मांगी मदद

ढाका, एजेंसियां। भारत के सितंबर 2026 में प्रस्तावित बांग्लादेश दौरे को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। BCB अध्यक्ष तमीम इकबाल ने बांग्लादेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर भारत के दौरे को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्तर पर बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया है। दोनों देशों के बीच छह मैचों की सफेद गेंद वाली श्रृंखला प्रस्तावित है, जिसमें तीन वनडे और तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले शामिल हैं।   BCB ने सरकार से भारत के साथ बातचीत की अपील की   तमीम इकबाल ने गुरुवार को बांग्लादेश सरकार के अधिकारियों से मुलाकात की और उनसे भारत के संबंधित पक्षों के साथ सरकारी स्तर पर संवाद शुरू करने का आग्रह किया। BCB का मानना है कि सरकार की पहल से दौरे को लेकर बनी अनिश्चितताओं को दूर करने और दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों को सामान्य बनाने में मदद मिल सकती है।   सितंबर में होनी है छह मैचों की श्रृंखला   भारत और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित दौरे में तीन वनडे और तीन टी20 मुकाबले खेले जाने हैं। यह श्रृंखला पहले अगस्त 2025 में होनी थी, लेकिन दोनों क्रिकेट बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम और अन्य व्यस्तताओं को देखते हुए इसे सितंबर 2026 तक स्थगित करने पर सहमति जताई थी। BCCI ने भी उस समय दौरे को सितंबर 2026 के लिए पुनर्निर्धारित किए जाने की पुष्टि की थी।   दौरे को लेकर अभी सरकारी मंजूरी अहम   दोनों क्रिकेट बोर्ड सितंबर की संभावित समय-सीमा को लेकर तैयारी कर रहे हैं, लेकिन दौरे को अंतिम रूप देने में दोनों देशों की सरकारी मंजूरी महत्वपूर्ण होगी। हालिया रिपोर्टों के अनुसार BCB भारत के दौरे को लेकर आशावादी है और सरकार की मदद से आवश्यक संवाद को आगे बढ़ाना चाहता है।   भारत-बांग्लादेश क्रिकेट संबंधों पर रहेगी नजर   भारत का बांग्लादेश दौरा केवल क्रिकेट के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच खेल कूटनीति और संबंधों को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। बांग्लादेश के खेल राज्य मंत्री अमिनुल हक ने भी भारत की मेजबानी को लेकर उम्मीद जताई थी और कहा था कि सरकार खेल कूटनीति को महत्व दे रही है।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
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