गुमला

K.Ravi Kumar
झारखंड के छह विधानसभा क्षेत्रों में 100% मतदाताओं तक पहुंचे गणना प्रपत्र

रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता गणना प्रपत्रों के वितरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य के छह विधानसभा क्षेत्रों में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा सभी पात्र मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचा दिए गए हैं। इनमें चतरा, मझगांव, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, गुमला और लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस उपलब्धि पर उन्होंने संबंधित बीएलओ, ईआरओ और एईआरओ को बधाई दी।   गुरुवार तक सभी क्षेत्रों में वितरण पूरा करने का लक्ष्य सोमवार को जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि राज्य के शेष विधानसभा क्षेत्रों में भी गुरुवार तक शत-प्रतिशत मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे प्रपत्र भरकर और हस्ताक्षर कर जल्द से जल्द बीएलओ को सौंप दें, ताकि उनका डिजिटाइजेशन समय पर पूरा किया जा सके।   बीएलओ को घर-घर जाकर करना होगा सत्यापन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बीएलओ का दायित्व है कि वे घर-घर जाकर मतदाताओं को प्रपत्र उपलब्ध कराएं और उन्हें वापस भी प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कैंप लगाकर या मतदाताओं को एक स्थान पर बुलाकर सत्यापन करने की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि एसआईआर अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही या खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।   अनधिकृत कैंप को बताया अवैध के. रवि कुमार ने यह भी कहा कि कुछ गैर-सरकारी संस्थानों, साइबर कैफे और अन्य संगठनों द्वारा एसआईआर से जुड़े कैंप लगाए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी कैंप को निर्वाचन आयोग की अनुमति नहीं है और इन्हें पूरी तरह अवैध माना जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Gumla Health Care
गुमला में एंबुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल, समय पर इलाज नहीं मिलने से दो युवकों की मौत

गुमला। झारखंड के गुमला जिले में सरकारी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। घाघरा और पालकोट थाना क्षेत्रों में समय पर 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण दो युवकों की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है।   सड़क हादसे के बाद दो घंटे तक नहीं मिली एंबुलेंस पहली घटना घाघरा थाना क्षेत्र के सलगी भुड़ियाटोली गांव की है। 22 वर्षीय मंगलेश्वर उरांव सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे सदर अस्पताल गुमला रेफर किया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि करीब दो घंटे तक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इलाज के लिए ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने घाघरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीसों घंटे एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की है।   जहर खाने के बाद भी नहीं पहुंची मदद दूसरी घटना पालकोट थाना क्षेत्र के मरदा गांव की है, जहां 34 वर्षीय कृष्णा लोहरा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, कृष्णा की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन काफी देर तक कोई वाहन नहीं पहुंचा। आखिरकार परिजन ऑटो से उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक आशंका जहर सेवन की जताई जा रही है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।   स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल दोनों घटनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने से गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस सेवा मजबूत करने और हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे आपातकालीन वाहन उपलब्ध कराने की मांग की है।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Gumla Record Room
गुमला में भगवान भरोसे जमीन के रिकॉर्ड, जर्जर रिकॉर्ड रूम से लाखों दस्तावेजों पर खतरा

गुमला। गुमला जिले के कचहरी परिसर स्थित रिकॉर्ड रूम की जर्जर हालत ने लाखों लोगों की जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों पुराने समाहरणालय भवन में संचालित इस रिकॉर्ड रूम में रखे अभिलेख बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के बीच असुरक्षित पड़े हैं। बरसात के मौसम में भवन की टूटी छत, सीलन और नमी के कारण दस्तावेजों के खराब होने का खतरा लगातार बना हुआ है।   जमीन पर बिखरे पड़े हैं महत्वपूर्ण अभिलेख रिकॉर्ड रूम में भूमि स्वामित्व, दाखिल-खारिज, पंजीकरण और अन्य राजस्व मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण रजिस्टर और दस्तावेज सुरक्षित अलमारियों में रखने के बजाय कई जगह जमीन पर बिखरे पड़े हैं। ये अभिलेख हजारों परिवारों के भूमि अधिकारों का आधार हैं और किसी भी कानूनी विवाद या नकल निर्गत करने के लिए इन्हीं पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके बावजूद इनके संरक्षण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।   टूटी खिड़की से सुरक्षा पर बड़ा खतरा रिकॉर्ड रूम की वह खिड़की, जहां से जमीन संबंधी नकल जारी की जाती है, लंबे समय से टूटी हुई है। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का कहना है कि यदि कोई असामाजिक तत्व इस रास्ते ज्वलनशील पदार्थ अंदर फेंक दे, तो वर्षों पुराने दस्तावेज कुछ ही मिनटों में नष्ट हो सकते हैं। इससे हजारों लोगों के भूमि रिकॉर्ड हमेशा के लिए खत्म होने का खतरा है।   सुरक्षित भवन में स्थानांतरण की उठी मांग स्थानीय अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिला प्रशासन रिकॉर्ड रूम की बदहाल स्थिति से पूरी तरह अवगत है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अधिवक्ता अरुण कुमार ने मांग की है कि रिकॉर्ड रूम को जल्द किसी सुरक्षित, आधुनिक और व्यवस्थित भवन में स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े अभिलेख आम नागरिकों के अधिकारों का आधार हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में अपूरणीय क्षति हो सकती है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Gumla Accident
गुमला में बारात से लौट रही कार पेड़ से टकराई, दूल्हे के पिता समेत दो की मौत

गुमला। झारखंड के गुमला जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। पालकोट थाना क्षेत्र के काली मंदिर के समीप बारात से लौट रही एक ब्रेजा कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे में दूल्हे के पिता समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज गुमला सदर अस्पताल में जारी है।   चालक को झपकी आने से हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, बसिया प्रखंड के लोंगा गांव से गुरुवार रात बारात कुम्हारी गांव गई थी। शनिवार सुबह करीब छह से सात बजे के बीच बारात लौटते समय पालकोट के काली मंदिर के पास चालक को झपकी आ गई। इससे वाहन अनियंत्रित होकर तेज रफ्तार में पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए।   दूल्हे के पिता की मौके पर मौत हादसे में कार चला रहे दूल्हे के पिता कलेश्वर साहू, जो घाघरा प्रखंड में पंचायत सेवक के पद पर कार्यरत थे, की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल दीनबंधु साहू को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया, लेकिन भरनो के पास रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।   चार घायलों का इलाज जारी दुर्घटना में बालमुकुंद साहू, मनोज ठाकुर, रामदरस पांडेय और संदीप साहू घायल हुए हैं। स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को पहले पालकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें गुमला सदर अस्पताल भेजा गया।   पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद दोनों परिवारों में शादी की खुशियां पलभर में गहरे शोक में बदल गईं।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Chamra Linda
मंत्री चमरा लिंडा ने गुमला के विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए डीसी को लिखा पत्र

गुमला। झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री Chamra Linda ने अपने विधानसभा क्षेत्र बिशुनपुर के विभिन्न गांवों में विकास कार्यों को गति देने के लिए गुमला के उपायुक्त को पत्र लिखा है। मंत्री ने गुमला और घाघरा प्रखंड के कई गांवों में सड़क, पेयजल, जलमीनार और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को जल्द स्वीकृति देकर क्रियान्वित करने का अनुरोध किया है।   पत्र में मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। ऐसे में विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को बेहतर आवागमन, स्वच्छ पेयजल और रोशनी की सुविधा मिल सके।   कई गांवों में सड़क निर्माण का प्रस्ताव मंत्री ने बसुआ पंचायत में महेश उरांव के घर से बाजार टांड़ स्थित धनु उरांव के घर तक पीसीसी सड़क निर्माण की अनुशंसा की है। इसके अलावा घाघरा प्रखंड की गोया-बेलागड़ा पंचायत में बिरसाई उरांव के घर से मस्जिद तक और जिलानी के घर से आंगनबाड़ी केंद्र तक पीसीसी सड़क बनाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। वहीं गुमला प्रखंड की अंबवा पंचायत में सेमर मोड़ से होदा मास्टर के घर तक सड़क निर्माण कराने की मांग की गई है।   जलमीनार, चापाकल और स्ट्रीट लाइट पर भी जोर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट दूर करने के लिए अंबवा पंचायत और टोटो पंचायत में चापाकल लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही कोटाम पंचायत के बाजार टांड़ में जलमीनार निर्माण की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा टोटो पंचायत स्थित हेरा मस्जिद के पास तथा घाघरा प्रखंड के गोया गांव में रऊफ मिस्त्री के घर के समीप स्ट्रीट लाइट लगाने की भी मांग की गई है।   मंत्री चमरा लिंडा ने उपायुक्त से इन सभी योजनाओं पर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है। पत्र सामने आने के बाद संबंधित गांवों के लोगों में विकास कार्यों को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की पहल और योजनाओं के जल्द धरातल पर उतरने पर टिकी है।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Gumla Murder
डायन-बिसाही के शक में वृद्ध की हत्या, आरोपी फरार

गुमला। झारखंड के गुमला जिले के सदर थाना क्षेत्र के मुरकुंडा पंचायत अंतर्गत कोटेनगसेरा गांव में अंधविश्वास से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां डायन-बिसाही के आरोप में 65 वर्षीय पालु खड़िया की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस दौरान उनकी पत्नी सुगी देवी पर भी हमला किया गया, लेकिन वह किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहीं। पूरी रात उन्होंने गांव के आसपास छिपकर बिताई और सुबह घर लौटने पर पति को मृत पाया।   जानकारी के अनुसार, पड़ोसी बहुरा उरांव के परिवार के कुछ सदस्य बीमार चल रहे थे। बीमारी का कारण जानने के लिए एक भगत को बुलाया गया, जिसने कथित तौर पर पालु खड़िया और उनकी पत्नी पर डायन-बिसाही का आरोप लगाया। इसके बाद मामला हिंसक हो गया और उन्हें घर बुलाकर मारपीट की गई।   घर बुलाकर की गई बेरहमी से पिटाई ग्रामीणों के मुताबिक, बहुरा उरांव ने दंपति को अपने घर बुलाया और डायन होने का आरोप लगाते हुए बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान पालु खड़िया को दीवार पर पटक दिया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और वे बेहोश हो गए। सुगी देवी के साथ भी मारपीट की गई, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वह भाग निकलीं।   रातभर लाश के पास रहा माहौल, आरोपी फरार महिला के भागने के बाद गंभीर रूप से घायल पालु खड़िया को घर लाकर छोड़ दिया गया। समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। सुबह जब सुगी देवी वापस लौटीं, तो उन्होंने अपने पति को मृत पाया। घटना के बाद मुख्य आरोपी बहुरा उरांव गांव से फरार हो गया है।   सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।   गांव में दहशत, अंधविश्वास पर उठे सवाल इस घटना के बाद गांव में तनाव और भय का माहौल है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर करता है, जिसमें आज भी निर्दोष लोगों को जान गंवानी पड़ती है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Amrapali Mango London
लंदन में झारखंड की महिलाओं का दिखेगा दम और आम्रपाली आम का जलवा

रांची। झारखंड की महिलाओं का दम अब लंदन में सिर चढ़ कर बोलने वाला है। सिमडेगा और गुमला की महिलाओं द्वारा उगाये गये आम्रपाली आमों का जलवा अब विदेशों में भी दिखने लगा है। यहां उत्पादित आम्रपाली आमों का देश तो कायल था ही, अब विदेशी भी इसके मजे लेंगे।  केंद्र सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास कर रही है। इसी क्रम झारखंड के आमों का निर्यात शुरू किया गया है। इसकी पहली खेप यूनाइटेड किंगडम भेजी गयी है। इसे स्थानीय सामान के विदेशों में जाने का शानदार उदाहरण बताते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि झारखंड के सिमडेगा की महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम यूनाइटेड किंगडम पहुंचने वाले हैं। एपीडा के निरंतर प्रयासों से किसानों को बेहतर मूल्य, महिलाओं को नई पहचान और भारत के कृषि निर्यात को नई गति मिल रही है। आम्रपाली आम कोलकाता से लंदन रवाना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने राज्य से यूनाइटेड किंगडम के लिए ताजे आमों की पहली वाणिज्यिक खेप को हरी झंडी दिखाकर 4 जून 2026 को कोलकाता से रवाना किया। 1.5 मीट्रिक टन आम्रपाली आम भेजा गया मंत्रालय ने बताया कि इस खेप में झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो ब्लॉक में स्थित महिला किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त 1.5 मीट्रिक टन ताजे आम्रपाली आम है। इस खेप का निर्यात कोलकाता स्थित मैसर्स जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लंदन, यूनाइटेड किंगडम को किया जा रहा है। निर्यात से आमदनी में बढ़ोतरी यह निर्यात, सिमडेगा जिले के किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और प्रगतिशील किसानों के लिए एपीडा की ओर से 5 मई, 2026 को आयोजित निर्यात-उन्मुख क्षमता विकास कार्यक्रम के बाद किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य निर्यात संबंधी आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और बाजार के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करना था। मंत्रालय के मुताबिक, इसके बाद, एपीडा ने जिले से निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले आमों की खरीद के लिए बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और मैसर्स जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के बीच संपर्क स्थापित करने में सहायता की। वर्तमान खेप इसी पहल का परिणाम है। सरकार ने आगे कहा कि इस पहल से क्षेत्र के किसान समूहों के बीच गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पद्धतियों को अपनाने, फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन करने को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

Unknown जून 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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