राजनीति

तमिलनाडु CM विजय और अमित शाह की दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से पहले मुलाकात
तमिलनाडु के CM विजय से अमित शाह की मुलाकात, दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक से पहले बढ़ी हलचल

चेन्नई, एजेंसियां। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से चेन्नई में मुलाकात की। यह मुलाकात 20 अगस्त 2026 को होने वाली दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक से पहले हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात विजय के मई 2026 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली मुलाकात बताई जा रही है।   दक्षिणी राज्यों के अहम मुद्दों पर होगी चर्चा   दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में अंतरराज्यीय विवाद, जल बंटवारा, क्षेत्रीय विकास, बुनियादी ढांचा और राज्यों के बीच समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। परिषद में तमिलनाडु के अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना शामिल हैं।   अमित शाह करेंगे बैठक की अध्यक्षता   दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जबकि मेजबान राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते विजय उपाध्यक्ष की भूमिका में रहेंगे। बैठक चेन्नई के पास कोवलम/मामल्लपुरम क्षेत्र में आयोजित की जा रही है।   जल विवाद समेत कई मुद्दे एजेंडे में   बैठक में कावेरी जल विवाद सहित दक्षिणी राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल बंटवारे के मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। इसके अलावा गोदावरी-कावेरी नदी जोड़ने जैसे प्रस्ताव को भी विजय द्वारा उठाए जाने की खबर है।   केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच समन्वय पर जोर   दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठकों का उद्देश्य राज्यों और केंद्र के बीच सहयोग बढ़ाना तथा ऐसे मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाना है, जिनमें एक से अधिक राज्यों की भूमिका होती है। इस बैठक में मुख्यमंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और केंद्र-राज्य प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक दौर को लेकर बड़ा दावा किया
राहुल गांधी का बड़ा दावा, बोले- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक दौर अंतिम चरण में

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भाजपा सरकार को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया। समाचार एजेंसी ANI के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी का राजनीतिक दौर अंतिम चरण में है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है।   मोदी सरकार पर राहुल गांधी का हमला     CWC बैठक में राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा कि मोदी सरकार राजनीतिक रूप से पीछे चल रही है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सरकार के खिलाफ अधिक आक्रामक राजनीतिक रणनीति अपनाने की अपील भी की।     उत्तराधिकारी की तलाश का किया दावा     राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो चुकी है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह राहुल गांधी का राजनीतिक दावा है, न कि भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से घोषित कोई आधिकारिक प्रक्रिया।     CWC बैठक में राजनीतिक रणनीति पर मंथन     कांग्रेस की बैठक में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संसद के हालिया मानसून सत्र और आगे की पार्टी रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेताओं ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने और युवाओं व छात्रों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार किया।     22 अगस्त को पुणे में राहुल गांधी का कार्यक्रम     राहुल गांधी 22 अगस्त को पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने की रणनीति के तहत यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद
वंदे मातरम् को लेकर सियासी घमासान तेज, कांग्रेस ने केवल पहले दो अंतरों पर कायम रहने की बात कही

नई दिल्ली, एजेंसियां। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो अंतरे गाने के 1937 के फैसले को दोहराया है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी स्पष्ट किया कि पार्टी अपने पुराने निर्णय पर कायम रहेगी।   कांग्रेस ने 1937 के फैसले का दिया हवाला   कांग्रेस का कहना है कि पार्टी के कार्यक्रमों में केवल पहले दो अंतरे गाने का निर्णय नया नहीं है, बल्कि यह 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुरूप है। पार्टी नेताओं ने कहा कि वह उसी परंपरा का पालन करेगी।   भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना   कांग्रेस के फैसले के बाद भाजपा नेताओं ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण से दूरी बना रही है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को राष्ट्र से ऊपर नहीं होना चाहिए।   कांग्रेस नेताओं ने दी सफाई   कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि पार्टी वही रास्ता अपनाएगी जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं ने तय किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि CWC ने इस संबंध में निर्णय लिया है और पार्टी उसके अनुसार आगे बढ़ेगी।   आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है विवाद   ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के बीच यह मुद्दा पहले ही राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। अब कांग्रेस के दो अंतरे गाने के फैसले के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
वंदे मातरम् पर कांग्रेस के रुख को लेकर केसी वेणुगोपाल का बयान
वंदे मातरम् पर कांग्रेस का रुख साफ, सिर्फ दो अंतरे गाए जाएंगे: केसी वेणुगोपाल

नई दिल्ली, एजेंसियां। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और अन्य प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में लिए गए फैसले का पालन करेगी। इसके तहत कांग्रेस कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के सिर्फ पहले दो अंतरे ही गाएंगे। बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक हुई। बैठक में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर उठे विवाद पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के CWC प्रस्ताव के कुछ अंश पढ़े, जिसमें राष्ट्रगीत के दो अंतरे गाने की व्यवस्था का उल्लेख था।   1937 के फैसले का पालन करेगी कांग्रेस     कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बैठक के बाद कहा कि 1937 में इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किया गया था। उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, गोविंद बल्लभ पंत, राजगोपालाचारी और आचार्य नरेंद्र देव समेत कई प्रमुख नेता मौजूद थे।   उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि वह आज भी उसी ऐतिहासिक फैसले के अनुरूप आगे बढ़ेगी।   केसी वेणुगोपाल बोले- पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट     कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है और इसमें किसी तरह का भ्रम नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान भावनात्मक विषय हैं, जबकि भाजपा के लिए ये राजनीतिक मुद्दे हैं।   वेणुगोपाल ने कहा कि 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए विवाद के पीछे संवादहीनता की स्थिति थी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और अब यह अध्याय बंद हो चुका है।   15 अगस्त को शुरू हुआ था विवाद     दरअसल, स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इस दौरान कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी राष्ट्रगीत के गायन के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर इशारा करती नजर आई थीं।   भाजपा ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ पूरा गाए जाने पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा कोई विरोध नहीं किया गया था।   CWC बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा     कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में ‘वंदे मातरम्’ के अलावा देश के मौजूदा राजनीतिक हालात, छात्रों से जुड़े मुद्दों और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति पर विचार किया।   बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, केरल के वी.डी. सतीशन, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी बैठक में मौजूद रहे।

ranjan kumar tiwari अगस्त 20, 2026 0
तमिलनाडु सरकार के छात्रों को राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से दूर रखने के निर्देश
CJP से जुड़े विरोध प्रदर्शन को लेकर तमिलनाडु सरकार सख्त, छात्रों को आंदोलन से दूर रखने के निर्देश

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की विजय सरकार ने CJP (Cockroach Janata Party) और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में स्कूली और कॉलेज छात्रों तथा युवाओं की भागीदारी रोकने के लिए शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश 19 अगस्त 2026 को सामने आया है।   स्कूल-कॉलेजों को दिए गए निर्देश     कॉलेजिएट एजुकेशन निदेशालय की ओर से जारी संचार में स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग और जिला प्रशासन को आपस में समन्वय कर उचित कदम उठाने को कहा गया है। अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है। सरकार का निर्देश खास तौर पर छात्रों और युवाओं को राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों तथा आंदोलन कार्यक्रमों में शामिल होने से रोकने पर केंद्रित है।     CJP और वामपंथी संगठनों के कार्यक्रमों पर नजर     निर्देश में विशेष रूप से CJP और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित विरोध कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है। प्रशासन को ऐसे कार्यक्रमों में छात्रों की भागीदारी रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।   यह घटनाक्रम CJP के शिक्षा-केंद्रित अभियान और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही गतिविधियों के बीच सामने आया है। CJP ने पहले भी छात्रों के मुद्दों को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया था।   राजनीतिक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी पर बहस     तमिलनाडु सरकार के इस निर्देश के बाद छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो सकती है। सरकार का रुख छात्रों को राजनीतिक आंदोलनों से दूर रखने पर है, जबकि ऐसे आंदोलनों से जुड़े संगठन इसे अपने मुद्दों को युवाओं तक पहुंचाने के प्रयास के रूप में देखते हैं।   फिलहाल सरकार की ओर से जारी निर्देश का मुख्य जोर शिक्षण संस्थानों में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न होने देने और उन्हें राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने पर है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
अमृता फडणवीस ने वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस की आलोचना की
वंदे मातरम् विवाद पर अमृता फडणवीस का कांग्रेस पर हमला, बोलीं- संसद का सम्मान करे विपक्ष

मुंबई, एजेंसियां। ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गायन को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस से संसद और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने की अपील की। अमृता फडणवीस ने इस विवाद को केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की भावनाओं और राष्ट्रभक्ति से जुड़ा विषय बताया।   कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल     अमृता फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस को संसद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ‘वंदे मातरम्’ के गायन के तरीके और इसके सभी अंतरों को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी चल रही है।   विवाद की शुरुआत स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर हुई। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने गीत के पूर्ण गायन का विरोध किया, जबकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ऐतिहासिक रूप से प्रचलित पहले दो अंतरों के गायन का अनुसरण करती है।   अमृता फडणवीस ने कांग्रेस पर साधा निशाना     अमृता फडणवीस ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय गीत को लेकर इस तरह का विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से संसद की परंपराओं और देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखने की बात कही।   इससे पहले भी उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि पार्टी देश के लिए अलग तरह की संवैधानिक व्यवस्था चाहती है। हालांकि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने बीजेपी पर ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया है।   खरगे के बयान से बढ़ा राजनीतिक टकराव     कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी की आलोचना का जवाब देते हुए कहा है कि कांग्रेस जिस संस्करण का गायन कर रही है, वही संस्करण महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे नेताओं के समय भी गाया जाता था। खरगे ने बीजेपी और आरएसएस के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को लेकर भी सवाल उठाए हैं।   दूसरी ओर, बीजेपी लगातार कांग्रेस से ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान पर माफी मांगने की मांग कर रही है। गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के रुख की आलोचना की है।   महाराष्ट्र में भी विवाद ने पकड़ा जोर     ‘वंदे मातरम्’ को लेकर महाराष्ट्र में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बुधवार को ठाणे के एक सरकारी कार्यक्रम में लता मंगेशकर द्वारा गाया गया संस्करण बजाए जाने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भविष्य के सरकारी कार्यक्रमों में केवल आधिकारिक संस्करण बजाने का निर्देश दिया।   इस पूरे विवाद के बीच ‘वंदे मातरम्’ अब राष्ट्रीय गीत, इतिहास, राष्ट्रवाद और राजनीतिक विचारधारा को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बड़े सियासी टकराव का मुद्दा बन गया है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंत्रियों के फैसलों की समीक्षा का अधिकार
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की शक्तियां बढ़ीं, अब मंत्रियों के फैसले पलट सकेंगे सीएम फडणवीस

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े ‘महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस, 2026’ में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए फैसले की समीक्षा करने और व्यापक जनहित में जरूरत पड़ने पर उसे बदलने या पलटने का अधिकार मिल गया है।   मुख्यमंत्री को मिला हस्तक्षेप का अधिकार     नए नियमों के अनुसार, यदि किसी मंत्री का निर्णय व्यापक जनहित के प्रतिकूल माना जाता है या उसमें स्पष्ट त्रुटि दिखाई देती है, तो मुख्यमंत्री उस फैसले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा किसी फैसले को बदलने की स्थिति में उसके कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य होगा।   हालांकि, संबंधित विभाग के रोजमर्रा के कामकाज की प्राथमिक जिम्मेदारी उसी मंत्री के पास रहेगी। यानी नए प्रावधान से मंत्रियों की विभागीय जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, लेकिन मुख्यमंत्री को उनके महत्वपूर्ण फैसलों पर अंतिम हस्तक्षेप का अधिकार मिलता है।   कैबिनेट के भीतर शक्ति संतुलन पर बहस     इस बदलाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कैबिनेट के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर महायुति सरकार में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के मंत्रियों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया पर इसका असर पड़ने की संभावना पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।   इस प्रावधान के समर्थकों का तर्क है कि इससे सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में जवाबदेही और समन्वय बढ़ सकता है, जबकि आलोचकों को आशंका है कि इससे राज्य की कैबिनेट व्यवस्था में निर्णय लेने की शक्ति मुख्यमंत्री कार्यालय के आसपास अधिक केंद्रित हो सकती है।   पहले भी उठा था अधिकारों को लेकर विवाद     यह बदलाव पूरी तरह नया मुद्दा नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में भी मंत्री के फैसले को मुख्यमंत्री द्वारा पलटने से जुड़ा विवाद सामने आया था। उस समय बॉम्बे हाई कोर्ट ने संबंधित निर्णय को रद्द कर दिया था। अब फडणवीस सरकार ने नियमों में स्पष्ट प्रावधान जोड़कर मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की व्यवस्था की है।     फैसलों पर मुख्यमंत्री की नजर बढ़ेगी     नए नियम लागू होने के बाद महाराष्ट्र में विभागीय फैसलों की निगरानी में मुख्यमंत्री की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री को किसी मंत्री के हर फैसले को मनमाने तरीके से बदलने की खुली छूट नहीं दी गई है—जनहित का आधार और लिखित कारण महत्वपूर्ण शर्तें हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर राजनीतिक विवाद
‘ये दिमागी नक्सल हैं’, निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर साधा निशाना, जानें किसे लेकर छिड़ा विवाद

नई दिल्ली, एजेंसियां। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कुछ लोग संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ लगातार ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे उन्होंने ‘दिमागी नक्सलवाद’ का नाम दिया। ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर पिछले कुछ दिनों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है।   निशिकांत दुबे ने किसे कहा ‘दिमागी नक्सल’     निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक और वैचारिक समूह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली सोच को बढ़ावा दे रहे हैं। उनके बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।   हालांकि, ‘दिमागी नक्सल’ कोई कानूनी या आधिकारिक श्रेणी नहीं है। यह राजनीतिक बहस में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है और इसके अर्थ को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक दलों की अलग-अलग व्याख्या सामने आ रही है।   कांग्रेस और विपक्ष पर लगातार हमले     बीजेपी नेताओं की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस चल रही है। सत्ता पक्ष विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और राजनीतिक मुद्दों को लेकर गलत नैरेटिव फैलाने का आरोप लगा रहा है।   वहीं, विपक्ष बीजेपी के इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताते हुए सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठा रहा है। इसी राजनीतिक टकराव के बीच ‘दिमागी नक्सल’ का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है।   बयान पर बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद     निशिकांत दुबे के बयान के बाद इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। इससे पहले भी इस शब्द को लेकर नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी ‘दिमागी नक्सल’ विवाद पर तंज कसते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है।   फिलहाल ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के बाहर भी राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी की संपत्ति जांच से जुड़े मामले की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राहुल गांधी की संपत्ति जांच पर CBI-ED की रिपोर्ट दाखिल करने पर रोक

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़ी कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में CBI और ED को इलाहाबाद हाई कोर्ट में जांच रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही इस मामले की कार्यवाही को अगली सुनवाई तक स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 17 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनाया।   हाई कोर्ट के आदेश को राहुल गांधी ने दी थी चुनौती     यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से जुड़ा है। याचिका में राहुल गांधी पर ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगाए गए थे और CBI तथा ED से जांच की मांग की गई थी।   इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों को इन आरोपों की जांच और प्रगति से संबंधित जानकारी देने के निर्देश दिए थे। राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।   CBI-ED को रिपोर्ट दाखिल करने से रोका     सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान CBI और ED को हाई कोर्ट के निर्देश के तहत कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करने को कहा। अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को भी मामले में आगे की कार्यवाही फिलहाल टालने का निर्देश दिया है।   सुप्रीम कोर्ट की पीठ में CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने मामले में याचिकाकर्ता, CBI और ED को नोटिस भी जारी किया है।   सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों से पूछा सवाल     सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो संबंधित एजेंसी ने खुद से कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की और क्या उसे जांच के लिए अदालत के निर्देश की जरूरत थी।   मामले में अगली सुनवाई तक इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यवाही स्थगित रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से राहुल गांधी को फिलहाल अंतरिम राहत मिली है, हालांकि यह आदेश आरोपों को सही या गलत ठहराने वाला अंतिम फैसला नहीं है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक के रूप में शपथ ग्रहण की
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक के रूप में ली शपथ, बोले- बनाएंगे नया बांकीपुर

पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने सोमवार को विधायक पद की शपथ ली। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के सामने उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। इस दौरान जन सुराज के नेता और कार्यकर्ता भी उनके साथ विधानसभा पहुंचे।   शपथ के बाद बोले- बनाना है नया बांकीपुर     विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका लक्ष्य एक नया बांकीपुर बनाना है, जहां लोगों को बेहतर शिक्षा, अच्छी सड़कें और रोजगार के अवसर मिल सकें।   उन्होंने कहा कि जिस सदन के सदस्य श्रीबाबू, अनुग्रह नारायण सिंह, कर्पूरी ठाकुर, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी जैसे नेता रहे हैं, उस सदन का सदस्य बनकर शपथ लेना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने इसे अपने लिए बड़ी जिम्मेदारी बताया।   10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने का किया दावा     प्रशांत किशोर ने कुछ दिन पहले बांकीपुर के 10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने की घोषणा की थी। उन्होंने पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं से अपना बायोडाटा और सीवी कार्यालय में जमा करने को कहा था।   उन्होंने दावा किया था कि अगले एक से दो वर्षों में कम से कम 10 हजार परिवारों के बच्चों को नौकरी दिलाने की व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी। उपचुनाव में जीत के बाद से वह लगातार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लोगों के बीच जाकर सभाएं और संवाद कर रहे हैं।   भाजपा प्रत्याशी को 19 हजार से अधिक वोटों से हराया     बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 19 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया था। मतगणना में प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 और राजद की रेखा कुमारी को 14,273 वोट प्राप्त हुए।   इस जीत के साथ प्रशांत किशोर ने अपनी पहली चुनावी परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की और अब वह विधानसभा में बांकीपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
BJP की नई राष्ट्रीय टीम में स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े समेत नेताओं को जिम्मेदारी
BJP New Team: नितिन नवीन ने नई टीम का किया ऐलान, स्मृति ईरानी-विनोद तावड़े समेत कई नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी। नई टीम में अनुभवी नेताओं के साथ कई प्रमुख चेहरों को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है, जबकि पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।   13 नेताओं को बनाया गया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष     बीजेपी की नई टीम में कुल 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इनमें वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, एम. नागराजा, तारिक मंसूर और मधुचंद्र कर शामिल हैं।     स्मृति ईरानी समेत 8 नेता बने महासचिव     नई राष्ट्रीय टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उनके अलावा बिप्लब देब, सुनील बंसल, विनोद तावड़े, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है।   वहीं बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बने रहेंगे।   शिवप्रकाश और सौदान सिंह को भी अहम जिम्मेदारी     बीजेपी ने शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) नियुक्त किया है। पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे में इन नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।     पीयूष गोयल होंगे राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष     केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का नया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। नितिन नवीन की नई टीम के ऐलान के साथ बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में लंबे समय से चल रही बदलाव की प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। नई टीम में अनुभव और अलग-अलग राज्यों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई दे रही है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम और मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल
मोदी मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल के संकेत, BJP की नई टीम में युवाओं को मिल सकता है मौका

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी सोमवार, 17 अगस्त को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर सकती है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में होने वाले इस संगठनात्मक बदलाव में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है।   युवा नेताओं को आगे लाने की तैयारी   सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी का फोकस संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर है। इसे युवा और खासकर Gen Z तक पार्टी की पहुंच मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जनवरी 2026 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले नितिन नबीन नई टीम में कई बदलाव कर सकते हैं।   कई वरिष्ठ नेताओं को संगठन में मिल सकती है जिम्मेदारी   सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नेताओं को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटाकर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। ऐसे में बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में बदलाव के बाद केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में भी फेरबदल की संभावना बढ़ गई है।   संगठन में अनुभव और युवा चेहरों का संतुलन   बीजेपी के मौजूदा संगठनात्मक ढांचे में वरिष्ठ नेताओं के साथ अनुभवी संगठनकर्ताओं की अहम भूमिका है। पार्टी के संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में भी वरिष्ठ नेताओं के साथ राज्यों के प्रमुख नेताओं को जगह मिली हुई है। नई टीम में युवा चेहरों को शामिल कर पार्टी संगठन को नई दिशा देने की कोशिश कर सकती है।   मंत्रिमंडल में भी बदलाव की अटकलें   बीजेपी संगठन में संभावित बड़े फेरबदल के बीच मोदी मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें भी तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक पार्टी या सरकार की ओर से किसी मंत्री को हटाने या नए मंत्रियों को शामिल करने को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम तस्वीर नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद ही साफ होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारियां
हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से, 900 से ज्यादा सवाल पहुंचे; विपक्ष के हंगामे के आसार

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक चलेगा। चौदहवीं विधानसभा का यह 11वां सत्र होगा, जिसमें कुल 10 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा सचिवालय में विधायकों के 900 से अधिक सवाल पहुंच चुके हैं। विधायक 18 अगस्त तक अपने प्रश्न भेज सकेंगे।   सड़क, पानी और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे रहेंगे प्रमुख     विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय और जनसरोकार के मुद्दों को प्रमुखता दी है। अब तक पहुंचे सवालों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास कार्यों से जुड़े विषय शामिल हैं। संबंधित विभाग इन सवालों के जवाब तैयार कर रहे हैं, जिन्हें प्रश्नकाल के दौरान मंत्री सदन में रखेंगे।     विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में     मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के हमलावर रुख के चलते सदन में हंगामे के आसार हैं। विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से भी सवालों का जवाब देने की तैयारी की जा रही है। सत्र से एक दिन पहले 20 अगस्त को भाजपा और कांग्रेस विधायक दल की बैठकें होने की संभावना है, जिसमें सदन की रणनीति पर चर्चा होगी।     मुख्यमंत्री से शुरू होगा सवालों के जवाब का सिलसिला     21 अगस्त को सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होगी। प्रश्नकाल में सबसे पहले मुख्यमंत्री सवालों के जवाब देंगे। इसके बाद उपमुख्यमंत्री समेत स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, राजस्व और शिक्षा विभाग के मंत्री प्रश्नों का उत्तर देंगे। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, लोक निर्माण, नगर एवं ग्राम योजना तथा आयुष विभाग से जुड़े सवाल भी सदन में उठाए जाएंगे।     सवालों की संख्या और बढ़ने की संभावना     विधानसभा सचिवालय में अभी तक 900 से अधिक प्रश्न पहुंच चुके हैं और 18 अगस्त तक नए सवाल भेजे जा सकेंगे। ऐसे में सत्र शुरू होने तक प्रश्नों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि विपक्ष किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है और सरकार की ओर से उनका क्या जवाब दिया जाता है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
देवघर में अश्विनी कुमार चौबे ने छात्र आंदोलन पर झारखंड सरकार को चेताया
देवघर पहुंचे अश्विनी कुमार चौबे, बोले- छात्र आंदोलन को आग का शोला न बनने दे झारखंड सरकार

देवघर। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार चौबे ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। देवघर में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों और उनके आक्रोश को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन को बढ़ने से पहले सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।   छात्रों के आंदोलन के समर्थन में भाजपा     अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि भाजपा छात्रों के आंदोलन के साथ खड़ी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।   उन्होंने कहा कि छात्र शक्ति में सरकार और व्यवस्था को बदलने की ताकत होती है। इसलिए सरकार को छात्रों के आक्रोश को हल्के में नहीं लेना चाहिए।   'आंदोलन को आग का शोला न बनने दें'     पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार को आगाह करते हुए कहा कि छात्र आंदोलन को बढ़ने से रोकने के लिए समय रहते कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने देनी चाहिए, जहां आंदोलन बड़ा रूप ले ले।   चौबे ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की भी अपील की।   कांग्रेस पर भी साधा निशाना     अश्विनी चौबे ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस लोगों को उकसाने का काम कर रही थी, लेकिन झारखंड में छात्रों की समस्याओं पर वह चुप है।   उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील करते हुए कहा कि अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में सरकार को छात्र शक्ति का एहसास होगा।   बिहार की राजनीति पर भी बोले चौबे     बिहार की राजनीति और बांकीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी की हार से जुड़े सवाल पर अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बेहतर तरीके से काम कर रही है। उन्होंने नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भी विकास जारी है।     'मैं आज भी पूरी तरह सक्रिय हूं'     राजनीति में अपनी सक्रियता को लेकर चौबे ने कहा कि भले ही वह फिलहाल सांसद या विधायक नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों में पूरी तरह सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि वह लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और संगठन को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
उत्तर प्रदेश में महिलाओं को ₹50 हजार वित्तीय सहायता देने की प्रस्तावित योजना
यूपी में चुनाव से पहले महिलाओं को ₹50 हजार देने की तैयारी, पहली किस्त ₹20 हजार होने की चर्चा

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार महिलाओं के लिए ₹50 हजार तक की वित्तीय सहायता वाली नई योजना पर विचार कर रही है। 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, महिला कल्याण विभाग की ओर से इस योजना का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। हालांकि, अभी इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।   महिलाओं को किस तरह मिल सकती है ₹50 हजार की मदद?   रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित योजना में पात्र महिलाओं को कुल ₹50,000 की आर्थिक सहायता किस्तों में देने का विचार है। इसमें चुनाव से पहले ₹20,000 की पहली किस्त दिए जाने की संभावना बताई गई है। इसके बाद शेष ₹30,000 को ₹10,000 की तीन किस्तों में देने का प्रस्ताव बताया गया है। हालांकि, इन किस्तों का वास्तविक भुगतान योजना को मंजूरी मिलने और सरकार की अंतिम शर्तें तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा।   अभी प्रस्ताव के स्तर पर है योजना   इस खबर में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ₹50 हजार की राशि अभी महिलाओं के खातों में भेजी नहीं जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक महिला कल्याण विभाग इस प्रस्ताव पर काम कर रहा है और सरकार की मंजूरी के बाद ही योजना का अंतिम स्वरूप सामने आएगा। इसलिए पात्र महिलाओं की संख्या, आवेदन प्रक्रिया, आय सीमा, उम्र सीमा और अन्य शर्तों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।   चुनाव से पहले महिला मतदाताओं पर नजर   उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए महिलाओं से जुड़ी योजनाएं राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। प्रस्तावित ₹50 हजार की सहायता योजना को महिला आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ चुनावी रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
मंत्री सतीश शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिकायत की
मंत्री सतीश शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों पर आदेश नहीं मानने का आरोप, मुख्यमंत्री से की शिकायत

जम्मू, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री सतीश शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिकायत की है। शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी मंत्रियों की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर प्रशासनिक स्तर पर जरूरी कार्रवाई करने की मांग की है।   अधिकारियों के रवैये पर उठाए सवाल     सतीश शर्मा के पास खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी, युवा सेवाएं एवं खेल तथा प्रशासनिक सुधार एवं प्रशिक्षण जैसे विभाग हैं। उन्होंने शिकायत में कथित तौर पर कहा कि विभागीय कामकाज के दौरान मंत्रियों के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।   मंत्री की शिकायत ऐसे समय सामने आई है, जब जम्मू-कश्मीर सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार जोर दे रही है।   मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग     शर्मा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस मामले को गंभीरता से लेने और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सरकार के निर्णयों एवं मंत्रियों के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है।   सरकार के कामकाज में मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में एक मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष अधिकारियों के आदेश नहीं मानने की शिकायत किया जाना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   उमर सरकार के सामने प्रशासनिक समन्वय की चुनौती     जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के सामने प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने की चुनौती बनी हुई है। सरकार पहले भी अधिकारियों से विभागीय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने और जनसेवा से जुड़े कामों की निगरानी बढ़ाने पर जोर देती रही है।   अब सतीश शर्मा की शिकायत के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले में क्या कदम उठाता है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई प्रशासनिक कार्रवाई होती है या नहीं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला
सोनिया गांधी के खिलाफ याचिका पर आज फैसला, वोटर लिस्ट में नाम को लेकर है विवाद

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट आज, 13 अगस्त 2026 को अपना आदेश सुना सकती है। मामला उस पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच कराने की मांग की गई है। अदालत ने 25 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखते हुए 13 अगस्त की तारीख तय की थी।   क्या है पूरा मामला?     याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उनके अनुसार सोनिया गांधी ने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल की। याचिकाकर्ता का दावा है कि नाम 1982 में हटाया गया और 1983 में दोबारा मतदाता सूची में दर्ज किया गया।   त्रिपाठी ने इस आधार पर पुलिस में FIR दर्ज कराकर कथित फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी की जांच कराने की मांग की है।   पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने याचिका खारिज की थी     इस मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 11 सितंबर 2025 को शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उस फैसले को चुनौती देते हुए रिवीजन याचिका दाखिल की। राउज एवेन्यू कोर्ट में इस पर सुनवाई हुई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।   25 जुलाई को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया और पक्षकारों को लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए 1 अगस्त तक का समय दिया था।   सोनिया गांधी की ओर से आरोपों का खंडन     सोनिया गांधी की ओर से पेश वकीलों ने याचिका का विरोध किया है। बचाव पक्ष ने याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए आरोपों को निराधार बताया है। वहीं याचिकाकर्ता का कहना है कि उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड प्रथमदृष्टया जांच की जरूरत दिखाते हैं।   अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी सवाल उठाया था कि कथित घटना करीब पांच दशक पुरानी है और इतने लंबे समय बाद जांच का दायरा क्या होगा।   आज के फैसले से क्या होगा?     सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज अदालत का फैसला FIR दर्ज करने और पुलिस जांच की मांग वाली याचिका पर होगा। यदि अदालत याचिका स्वीकार करती है तो मामले में पुलिस जांच/FIR की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। यदि याचिका खारिज होती है तो मौजूदा स्तर पर FIR की मांग को राहत नहीं मिलेगी।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
FCRA संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति JPC को भेजे जाने का फैसला
FCRA संशोधन विधेयक JPC को भेजा गया, विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली, एजेंसियां। विदेशी अंशदान विनियमन कानून यानी FCRA में बदलाव से जुड़े विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है। यह फैसला विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच लिया गया। सरकार ने विधेयक को तुरंत पारित कराने के बजाय विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए समिति को भेजने का रास्ता चुना है।   31 सदस्यीय JPC करेगी विधेयक की जांच     लोकसभा में विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया। समिति विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी। इसके बाद ही विधेयक के आगे के विधायी रास्ते पर फैसला होगा।   इसका मतलब यह है कि FCRA संशोधन विधेयक अभी कानून नहीं बना है। JPC की जांच और उसकी सिफारिशों के बाद विधेयक में बदलाव भी हो सकते हैं।   FCRA में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?     2026 के इस संशोधन विधेयक का एक प्रमुख प्रस्ताव यह है कि यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त या नवीनीकृत नहीं होता है, तो विदेशी अंशदान से बनाई गई संपत्तियों और संबंधित विदेशी धन को सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण के नियंत्रण में लेने की व्यवस्था की जा सकती है।   विधेयक में FCRA के तहत पंजीकरण और अनुपालन से जुड़े प्रावधानों को भी बदलने का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क है कि इससे विदेशी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा मजबूत होगी।   विपक्ष ने क्यों जताई आपत्ति?     विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रस्तावित शक्तियों का इस्तेमाल गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। खास तौर पर FCRA पंजीकरण रद्द होने के बाद संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण के प्रावधान को लेकर चिंता जताई गई है।   पूर्वोत्तर राज्यों और कुछ धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों की ओर से भी विधेयक के प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की गई है। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी इसे JPC को भेजे जाने का स्वागत करते हुए कहा कि चर्च और धार्मिक संगठनों की चिंताओं को समिति के सामने रखा जाना चाहिए।   अब आगे क्या होगा?     JPC अब विधेयक के प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रावधान की समीक्षा करेगी और संबंधित पक्षों की राय पर विचार कर सकती है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार विधेयक को संशोधनों के साथ या मौजूदा स्वरूप में संसद में आगे बढ़ा सकती है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
संसद का 2026 मानसून सत्र समाप्त, 19 विधेयक हुए पारित
संसद का मानसून सत्र आज समाप्त, हंगामे और राजनीतिक गतिरोध के बीच 19 विधेयक हुए पारित

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद का 2026 का मानसून सत्र आज 13 अगस्त को समाप्त हो गया। 20 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखा टकराव देखने को मिला। लगातार विरोध-प्रदर्शन और कार्यवाही में व्यवधान के बावजूद संसद ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी। सत्र के दौरान कुल 19 विधेयक पारित किए गए, जिनमें कई विधेयक दोनों सदनों से मंजूर हुए।   19 विधेयक हुए पारित     संसदीय आंकड़ों के अनुसार सत्र के दौरान 19 विधेयक संसद से पारित हुए। इनमें सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े संशोधन, MSME से संबंधित संशोधन, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक, बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, कराधान संबंधी संशोधन और ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक प्रमुख रहे।   हाल के दिनों में केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 भी दोनों सदनों से पारित हुए। केरल के नाम को ‘केरलम’ करने वाला विधेयक लोकसभा में 11 अगस्त और राज्यसभा में 12 अगस्त को पारित हुआ।   खनिज क्षेत्र से जुड़ा अहम विधेयक भी पारित     सत्र के अंतिम दिनों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा से पारित हुआ। इसका उद्देश्य खनिज खोज और खनन गतिविधियों में लचीलापन बढ़ाना तथा महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को प्रोत्साहित करना है।   हालांकि, सभी प्रस्तावित विधायी एजेंडे पूरे नहीं हो सके। कुछ महत्वपूर्ण विधेयक लंबित रह गए और कुछ प्रस्तावों पर राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई।   NEET विवाद और विरोध-प्रदर्शन को लेकर टकराव     पूरे सत्र में NEET परीक्षा और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच बड़े टकराव का कारण रहा। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को छात्र आंदोलन पर चर्चा की पेशकश की थी और सवालों का जवाब देने की बात कही, लेकिन विपक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद भी सदन में गतिरोध जारी रहा।   सत्र के दौरान पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट जज न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े मामले की जांच समिति की रिपोर्ट भी संसद में पेश किए जाने को लेकर चर्चा में रही।   हंगामे के बीच खत्म हुआ सत्र     सत्र की शुरुआत से ही कई मुद्दों पर विपक्ष के विरोध के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई। अंतिम दिन भी सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा। इसके बावजूद सरकार ने अपने विधायी एजेंडे के कई हिस्सों को आगे बढ़ाया।   संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक, कुल 19 बैठकों के लिए निर्धारित था।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
FCRA संशोधन बिल को लेकर मायावती ने सरकार और विपक्ष पर निशाना साधा
FCRA बिल पर मायावती का वार, बोलीं- Gen Z वोट के लिए मुद्दे भूल रहा विपक्ष

लखनऊ, एजेंसियां। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने FCRA संशोधन बिल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती थी, जबकि विपक्ष ने संसद की कार्यवाही बाधित कर इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा का रास्ता रोक दिया।   FCRA बिल को लेकर सरकार और विपक्ष पर सवाल     मायावती ने कहा कि सरकार FCRA संशोधन बिल को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसे अन्य विधेयकों की तरह जल्द पारित कराना चाहती थी। वहीं विपक्ष के विरोध के बाद विधेयक को प्रारंभिक चर्चा के बिना संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया।   उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में हुई और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों ने इस विधेयक को राजनीतिक मुद्दा बना दिया।   विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप     बसपा प्रमुख ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर आरोप लगाया कि वे FCRA संशोधन बिल को सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।   मायावती के अनुसार, विपक्ष को विधेयक पेश किए जाने के दौरान संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए थी, ताकि उसकी कमियों पर सदन में चर्चा होती और देश के सामने विधेयक की पूरी जानकारी आती।   ‘कई बिल मिनटों में पास हो गए’     मायावती ने दावा किया कि विपक्ष के लगातार हंगामे और संसद की कार्यवाही बाधित होने का फायदा सरकार को मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान कई अन्य विधेयक बेहद कम समय में पारित हो गए, जिन पर विपक्ष को गंभीर चर्चा करनी चाहिए थी।   उन्होंने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए ‘आंतरिक मिलीभगत’ की आशंका भी जताई।   ‘Gen Z के वोटों के लिए बाकी मुद्दों को नजरअंदाज कर रहा विपक्ष’     मायावती ने कहा कि विपक्ष शायद Gen Z के वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए दूसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दे रहा है।   उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके साथ-साथ आम जनता और देश से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।   राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाने की बात     मायावती ने अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी संसद में उठाने की बात कही। उनका आरोप है कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण इस विषय को पीछे कर दिया, जबकि इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।   उन्होंने जनता से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को लेकर सतर्क रहने की अपील की। साथ ही बसपा की ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति का उल्लेख करते हुए लोगों से पार्टी से जुड़ने का आह्वान किया।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
तमिलनाडु में परिसीमन के खिलाफ मुख्यमंत्री विजय का प्रस्ताव
तमिलनाडु में परिसीमन पर संग्राम, CM विजय विधानसभा में लाएंगे प्रस्ताव; 543 लोकसभा सीटें फ्रीज करने की मांग

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय बुधवार को विधानसभा में संभावित परिसीमन के खिलाफ सरकार की ओर से विशेष प्रस्ताव पेश करेंगे। प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर बरकरार रखने और राज्यों के बीच मौजूदा सीट आवंटन को सुरक्षित रखने की मांग की जाएगी। साथ ही, मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर 2029 के चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का समर्थन किया जाएगा।   परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर चिंता     प्रस्ताव में कहा गया है कि दशकों से लोकसभा और विधानसभा सीटों का राज्यों के बीच आवंटन 1971 की जनगणना के आंकड़ों से जुड़ा रहा है। अब जनसंख्या के नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किए जाने की संभावित चर्चा को लेकर तमिलनाडु सरकार ने चिंता जताई है।   सरकार का तर्क है कि जिन दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू किया और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आर्थिक विकास के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया, उन्हें नए परिसीमन में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नुकसान का सामना नहीं करना चाहिए।   543 लोकसभा सीटों को फ्रीज करने की मांग     प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 पर स्थायी रूप से बनाए रखने का आग्रह किया जाएगा। इसके साथ ही राज्यों के बीच मौजूदा संसदीय सीटों के हिस्से को भी सुरक्षित रखने की मांग होगी।   तमिलनाडु सरकार का कहना है कि इससे राज्यों का मौजूदा आनुपातिक प्रतिनिधित्व कायम रहेगा और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को नुकसान नहीं होगा।   2029 में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण का समर्थन     मुख्यमंत्री विजय के प्रस्ताव में लोकसभा और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने की मांग भी की जाएगी। इसके अलावा मौजूदा 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने का समर्थन किया जाएगा।     8 अगस्त की बैठक के बाद लिया गया फैसला     यह प्रस्ताव 8 अगस्त को चेन्नई में मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई सांसदों की परामर्श बैठक के कुछ दिनों बाद लाया जा रहा है। बैठक में परिसीमन से तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई थी।   बैठक में लोकसभा की कुल सीटों को 543 पर स्थिर रखने और राज्यों के मौजूदा संसदीय प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने का फैसला किया गया था।   2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का भी जिक्र     प्रस्ताव में अप्रैल 2026 में संसद में पेश लेकिन पारित नहीं हो सके एक संविधान संशोधन विधेयक का भी उल्लेख किया गया है। इसमें परिसीमन पर लंबे समय से लागू रोक हटाने और 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन कराने का प्रस्ताव था।   तमिलनाडु सरकार ने ऐसी किसी भी संभावित पहल पर चिंता जताते हुए कहा है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण राज्य और अन्य दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 14, 2026 0