नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के रघुबीर नगर इलाके में सोमवार तड़के ई-रिक्शा की बैटरी फटने से चार मंजिला इमारत की पहली मंजिल में भीषण आग लग गई। हादसे में दो लोग झुलस गए। दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। तड़के 4:42 बजे मिली आग की सूचना दमकल विभाग के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 4:42 बजे रघुबीर नगर के आर ब्लॉक स्थित एक मकान में आग लगने की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। जांच में सामने आया कि आग इमारत की पहली मंजिल पर ई-रिक्शा की बैटरी फटने के बाद लगी। बैटरी फटने के बाद वहां रखे घरेलू सामान ने आग पकड़ ली, जिससे कुछ ही समय में आग फैल गई। हादसे में दो लोगों की मौत आग की चपेट में आने से 17 वर्षीय सुफैद और 38 वर्षीय मोहम्मद सामिद झुलस गए। दोनों को उपचार के लिए रघुबीर नगर स्थित गुरु गोविंद सिंह अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 5:25 बजे आग पर पाया काबू दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद करीब 5:25 बजे आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि आग इमारत के अन्य हिस्सों में ज्यादा नहीं फैल सकी। पुलिस कर रही मामले की जांच फिलहाल पुलिस आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में ई-रिक्शा की बैटरी फटने को आग की वजह बताया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बैटरी किस स्थिति में थी और घटना के समय वहां उसे चार्ज किया जा रहा था या नहीं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली से पुणे जा रही SpiceJet की फ्लाइट SG 105 में मंगलवार रात तकनीकी समस्या के बाद यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विमान के केबिन में AC और वेंटिलेशन काम नहीं करने से यात्रियों को गर्मी और उमस के बीच सांस लेने में दिक्कत होने लगी। स्थिति बिगड़ने पर यात्रियों ने हंगामा किया, जिसके बाद विमान को रनवे से वापस लाया गया। बाद में एयरलाइन ने दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था कर यात्रियों को पुणे भेजा। 100 से अधिक यात्री गर्मी और उमस से परेशान यह फ्लाइट दिल्ली से पुणे के लिए रवाना होने वाली थी। यात्रियों के मुताबिक, विमान में बोर्डिंग के बाद काफी देर तक AC नहीं चला। विमान रनवे पर करीब 40 से 45 मिनट तक रहने के बावजूद केबिन का तापमान और वेंटिलेशन सामान्य नहीं हुआ। गर्मी और घुटन के कारण कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ यात्रियों ने सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। इसके बाद यात्रियों ने उड़ान रोकने और विमान के दरवाजे खोलने की मांग शुरू कर दी। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी हुई परेशानी एक यात्री लेशपाल ने ANI को बताया कि केबिन में वेंटिलेशन नहीं होने के कारण यात्रियों को काफी दिक्कत हुई। उनके मुताबिक, गर्मी के कारण यात्रियों के कपड़े पसीने से भीग गए और कुछ बच्चे रोने लगे। गर्भवती महिलाओं को भी परेशानी होने की बात कही गई। यात्रियों के हंगामे के बाद विमान को वापस लाया गया और उन्हें उतरने की अनुमति दी गई। तकनीकी जांच के बाद विमान उड़ान के लिए अनुपयुक्त पाया गया SpiceJet के प्रवक्ता के अनुसार, फ्लाइट में तकनीकी समस्या सामने आई थी। विमान को उड़ान के लिए तैयार किया जा रहा था, लेकिन समस्या के कारण उसे संचालित नहीं किया जा सका। एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों को हुई परेशानी के लिए उसे खेद है और उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरे विमान की व्यवस्था की गई। सुबह पांच बजे दूसरी फ्लाइट से भेजे गए यात्री यात्रियों के अनुसार, दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था के बाद उन्हें अगले दिन सुबह करीब 5 बजे पुणे के लिए रवाना किया गया। इसके चलते यात्रियों को कई घंटे एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा। घटना के बाद यात्रियों ने विमान में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और तकनीकी समस्या के बावजूद बोर्डिंग कराए जाने पर सवाल उठाए हैं। एयरलाइन की ओर से तकनीकी खराबी और उड़ान में हुई देरी को लेकर जानकारी दी गई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील यानी पीएम-पोषण के मेन्यू में बदलाव किया गया है। अब बच्चों को जल्द ही इडली-सांभर भी परोसा जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों और भोजन उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों को 24 अगस्त तक जरूरी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है। कई व्यंजनों में किया गया बदलाव संशोधित मेन्यू में इडली-सांभर को शामिल करने के साथ कुछ पुराने व्यंजनों में भी बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक रागी हलवा की जगह गेहूं का आटा और चना मसाला, जबकि सब्जियों वाली दलिया की जगह ज्वार और बाजरा आधारित विकल्प शामिल किए गए हैं। 24 अगस्त तक तैयारी पूरी करने का निर्देश शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों, केंद्रीकृत रसोई और संबंधित एजेंसियों को नए मेन्यू के अनुसार भोजन तैयार करने की व्यवस्था करने को कहा है। भोजन की गुणवत्ता, पोषण और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में स्कूल नेतृत्व से जुड़े पदों की बड़ी संख्या में रिक्तियां सामने आई हैं। हालिया UPSC भर्ती विज्ञापन के मुताबिक प्रिंसिपल के 124 और वाइस-प्रिंसिपल के 704 पद, यानी कुल 828 पद खाली हैं। दिल्ली शिक्षा निदेशालय करीब 1,090 सरकारी स्कूल संचालित करता है। 124 प्रिंसिपल और 704 वाइस-प्रिंसिपल पद रिक्त रिक्त पदों में 124 प्रिंसिपल और 704 वाइस-प्रिंसिपल शामिल हैं। इन पदों को सीधी भर्ती के जरिए भरने के लिए UPSC ने आवेदन मांगे हैं। आवेदन प्रक्रिया 25 जुलाई से शुरू हुई थी और 14 अगस्त 2026 तक आवेदन किया जा सकता है। इन आंकड़ों ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक नेतृत्व की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल स्कूल के प्रशासन, शिक्षकों के समन्वय और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं। स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी कमी Principal and Vice-Principal Government School Association के अनुसार दिल्ली में प्रिंसिपल के 950 स्वीकृत पद और वाइस-प्रिंसिपल के 1,670 स्वीकृत पद हैं। दोनों श्रेणियों में 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और बाकी पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान बताया गया है। इस व्यवस्था में लंबे समय तक पद खाली रहने से स्कूलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अतिरिक्त बोझ दूसरे अधिकारियों या शिक्षकों पर पड़ सकता है। UPSC के जरिए हो रही भर्ती दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी रिक्तियों के आधार पर UPSC ने 124 प्रिंसिपल और 704 वाइस-प्रिंसिपल पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इससे बड़ी संख्या में शिक्षा क्षेत्र के योग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी का अवसर भी मिलेगा। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और नए अधिकारियों की नियुक्ति में समय लग सकता है। ऐसे में फिलहाल खाली पदों का मुद्दा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। शिक्षा व्यवस्था पर क्यों महत्वपूर्ण है मामला स्कूल के प्रधानाचार्य और उप-प्रधानाचार्य केवल प्रशासनिक पद नहीं हैं। स्कूल की शैक्षणिक योजना, अनुशासन, शिक्षक प्रबंधन, अभिभावकों के साथ समन्वय और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी भूमिका होती है। ऐसे में 828 नेतृत्व पदों का रिक्त होना दिल्ली के सरकारी स्कूलों की प्रशासनिक क्षमता के लिहाज से बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि UPSC भर्ती प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और इन पदों पर नियुक्तियां कब तक की जाती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सरकार ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी से जुड़ा नया विधेयक मंजूर कर लिया है। प्रस्तावित दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज बिल के तहत राजधानी में स्थापित होने वाली निजी विश्वविद्यालयों में हर पाठ्यक्रम की 25% सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। विधेयक को अब दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। दिल्ली के छात्रों को मिलेगा 25% सीटों का लाभ प्रस्तावित कानून का सबसे बड़ा प्रावधान स्थानीय छात्रों के लिए सीटों का आरक्षण है। इसके तहत निजी विश्वविद्यालयों के प्रत्येक पाठ्यक्रम में 25% सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए निर्धारित करने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य दिल्ली के विद्यार्थियों को राजधानी में ही उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। निजी और विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए रास्ता साफ प्रस्तावित विधेयक दिल्ली में निजी और विदेशी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता आसान करने के साथ-साथ उनके लिए एक नियामक ढांचा तैयार करेगा। इससे विश्वविद्यालयों के संचालन, प्रशासन और जवाबदेही से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा प्रस्ताव में विश्वविद्यालयों को उनकी परिचालन और विकास संबंधी जरूरतों के अनुसार फीस संरचना तय करने की व्यवस्था भी शामिल है। विधानसभा में पेश होगा विधेयक दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने की तैयारी है। कानून बनने के बाद दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों के संचालन और स्थानीय छात्रों के लिए सीटों के प्रावधान को नया कानूनी आधार मिलेगा। सरकार का कहना है कि इस पहल से दिल्ली के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाने की जरूरत कम हो सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शनिवार, 8 अगस्त को उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी, पूर्वोत्तर, पश्चिमी और प्रायद्वीपीय भारत के कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने जलभराव और बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत में बारिश के आसार उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। वहीं, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी शनिवार को तेज बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी राजस्थान में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है, जबकि पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी अलर्ट ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में व्यापक बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 8 अगस्त को ओडिशा में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बिहार में भी कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय सहित कई राज्यों में भारी बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में भी बारिश पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में व्यापक बारिश की संभावना है। महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश का अनुमान है। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम खराब रहने के मद्देनजर IMD ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह भी दी है। दिल्ली में शुक्रवार की बारिश से जनजीवन प्रभावित शुक्रवार को दिल्ली-NCR में हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई। दक्षिण दिल्ली की एमबी रोड समेत कई प्रमुख सड़कों पर पानी भरने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई जगह मोटरसाइकिल और ऑटो पानी में फंस गए। आईटीओ, पटेल रोड, रोहतक रोड, वजीराबाद रोड, कीर्ति नगर, शाहीन बाग, दिल्ली-जयपुर हाईवे और बदरपुर बॉर्डर के आसपास भी यातायात प्रभावित रहा। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां जलभराव वाले इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में इबोला संक्रमण के संदिग्ध मामले को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों की सतर्कता बढ़ गई है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन से लौटे 52 वर्षीय BSF कांस्टेबल को बुखार आने के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने एहतियात के तौर पर उसका सैंपल इबोला की जांच के लिए भेजा है। फिलहाल संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। क्वारंटीन के दौरान आया बुखार रिपोर्ट के अनुसार, BSF जवान कांगो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन से लौटने के बाद अनिवार्य क्वारंटीन में था। इसी दौरान उसे बुखार आया, जिसके बाद इबोला निगरानी प्रोटोकॉल सक्रिय किए गए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने किसी भी संभावित जोखिम को देखते हुए उसे अलग रखा है और उसकी चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है। सैंपल जांच के बाद स्थिति होगी साफ जवान के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बुखार का कारण इबोला वायरस है या कोई अन्य संक्रमण। अधिकारियों ने फिलहाल इसे संदिग्ध मामला माना है और संक्रमण की पुष्टि नहीं की है। कांगो में इबोला प्रकोप के कारण बढ़ी सतर्कता डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के प्रकोप को देखते हुए भारत पहले से ही निगरानी और स्क्रीनिंग बढ़ा चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 23 मई से इबोला प्रभावित देशों से भारत पहुंचे करीब 10,974 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और अब तक भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग की स्थिति पर लगातार नजर दिल्ली में सामने आए संदिग्ध मामले के बाद स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। जवान की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का जोर संभावित संक्रमण की समय रहते पहचान करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय लागू करने पर है।
जयपुर, एजेंसियां। राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) ने राज्य की पांचों सरकारी बिजली कंपनियों में 2,005 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती में जूनियर इंजीनियर, जूनियर अकाउंटेंट और जूनियर असिस्टेंट/कमर्शियल असिस्टेंट-II के पद शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 5 अगस्त 2026 से शुरू होगी और उम्मीदवार 25 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। जूनियर इंजीनियर समेत इन पदों पर भर्ती भर्ती अभियान के तहत कुल 2,005 पद भरे जाएंगे। इनमें JEN-I (इलेक्ट्रिकल) के 727, JEN-I (मैकेनिकल) के 110, JEN-I (सिविल) के 44, जूनियर अकाउंटेंट के 192 और जूनियर असिस्टेंट/कमर्शियल असिस्टेंट-II के 765 पद शामिल हैं। राजस्थान की पांच बिजली कंपनियों में होगी नियुक्ति यह संयुक्त भर्ती RVUN, RVPN, JVVN, AVVN और JdVVN के लिए आयोजित की जा रही है। कुल पदों में से 308 पद RVUN, 593 पद RVPN, 393 पद JVVN, 448 पद AVVN और 263 पद JdVVN में हैं। 5 अगस्त से 25 अगस्त तक कर सकेंगे आवेदन योग्य उम्मीदवार 5 अगस्त 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की अंतिम तारीख 25 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले विस्तृत भर्ती विज्ञापन में दी गई शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, शुल्क और चयन प्रक्रिया की जानकारी ध्यान से जांचने की सलाह दी गई है। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार मिलेगा लाभ भर्ती में SC, ST, BC, MBC, EWS, PwBD, TSP, सहरिया, पूर्व सैनिक और महिला उम्मीदवारों समेत पात्र श्रेणियों को राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षण और अन्य छूट का लाभ मिलेगा। विस्तृत नियम भर्ती विज्ञापन में दिए जाएंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में छात्र संगठनों के जारी प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है। एहतियात के तौर पर वीकेंड (शनिवार और रविवार) को दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को सामान्य समय से दो घंटे पहले यानी रात 8 बजे बंद करने का आदेश दिया गया है। यह फैसला दिल्ली पुलिस की सुरक्षा संबंधी सिफारिश के बाद लिया गया है। प्रदर्शन वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई प्रशासन ने जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है तथा संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वीकेंड में रात 8 बजे तक ही खुलेंगी शराब की दुकानें सुरक्षा कारणों से वीकेंड के दौरान दिल्ली की सभी लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों को रात 8 बजे तक ही संचालन की अनुमति दी गई है। सामान्य दिनों में ये दुकानें देर रात तक खुली रहती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए समय में अस्थायी बदलाव किया गया है। यातायात और मेट्रो सेवाओं पर भी असर प्रदर्शन के मद्देनज़र मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई मेट्रो स्टेशनों पर विशेष निगरानी रखी गई है और यात्रियों को यात्रा से पहले ट्रैफिक एवं मेट्रो एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है। स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर दिल्ली पुलिस और प्रशासन ने कहा है कि सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी दिल्ली में सुरक्षा कारणों के चलते लगातार दूसरे दिन 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखा गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा एजेंसियों के निर्देश के बाद इन स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं। हालांकि, मेट्रो ट्रेनें कुछ स्टेशनों से होकर गुजर रही हैं। प्रदर्शन और सुरक्षा को देखते हुए फैसला दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन और संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के बाद DMRC ने एहतियात के तौर पर कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला लिया। यात्रियों को हुई परेशानी मेट्रो स्टेशन बंद होने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों और दूसरे मेट्रो स्टेशनों का सहारा लेना पड़ा। DMRC ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मेट्रो की ताजा जानकारी जरूर जांच लें। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। DMRC ने जारी की यात्रियों के लिए सलाह DMRC की ओर से कहा गया है कि मेट्रो सेवाओं में किसी भी बदलाव की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से साझा की जाएगी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें। फिलहाल सुरक्षा स्थिति को देखते हुए मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध जारी है और आगे का फैसला सुरक्षा एजेंसियों के निर्देश के आधार पर लिया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत ग्रीन ड्राइव पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में बड़े पैमाने पर पौधारोपण को बढ़ावा देना और नागरिकों को सीधे पर्यावरण संरक्षण अभियान से जोड़ना है। सरकार ने इस अभियान के तहत दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब नागरिक घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से greendrive.delhivanmahotsav.in पोर्टल पर जाकर पौधारोपण के लिए स्लॉट बुक कर सकते हैं। इसके साथ ही लोग ‘एनवायरनमेंटल सेवियर’ के रूप में रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और नजदीकी सरकारी नर्सरी से निःशुल्क पौधे प्राप्त कर सकते हैं। इस पोर्टल के जरिए कई सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें पौधारोपण स्लॉट बुकिंग, नर्सरी लोकेटर, और ‘वृक्ष रथ’ सेवा शामिल है। वृक्ष रथ सुविधा के तहत यदि किसी स्कूल, आरडब्ल्यूए या संस्था के पास पर्याप्त जगह है, तो सरकार वहां सीधे पौधे उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने कहा इस मौके पर बड़ी संख्या में ‘दिल्ली ग्रीन वॉरियर्स’ स्वयंसेवक भी मौजूद रहे, जिन्होंने अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल पौधे लगाने की नहीं, बल्कि दिल्ली को हरित, स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने बताया कि पूरी दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में समान रूप से पौधारोपण किया जाएगा। इसके लिए सरकारी नर्सरी से लेकर घरों और संस्थानों तक हर उपलब्ध स्थान का उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम में यह भी जानकारी कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि जुलाई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रिज क्षेत्र पुनरुद्धार कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे और इस दौरान इलेक्ट्रिक बसों को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी। सरकार का दावा है कि यह पोर्टल पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे हर नागरिक ‘ग्रीन वॉरियर’ बनकर योगदान दे सकेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड मामले में जांच तेज हो गई है। इस हादसे में 21 लोगों की मौत के बाद पुलिस अब मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। इसी क्रम में आरोपी होटल मालिक लवकेश बजाज को साकेत कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी से पूछताछ आवश्यक है। जांच के दौरान होटल से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, संचालन संबंधी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जुटाने की जरूरत है। अदालत ने पुलिस की दलीलों को स्वीकार करते हुए रिमांड मंजूर कर ली। आरोपी ने किया रिमांड का विरोध सुनवाई के दौरान लवकेश बजाज ने पुलिस रिमांड का विरोध करते हुए दावा किया कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और हिरासत की आवश्यकता नहीं है। वहीं, उसके वकील ने अदालत में यह भी कहा कि अब तक उन्हें एफआईआर की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस पर दिल्ली पुलिस ने आश्वासन दिया कि नियमानुसार एफआईआर की कॉपी जल्द उपलब्ध करा दी जाएगी। कई एजेंसियां कर रही हैं जांच मामले की जांच को व्यापक रूप से आगे बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस ने नगर निगम (एमसीडी) को पत्र लिखकर होटल भवन का स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्वे कराने का अनुरोध किया है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि इमारत सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी या नहीं। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनी बीएसईएस से भवन के बिजली कनेक्शन और विद्युत प्रणाली से संबंधित जानकारी मांगी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं शॉर्ट सर्किट या विद्युत सुरक्षा में लापरवाही हादसे का कारण तो नहीं बनी। होटल के दस्तावेजों की भी होगी पड़ताल दक्षिण जिला प्रशासन को भी मामले में विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट को होटल के रजिस्ट्रेशन, मालिकाना हक, लाइसेंस और अन्य कानूनी दस्तावेजों की जांच करने को कहा गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि होटल निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत संचालित हो रहा था या नहीं। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।