अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो जुलाई का महीना आपके लिए शानदार साबित हो सकता है। जून में कई बड़े स्मार्टफोन लॉन्च हुए थे, लेकिन जुलाई में बजट, मिड-रेंज, प्रीमियम और फोल्डेबल सेगमेंट में कई नए डिवाइस बाजार में दस्तक देने वाले हैं।
इस महीने OPPO, Nothing, Samsung, iQOO, Motorola और OnePlus जैसी कंपनियां अपने नए स्मार्टफोन्स पेश करेंगी। कहीं बड़ी बैटरी मिलेगी तो कहीं फ्लैगशिप कैमरा, लेटेस्ट प्रोसेसर और AI फीचर्स का शानदार कॉम्बिनेशन देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं जुलाई में लॉन्च होने वाले प्रमुख स्मार्टफोन्स के बारे में।
OPPO 2 जुलाई को भारत में अपनी नई Reno 16 Series लॉन्च करेगी। इस सीरीज में Reno 16 और Reno 16c शामिल होंगे।
Reno 16 में 6.32 इंच का FHD+ AMOLED 120Hz डिस्प्ले, MediaTek Dimensity 8550 प्रोसेसर और 50MP का ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है। वहीं सेल्फी के लिए 50MP फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है।
दोनों स्मार्टफोन में नया AI Snap Key मिलेगा, जिससे यूजर्स AI फीचर्स को तुरंत एक्सेस कर सकेंगे। इसके अलावा IP66, IP68, IP69 और IP69K रेटिंग, एयरोस्पेस-ग्रेड एल्यूमिनियम फ्रेम, Splash Touch और Glove Touch जैसे फीचर्स भी दिए जाएंगे।
Reno 16c में 6.57 इंच की AMOLED डिस्प्ले मिलने की संभावना है। लॉन्च इवेंट के दौरान कंपनी OPPO Bubble नाम का नया मैग्नेटिक एक्सेसरी भी पेश करेगी, जो फोन के पीछे लगकर रियर कैमरे का लाइव प्रीव्यू दिखाएगा और बेहतर सेल्फी लेने में मदद करेगा।
Nothing 7 जुलाई को अपना नया Phone (4b) लॉन्च करने जा रही है। यह कंपनी का एंट्री-लेवल स्मार्टफोन होगा।
लीक्स के अनुसार इसमें Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर, 8GB RAM, 6.77 इंच AMOLED डिस्प्ले, 50MP डुअल कैमरा और 5400mAh की बैटरी मिलेगी, जो 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी।
Nothing का सिग्नेचर ट्रांसपेरेंट डिजाइन और Glyph Bar भी इस फोन की खास पहचान होगा।
OnePlus का नया N6 30 जून को लॉन्च हो चुका है, जबकि इसकी बिक्री 4 जुलाई से शुरू होगी।
करीब 25 हजार रुपये के बजट में आने वाला यह स्मार्टफोन बड़ी बैटरी चाहने वाले ग्राहकों के लिए आकर्षक विकल्प हो सकता है।
मुख्य फीचर्स:
Samsung 22 जुलाई को अपना Galaxy Unpacked इवेंट आयोजित कर सकता है। इस दौरान कंपनी अपनी नई फोल्डेबल सीरीज लॉन्च करेगी।
संभावित मॉडल्स:
Galaxy Z Fold 8 में 4800mAh बैटरी और डुअल रियर कैमरा मिलने की उम्मीद है।
वहीं Ultra मॉडल में 200MP प्राइमरी कैमरा, 5000mAh बैटरी, टेलीफोटो कैमरा और Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया जा सकता है।
Galaxy Z Flip 8 में 6.9 इंच OLED इनर डिस्प्ले, 4.1 इंच कवर स्क्रीन, 4300mAh बैटरी और 50MP डुअल कैमरा मिलने की संभावना है।
iQOO भी जुलाई के अंत तक भारत में अपना नया Z11 5G लॉन्च कर सकता है।
लीक रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें मिल सकते हैं:
अगर ये स्पेसिफिकेशन सही साबित होते हैं, तो यह अपने सेगमेंट में सबसे बड़ी बैटरी वाले स्मार्टफोन्स में शामिल हो सकता है।
Motorola भी जुलाई में अपना नया फ्लिप फोल्डेबल Razr 70 Ultra लॉन्च कर सकता है।
संभावित फीचर्स:
यह स्मार्टफोन उन ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है जो प्रीमियम फोल्डेबल डिवाइस की तलाश में हैं।
जुलाई का महीना स्मार्टफोन खरीदारों के लिए बेहद खास रहने वाला है। बजट से लेकर फ्लैगशिप और फोल्डेबल तक लगभग हर कैटेगरी में नए विकल्प उपलब्ध होंगे। यदि आप नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन लॉन्च का इंतजार करना फायदे का सौदा साबित हो सकता है, क्योंकि कंपनियां नई तकनीक, बेहतर कैमरा, बड़ी बैटरी और AI फीचर्स के साथ ग्राहकों को आकर्षित करने की तैयारी में हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea (Vi) ने बिना किसी बड़े ऐलान के अपना नया सालभर वाला प्रीपेड प्लान लॉन्च कर दिया है। इस प्लान की कीमत ₹4,600 रखी गई है, जो मौजूदा समय में Jio और Airtel के कई वार्षिक प्रीपेड प्लानों से महंगा माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि इस प्लान में अनलिमिटेड डेटा मिलता है, लेकिन इसकी शर्तें जानना भी जरूरी है। यह प्लान फिलहाल Vi की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है। ₹4,600 वाले प्लान में क्या मिलेगा? Vi के इस नए एनुअल प्रीपेड प्लान की वैधता 365 दिन है। इसमें ग्राहकों को पूरे साल के लिए कई बेसिक सुविधाएं मिलती हैं। प्लान के प्रमुख फायदे: 365 दिनों की वैधता अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग प्रतिदिन 100 मुफ्त SMS अनलिमिटेड डेटा (शर्तों के साथ) हालांकि, इस प्लान में किसी भी OTT प्लेटफॉर्म जैसे Netflix, Amazon Prime Video, JioHotstar या अन्य स्ट्रीमिंग सर्विस का मुफ्त सब्सक्रिप्शन शामिल नहीं किया गया है। क्या सच में मिलेगा अनलिमिटेड डेटा? Vi इस प्लान को अनलिमिटेड डेटा प्लान के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन वास्तव में इसमें फेयर यूसेज पॉलिसी (FUP) लागू होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्राहकों को हर 28 दिनों के लिए 300GB डेटा मिलेगा। यानी डेटा पूरी तरह बिना सीमा वाला नहीं है। 4G और 5G दोनों नेटवर्क पर यही डेटा सीमा लागू होगी। इसका मतलब है कि 5G इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को भी अलग से अनलिमिटेड हाई-स्पीड डेटा नहीं मिलेगा। एक दिन का खर्च कितना पड़ेगा? अगर पूरे साल की कीमत को 365 दिनों में बांटा जाए, तो इस प्लान की लागत करीब ₹12.60 प्रतिदिन बैठती है। जो ग्राहक लंबे समय तक बार-बार रिचार्ज नहीं कराना चाहते, उनके लिए यह एक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसकी कीमत प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुकाबले अधिक है। 5G अभी भी सीमित शहरों तक Vi ने भले ही यह प्रीमियम प्लान लॉन्च कर दिया हो, लेकिन कंपनी की 5G सेवा अभी पूरे देश में उपलब्ध नहीं है। फिलहाल Vi की 5G सर्विस चुनिंदा शहरों और क्षेत्रों में ही उपलब्ध है, जिनमें शामिल हैं— दिल्ली मुंबई कोलकाता गुजरात के कुछ हिस्से कर्नाटक के कुछ इलाके कंपनी धीरे-धीरे अपने 5G नेटवर्क का विस्तार कर रही है। 5G सेवा का लाभ लेने के लिए ग्राहकों के पास 5G स्मार्टफोन होना चाहिए और वे 5G कवरेज वाले क्षेत्र में होने चाहिए। अच्छी बात यह है कि इसके लिए नया SIM कार्ड लेने की जरूरत नहीं पड़ती। Jio और Airtel से कितना अलग है यह प्लान? Vi का यह प्लान कीमत के मामले में Jio और Airtel के कई वार्षिक प्लानों से महंगा है। हालांकि, इसमें OTT सब्सक्रिप्शन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं शामिल नहीं हैं। ऐसे में यह प्लान उन ग्राहकों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है जो पूरे साल की वैधता और अधिक डेटा चाहते हैं, लेकिन जिन यूजर्स के लिए OTT बेनिफिट और व्यापक 5G कवरेज महत्वपूर्ण है, वे अन्य टेलीकॉम कंपनियों के विकल्पों की भी तुलना कर सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Google ने अपने बहुप्रतीक्षित AI मॉडल Gemini 3.5 Pro की लॉन्चिंग को फिलहाल टाल दिया है। पहले कंपनी इसे जून 2026 में लॉन्च करने की तैयारी में थी, लेकिन अब इसे जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google मॉडल को और बेहतर बनाने तथा शुरुआती यूजर्स से मिले फीडबैक के आधार पर अंतिम बदलाव करने में जुटा हुआ है। क्यों टली लॉन्चिंग? रिपोर्ट के अनुसार, Google Gemini 3.5 Pro की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और AI एजेंट क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त समय ले रहा है। कंपनी चाहती है कि मॉडल लॉन्च के समय अधिक स्थिर और बेहतर प्रदर्शन करे। क्या होगा नया? Gemini 3.5 Pro को लंबे और जटिल कार्यों को बेहतर तरीके से संभालने, कोडिंग, रिसर्च और AI एजेंट आधारित टास्क में पहले से अधिक सक्षम बनाने पर काम किया जा रहा है। AI सेक्टर की बढ़ी प्रतिस्पर्धा Gemini 3.5 Pro की लॉन्चिंग में देरी ऐसे समय हुई है जब AI इंडस्ट्री में Google, OpenAI और Anthropic के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। ऐसे में Google किसी भी जल्दबाजी से बचना चाहता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आज के समय में साइबर फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कई बार लोगों के नाम पर उनकी जानकारी के बिना सिम कार्ड जारी कर दिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल गलत गतिविधियों में भी हो सकता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आपके आधार और पहचान पत्र पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। सरकार ने इसके लिए संचार साथी (Sanchar Saathi) नाम की एक पोर्टल की सुविधा शुरू की है, जहां पर आप घर बैठे कुछ ही मिनटों में अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल नंबरों की जानकारी देख सकते हैं। क्यों जरूरी है अपने नाम पर जारी SIM की जांच करना? यदि आपके नाम पर कोई ऐसा मोबाइल नंबर सक्रिय है जिसका आप उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो उसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। ऐसे मामलों में साइबर अपराध, फर्जी बैंक खाते खोलने या ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसलिए समय-समय पर अपने नाम पर जारी सिम कार्ड की जांच करना जरूरी है। घर बैठे ऐसे करें अपने नाम पर जारी SIM की जांच Step 1 अपने मोबाइल या लैपटॉप में संचार साथी (Sanchar Saathi) की आधिकारिक वेबसाइट खोलें। Step 2 होम पेज पर "Know Your Mobile Connections (TAF-COP)" विकल्प पर क्लिक करें। Step 3 अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। Step 4 मोबाइल पर प्राप्त OTP दर्ज करके सत्यापन करें। Step 5 सत्यापन पूरा होते ही आपके नाम पर जारी सभी सक्रिय मोबाइल नंबरों की सूची स्क्रीन पर दिखाई देगी। फर्जी या अनजान SIM को कैसे बंद कराएं? यदि सूची में कोई ऐसा मोबाइल नंबर दिखाई देता है जिसे आप नहीं पहचानते या इस्तेमाल नहीं करते, तो— उस नंबर को चुनें। "Not My Number" या उपलब्ध शिकायत विकल्प पर क्लिक करें। शिकायत दर्ज करने के बाद संबंधित दूरसंचार कंपनी और विभाग जांच करेंगे। जांच सही पाए जाने पर उस नंबर को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आपके नाम पर कितने SIM जारी हो सकते हैं? भारत में एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं। हालांकि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह सीमा अलग हो सकती है। यदि आपके नाम पर इससे अधिक कनेक्शन पाए जाते हैं, तो संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है। कब तुरंत जांच करनी चाहिए? नया मोबाइल नंबर लेने के बाद। मोबाइल खो जाने पर। आधार या अन्य दस्तावेज़ खो जाने पर। साइबर फ्रॉड का संदेह होने पर। समय-समय पर सुरक्षा के लिए। साइबर फ्रॉड से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय अपना आधार, पैन और पहचान पत्र किसी अनजान व्यक्ति को न दें। किसी भी खाली फॉर्म या फोटोकॉपी पर बिना कारण हस्ताक्षर न करें। OTP और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। केवल अधिकृत मोबाइल विक्रेता से ही नया सिम खरीदें। समय-समय पर अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की जांच करते रहें। SIM से जुड़ी शिकायत कहां करें? यदि आपको किसी मोबाइल नंबर, फर्जी सिम या साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायत करनी है, तो आप संचार साथी पोर्टल या संबंधित दूरसंचार कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।