थिम्फू, एजेंसियां। भारत और भूटान ने द्विपक्षीय विकास सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने ₹4,000 करोड़ की रियायती क्रेडिट लाइन के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही भूटान के 13वें पंचवर्षीय योजना के तहत ₹332 करोड़ की लागत वाले 12 नए विकास प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी गई है। दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। ₹4,000 करोड़ की क्रेडिट लाइन से विकास को मिलेगा बढ़ावा नई क्रेडिट लाइन का उद्देश्य भूटान में बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े कार्यों को वित्तीय सहायता देना है। भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चल रहे विकास सहयोग में यह समझौता दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। 12 नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च होंगे ₹332 करोड़ भारत और भूटान ने Project Tied Assistance (PTA) के तहत 12 नए विकास प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत करीब ₹332 करोड़ है। दोनों देशों ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत पहले से चल रही भारत समर्थित परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई। भारत-भूटान साझेदारी में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। नए समझौतों से इन क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। विकास साझेदारी को नई मजबूती भारत और भूटान के बीच विकास सहयोग दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। 13वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भारत ने भूटान के विकास के लिए करीब ₹10,000 करोड़ की सहायता का प्रावधान किया है। नए प्रोजेक्ट्स और क्रेडिट लाइन से भूटान की विकास योजनाओं को गति मिलने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी टेक कंपनी एप्पल ने भारत में जून 2026 तिमाही के दौरान अब तक का अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) टिम कुक ने बताया कि भारत में इस अवधि के दौरान एप्पल का राजस्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जबकि मैक (Mac) कंप्यूटरों की बिक्री ने भी नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया। कंपनी ने भारत को अपने सबसे तेज़ी से बढ़ते वैश्विक बाजारों में शामिल बताया। मैक कंप्यूटरों की बिक्री में ऐतिहासिक बढ़त एप्पल के अनुसार, जून तिमाही में भारत में मैक कंप्यूटरों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। बढ़ती प्रीमियम डिवाइस मांग, कॉर्पोरेट ग्राहकों की खरीद और शिक्षा क्षेत्र में उपयोग बढ़ने से मैक की बिक्री अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप की लागत बढ़ी हुई है। भारत बना एप्पल के लिए रणनीतिक बाजार टिम कुक ने कहा कि भारत एप्पल के सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे बाजारों में से एक बन गया है। कंपनी देश में अपने रिटेल नेटवर्क, स्थानीय विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला का लगातार विस्तार कर रही है। भारत में बढ़ती आईफोन और अन्य एप्पल उत्पादों की मांग कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति को मजबूती दे रही है। 'मेक इन इंडिया' से मिला बड़ा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में स्थानीय उत्पादन और आईफोन निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी से एप्पल को बड़ा लाभ मिला है। भारत अब कंपनी के वैश्विक विनिर्माण और निर्यात नेटवर्क का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, जिससे आने वाले समय में एप्पल की बाजार हिस्सेदारी और निवेश दोनों के बढ़ने की उम्मीद है।
मुंबई, एजेंसियां। भारत के मैसेजिंग ऐप मार्केट में अपनी जगह मजबूत करने के लिए Zoho के Arattai ऐप ने पहचान सत्यापन और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर्स पेश किए हैं। कंपनी का फोकस फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन धोखाधड़ी को कम करने पर है। Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन से बढ़ेगी सुरक्षा Zoho के Arattai ऐप में Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन फीचर जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की पहचान को अधिक भरोसेमंद बनाना और नकली प्रोफाइल की संख्या कम करना है। Aadhaar वेरिफिकेशन के जरिए यूजर अपनी डिजिटल पहचान को प्रमाणित कर सकेंगे। प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर कंपनी का फोकस Arattai ऐप को Zoho ने प्राइवेसी-केंद्रित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है। ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, सिक्योर चैट और कॉलिंग जैसे फीचर्स उपलब्ध हैं। कंपनी का कहना है कि यूजर्स की सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी उसकी प्राथमिकता है। फर्जी अकाउंट और साइबर फ्रॉड पर लगेगी रोक मैसेजिंग ऐप्स पर बढ़ते फर्जी अकाउंट, स्कैम और पहचान चोरी के मामलों को देखते हुए पहचान सत्यापन फीचर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Aadhaar आधारित वेरिफिकेशन से सही यूजर की पहचान करने में मदद मिल सकती है और प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ सकता है। WhatsApp को टक्कर देने की तैयारी Zoho का Arattai ऐप भारतीय मैसेजिंग मार्केट में WhatsApp जैसे बड़े प्लेटफॉर्म को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। कंपनी लगातार नए फीचर्स जोड़कर ऐप को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाने पर काम कर रही है।
ग्लासगो, एजेंसियां। भारतीय लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। यह भारत के लिए एथलेटिक्स में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अंतिम लैप में शानदार वापसी बारिश से प्रभावित मुकाबले में गुलवीर सिंह ने शुरुआत में संयम बनाए रखा और अंतिम लैप में शानदार रफ्तार दिखाते हुए दूसरे स्थान पर फिनिश किया। उनकी रणनीतिक दौड़ और दमदार फिनिश ने उन्हें ऐतिहासिक रजत पदक दिलाया। इस प्रदर्शन ने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिलाई है। भारत के पदक अभियान को मिली मजबूती गुलवीर सिंह के रजत पदक से भारत के पदक अभियान को नई गति मिली। इससे पहले भारत को इस स्पर्धा में कभी पदक नहीं मिला था। खेल विशेषज्ञों ने इसे भारतीय लंबी दूरी की दौड़ के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है और कहा है कि यह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। राष्ट्रपति समेत खेल जगत ने दी बधाई गुलवीर सिंह की इस ऐतिहासिक सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत कई खेल हस्तियों और प्रशंसकों ने उन्हें बधाई दी। सोशल मीडिया पर भी उनकी उपलब्धि की जमकर सराहना हो रही है और इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए यादगार पल बताया जा रहा है।
नागोया, एजेंसियां। एशियन गेम्स 2026 के क्रिकेट मुकाबलों का आधिकारिक ड्रॉ जारी कर दिया गया है। ड्रॉ के अनुसार भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग हिस्सों में रखा गया है, जिससे दोनों टीमों के बीच मुकाबला केवल फाइनल में ही संभव होगा। दोनों टीमें अपने-अपने हिस्से से जीतकर फाइनल में पहुंचती हैं, तभी क्रिकेट प्रेमियों को बहुप्रतीक्षित भारत-पाकिस्तान मुकाबला देखने को मिलेगा। भारत और पाकिस्तान को मिला सीधा क्वार्टर फाइनल प्रवेश टी20 रैंकिंग के आधार पर भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और मेजबान जापान को पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता में सीधा क्वार्टर फाइनल खेलने का मौका मिला है। वहीं बाकी टीमें प्रारंभिक दौर के मुकाबले खेलकर नॉकआउट में जगह बनाएंगी। भारत मौजूदा एशियन गेम्स का डिफेंडिंग चैंपियन है और एक बार फिर स्वर्ण पदक बचाने के इरादे से उतरेगा। फाइनल में हो सकती है हाई-वोल्टेज भिड़ंत ड्रॉ के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों टीमें अपने-अपने नॉकआउट मुकाबले जीतकर फाइनल तक पहुंच पाती हैं। यदि ऐसा होता है, तो एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जा सकता है। आयोजन समिति के अनुसार क्रिकेट प्रतियोगिता 17 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच जापान के आइची-नागोया में आयोजित होगी।
सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की है। आमतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी और भविष्य की तकनीकों पर अपने विचार साझा करने वाले वेम्बु ने इस बार देश के मौजूदा घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ प्रदर्शन भारत की प्रगति को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि देश को विकास की राह से भटकाने वाले ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने देना चाहिए। सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा? श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने पोस्ट में कहा कि उनके अनुसार दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोग भारत को अराजकता की ओर धकेलना चाहते हैं और देश की प्रगति को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि ऐसे इरादों को विफल करना आवश्यक है और भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाली ताकतों को सफल नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां जनता अपनी सामूहिक राय चुनावों के माध्यम से व्यक्त करती है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव ही जनमत व्यक्त करने का सबसे उचित माध्यम हैं। किस पोस्ट के जवाब में आई प्रतिक्रिया? श्रीधर वेम्बु की यह टिप्पणी उद्योग जगत से जुड़े विचारक एस. गुरुमूर्ति की एक सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में आई। इसके बाद उनका बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। तकनीकी विकास पर जताई चिंता वेम्बु का मानना है कि भारत इस समय टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर निर्माण और एयरोस्पेस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में लंबे समय तक चलने वाले विवाद और प्रदर्शन देश की विकास गति को प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार भारत के सामने आज वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का बड़ा अवसर है और इस दिशा में स्थिर माहौल बेहद जरूरी है। पहले भी प्रगति को लेकर जताई थी उम्मीद हाल ही में किए गए एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में श्रीधर वेम्बु ने भारत की तकनीकी प्रगति की सराहना की थी। उन्होंने लिखा था कि पिछले एक दशक में भारत ने सेमीकंडक्टर फैब, एयरोस्पेस और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा था कि भारत अभी भी लंबा सफर तय कर रहा है, लेकिन देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार कुछ ताकतें भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं, फिर भी उन्हें विश्वास है कि अंततः जीत भारत की ही होगी। AI को लेकर क्या सोचते हैं श्रीधर वेम्बु? श्रीधर वेम्बु अक्सर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की तकनीकों पर अपने विचार साझा करते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि दुनिया भर में AI में हो रहा भारी निवेश इस सोच पर आधारित है कि आने वाले वर्षों में यही सबसे प्रभावशाली तकनीक बनेगी। उनका मानना है कि AI केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह— कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज खोजने में मदद करेगा। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान विकसित करेगा। शहरों में सस्ते आवास जैसी समस्याओं के समाधान खोजने में योगदान देगा। विभिन्न उद्योगों और तकनीकों को नए सिरे से विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बयान बना चर्चा का विषय दिल्ली में जारी प्रदर्शनों के बीच श्रीधर वेम्बु का यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। जहां कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इससे अलग राय भी व्यक्त कर रहे हैं। फिलहाल यह बयान देश में विकास, लोकतंत्र और विरोध-प्रदर्शन की भूमिका को लेकर नई बहस का हिस्सा बन गया है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने का ऐलान किया है। नए आदेश के तहत भारत से अमेरिका जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के Section 301 के तहत लिया गया है और शुक्रवार से प्रभावी हो गया। भारत को 12.5% के बजाय 10% टैरिफ, नीति बदलाव का मिला लाभ अमेरिका ने शुरुआत में भारत पर 12.5% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारत द्वारा फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम) से बने उत्पादों के आयात पर रोक संबंधी नीति में बदलाव करने के बाद टैरिफ दर घटाकर 10% कर दी गई। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, उन्हें कम दर पर शुल्क लगाया गया है। व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि नए टैरिफ का असर भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है, हालांकि 10% की दर अन्य कई देशों की तुलना में कम है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी अब दोनों देशों की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस फैसले के बाद वैश्विक व्यापार जगत की नजर दोनों देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई है।
नई दिल्ली: 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित तमिल के प्रख्यात साहित्यकार, गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु ने भारतीय भाषाओं, खासकर तमिल साहित्य की वैश्विक पहचान को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि तमिल साहित्य का समृद्ध खजाना अनुवाद की कमी के कारण दुनिया तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे कई महान रचनाकारों को उनका उचित सम्मान नहीं मिल पाता। पीटीआई के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह के बाद वैरामुथु ने कहा कि तमिल भाषा का विशाल साहित्य न तो पर्याप्त रूप से दूसरी भारतीय भाषाओं में अनुवादित हुआ है और न ही विदेशी भाषाओं में। इसी वजह से तमिल साहित्य की उत्कृष्ट कृतियां अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक नहीं पहुंच पाती हैं। चार दशक के साहित्यिक योगदान का मिला सम्मान आर. वैरामुथु को 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार उनके चार दशक से अधिक लंबे साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। उन्होंने कविता, उपन्यास, निबंध और फिल्मी गीतों के माध्यम से तमिल साहित्य को नई पहचान दिलाई है। साहित्य के साथ-साथ सिनेमा में भी उनके योगदान को व्यापक सराहना मिली है। 'कल्लिक्कट्टू एथिकासम' से मिली विशेष पहचान ज्ञानपीठ सम्मान के दौरान उनकी चर्चित कृति 'कल्लिक्कट्टू एथिकासम' (Kallikattu Ithikasam) का विशेष उल्लेख किया गया। यह उपन्यास ग्रामीण जीवन, विस्थापन और मानवीय संघर्ष की संवेदनशील कहानी प्रस्तुत करता है। इसी कृति के लिए वैरामुथु को वर्ष 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था। इसे आधुनिक तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में गिना जाता है। भारतीय भाषाओं के अनुवाद पर फिर शुरू हुई बहस वैरामुथु के बयान के बाद भारतीय भाषाओं के साहित्य के अनुवाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लंबे समय से साहित्यकार यह मांग करते रहे हैं कि भारतीय भाषाओं की उत्कृष्ट रचनाओं का बड़े पैमाने पर अनुवाद किया जाए, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पाठकों तक पहुंच सकें। वैश्विक पहचान के लिए अनुवाद जरूरी वैरामुथु का मानना है कि यदि तमिल सहित सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य का व्यवस्थित और व्यापक अनुवाद किया जाए, तो भारतीय साहित्य को वैश्विक स्तर पर कहीं अधिक पहचान और सम्मान मिल सकता है। उनके अनुसार, भाषा नहीं बल्कि अनुवाद की कमी भारतीय साहित्य की अंतरराष्ट्रीय पहुंच में सबसे बड़ी बाधा है।
भारत का एक स्टार्टअप इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जो भविष्य में चीन पर निर्भरता कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। बेंगलुरु स्थित Vimag Labs ने एक ऐसा इलेक्ट्रिक मोटर तैयार किया है, जिसमें रेयर अर्थ मैग्नेट (Rare Earth Magnets) की जरूरत नहीं पड़ती। कंपनी का दावा है कि यह मोटर सॉफ्टवेयर की मदद से पारंपरिक मैग्नेट की तरह काम करता है और प्रदर्शन के मामले में मौजूदा तकनीक को कड़ी टक्कर दे सकता है। कोरोना काल की समस्या से जन्मा नया आइडिया Vimag Labs के सह-संस्थापक और CEO मनीष सेठ के अनुसार, वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान कंपनी के मोटर प्रोटोटाइप के लिए जरूरी मैग्नेट शंघाई पोर्ट पर कई महीनों तक फंसे रहे। इस अनुभव ने उन्हें ऐसी तकनीक विकसित करने की प्रेरणा दी, जिससे भविष्य में विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम की जा सके। इसके बाद कंपनी ने पूरी तरह मैग्नेट-फ्री और रेयर अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक मोटर विकसित करने पर काम शुरू किया। क्यों जरूरी हैं रेयर अर्थ मैग्नेट? आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस मोटरों में नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) जैसे रेयर अर्थ मैग्नेट का उपयोग किया जाता है। ये मोटर की ताकत, दक्षता, टॉर्क और बैटरी की रेंज बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर इन मैग्नेट की सप्लाई पर चीन का दबदबा है। रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया के अधिकांश रेयर अर्थ मिनरल्स और उनसे बनने वाले मैग्नेट की सप्लाई चीन के नियंत्रण में है। ऐसे में किसी भी तरह की निर्यात पाबंदी या सप्लाई बाधित होने पर पूरी EV इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती है। सॉफ्टवेयर से तैयार होता है 'वर्चुअल मैग्नेट' Vimag Labs की सबसे बड़ी खासियत इसकी Software-Defined Magnet तकनीक है। इस तकनीक में पारंपरिक स्थायी मैग्नेट की जगह कॉपर कॉइल और स्टील का उपयोग किया जाता है। इसके बाद विशेष सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम के जरिए मोटर के अंदर आवश्यक चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) तैयार किया जाता है। कंपनी का कहना है कि इस तकनीक से मोटर का प्रदर्शन पारंपरिक Permanent Magnet Synchronous Motor (PMSM) के बराबर या कई परिस्थितियों में उससे बेहतर हो सकता है। बैटरी की बचत और बेहतर रेंज का दावा कंपनी के मुताबिक, सॉफ्टवेयर के जरिए चुंबकीय क्षेत्र को लगातार नियंत्रित किया जा सकता है। इससे मोटर अधिक दक्षता के साथ काम करता है और वाहन की बैटरी पर कम दबाव पड़ता है। इसका सीधा फायदा वाहन की ड्राइविंग रेंज बढ़ने और बैटरी की लागत कम होने के रूप में मिल सकता है। साथ ही, भविष्य में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए मोटर के प्रदर्शन में सुधार भी किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक मैग्नेट वाले मोटरों में ऐसा संभव नहीं होता। भारत में ही हो सकता है पूरा निर्माण इस मोटर के निर्माण में मुख्य रूप से कॉपर, स्टील और सामान्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उपयोग किया जाता है। इसलिए इसका उत्पादन पूरी तरह भारत में किया जा सकता है और रेयर अर्थ मैटेरियल पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है। कंपनी का मानना है कि भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के साथ इस तकनीक की लागत भी भविष्य में और कम होगी। कई कंपनियों के साथ चल रही है टेस्टिंग Vimag Labs फिलहाल इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों पर फोकस कर रही है। कंपनी ने कई प्रमुख वाहन निर्माताओं के साथ अपनी तकनीक की टेस्टिंग शुरू कर दी है। इसके अलावा, एक प्रमुख कमर्शियल थ्री-व्हीलर पावरट्रेन सप्लायर और भारत की अग्रणी यात्री वाहन कंपनियों के साथ भी तकनीकी सहयोग पर काम चल रहा है। कंपनी यूरोप के ऑटोमोबाइल उद्योग के साथ भी इस तकनीक को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस साल हजारों मोटर सप्लाई करने की तैयारी कंपनी का लक्ष्य इस वर्ष अपने उत्पादन को बढ़ाकर 1,000 से 10,000 मोटर तक पहुंचाने का है। इसके लिए Vimag Labs निवेश जुटाने की तैयारी भी कर रही है। कंपनी इससे पहले लगभग 5 मिलियन डॉलर की Series A फंडिंग हासिल कर चुकी है। भविष्य की योजना में शामिल है अपना चिप Vimag Labs भविष्य में अपने मोटर के लिए विशेष Application-Specific Integrated Circuit (ASIC) विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। कंपनी का दावा है कि इससे मोटर के इलेक्ट्रॉनिक्स की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है और वैश्विक चिप सप्लाई पर निर्भरता भी घटेगी। साथ ही कंपनी इलेक्ट्रिक ट्रक, बसों और रक्षा क्षेत्र में इस तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। भारत के लिए क्यों अहम है यह तकनीक? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भारत इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में आयातित रेयर अर्थ मैग्नेट पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी, उत्पादन लागत घटेगी और देश की डीप-टेक एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडस्ट्री को नई गति मिल सकती है।
भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने भारत में ₹1,34,166 कीमत वाला नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है। इसकी कीमत Apple के iPhone 17 Pro से भी अधिक है। हालांकि, यह फोन प्रीमियम स्मार्टफोन से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। इसका उद्देश्य उन जगहों पर संचार सुविधा उपलब्ध कराना है, जहां मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं पहुंचता। यह फोन खास तौर पर रक्षा बलों, आपदा राहत एजेंसियों, समुद्री क्षेत्रों, खनन उद्योग और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले लोगों के लिए तैयार किया गया है। क्या है BSNL का सैटेलाइट फोन? BSNL का यह डिवाइस Global Satellite Phone Service (GSPS) का हिस्सा है। सामान्य मोबाइल फोन जहां नजदीकी मोबाइल टावर से जुड़ते हैं, वहीं यह फोन सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट होता है। इसके जरिए ऐसे क्षेत्रों में भी वॉयस कॉल और SMS किए जा सकते हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता। फोन में मजबूत (Rugged) डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ और SOS इमरजेंसी फीचर भी दिया गया है, जिससे कठिन परिस्थितियों में भी इसका उपयोग किया जा सके। इतनी ज्यादा कीमत क्यों है? BSNL के सैटेलाइट फोन की ऊंची कीमत की सबसे बड़ी वजह इसकी विशेष तकनीक है। यह डिवाइस सामान्य मोबाइल टावर के बजाय Inmarsat जैसे वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क से सीधे जुड़ता है। इसके लिए विशेष एंटीना, सैटेलाइट कम्युनिकेशन हार्डवेयर और उन्नत तकनीक की जरूरत होती है, जिसकी लागत सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में काफी अधिक होती है। इसके अलावा, सैटेलाइट फोन सीमित संख्या में बनाए जाते हैं, जिससे उनकी निर्माण लागत भी बढ़ जाती है। केवल फोन खरीदना ही काफी नहीं इस फोन का उपयोग करने के लिए केवल डिवाइस खरीदना पर्याप्त नहीं है। उपयोगकर्ताओं को BSNL की सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवा का प्लान भी लेना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार— व्यावसायिक (Commercial) प्लान लगभग ₹5,835 प्रति माह से शुरू होते हैं। सरकारी उपयोगकर्ताओं के लिए प्लान ₹3,500 प्रति माह से उपलब्ध हैं। तय फ्री टॉकटाइम के बाद कॉल और SMS के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा। iPhone के Satellite फीचर से कैसे अलग है? Apple के iPhone में उपलब्ध Emergency SOS via Satellite फीचर केवल आपातकालीन स्थिति के लिए बनाया गया है। जब मोबाइल नेटवर्क और Wi-Fi उपलब्ध नहीं होता, तब उपयोगकर्ता इसके जरिए इमरजेंसी सेवाओं से संपर्क कर सकते हैं या अपनी लोकेशन साझा कर सकते हैं। वहीं BSNL का सैटेलाइट फोन एक पूर्ण सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस है। इसकी मदद से उपयोगकर्ता बिना किसी मोबाइल टावर के नियमित रूप से— वॉयस कॉल कर सकते हैं। SMS भेज सकते हैं। दूरस्थ इलाकों में लगातार संचार बनाए रख सकते हैं। यानी iPhone का सैटेलाइट फीचर केवल आपात स्थिति के लिए है, जबकि BSNL का फोन रोजमर्रा के सैटेलाइट संचार के लिए तैयार किया गया है। किन लोगों के लिए उपयोगी है यह फोन? BSNL के अनुसार यह फोन विशेष रूप से इन क्षेत्रों के लिए उपयोगी है— रक्षा बल आपदा प्रबंधन एजेंसियां समुद्री जहाज और तटीय संचालन खनन उद्योग दूरदराज के औद्योगिक क्षेत्र तीर्थयात्री एडवेंचर ट्रैवलर ऐसे क्षेत्र जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है क्या कोई भी खरीद सकता है? नहीं। भारत में सैटेलाइट फोन का उपयोग कड़े नियमों के तहत होता है। इसे खरीदने और इस्तेमाल करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। बिना वैध अनुमति के सैटेलाइट फोन का उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। क्यों है यह फोन खास? हालांकि इसकी कीमत किसी फ्लैगशिप स्मार्टफोन से अधिक है, लेकिन BSNL का सैटेलाइट फोन मनोरंजन या कैमरा फीचर्स के लिए नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों के लिए बनाया गया है जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह विफल हो जाता है। यही वजह है कि यह डिवाइस सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संचार उपकरण माना जा रहा है।
नई दिल्ली: भारत सदियों से अपनी समृद्ध वस्त्र परंपरा के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कश्मीर का पश्मीना, असम का मूंगा रेशम, तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी, मध्य प्रदेश की चंदेरी और सूरत का टेक्सटाइल उद्योग भारतीय शिल्प और कौशल की पहचान रहे हैं। अब केंद्र सरकार इसी विरासत को आधुनिक औद्योगिक ढांचे से जोड़कर भारत को वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में 4,445 करोड़ रुपये के बजट के साथ PM MITRA (Mega Integrated Textile Region and Apparel) योजना शुरू की। इस योजना का उद्देश्य पूरे टेक्सटाइल वैल्यू चेन को एक ही परिसर में विकसित कर उत्पादन लागत कम करना, निर्यात बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है टेक्सटाइल उद्योग भारत का वस्त्र एवं परिधान उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। GDP में लगभग 2.3% योगदान औद्योगिक उत्पादन में 13% हिस्सेदारी कुल निर्यात में करीब 12% योगदान लगभग 4.5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। क्यों महसूस हुई नए मॉडल की जरूरत? अब तक भारत का टेक्सटाइल उद्योग अलग-अलग राज्यों में बिखरा हुआ था। कपास उत्पादन, धागा निर्माण, बुनाई, प्रोसेसिंग, गारमेंट निर्माण और निर्यात जैसी गतिविधियां अलग-अलग स्थानों पर होने के कारण— उत्पादन लागत बढ़ती थी। समय अधिक लगता था। लॉजिस्टिक्स महंगे पड़ते थे। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती थी। सरकार का मानना है कि एकीकृत टेक्सटाइल पार्क इन चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। PM MITRA योजना का '5F' विजन इस योजना की नींव प्रधानमंत्री मोदी के '5F' विजन पर आधारित है— Farm to Fiber Fiber to Factory Factory to Fashion Fashion to Foreign इस मॉडल का उद्देश्य किसानों, बुनकरों, उद्योगों और निर्यातकों को एक ही इकोसिस्टम से जोड़ना है, जिससे पूरी सप्लाई चेन अधिक तेज, सस्ती और प्रतिस्पर्धी बन सके। सात राज्यों में विकसित हो रहे हैं PM MITRA पार्क देशभर में कुल 7 PM MITRA पार्क विकसित किए जा रहे हैं। ग्रीनफील्ड परियोजनाएं: विरुधुनगर (तमिलनाडु) नवसारी (गुजरात) कलबुर्गी (कर्नाटक) धार (मध्य प्रदेश) लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ब्राउनफील्ड परियोजनाएं: वारंगल (तेलंगाना) अमरावती (महाराष्ट्र) इन पार्कों में 1,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में कताई, बुनाई, प्रोसेसिंग, गारमेंट निर्माण और निर्यात से जुड़ी इकाइयों को एक साथ विकसित किया जाएगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर PM MITRA पार्कों में उद्योगों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें— प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर रेडी-टू-मूव फैक्ट्री शेड समर्पित बिजली सब-स्टेशन निरंतर जलापूर्ति कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) Zero Liquid Discharge (ZLD) तकनीक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी इन सुविधाओं से उत्पादन लागत कम होगी, लॉजिस्टिक्स तेज होंगे और पर्यावरणीय मानकों का बेहतर पालन किया जा सकेगा। निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा सरकार के अनुसार, PM MITRA योजना के तहत अब तक लगभग 69,899 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जबकि 27,658 करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर उतर चुका है। अनुमान है कि प्रत्येक पार्क से करीब 3 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। सातों पार्क मिलकर 21 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। 2030 तक 350 अरब डॉलर का लक्ष्य सरकार का लक्ष्य है कि 'Vision 2030' के तहत भारत के वस्त्र एवं परिधान उद्योग को 350 अरब डॉलर के वैश्विक उद्योग के रूप में विकसित किया जाए। PM MITRA पार्क इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की आधारशिला माने जा रहे हैं, जो भारत को वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन में और मजबूत स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनावपूर्ण संबंधों के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने शांति और संवाद की नई पहल की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को लिखे संयुक्त पत्र में दोनों देशों से टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने और द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने की अपील की गई है। पत्र पर भारत की 61 और पाकिस्तान की 56 हस्तियों के हस्ताक्षर हैं। पूर्व नेताओं और सामाजिक हस्तियों ने की पहल पत्र पर भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah, Mehbooba Mufti, राज्यसभा सांसद Manoj Jha सहित कई पूर्व अधिकारी, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री Khurshid Mahmud Kasuri समेत कई प्रमुख हस्तियां इस पहल का हिस्सा बनी हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती शत्रुता से दोनों देशों के विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और आम नागरिकों के हित प्रभावित हो रहे हैं। 11 प्रमुख मांगें रखीं संयुक्त पत्र में दोनों सरकारों के सामने 11 प्रमुख सुझाव रखे गए हैं। इनमें द्विपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू करना, जम्मू-कश्मीर सहित सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत, सीमा पर सैन्य तनाव कम करना, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान बहाल करना, क्रिकेट और अन्य खेलों की द्विपक्षीय श्रृंखला शुरू करना, सीधी हवाई सेवाएं बहाल करना, वीजा प्रक्रिया सरल बनाना, दोनों देशों में हाई कमिश्नर की नियुक्ति, बस सेवाओं और सीमा पार आवाजाही को फिर से शुरू करना तथा व्यापारिक संबंधों को बहाल करने जैसी मांगें शामिल हैं। तनाव के बीच शांति की अपील यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब हाल के वर्षों में आतंकवादी घटनाओं, सीमावर्ती तनाव और कूटनीतिक मतभेदों के कारण दोनों देशों के संबंध लगातार प्रभावित रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि संवाद ही सभी समस्याओं का स्थायी समाधान है और दोनों देशों को शांति, सहयोग तथा विकास के साझा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि, इस पहल पर दोनों सरकारों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे "आक्रामक कार्रवाई" और अफगानिस्तान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष नागरिकों के हताहत होने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने कहा कि आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के नाम पर किसी दूसरे देश की सीमा का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। अफगानिस्तान ने भी जताया विरोध अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के हवाई हमलों में कम से कम 36 नागरिकों की मौत और 160 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। हमलों के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। बढ़ा क्षेत्रीय तनाव भारत ने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
मुंबई , एजेंसियां। भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 जून तक ब्रिटेन दौरे पर रहेंगे, जहां दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। व्यापार समझौते के क्रियान्वयन पर होगी चर्चा दौरे के दौरान भारतीय और ब्रिटिश अधिकारियों के बीच टैरिफ, व्यापार सुविधा, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। दोनों देश समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दे रहे हैं। कारोबार को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। इससे कई क्षेत्रों में रोजगार और निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं।
पेरिस, एजेंसियां। भारत और यूके के बीच 15 जुलाई से ट्रेड डील लागू हो जायेगा। इसके बाद भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर सस्ते मिलेंगे। क्योंकि, भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यानी इस दिन से भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।