शिक्षा

दिल्ली की प्राइवेट यूनिवर्सिटी में स्थानीय छात्रों के लिए 25% सीटें

दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए बड़ा प्रस्ताव, स्थानीय छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी में स्थानीय छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटों का प्रस्ताव
दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की 25 प्रतिशत सीटें स्थानीय छात्रों के लिए प्रस्तावित

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सरकार ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी से जुड़ा नया विधेयक मंजूर कर लिया है। प्रस्तावित दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज बिल के तहत राजधानी में स्थापित होने वाली निजी विश्वविद्यालयों में हर पाठ्यक्रम की 25% सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। विधेयक को अब दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा।

 

दिल्ली के छात्रों को मिलेगा 25% सीटों का लाभ

 

प्रस्तावित कानून का सबसे बड़ा प्रावधान स्थानीय छात्रों के लिए सीटों का आरक्षण है। इसके तहत निजी विश्वविद्यालयों के प्रत्येक पाठ्यक्रम में 25% सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए निर्धारित करने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य दिल्ली के विद्यार्थियों को राजधानी में ही उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

 

निजी और विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए रास्ता साफ

 

प्रस्तावित विधेयक दिल्ली में निजी और विदेशी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता आसान करने के साथ-साथ उनके लिए एक नियामक ढांचा तैयार करेगा। इससे विश्वविद्यालयों के संचालन, प्रशासन और जवाबदेही से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा प्रस्ताव में विश्वविद्यालयों को उनकी परिचालन और विकास संबंधी जरूरतों के अनुसार फीस संरचना तय करने की व्यवस्था भी शामिल है।

 

विधानसभा में पेश होगा विधेयक

 

दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने की तैयारी है। कानून बनने के बाद दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों के संचालन और स्थानीय छात्रों के लिए सीटों के प्रावधान को नया कानूनी आधार मिलेगा।

सरकार का कहना है कि इस पहल से दिल्ली के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाने की जरूरत कम हो सकती है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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IIT दिल्ली में PM मोदी ने युवाओं को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया
‘जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है’, IIT दिल्ली में PM मोदी का युवाओं को बड़ा संदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 8 अगस्त 2026 को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवाओं को जीवन और करियर की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है” और छात्रों से बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने, लगातार सीखने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।   ‘जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस’     प्रधानमंत्री ने कहा कि शैक्षणिक परीक्षाओं में सवाल सिलेबस के अनुसार आते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। इसलिए युवाओं को ऐसी चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए, जिनका कोई निर्धारित उत्तर या समाधान पहले से मौजूद नहीं होता।   उन्होंने विद्यार्थियों को केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित सोच रखने के बजाय ज्ञान, कौशल, नवाचार और समस्या समाधान पर ध्यान देने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि असफलता भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है और युवाओं को उससे घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।   AI और तकनीक के दौर में युवाओं की जिम्मेदारी     PM मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), तकनीकी बदलाव और नवाचार को भारत के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश की युवा प्रतिभा इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।   उन्होंने IIT से निकलने वाले युवाओं से अपनी तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार के जरिए भारत की तकनीकी क्षमता को और मजबूत करने पर जोर दिया।   ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का उद्घाटन     दीक्षांत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने IIT दिल्ली के सोनीपत परिसर में ‘परम प्रज्ञा’ AI-सक्षम हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का उद्घाटन भी किया। यह सुविधा AI, डेटा साइंस और उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।   प्रधानमंत्री ने इसे भारत की उन्नत तकनीकी और अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने से जोड़ते हुए युवाओं को इस तरह की नई तकनीकों का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का संदेश दिया।   3,036 विद्यार्थियों ने हासिल की डिग्री     IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में 3,036 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें 587 पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने सभी विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।   अपने संबोधन में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश यही रहा कि IIT से निकलने वाले युवा केवल अपने करियर के लिए नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी, वैज्ञानिक और सामाजिक विकास में योगदान देने के लिए भी तैयार हों।

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दिल्ली यूनिवर्सिटी में DUSU चुनाव 2026 की प्रक्रिया शुरू, चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली विश्वविद्यालय में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव 2026-27 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। विश्वविद्यालय ने चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए मुख्य चुनाव अधिकारी और मुख्य रिटर्निंग अधिकारी की नियुक्ति कर दी है। इसके साथ ही नए सत्र के छात्रसंघ चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।   चुनाव अधिकारियों की हुई नियुक्ति   दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर राज किशोर शर्मा को मुख्य चुनाव अधिकारी और प्रोफेसर राजेश को मुख्य रिटर्निंग अधिकारी की जिम्मेदारी दी है। अधिकारियों की नियुक्ति के साथ अब चुनाव से जुड़ी आगे की प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। DUSU चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे प्रमुख पदों के लिए छात्र प्रतिनिधियों का चुनाव होता है। पिछले चुनाव में मतदान और मतगणना सितंबर 2025 में हुई थी।   प्रचार को लेकर सख्त नियम   इस बार दिल्ली विश्वविद्यालय ने चुनाव प्रचार को लेकर कई नियम लागू किए हैं। विश्वविद्यालय ने मुद्रित प्रचार सामग्री पर पूरी तरह रोक लगाई है। उम्मीदवारों को प्रचार के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। गंभीर स्थिति में नामांकन रद्द किए जाने तक का प्रावधान रखा गया है।   छात्र संगठनों की गतिविधियां तेज   DUSU चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों की गतिविधियां भी तेज होने की उम्मीद है। हाल ही में छात्रों की मांगों को लेकर चल रही भूख हड़ताल भी विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हुई। प्रशासन ने DUSU चुनाव के बाद तीन महीने के भीतर Academic Council में छात्र प्रतिनिधित्व को लेकर कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

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बिहार के सरकारी स्कूलों में आज से शनिवार को फिर लागू हुआ हाफ-डे, नई व्यवस्था के तहत बदला टाइमटेबल

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बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को हाफ डे, 8 अगस्त से लागू होगी नई व्यवस्था

NEET-UG 2027
NEET-UG 2027: नई परीक्षा व्यवस्था पर अभी सस्पेंस, टास्क फोर्स देगी सुझाव

नई दिल्ली, एजेंसियां। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में बदलने को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने बताया कि 2027 से NEET-UG को ऑनलाइन कराने पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। परीक्षा के मौजूदा पेन-पेपर प्रारूप को कंप्यूटर आधारित प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम फैसला नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद किया जाएगा।   सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने क्या कहा?   केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि NEET-UG को मौजूदा पेन-पेपर प्रारूप से कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने का मुद्दा सभी संबंधित पक्षों के साथ विचाराधीन है। सरकार ने साफ किया कि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।   यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले NEET-UG को 2027 से कंप्यूटर आधारित कराने की संभावना को लेकर काफी चर्चा थी। अब केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा का अंतिम प्रारूप टास्क फोर्स की सिफारिशों और आगे की समीक्षा के बाद ही तय किया जाएगा।   नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की रिपोर्ट अहम   परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसका उद्देश्य देश की परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उपायों पर सुझाव देना है।   NEET-UG को CBT में बदलने का प्रस्ताव भी इसी व्यापक परीक्षा सुधार प्रक्रिया से जुड़ा है। सरकार टास्क फोर्स की सिफारिशों को देखने के बाद ही यह तय करेगी कि NEET-UG को किस प्रारूप में आयोजित किया जाना चाहिए।   JEE जैसा हो सकता है परीक्षा का प्रारूप   विचाराधीन प्रस्ताव में NEET-UG को JEE की तर्ज पर कंप्यूटर आधारित और संभवतः दो चरणों में आयोजित करने का विकल्प भी शामिल बताया गया है। हालांकि, यह अभी प्रस्ताव और विचार-विमर्श के स्तर पर है। इसे अंतिम परीक्षा पैटर्न नहीं माना जा सकता।   कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू होने पर प्रश्नपत्र लीक, पेपर की छपाई, वितरण और परीक्षा केंद्रों से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, देशभर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त सुरक्षित CBT केंद्र और तकनीकी व्यवस्था तैयार करना भी बड़ी चुनौती होगी।   NEET अभ्यर्थियों के लिए क्या मतलब?   फिलहाल NEET-UG 2027 की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन होने की पुष्टि मानकर तैयारी बदलने की जरूरत नहीं है। जब तक केंद्र या संबंधित परीक्षा प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक निर्णय और अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक परीक्षा का अंतिम प्रारूप तय नहीं माना जाएगा।   सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा है और अब मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।

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French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
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भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

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