भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मारुति सुजुकी ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपनी पहली इलेक्ट्रिक SUV Maruti Suzuki e Vitara के दम पर लॉन्च के महज चार महीनों के भीतर देश की शीर्ष EV कंपनियों में जगह बना ली है। सीमित पोर्टफोलियो होने के बावजूद कंपनी ने बिक्री के मामले में कई स्थापित ब्रांड्स को पीछे छोड़कर बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
जनवरी से मई 2026 के बीच मारुति सुजुकी ने कुल 4,365 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री की। यह आंकड़ा VinFast की 4,133 यूनिट्स की बिक्री से भी अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने BYD, Hyundai Motor Company और Kia Corporation जैसी कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है।
हालांकि भारतीय EV बाजार में अभी भी Tata Motors पहले और Mahindra & Mahindra दूसरे स्थान पर कायम हैं, जबकि JSW MG Motor India तीसरे स्थान पर बनी हुई है।
मारुति सुजुकी फिलहाल भारतीय बाजार में केवल एक इलेक्ट्रिक मॉडल e Vitara बेच रही है। इसके मुकाबले Hyundai के पास Hyundai Creta Electric और Hyundai Ioniq 5 जैसे मॉडल हैं। वहीं VinFast, Tata Motors और Mahindra के पास कई EV विकल्प मौजूद हैं।
इसके बावजूद e Vitara की लोकप्रियता ने मारुति को तेज़ी से आगे बढ़ाया है। जनवरी से मई 2026 के दौरान कंपनी ने औसतन 873 EV प्रति माह बेचीं। यह आंकड़ा VinFast (827), Hyundai (583), BYD (488) और Kia (405) की मासिक औसत बिक्री से अधिक रहा। यह दर्शाता है कि ग्राहकों ने मारुति के पहले इलेक्ट्रिक उत्पाद को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। अप्रैल और मई 2026 के बीच EV रजिस्ट्रेशन में सालाना आधार पर 77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल रजिस्ट्रेशन 52,274 यूनिट्स तक पहुंच गया। मई 2026 में कुल पैसेंजर वाहन बाजार में EV की हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, सरकार की प्रोत्साहन नीतियां और नए मॉडलों की उपलब्धता इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि अब अधिक ग्राहक पारंपरिक ईंधन वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
मारुति सुजुकी केवल घरेलू बाजार में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी e Vitara के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। सितंबर 2025 में निर्यात शुरू होने के बाद कंपनी अब तक 46 देशों में 35,000 से अधिक यूनिट्स भेज चुकी है।
e Vitara अब मारुति की सबसे ज्यादा निर्यात होने वाली गाड़ियों में तीसरे स्थान पर पहुंच चुकी है। इससे आगे केवल Maruti Suzuki Fronx और Maruti Suzuki Jimny हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इसी प्लेटफॉर्म पर आधारित एक रीबैज्ड मॉडल Toyota Urban Cruiser eBella भी तैयार किया जा रहा है, जिसे Toyota Motor Corporation अपने ब्रांड के तहत बेच रही है।
मारुति सुजुकी की यह सफलता दिखाती है कि भारतीय EV बाजार में ब्रांड की विश्वसनीयता और मजबूत डीलर नेटवर्क अभी भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। केवल एक मॉडल के साथ टॉप 4 में पहुंचना इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में कंपनी इलेक्ट्रिक सेगमेंट में और बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में मोटोरोला और वीवो के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है। ₹45,000 से ₹50,000 के प्रीमियम सेगमेंट में अब Motorola Edge 70 Pro+ और Vivo V70 एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दोनों स्मार्टफोन बड़ी बैटरी, 90W फास्ट चार्जिंग और 50MP कैमरा जैसे आकर्षक फीचर्स के साथ आते हैं। हालांकि, दोनों की खूबियां अलग-अलग हैं। अगर आप इस बजट में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि कौन सा फोन आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। डिस्प्ले और डिजाइन: Motorola का बड़ा फायदा Motorola Edge 70 Pro+ में 6.8 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 5,200 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। दूसरी तरफ Vivo V70 में 6.59 इंच का AMOLED पैनल मिलता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 5,000 निट्स ब्राइटनेस दी गई है। अगर आप गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और आउटडोर विजिबिलिटी को महत्व देते हैं, तो Motorola का डिस्प्ले ज्यादा प्रभावशाली साबित हो सकता है। वहीं, Vivo V70 का कॉम्पैक्ट डिजाइन उन यूजर्स को पसंद आएगा जो हल्का और आसानी से पकड़ में आने वाला फोन चाहते हैं। कैमरा: ZEISS बनाम पेरिस्कोप जूम Motorola Edge 70 Pro+ में 50MP Sony LYT-710 प्राइमरी कैमरा के साथ 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस मिलता है, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम और 50x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। इसके अलावा सभी कैमरों से 4K 60fps वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं, Vivo V70 में ZEISS ट्यूनिंग वाला 50MP कैमरा सिस्टम दिया गया है, जो प्राकृतिक रंगों और शानदार पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के लिए जाना जाता है। जूम फोटोग्राफी पसंद है? Motorola बेहतर विकल्प। पोर्ट्रेट और कलर साइंस महत्वपूर्ण है? Vivo V70 मजबूत दावेदार। परफॉर्मेंस और गेमिंग: Motorola को बढ़त Motorola Edge 70 Pro+ में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर और बड़ा वेपर कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जिससे हैवी गेमिंग और मल्टीटास्किंग के दौरान बेहतर प्रदर्शन मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर Vivo V70 में Snapdragon 7 Gen 4 चिपसेट मिलता है, जो सामान्य उपयोग और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त है। रॉ परफॉर्मेंस के मामले में Motorola Edge 70 Pro+ थोड़ा आगे दिखाई देता है। बैटरी और चार्जिंग दोनों स्मार्टफोन में: 6,500mAh बैटरी 90W फास्ट चार्जिंग की सुविधा मिलती है। हालांकि Motorola Edge 70 Pro+ में अतिरिक्त 15W वायरलेस चार्जिंग भी दी गई है, जो इसे एक अतिरिक्त बढ़त देती है। सॉफ्टवेयर अपडेट: Vivo का फायदा Vivo V70: 4 बड़े Android अपडेट Motorola Edge 70 Pro+: 3 बड़े Android अपडेट अगर आप फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो Vivo V70 का लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट आपके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। कौन सा फोन खरीदना चाहिए? Motorola Edge 70 Pro+ चुनें अगर: आपको बेहतर डिस्प्ले चाहिए हैवी गेमिंग करते हैं वायरलेस चार्जिंग चाहते हैं जूम कैमरा आपके लिए महत्वपूर्ण है Vivo V70 चुनें अगर: ZEISS कैमरा एक्सपीरियंस पसंद है बेहतर पोर्ट्रेट फोटोग्राफी चाहते हैं लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट प्राथमिकता है कॉम्पैक्ट डिजाइन पसंद करते हैं
Apple ने अपने सालाना डेवलपर इवेंट WWDC 2026 में कई बड़े अपडेट्स का ऐलान किया। इस बार कंपनी का पूरा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर रहा। नए Siri AI, iOS 27, macOS Golden Gate और कई ऐप्स में AI इंटीग्रेशन के जरिए Apple ने अपने इकोसिस्टम को पहले से अधिक स्मार्ट और यूजर-फ्रेंडली बनाने की कोशिश की है। आइए जानते हैं WWDC 2026 के 7 सबसे बड़े ऐलान। 1. Siri AI हुआ पहले से ज्यादा स्मार्ट WWDC 2026 की सबसे बड़ी घोषणा नए Siri AI को लेकर रही। अब Siri सिर्फ वॉयस असिस्टेंट नहीं रहेगा, बल्कि यूजर्स के पर्सनल कॉन्टेक्स्ट को समझकर बेहतर सुझाव भी देगा। नए Siri में ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस, इन-ऐप एक्शन और बेहतर कन्वर्सेशन जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं। अब यह ट्रिप प्लानिंग, आइडिया जनरेट करने और रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने में मदद करेगा। Siri Dynamic Island के अंदर भी दिखाई देगा। 2. Siri के लिए अलग ऐप लॉन्च Apple ने Siri के लिए एक नया डेडिकेटेड ऐप भी पेश किया है। इस ऐप में पुरानी बातचीत की हिस्ट्री दिखाई देगी और यूजर्स आसानी से नई चैट शुरू कर सकेंगे। यह ऐप iPhone, iPad, Apple Watch, Vision Pro और Mac सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। 3. कैमरा ऐप में आया AI सपोर्ट अब iPhone का कैमरा ऐप भी Siri AI के साथ काम करेगा। यूजर किसी वस्तु, दस्तावेज या खाने की तस्वीर पर कैमरा पॉइंट करके उससे जुड़ी जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा बिल स्कैनिंग, खर्च बांटने और खाने की न्यूट्रिशन डिटेल्स बताने जैसे फीचर्स भी जोड़े गए हैं। 4. macOS Golden Gate पेश Apple ने अपने नए macOS 27 "Golden Gate" की घोषणा की है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि अब नए macOS अपडेट Intel प्रोसेसर वाले Macs को सपोर्ट नहीं करेंगे। हालांकि पुराने Intel Mac यूजर्स को अगले तीन वर्षों तक सिक्योरिटी अपडेट मिलते रहेंगे, लेकिन नए फीचर्स सिर्फ Apple Silicon आधारित डिवाइसेज़ में उपलब्ध होंगे। 5. iOS 27 में बेहतर स्पीड और नया अनुभव Apple ने iOS 27 को भी पेश किया है, जिसमें इंटरफेस को पहले से अधिक स्मूद और ऑप्टिमाइज किया गया है। कंपनी के अनुसार: ऐप्स लगभग 30 प्रतिशत तेजी से खुलेंगे। फोटो लोडिंग स्पीड में करीब 70 प्रतिशत सुधार होगा। पिछले साल पेश किए गए Liquid Glass डिजाइन को और बेहतर बनाया गया है। यह अपडेट 2026 की तीसरी तिमाही तक सपोर्टेड iPhones में रोलआउट किया जाएगा। 6. Messages, Mail और Phone ऐप में AI फीचर्स Apple Intelligence के तहत कई ऐप्स को AI से अपग्रेड किया गया है। Messages ऐप बातचीत के अनुसार फोटो सुझाव देगा। Phone ऐप कॉल के दौरान जरूरी जानकारी अपने आप दिखाएगा। Mail ऐप स्मार्ट सुझाव और कैलेंडर मैनेजमेंट में सहायता करेगा। Image Playground में फोटो एडिटिंग के नए AI टूल्स जोड़े गए हैं। 7. Safari ब्राउजर हुआ और स्मार्ट Safari में AI आधारित नया "Notify Me" फीचर जोड़ा गया है। यह किसी वेबसाइट पर होने वाले बदलावों पर नजर रखेगा और जैसे ही कोई प्रोडक्ट उपलब्ध होगा या अपडेट आएगा, यूजर को तुरंत सूचना देगा। इसके अलावा Safari अब खुले हुए टैब्स को विषय के अनुसार ऑर्गनाइज भी कर सकेगा, जिससे ब्राउजिंग अनुभव पहले से बेहतर होगा। Apple का AI पर बड़ा दांव WWDC 2026 से साफ हो गया है कि Apple अब AI रेस में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है। Siri AI और Apple Intelligence के जरिए कंपनी अपने सभी डिवाइसेज़ के अनुभव को अधिक व्यक्तिगत और स्मार्ट बनाने पर जोर दे रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा कदम उठाते हुए Meta ने Facebook के लिए नया AI-पावर्ड फीचर ‘क्रिएटर असिस्टेंट’ लॉन्च किया है। यह टूल कंटेंट क्रिएटर्स को उनकी ऑडियंस को बेहतर ढंग से समझने, कंटेंट की परफॉर्मेंस का विश्लेषण करने और नए क्रिएटिव आइडिया विकसित करने में सहायता करेगा। कंपनी का कहना है कि यह फीचर क्रिएटर्स के लिए एक डिजिटल सलाहकार की तरह काम करेगा। क्रिएटर डैशबोर्ड में मिलेगा नया फीचर क्रिएटर असिस्टेंट को सीधे फेसबुक के क्रिएटर डैशबोर्ड में जोड़ा गया है। यह टूल ऑडियंस के व्यवहार, एंगेजमेंट ट्रेंड्स और कंटेंट प्रदर्शन का विश्लेषण कर उपयोगी सुझाव देता है। क्रिएटर इससे बातचीत के अंदाज में सवाल पूछ सकते हैं, जैसे किसी रील को अधिक व्यूज क्यों मिले या समय के साथ उनकी ऑडियंस में क्या बदलाव आया। AI आधारित यह सिस्टम जटिल आंकड़ों को सरल भाषा में समझाकर कंटेंट रणनीति को बेहतर बनाने में मदद करेगा। इससे क्रिएटर्स को अलग-अलग रिपोर्ट और चार्ट देखने की जरूरत कम होगी। रचनात्मक रुकावट दूर करने में भी मदद Meta के अनुसार, यह टूल केवल आंकड़ों का विश्लेषण नहीं करेगा बल्कि क्रिएटिव ब्लॉक की स्थिति में नए कंटेंट आइडिया भी सुझाएगा। ट्रेंडिंग ऑडियो, लोकप्रिय कंटेंट फॉर्मेट और मौजूदा सांस्कृतिक ट्रेंड्स के आधार पर यह क्रिएटर्स को समयानुकूल सुझाव देगा। साथ ही, यह हर क्रिएटर के लक्ष्य—जैसे ऑडियंस बढ़ाना, एंगेजमेंट बढ़ाना या कमाई करना। रील्स ट्रांसलेशन में जुड़ेंगी 5 नई भाषाएं क्रिएटर असिस्टेंट के साथ Meta ने Facebook Reels के AI-पावर्ड ट्रांसलेशन फीचर का भी विस्तार किया है। अब इस सुविधा में अरबी, बहासा इंडोनेशियाई, फ्रेंच, थाई और वियतनामी भाषाएं जोड़ी जाएंगी। यह तकनीक वीडियो की मूल आवाज और टोन को बनाए रखते हुए डबिंग और लिप-सिंकिंग की सुविधा प्रदान करती है। फिलहाल ‘क्रिएटर असिस्टेंट’ को अमेरिका, कनाडा और भारत में चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा रहा है। आने वाले महीनों में इसे वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा और इसमें नए फीचर भी जोड़े जाएंगे। इससे दुनिया भर के कंटेंट क्रिएटर्स को अपने दर्शकों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।