शिक्षा

बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को हाफ डे, 8 अगस्त से लागू होगी नई व्यवस्था

abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
Bihar Government School
Half Day apply on Saturday in Bihar Government School

पटना, एजेंसियां। बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को अब आधे दिन की पढ़ाई होगी। शिक्षा विभाग ने यह व्यवस्था 8 अगस्त 2026 से लागू करने का निर्णय लिया है। शनिवार को स्कूलों में ‘नो बैग डे’ के तहत पढ़ाई के साथ रचनात्मक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी जोर दिया जाएगा।

 

शनिवार को 9:30 बजे से दोपहर तक चलेगा स्कूल

 

नई व्यवस्था के अनुसार सोमवार से शुक्रवार तक सरकारी स्कूलों में कक्षाएं सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक चलेंगी। वहीं शनिवार को स्कूल सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित होंगे। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां दोपहर तक चलेंगी। इसके बाद मध्याह्न भोजन दिया जाएगा और विद्यार्थियों की छुट्टी होगी।

 

‘नो बैग डे’ में होंगी रचनात्मक गतिविधियां

 

शनिवार को विद्यार्थियों पर नियमित पढ़ाई और किताबों का बोझ कम रखने की योजना है। इस दिन संगीत, नाटक, कला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ स्कूल में सीखने के माहौल को अधिक रुचिकर बनाना है। इसके लिए कला और संगीत में प्रशिक्षित शिक्षकों की भी भूमिका तय की जाएगी।

 

शिक्षकों के लिए भी तय किए गए काम

 

विद्यार्थियों की छुट्टी के बाद शिक्षक अपने शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य पूरे करेंगे। इसमें पाठ योजना तैयार करना, विद्यार्थियों के मूल्यांकन से जुड़े काम, अभिलेख अपडेट करना और जरूरत के अनुसार कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त सहायता देना शामिल है।

 

शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया भी तेज

 

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत 73,151 शिक्षकों ने समायोजन और युक्तिकरण के लिए आवेदन किया है। सामान्य शिक्षकों के लिए स्थानांतरण आवेदन का नया चरण 17 सितंबर से शुरू करने की बात कही गई है। विभाग का लक्ष्य पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया को 31 अक्टूबर तक पूरा करना है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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यूपी में सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ी जानकारी
यूपी में 11,508 सहायक अध्यापकों की भर्ती का रास्ता साफ, शहरी स्कूलों के पदों का अधियाचन अपलोड

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 11,508 सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। ताजा अपडेट के अनुसार इन पदों का अधियाचन भर्ती पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। इससे लंबे समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।   11,508 पदों का अधियाचन हुआ अपलोड     शिक्षा विभाग की ओर से शहरी क्षेत्रों के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में खाली पड़े 11,508 सहायक अध्यापक पदों का अधियाचन अपलोड किया गया है। अधियाचन का अर्थ है कि संबंधित विभाग ने रिक्त पदों का विवरण भर्ती कराने वाली व्यवस्था को भेज दिया है।   इस कदम के बाद भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है। अब अभ्यर्थियों की नजर आधिकारिक भर्ती विज्ञापन, पात्रता, आवेदन की तारीख और चयन प्रक्रिया की घोषणा पर है।   ग्रामीण क्षेत्रों के पद भी भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा     उत्तर प्रदेश में शिक्षक पदों की कमी को दूर करने के लिए केवल शहरी क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है।   ताजा रिपोर्टों में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 60 हजार से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की व्यापक तैयारी का भी उल्लेख है। हालांकि, 11,508 पदों वाला आंकड़ा विशेष रूप से नगरीय क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों से संबंधित है।   अभ्यर्थियों को अभी किस बात का इंतजार?     अधियाचन अपलोड होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण आधिकारिक भर्ती विज्ञापन जारी होना है। इसमें पदवार एवं जिलेवार विवरण, शैक्षिक योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण, आवेदन प्रक्रिया और चयन के नियम स्पष्ट होंगे।   इसलिए अभ्यर्थियों को फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रहे आवेदन लिंक या तारीखों पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।

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RRB ALP CBT-2 की आंसर की जारी, 11 अगस्त तक आपत्ति दर्ज करने का मौका

नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) भर्ती परीक्षा के CBT-2 की प्रोविजनल आंसर की जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपनी उत्तर कुंजी और रिस्पॉन्स शीट देखकर संभावित अंकों का अनुमान लगा सकते हैं। अगर किसी प्रश्न या उत्तर को लेकर आपत्ति है तो उम्मीदवार 11 अगस्त 2026 तक आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।   5 अगस्त को जारी हुई आंसर की   RRB ALP CBT-2 की आंसर की 5 अगस्त 2026 को जारी की गई। उम्मीदवारों को अपनी उत्तर कुंजी देखने के लिए संबंधित आरआरबी की वेबसाइट अथवा भर्ती पोर्टल पर लॉगिन करना होगा।   लॉगिन के लिए उम्मीदवारों को अपने पंजीकरण संबंधी विवरण का इस्तेमाल करना होगा। आंसर की के साथ उम्मीदवार अपनी रिस्पॉन्स शीट और प्रश्नपत्र भी देख सकते हैं।   11 अगस्त तक दर्ज कर सकेंगे आपत्ति   उम्मीदवार प्रोविजनल आंसर की में किसी उत्तर को गलत मानते हैं तो निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तारीख 11 अगस्त 2026 है। समय सीमा समाप्त होने के बाद आपत्ति दर्ज करने का अवसर नहीं मिलेगा।   उम्मीदवारों को सलाह है कि आपत्ति दर्ज करने से पहले संबंधित प्रश्न, अपनी रिस्पॉन्स शीट और आधिकारिक उत्तर को ध्यान से जांच लें। आपत्ति के समर्थन में आवश्यक प्रमाण या संदर्भ उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।   ऐसे डाउनलोड करें आंसर की   उम्मीदवार आंसर की देखने के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड के संबंधित पोर्टल पर जाएं। इसके बाद RRB ALP CBT-2 Answer Key लिंक पर क्लिक करके अपने लॉगिन विवरण दर्ज करें। लॉगिन करने के बाद उम्मीदवार अपनी उत्तर कुंजी, रिस्पॉन्स शीट और प्रश्नपत्र देख सकते हैं। इसे डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रखना भी बेहतर रहेगा।   आपत्ति के बाद जारी होगी अंतिम उत्तर कुंजी   प्रोविजनल आंसर की पर प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा के बाद रेलवे भर्ती बोर्ड आवश्यक बदलाव कर सकता है। इसके बाद अंतिम उत्तर कुंजी के आधार पर परीक्षा का मूल्यांकन किया जाएगा।   उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे 11 अगस्त की अंतिम समय सीमा का इंतजार न करें और यदि कोई वास्तविक आपत्ति है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय रहते उसे दर्ज कर दें।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सरकार ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 12वीं के विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए मुफ्त JEE और NEET कोचिंग की पहल शुरू की है। इसके तहत चयनित विद्यार्थियों को एक साल की आवासीय कोचिंग दी जाएगी। खास बात यह है कि कोचिंग के साथ विद्यार्थियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी मुफ्त होगी।   डक्षिणा फाउंडेशन के साथ मिलकर चलेगा कार्यक्रम   यह कार्यक्रम दिल्ली सरकार और Dakshana Foundation के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे मेधावी विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी का अवसर देना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। कोचिंग में JEE और NEET की तैयारी के साथ नियमित मॉक टेस्ट और परीक्षा आधारित अभ्यास भी कराया जाएगा।   चयन परीक्षा के आधार पर होगा चयन   इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों का चयन Joint Dakshana Selection Test (JDST) 2027 के माध्यम से किया जाएगा। दिल्ली के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को कक्षा 12वीं के विज्ञान वर्ग के पात्र विद्यार्थियों तक इस अवसर की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। चयनित छात्रों को एक साल की आवासीय कोचिंग के दौरान पढ़ाई के साथ रहने और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।   आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलेगा फायदा   इस पहल से उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं लेकिन महंगी कोचिंग फीस के कारण तैयारी नहीं कर पाते। सरकार की इस पहल से सरकारी स्कूलों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर संसाधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने का अवसर मिलेगा।

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