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iPhone Fold with 3D Hinge Leak

Apple iPhone Fold: 3D प्रिंटेड हिंज से आएगा ‘मिनिमल क्रीज़’ अनुभव, 2026 में लॉन्च की तैयारी

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Apple iPhone Fold concept showing foldable display with minimal crease and advanced hinge design
Apple iPhone Fold 3D Hinge Design

टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि Apple अब फोल्डेबल स्मार्टफोन मार्केट में एंट्री की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का पहला फोल्डेबल डिवाइस-iPhone Fold-एक खास 3D प्रिंटेड हिंज टेक्नोलॉजी के साथ आ सकता है, जो स्क्रीन पर दिखने वाली क्रीज़ को काफी हद तक कम कर देगा।

3D प्रिंटेड हिंज: क्या है खास?

लीक्स के अनुसार, Apple अपने फोल्डेबल iPhone में 3D प्रिंटेड मटेरियल से बना हिंज इस्तेमाल कर सकता है।

  • इससे डिस्प्ले पर बनने वाली क्रीज़ (fold line) कम दिखेगी
  • फोन को ज्यादा स्मूद फोल्डिंग अनुभव मिलेगा
  • डिवाइस की मजबूती और टिकाऊपन भी बढ़ेगा

Apple पहले से ही 3D प्रिंटिंग का उपयोग Apple Watch के केस और iPhone Air के USB Type-C पोर्ट में कर चुका है, जिससे कंपनी की इस टेक्नोलॉजी में पकड़ साफ नजर आती है।

Samsung Fold सीरीज को मिलेगी टक्कर

फोल्डेबल मार्केट में फिलहाल Samsung Galaxy Z Fold series का दबदबा है। ऐसे में Apple का यह कदम सीधे तौर पर Samsung को चुनौती देगा।

एडवांस डिस्प्ले टेक्नोलॉजी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone Fold में ड्यूल-लेयर ग्लास डिजाइन दिया जा सकता है-

  • UTG (Ultra Thin Glass) + UFG (Ultra Flexible Glass)
  • डिस्प्ले को दो पतली ग्लास लेयर के बीच रखा जाएगा
  • इससे स्क्रीन पर दबाव कम होगा और क्रीज़ घटेगी

Samsung Display से बड़े ऑर्डर

खबर है कि Apple करीब 20 मिलियन फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल Samsung Display से ऑर्डर कर सकता है। यह इशारा करता है कि कंपनी इस सेगमेंट में बड़े स्तर पर एंट्री की तैयारी कर रही है।

कब हो सकता है लॉन्च?

iPhone Fold को 2026 के अंत तक लॉन्च किए जाने की संभावना जताई जा रही है, संभव है कि इसे iPhone 18 Pro सीरीज के साथ पेश किया जाए।

क्या बदल जाएगा स्मार्टफोन मार्केट?

अगर Apple अपने फोल्डेबल डिवाइस के साथ क्रीज़ और ड्यूरेबिलिटी जैसी समस्याओं को हल करने में सफल रहता है, तो यह पूरे स्मार्टफोन मार्केट के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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NEET पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा एक्शन, 22 जून तक भारत में Telegram पर अस्थायी रोक

मेडिकल प्रवेश परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार का सख्त कदम राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और नकल रैकेट पर कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि Telegram का इस्तेमाल संगठित गिरोहों द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उम्मीदवारों को धोखा देने और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। आईटी कानून के तहत जारी हुआ आदेश सरकार ने Telegram पर यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून के एक विशेष प्रावधान के तहत लगाया है। यह प्रावधान देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित करने की अनुमति देता है। सरकारी बयान के मुताबिक यह कदम सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। NEET 2026 पेपर लीक के बाद बढ़ी सख्ती पिछले महीने NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जब जांच एजेंसियों को प्रश्नपत्र लीक होने के संकेत मिले थे। इस घटना के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अब सरकार ने 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। NTA ने बताया क्यों उठाना पड़ा यह कदम शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली National Testing Agency (NTA) ने कहा कि Telegram का उपयोग कुछ संगठित नकल गिरोहों द्वारा NEET पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों को गुमराह करने और धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार, प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद अस्थायी प्रतिबंध को "अंतिम विकल्प" के रूप में लागू किया गया। लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा असर भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और यहां करोड़ों लोग इस ऐप का उपयोग करते हैं। शिक्षा, व्यवसाय, समाचार, ऑनलाइन समुदाय और व्यक्तिगत संचार के लिए Telegram व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने स्वीकार किया है कि इस कदम से बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी बताया गया है। टेलीकॉम और टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और टेक प्लेटफॉर्म्स की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां जैसे Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea (Vi) इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया में हैं या नहीं, इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं Google Play Store और Apple App Store की ओर से भी फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है। 21 जून की परीक्षा पर टिकी निगाहें अब छात्रों और अभिभावकों की नजर 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा पर है। सरकार का कहना है कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। Telegram पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध हाल के वर्षों में किसी बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के खिलाफ उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है।  

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क्या आपका पुराना मोबाइल नंबर किसी और को मिल गया? बैंक OTP, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट ऐसे रखें सुरक्षित

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग, यूपीआई, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपने मोबाइल नंबर बदल लिया है, लेकिन अपने जरूरी अकाउंट्स में नया नंबर अपडेट नहीं किया, तो यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक बंद पड़े नंबरों को स्थायी रूप से निष्क्रिय नहीं रखतीं। निर्धारित अवधि के बाद वही नंबर किसी नए ग्राहक को जारी कर दिया जाता है। ऐसे में आपका पुराना नंबर किसी और के पास पहुंच सकता है और इससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। पुराना नंबर किसी और को मिलने पर क्या हो सकता है? अगर आपके बैंक खाते, ईमेल, यूपीआई ऐप या सोशल मीडिया प्रोफाइल अभी भी पुराने नंबर से जुड़े हुए हैं, तो नए नंबर धारक को आपके लिए आने वाले OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक और अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त हो सकते हैं। इससे कोई व्यक्ति आपके अकाउंट तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है और आपकी संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी बन सकता है जोखिम अधिकांश लोग अकाउंट सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करते हैं। इसमें लॉगिन के समय मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षा कोड भेजा जाता है। लेकिन अगर वह नंबर अब आपके पास नहीं है और किसी दूसरे व्यक्ति को जारी हो चुका है, तो वही कोड उसके मोबाइल पर पहुंच सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल SMS आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जाता। अकाउंट हैकिंग का बढ़ रहा खतरा हर साल दुनिया भर में लाखों मोबाइल नंबर दोबारा जारी किए जाते हैं। ऐसे में पुराने नंबरों से जुड़े अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पुराना नंबर पहुंच गया और उसने आपके ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की, तो जरूरी सुरक्षा संदेश उसी के फोन पर जा सकते हैं। नंबर बदलने के बाद तुरंत करें ये काम यदि आपने हाल ही में नया मोबाइल नंबर लिया है, तो इन प्लेटफॉर्म पर तुरंत नंबर अपडेट करें— बैंक खाते और नेट बैंकिंग सेवाएं यूपीआई और डिजिटल पेमेंट ऐप्स ईमेल अकाउंट व्हाट्सऐप इंस्टाग्राम फेसबुक अन्य जरूरी ऑनलाइन सेवाएं ध्यान रखें कि केवल नया नंबर जोड़ना काफी नहीं है। पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है। SMS OTP के बजाय अपनाएं सुरक्षित विकल्प साइबर विशेषज्ञ अब ऑथेंटिकेटर ऐप्स के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। ये ऐप मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं होते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं। इसके साथ ही अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि कई बार पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में सेव रह जाता है। अभी जांच करना क्यों है जरूरी? मोबाइल नंबर का दोबारा आवंटन टेलीकॉम कंपनियों की सामान्य प्रक्रिया है और यह भविष्य में भी जारी रहेगी। इसलिए अगर आपने कभी नंबर बदला है, तो एक बार सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच जरूर करें। एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते, निजी जानकारी और सोशल मीडिया प्रोफाइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।  

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Person turning off an air conditioner with a remote to protect the AC compressor.
AC ऐसे बंद करेंगे तो कंप्रेसर आपको कहेगा- धन्यवाद, जानिए सही तरीका

गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। लोग घंटों एसी चलाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि एसी को सही तरीके से बंद करना भी उतना ही जरूरी है जितना उसे चलाना। विशेषज्ञों के अनुसार, एसी को गलत तरीके से बंद करने की आदत लंबे समय में उसकी कार्यक्षमता और उम्र दोनों पर असर डाल सकती है। गलत तरीके से AC बंद करना क्यों पड़ सकता है भारी? एयर कंडीशनर के भीतर फैन, कंप्रेसर और अन्य कई महत्वपूर्ण हिस्से एक साथ काम करते हैं। यदि एसी को सीधे मुख्य स्विच से बंद कर दिया जाए या अचानक बिजली काट दी जाए, तो सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। लगातार ऐसा होने से कंप्रेसर की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जो एसी का सबसे महंगा और महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। रिमोट से AC बंद करना क्यों है बेहतर? विशेषज्ञों का मानना है कि एसी को बंद करने का सबसे सुरक्षित तरीका रिमोट का इस्तेमाल करना है। रिमोट से बंद करने पर मशीन के सभी हिस्से क्रमबद्ध तरीके से काम करना बंद करते हैं, जिससे सिस्टम को अचानक झटका नहीं लगता और अंदर के यांत्रिक हिस्से सुरक्षित रहते हैं। अगर लंबे समय तक एसी का इस्तेमाल नहीं करना है, तो पहले रिमोट से एसी बंद करें और उसके बाद मुख्य स्विच ऑफ करें। सीजन खत्म होने पर क्या करें? गर्मी का मौसम समाप्त होने के बाद यदि कई महीनों तक एसी का उपयोग नहीं होना है, तो रिमोट से बैटरियां निकाल देना चाहिए। लंबे समय तक बैटरियां लगी रहने से लीकेज का खतरा बढ़ जाता है, जिससे रिमोट खराब हो सकता है। इसके अलावा समय-समय पर एसी की सफाई और सर्विसिंग करवाना भी जरूरी है, ताकि उसकी कूलिंग क्षमता और कार्यक्षमता बनी रहे। इन्वर्टर और नॉन-इन्वर्टर AC में क्या अंतर है? पारंपरिक नॉन-इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर बार-बार चालू और बंद होता है, जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है। वहीं इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर लगातार चलता रहता है और आवश्यकता के अनुसार अपनी गति कम या ज्यादा करता है। इससे तापमान स्थिर बना रहता है और बिजली की बचत होती है। बिजली बिल कम करने में भी मददगार है इन्वर्टर तकनीक इन्वर्टर एसी में कमरे का निर्धारित तापमान हासिल होने के बाद कंप्रेसर पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि धीमी गति से चलता रहता है। इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और लगातार बेहतर कूलिंग मिलती है। यही कारण है कि लंबे समय तक इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए इन्वर्टर एसी अधिक किफायती माना जाता है। यदि आप अपने एयर कंडीशनर की उम्र बढ़ाना चाहते हैं और महंगे मरम्मत खर्च से बचना चाहते हैं, तो सिर्फ सही तरीके से एसी बंद करने की आदत भी बड़ा फर्क ला सकती है।  

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