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बिहार में मौसम का अलर्ट, आज आंधी-वज्रपात की चेतावनी; 9-10 अगस्त को भारी बारिश के आसार

abhishek singh अगस्त 7, 2026 0
Bihar Weather
Bihar Weather Update

पटना, एजेंसियां। बिहार में मानसून के सक्रिय रहने के बीच मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए बारिश और आंधी-वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 7 अगस्त के पूर्वानुमान के अनुसार आज और 8 अगस्त को राज्य में गरज-चमक और आंधी की स्थिति बन सकती है। वहीं 9 और 10 अगस्त को भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

 

कई दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौर

 

मौसम विभाग के अनुसार बिहार में अगले कई दिनों तक मौसम सक्रिय रहने वाला है। 7 और 8 अगस्त को आंधी-वज्रपात की चेतावनी है, जबकि 9 और 10 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इसके बाद भी 11 से 13 अगस्त तक गरज-चमक और आंधी की स्थिति बनी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के ताजा अलर्ट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

 

आंधी और बिजली गिरने के दौरान सावधानी जरूरी

 

बारिश के साथ आंधी और बिजली गिरने की स्थिति में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। खेतों में काम करने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तेज हवा के दौरान पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर संरचनाओं के आसपास खड़े होने से बचना भी जरूरी है।

 

किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण मौसम अपडेट

 

मानसून की सक्रियता से राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इससे खरीफ फसलों को फायदा मिल सकता है, लेकिन लगातार तेज बारिश होने पर निचले इलाकों में जलजमाव और खेतों में पानी भरने की समस्या भी पैदा हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार सरकार की नई शिक्षक मेंटर योजना
बिहार सरकार का नया शिक्षा मिशन, 20 हजार शिक्षक बनेंगे दूसरे शिक्षकों के मेंटर

पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक नई पहल की तैयारी की है। शिक्षा विभाग राज्य में करीब 20 हजार विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की पहचान करने की योजना बना रहा है। ये शिक्षक अपने-अपने विषय में दूसरे शिक्षकों के लिए मेंटोर की भूमिका निभाएंगे और उन्हें पढ़ाने के बेहतर तरीकों में मदद करेंगे।   कक्षा 9 से ऊपर के शिक्षकों में से होगा चयन     सरकार की योजना के तहत कक्षा 9 और उससे ऊपर पढ़ाने वाले करीब 1.5 लाख शिक्षकों में से विषय के बेहतर जानकार और अनुभवी शिक्षकों की पहचान की जाएगी। चयनित शिक्षकों को उनके विषय में विशेषज्ञता के आधार पर मेंटर की जिम्मेदारी दी जा सकती है।   शिक्षा विभाग का मानना है कि अनुभवी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ अन्य शिक्षकों तक पहुंचाने से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर किया जा सकता है।   शिक्षकों को पढ़ाने के तरीके में मिलेगी मदद     नई व्यवस्था में मेंटर शिक्षक दूसरे शिक्षकों को विषय की तैयारी, कक्षा संचालन और विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से पढ़ाने के संबंध में मार्गदर्शन देंगे। इसका उद्देश्य केवल शिक्षकों की क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि छात्रों के सीखने के परिणामों में भी सुधार करना है।   सरकार का लक्ष्य सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करना और पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाना है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस योजना के बारे में जानकारी दी है।   सरकारी स्कूलों की पढ़ाई मजबूत करने पर जोर     बिहार सरकार शिक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर बदलाव की कोशिश कर रही है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और उनकी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों में अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण सुधारने पर भी जोर दिया जा रहा है।   20 हजार विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को मेंटर के रूप में तैयार करने की योजना इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो बड़ी संख्या में शिक्षकों को अनुभवी साथियों से सीधे मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।

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क्या नीतीश से दूर हो रहा 'लव' समीकरण? बांकीपुर उपचुनाव ने बदली बिहार की जातीय राजनीति की चर्चा

पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चुनाव परिणाम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य की पारंपरिक जातीय राजनीति में बदलाव की शुरुआत हो रही है? खासकर यादव और कुर्मी वोटों के एक साथ आने की चर्चा ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को मिले समर्थन के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कुर्मी समाज का एक वर्ग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू से दूरी बना रहा है, या फिर यह केवल उपचुनाव तक सीमित एक राजनीतिक संदेश था। बिहार की राजनीति में 'सोशल इंजीनियरिंग' का इतिहास मंडल राजनीति के बाद बिहार में जातीय समीकरण चुनावी राजनीति की धुरी रहे हैं। एक समय लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण बेहद प्रभावी रहा। दूसरी ओर, वर्ष 1994 में नीतीश कुमार ने लालू यादव से अलग होकर जॉर्ज फर्नांडिस के साथ समता पार्टी बनाई और बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के जरिए 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी/कुशवाहा) सामाजिक समीकरण को मजबूत किया। इसी सामाजिक समीकरण और भाजपा के सवर्ण एवं वैश्य समर्थन के साथ एनडीए ने बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई और लंबे समय तक सत्ता में रहा। क्या यादव और कुर्मी वोट एक मंच पर आ रहे हैं? बांकीपुर उपचुनाव के बाद चर्चा इस बात की है कि जन सुराज के उम्मीदवार को यादव और कुर्मी दोनों वर्गों का समर्थन मिला। यदि यह आकलन सही है, तो यह बिहार की पारंपरिक जातीय राजनीति में एक नए समीकरण की संभावना का संकेत माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि एक उपचुनाव के आधार पर पूरे राज्य की राजनीति का आकलन नहीं किया जा सकता। कुर्मी समाज की नाराजगी बनी चर्चा का विषय राजनीतिक विश्लेषणों में यह भी कहा जा रहा है कि बांकीपुर उपचुनाव ऐसे समय हुआ जब मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने को लेकर कुर्मी समाज के एक वर्ग में असंतोष था। इसके साथ ही जदयू के संगठनात्मक नेतृत्व में बदलाव और पार्टी की कार्यशैली को लेकर भी कुछ वर्गों में नाराजगी की चर्चा रही। विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों का असर उपचुनाव में देखने को मिला, जहां कुछ पारंपरिक वोट बैंक में बदलाव के संकेत दिखाई दिए। क्या यह बदलाव स्थायी है? वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क का मानना है कि बांकीपुर में दिखाई दिया यह राजनीतिक समीकरण फिलहाल परिस्थितिजन्य हो सकता है। उनके अनुसार, कुर्मी समाज में नाराजगी जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह स्थायी रूप से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ जाएगा। उनका कहना है कि यदि जदयू भविष्य में अपने पारंपरिक समर्थकों का भरोसा दोबारा जीतने में सफल नहीं होती, तो कुर्मी वोटों का एक हिस्सा जन सुराज की ओर जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं और भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी संभव नहीं है। राजनीतिक संकेतों पर सबकी नजर बांकीपुर उपचुनाव ने यह जरूर संकेत दिया है कि बिहार की राजनीति में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि यह बदलाव स्थायी होगा या सिर्फ उपचुनाव तक सीमित रहेगा, इसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियां ही देंगी।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
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Patna Airport expands daily flight operations to 78 and launches its first direct flight service to Bhopal from August 10.
पटना एयरपोर्ट से यात्रियों को बड़ी सौगात, अब रोज 78 फ्लाइट्स; पहली बार भोपाल के लिए शुरू होगी सीधी हवाई सेवा

पटना: बिहार की राजधानी पटना से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अगस्त से लागू नई उड़ान समय-सारिणी के तहत अब पटना एयरपोर्ट से प्रतिदिन 78 उड़ानों (39 आगमन और 39 प्रस्थान) का संचालन होगा। इससे यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक उड़ान विकल्प और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि 10 अगस्त से पहली बार पटना और भोपाल के बीच सीधी विमान सेवा भी शुरू होने जा रही है। जुलाई के मुकाबले बढ़ी उड़ानों की संख्या नई समय-सारिणी लागू होने के बाद पटना एयरपोर्ट पर रोजाना 39 विमान उड़ान भरेंगे और 39 विमान यहां उतरेंगे। यानी कुल 78 उड़ानों का संचालन होगा। इससे पहले जुलाई महीने में पटना एयरपोर्ट से प्रतिदिन औसतन 62 से 64 उड़ानों का ही संचालन हो रहा था। नई व्यवस्था से यात्रियों को टिकट उपलब्धता और यात्रा के समय में अधिक विकल्प मिलेंगे। 10 अगस्त से शुरू होगी पटना-भोपाल डायरेक्ट फ्लाइट पटना और भोपाल के बीच पहली बार सीधी हवाई सेवा शुरू की जा रही है। एलायंस एयर 72 सीटों वाले ATR विमान से कोलकाता–पटना–भोपाल सेक्टर पर यह सेवा संचालित करेगी। फ्लाइट का शेड्यूल दोपहर 1:15 बजे कोलकाता से पटना पहुंचेगी। 1:40 बजे पटना से भोपाल के लिए उड़ान भरेगी। शाम 7:00 बजे भोपाल से पटना पहुंचेगी। 7:30 बजे पटना से कोलकाता के लिए रवाना होगी। शुरुआत में यह सेवा सप्ताह के चुनिंदा दिनों में उपलब्ध रहेगी। पटना से भोपाल: सोमवार, बुधवार और रविवार भोपाल से पटना: रविवार इस नई सेवा से बिहार और मध्य प्रदेश के बीच व्यापार, शिक्षा, सरकारी कार्य और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दिल्ली जाने वालों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा नई उड़ान व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ दिल्ली जाने वाले यात्रियों को मिलेगा। अब पूरे दिन अलग-अलग समय पर कई उड़ानें उपलब्ध रहेंगी। सुबह की पहली फ्लाइट एयर इंडिया एक्सप्रेस की होगी, जो सुबह 7:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होगी। रात की अंतिम फ्लाइट इंडिगो की होगी, जो रात 10:10 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरेगी। इससे बिजनेस ट्रैवलर्स, छात्रों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा का बेहतर विकल्प मिलेगा। किन शहरों के लिए कितनी उड़ानें? नई समय-सारिणी के तहत दिल्ली सबसे व्यस्त रूट रहेगा। दिल्ली: 14 जोड़ी उड़ानें मुंबई: 4 जोड़ी उड़ानें हैदराबाद: 4 जोड़ी उड़ानें बेंगलुरु: 4 जोड़ी उड़ानें कोलकाता: 3 जोड़ी उड़ानें पुणे: 2 जोड़ी उड़ानें नवी मुंबई: 1 जोड़ी उड़ान चंडीगढ़, रांची और लखनऊ सहित अन्य शहरों के लिए भी नियमित उड़ानें उपलब्ध रहेंगी। देर रात तक रहेगा उड़ानों का संचालन नई व्यवस्था के तहत पटना एयरपोर्ट पर देर रात तक विमानों का संचालन जारी रहेगा। पुणे से आने वाली इंडिगो की फ्लाइट रात करीब 2:00 बजे पटना पहुंचेगी। वहीं दिन की अंतिम प्रस्थान उड़ान रात 2:55 बजे पुणे के लिए रवाना होगी। यह सेवा सप्ताह के सभी सातों दिन उपलब्ध रहेगी, जिससे देर रात यात्रा करने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी। यात्रियों को क्या होगा फायदा? उड़ानों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को टिकट मिलने में आसानी होगी, यात्रा के लिए अधिक समय विकल्प मिलेंगे और देश के प्रमुख शहरों से पटना की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और अब भोपाल के लिए बढ़ी हवाई सेवाएं बिहार के व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति देंगी।  

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