शुभेंदु अधिकारी

शुभेंदु अधिकारी सुरक्षा घेरा
जैश से कथित खतरे के बाद शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा बढ़ी, बुलेटप्रूफ वाहन किया गया अनिवार्य

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। खुफिया एजेंसियों से मिले कथित आतंकी खतरे के इनपुट के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने अब उनके लिए बुलेटप्रूफ वाहन का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है।   एसटीएफ की जांच में पूर्व बर्धमान से गिरफ्तार एक संदिग्ध और उसकी कथित सहयोगी के तार पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की आशंका जताई गई है। जांच के दौरान आरोपियों के पास से शुभेंदु अधिकारी के कथित कार्यक्रम और यात्रा मार्ग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मिलने का दावा किया गया है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह जानकारी उनके पास कैसे पहुंची।     पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अधिकारी के काफिले में पहले से बुलेटप्रूफ वाहन मौजूद था, लेकिन वे आमतौर पर लोगों के बीच सीधे संपर्क के लिए सामान्य वाहन का इस्तेमाल करते थे। हालांकि, नए सुरक्षा इनपुट के बाद एजेंसियों ने केवल बुलेटप्रूफ वाहन से ही यात्रा करने की सलाह दी है और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव किया गया है।     जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं। साथ ही उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों, यात्रा मार्ग और सभाओं के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि कथित खतरा कितना गंभीर था और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था या नहीं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
Suvendu Adhikari
अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत, 1.10 करोड़ महिलाओं के खातों में पहुंचे 3,000 रुपये

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अन्नपूर्णा भंडार योजना की शुरुआत कर दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की 1 करोड़ 10 लाख पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3,000-3,000 रुपये की पहली किस्त डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।   1.60 करोड़ आवेदन आए, 27 लाख आवेदन किए गए खारिज मुख्यमंत्री ने बताया कि अन्नपूर्णा भंडार योजना के लिए कुल 1.60 करोड़ आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से गहन जांच के बाद 27 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए। उन्होंने कहा कि जिन आवेदनों में नागरिकता या स्थायी निवास को लेकर संदेह था, उन्हें योजना के दायरे से बाहर रखा गया। शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि भारत और पश्चिम बंगाल के करदाताओं के पैसे केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए हैं और इन्हें गैर-भारतीयों को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता और पात्रता का पूरा ध्यान रखा गया है।   लक्ष्मी भंडार योजना की जगह लेगी नई योजना अन्नपूर्णा भंडार योजना ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना का स्थान लिया है। पहले लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को 1,700 रुपये की सहायता मिलती थी। नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे उन्हें घरेलू खर्च और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में अधिक मदद मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari addresses Assembly on illegal infiltration and deportation policy.
घुसपैठ पर बंगाल सरकार का सख्त रुख, ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति पर अडिग रहने का दावा

  पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र की ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू कर रही है और इससे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। 10 हजार घुसपैठियों की पहचान का दावा मुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बनने के बाद पिछले लगभग डेढ़ महीने के दौरान 10 हजार अवैध घुसपैठियों की पहचान की गई है। उन्होंने दावा किया कि इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को सीमा पार वापस भेजा जा चुका है और शेष के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। 12 होल्डिंग सेंटरों में रखे गए 1800 लोग मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य सरकार ने हाल ही में 12 होल्डिंग सेंटर स्थापित किए हैं, जहां फिलहाल 1800 लोगों को रखा गया है। उन्होंने कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन लोगों को भी जल्द डिपोर्ट किया जाएगा। गिरफ्तारी के बाद बीएसएफ को सौंपे जाएंगे लोग मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ के मामलों में गिरफ्तार व्यक्तियों को जेल में रखने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा जाएगा, ताकि उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीमा पार भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूर्ववर्ती सरकार पर लगाए आरोप अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए आवश्यक सहयोग नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। बीएसएफ को 142.79 एकड़ भूमि देने का दावा मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद डेढ़ महीने से भी कम समय में बीएसएफ को 142.79 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। उनके अनुसार इससे सीमा पर कंटीले तार लगाने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने का काम तेज होगा। ‘जो भागना चाहते हैं, वे भाग जाएं’ मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जो लोग अवैध रूप से राज्य में रह रहे हैं और भागना चाहते हैं, वे सीमा पर बाड़ पूरी होने से पहले चले जाएं। उन्होंने दावा किया कि सरकार की सख्ती के बाद कुछ क्षेत्रों से अवैध घुसपैठियों के वापस लौटने की सूचनाएं भी मिली हैं। भारतीय नागरिकों को चिंता की जरूरत नहीं मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वास्तविक भारतीय नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल अवैध घुसपैठियों के खिलाफ है और इसका किसी धर्म, जाति या समुदाय से कोई संबंध नहीं है। सरकारी योजनाओं का लाभ केवल नागरिकों को मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को मिलेगा। उन्होंने अन्नपूर्णा भंडार, वृद्धावस्था पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल पात्र नागरिकों के लिए किया जाएगा और किसी भी अवैध घुसपैठिये को इन योजनाओं का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। आगे और तेज हो सकती है कार्रवाई मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिला है कि राज्य सरकार आने वाले दिनों में अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर सकती है। पहचान, हिरासत और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जारी हैं और सरकार इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari addresses Assembly on anti-corruption measures and asset seizure law.
भ्रष्टाचार पर बंगाल सरकार का बड़ा संदेश, अवैध संपत्तियां जब्त कर भूमिहीनों को बसाने का संकेत

  पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि भ्रष्टाचार और अपराध से अर्जित संपत्तियों को केवल जब्त ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उनकी नीलामी भी की जा सकती है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्तियों पर बनेगा नया कानून विधानसभा में अपने जवाबी भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गुंडाराज, माफियातंत्र और वसूली की राजनीति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार इस सत्र में एक नया विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिसके माध्यम से भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने तथा उनकी नीलामी का कानूनी प्रावधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल जेल जाने या लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने से कोई बच नहीं सकेगा। यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति अवैध तरीके से अर्जित पाई जाती है तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। आलीशान इमारतों का किया उल्लेख अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कोलकाता के हरीश मुखर्जी रोड और हरीश चटर्जी रोड स्थित आलीशान इमारतों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी बड़ी संपत्तियों का उपयोग उन लोगों के पुनर्वास के लिए किया जा सकता है, जो आज सड़कों, फुटपाथों और फ्लाईओवरों के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उन्हें जनहित में उपयोग में लाना भी है। राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चाएं मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इसे तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर इशारा माना जा रहा है। हरीश मुखर्जी रोड और हरीश चटर्जी रोड क्षेत्र में स्थित कुछ चर्चित संपत्तियों को लेकर पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं और अन्य विवादों की चर्चा होती रही है। सरकार की ओर से किसी विशेष व्यक्ति या संपत्ति के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। सत्ता पक्ष ने किया समर्थन मुख्यमंत्री के बयान के दौरान सत्ता पक्ष के कई विधायकों और मंत्रियों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह रुख आने वाले समय में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को और तेज करने का संकेत है। विपक्ष की प्रतिक्रिया पर नजर मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब विपक्ष की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रस्तावित विधेयक और उससे जुड़े प्रावधानों को लेकर विधानसभा और राज्य की राजनीति में आगे भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
West Bengal government reviews road names as debate grows over historical and colonial-era naming.
बंगाल में बदलेंगे सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नाम! सरकार ने शुरू की समीक्षा प्रक्रिया

  पश्चिम बंगाल में सड़क और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कोलकाता के पार्क सर्कस स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर ‘गोपाल मुखर्जी रोड’ किए जाने के बाद राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि अन्य सड़कों और इलाकों के नामों की भी समीक्षा की जा सकती है। इस उद्देश्य से एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी कार्तिक महाराज को सौंपी गई है। मुगल, पठान और ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रहेंगी सड़कें: सरकार विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय गौरव और ऐतिहासिक पहचान को प्राथमिकता देते हुए नामकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोलकाता सहित राज्य में किसी मुगल, पठान या अत्याचारी ब्रिटिश शासक के नाम पर सड़कें नहीं रखी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगिनी निवेदिता को छोड़कर किसी विदेशी व्यक्ति के नाम पर सड़क रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रभक्त व्यक्तित्वों को सम्मान देने की बात भी कही। विधानसभा में विपक्ष ने उठाए सवाल मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बंद्योपाध्याय ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उनका दावा था कि इस सड़क का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर नहीं, बल्कि उनके दादा मौलाना उबैदुल्लाह सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था। विपक्ष के साथ-साथ कुछ इतिहासकारों ने भी सरकार के इस फैसले और उसके पीछे दिए गए तर्कों पर आपत्ति जताई है। जनता से भी मांगे जाएंगे सुझाव मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में स्वतंत्रता सेनानी बीना दास का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल के इतिहास और राष्ट्रीय स्वाभिमान को प्रमुखता देने के लिए नामकरण की समीक्षा जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से भी सुझाव देने की अपील की और कहा कि गठित समिति सभी प्रस्तावों पर विचार करेगी। राज्यभर में हो सकता है नामों का पुनर्मूल्यांकन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कोलकाता सहित पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में भी सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों के नामों के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसे में यह मुद्दा राज्य की राजनीति और सार्वजनिक विमर्श का प्रमुख विषय बन सकता है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
Kolkata Police escort accused Ranjit Singh after his arrest over alleged objectionable social media posts against Prime Minister Narendra Modi and Suvendu Adhikari.
पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला गिरफ्तार, 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा गया आरोपी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के कसबा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कसबा थाना पुलिस ने आरोपी रंजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। अलीपुर अदालत ने आरोपी को 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। नस्कर हाट इलाके से हुई गिरफ्तारी पुलिस के अनुसार, आरोपी रंजीत सिंह को नस्कर हाट इलाके से गिरफ्तार किया गया। उस पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ अभद्र और भ्रामक टिप्पणियां पोस्ट करने का आरोप है। अदालत में सरकारी पक्ष ने रखा कड़ा रुख रविवार को आरोपी को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील शुभाशीष भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि आरोपी लगातार सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री और राज्य के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहा था। सरकारी पक्ष ने कहा कि आरोपी की टिप्पणियों का उद्देश्य केवल नेताओं की छवि धूमिल करना नहीं था, बल्कि समाज में भ्रम, अशांति और भ्रामक सूचनाएं फैलाना भी था। पुलिस हिरासत की मांग मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी वकील ने आरोपी की पुलिस हिरासत की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि यह जांच करना आवश्यक है कि आरोपी ने यह गतिविधि अकेले की या इसके पीछे किसी संगठित समूह अथवा साजिश का हाथ है। 27 जून तक पुलिस कस्टडी अलीपुर अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रंजीत सिंह को 27 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया है। सोशल मीडिया अकाउंट और फोन रिकॉर्ड की जांच शुरू पुलिस अब आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स, मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आपत्तिजनक पोस्ट के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या सुनियोजित अभियान तो नहीं था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Former West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee amid controversy over changes in her security personnel and Z-category protection.
बंगाल में ‘सुरक्षा’ पर संग्राम! ममता बनर्जी के पसंदीदा बॉडीगार्ड हटाने पर टीएमसी-भाजपा आमने-सामने, डेरेक बोले- रातभर बिना सुरक्षा रहीं दीदी

  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आरोप लगाया है कि नई भाजपा सरकार ने ममता बनर्जी की सुरक्षा में वर्षों से तैनात अधिकारियों को हटाकर उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ किया है। वहीं, मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी पसंद के सुरक्षा अधिकारी चुनने का अधिकार नहीं है और सुरक्षा तैनाती का फैसला पुलिस प्रशासन करेगा। क्या है पूरा विवाद? 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात कुछ पुराने सुरक्षा अधिकारियों को हटाकर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। टीएमसी का दावा है कि ये अधिकारी कई वर्षों से, यहां तक कि ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहने के समय से उनकी सुरक्षा में तैनात थे। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात कर पुराने अधिकारियों को वापस तैनात करने की मांग की, लेकिन सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया। टीएमसी का आरोप- ‘राजनीतिक प्रतिशोध का नया निचला स्तर’ All India Trinamool Congress (AITC) की आधिकारिक वेबसाइट से जुड़े नेताओं ने इस कदम को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है। टीएमसी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि: “ममता बनर्जी की सुरक्षा में लंबे समय से तैनात कर्मियों को हटाना कोई प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि उन्हें अलग-थलग करने और खतरे में डालने की सोची-समझी कोशिश है।” पार्टी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कदम ‘बदले की राजनीति’ और ‘सत्ता के दुरुपयोग’ का उदाहरण है। डेरेक ओब्रायन का दावा- रातभर नहीं था कोई सुरक्षाकर्मी Derek O'Brien ने दावा किया कि ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास से लंबे समय से तैनात निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि: “बुधवार रात ममता बनर्जी के घर के बाहर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था।” डेरेक ने इसे पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही बताया। सागरिका घोष ने उठाए सवाल टीएमसी की राज्यसभा सांसद Sagarika Ghose ने भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि: पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं है। यह राज्य सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी है। अचानक सुरक्षा अधिकारियों को हटाने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए। यदि ममता बनर्जी को देर रात बिना सुरक्षा छोड़ा गया, तो यह बेहद गंभीर मामला है। शुभेंदु सरकार का रुख क्या है? मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि: सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती पुलिस प्रशासन का अधिकार है। किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री को अपनी पसंद के अधिकारियों की मांग करने का विशेष अधिकार नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था पेशेवर और प्रशासनिक मानकों के आधार पर तय की जाएगी। ममता बनर्जी को किस स्तर की सुरक्षा प्राप्त है? ममता बनर्जी को वर्तमान में ‘जेड श्रेणी (Z Category) सुरक्षा’ प्राप्त है। इस श्रेणी में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की एक बड़ी टीम, व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) और अन्य सुरक्षा प्रबंध शामिल होते हैं। राजनीतिक महत्व यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर उठा यह विवाद राज्य की राजनीति में एक नए टकराव का केंद्र बन गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करती है या नहीं, और क्या टीएमसी इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी स्तर पर आगे बढ़ाती है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
West Bengal Governor RN Ravi addresses the Assembly during Budget Session outlining BJP government's priorities and reforms.
बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरएन रवि का बड़ा संदेश, बोले- अपराधियों और घुसपैठियों पर कार्रवाई कर रही सरकार

  पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को शुरू हो गया। सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरएन रवि ने अपने अभिभाषण में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं को सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि नई सरकार कानून-व्यवस्था बहाल करने, घुसपैठ रोकने, भ्रष्टाचार और वसूली के नेटवर्क को खत्म करने तथा राज्य को औद्योगिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘धमकाने की संस्कृति और भ्रष्टाचार के गिरोह खत्म होंगे’ राज्यपाल ने कहा कि पिछली सरकार के शासनकाल में पनपे असामाजिक तत्वों, वसूली करने वाले गिरोहों और अवैध खनन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नई सरकार ‘धमकाने की संस्कृति’ और भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। घुसपैठ और अतिक्रमण पर सख्ती राज्यपाल ने कहा कि अवैध रूप से रह रहे विदेशियों और घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। सीमा सुरक्षा सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया। बीएसएफ को भूमि उपलब्ध कराने के फैसले की सराहना आरएन रवि ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि उपलब्ध कराने के राज्य सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। महिलाओं और कमजोर वर्गों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं राज्यपाल ने कहा कि सरकार महिलाओं तथा कमजोर एवं वंचित वर्गों के खिलाफ अपराधों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस बल में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विशेष कदम उठाए जाएंगे। अवैध खनन और वसूली के नेटवर्क पर प्रहार सरकार अवैध बालू और कोयला खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। राज्य में कथित तौर पर सक्रिय वसूली नेटवर्क को खत्म कर कानून का शासन स्थापित किया जाएगा। उद्योग, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर रहेगा फोकस पश्चिम बंगाल को प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में काम। अनुपयोगी सरकारी भूमि को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। मेट्रो और रेलवे परियोजनाओं में केंद्र के साथ सहयोग। तटीय नौवहन, जलमार्ग, मत्स्य पालन और ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा। उत्तर बंगाल में IIT और AIIMS स्थापित करने की दिशा में प्रयास। स्टार्टअप केंद्र विकसित कर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण और ‘पीएम श्री’ स्कूल योजना लागू की जाएगी। राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया जाएगा। अन्नपूर्णा भंडार योजना और महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा राज्यपाल ने कहा कि सरकार ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ शुरू करेगी और महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विधवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। गोरखालैंड मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत राज्यपाल ने कहा कि दार्जिलिंग और गोरखालैंड से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। राज्यपाल आरएन रवि के अभिभाषण ने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार के पहले बजट सत्र की दिशा तय कर दी है। यह सत्र ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा ने लगभग 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस शासन का अंत कर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court to challenge Bhabanipur election result and Suvendu Adhikari's victory.
भवानीपुर सीट के चुनाव परिणाम को ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती, दायर की चुनाव याचिका

  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जीत के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की है। 15,105 वोटों से मिली थी हार भवानीपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से पराजित किया था। इस जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचीं ममता टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी चुनाव याचिका की औपचारिक पुष्टि (वेरिफिकेशन) के लिए मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की रजिस्ट्री पहुंचीं। पार्टी का कहना है कि चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में चुनौती दी गई है। 4 मई को हुई थी मतगणना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना 4 मई को हुई थी। चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला, जिसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब क्या होगा आगे? चुनाव याचिका दायर होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट मामले की सुनवाई करेगा। अदालत तय करेगी कि याचिका स्वीकार करने के पर्याप्त आधार हैं या नहीं। इसके बाद चुनाव परिणाम से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई हो सकती है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Subendu Adhikari
पश्चिम बंगाल में विभागों का बंटवारा, शुभेंदु सरकार ने मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारियां

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी  ने मंत्रिपरिषद के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। राज्य सरकार ने बुधवार को विभाग आवंटन का आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इस बहुप्रतीक्षित सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ नए चेहरों को भी अहम विभागों की जिम्मेदारी मिली है।   मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे अहम विभाग मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गृह, बिजली, सूचना एवं संस्कृति, भूमि एवं भूमि सुधार, शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास तथा पहाड़ी क्षेत्र विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं। इसके अलावा वे उन सभी विभागों की भी निगरानी करेंगे, जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं। कैबिनेट मंत्रियों के विभाग 1.शुभेंदु अधिकारी - मुख्यमंत्री, गृह, बिजली, इन्फॉर्मेशन एंड कल्चरल, रिफ्यूजी रिलीफ समेत तमाम विभाग, जो मंत्रियों को आवंटित नहीं हैं 2.निशीथ प्रमाणिक - उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय, जल संरक्षण 3.अशोक कीर्तनिया - फूड एंड सप्लाई, सहकारिता 4.दिलीप घोष - पंचायती राज, ग्रामीण विकास, कृषि विपणण 5.क्षुधिराम टूडू - आदिवासी विकास, अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा 6.अग्निमित्रा पॉल - शहरी विकास, नगर निगम 7.दीपक बर्मन - स्कूली शिक्षा, हाउसिंग, माइक्रो और मीडियम इंटरप्राइजेज, टेक्सटाइल्स 8.तापस रॉय - उद्योग, कामर्स, रिन्यूबल एनर्जी 9.शंकर घोष - संसदीय कार्य मंत्री और पर्यटन 10.मनोज कुमार ओरांव - वन एवं पर्यावरण 11.अर्जुन सिंह - श्रम, ट्रांसपोर्ट 12.गौरी शंकर घोष - पिछड़ी जाति कल्याण 13.जगन्नाथ चौधरी - उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्किल डेवलेपमेंट 14.स्वप्न दास गुप्ता - वित्त 15.कल्याण चक्रवर्ती - आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, हार्टिकल्चर 16.शरद्वत मुखर्जी - हेल्थ और परिवार कल्याण 17.अरुप कुमार दास - सिंचाई 18. अजय कुमार पोद्दार - पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग और पब्लिक वर्क्स 19.दूध कुमार मंडल - कृषि स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभाग 1.मालती रेवा रॉय - महिला और बाल कल्याण, सोशल वेलफेयर 2.राजेश मिश्रा - पशु संसाधन और मत्स्य 3.इंद्रनील खान - युवा और खेल मामलों के मंत्री   राज्य मंत्री के विभाग 1. जोएल मूर्मू - आदिवासी विकास, सिंचाई 2.डॉ. हरेकृष्ण बेरा - उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्किल डेवलेपमेंट 3.आनंदमय बर्मन - ट्रांसपोर्ट और वित्त मंत्रालय 4.अशोक डिंडा - एग्रीकल्चरल मार्केटिंग, टेक्सटाइल, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज 5.नादियार चंद बाउरी - पब्लिक वर्क्स, पिछड़ा कल्याण 6. बिशाल लामा - गृह, मदरसा शिक्षा 7.शांतनु प्रमाणिक - फूड एंड सप्लाई, पंचायती राज, ग्रामीण विकास 8.मौमिता बिस्वास मैत्रा - इंडस्ट्री, कॉर्मर्स एंड इंटरप्राइजेज, बायोटेक्नॉलोजी 9.उमेश राय - संसदीय विभाग, शहरी विकास, निगम 10.पूर्णिमा चक्रवर्ती - सूचना, कल्चरल अफेयर, पर्यटन 11.कौशिक चक्रवर्ती - स्कूली शिक्षा, फायर एंड इमरजेंसी 12.भास्कर भट्टाचार्य - पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग, श्रम 13.दिबाकर ग्रहमी - सहकारिता, वन एवं पर्यावरण 14.अमिया किसकू - फूड प्रोसेसिंग, कृषि 15.कलिता मांझी - हाउसिंग 16.गार्गी दास घोष - बिजली, रिन्यूबल एनर्जी 17.बिरज बिस्वास - लैंड रिफॉर्म, रिफ्यूजी रिलीफ, सुंदरबन 18.सुमाना सरकार - स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण

abhishek singh जून 10, 2026 0
Mamata Banerjee Kakori Ghosh
TMC के 20 लोकसभा सांसद टूटे, NDA का समर्थन करेंगे

स्पीकर को लेटर लिखा, CM शुभेंदु और बंगाल प्रभारी से मिले, राज्यसभा सांसद का भी इस्तीफा कोलकाता, एजेंसियां। विधायकों के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भी ममता का साथ छोड़ दिया है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली ने भी सोमवार को यही दावा किया। उन्होंने बताया कि 20 सांसदों ने NDA को समर्थन देने का फैसला किया है। इस बारे में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भी भेज दिया गया है। 11 सांसदों ने मीटिंग की इनमें से 11 सांसदों ने सोमवार दोपहर केंद्रीय मंत्री और BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर मीटिंग की। इस दौरान सुबह TMC के राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे चुके सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद रहे। बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी भी इनसे मिलने पहुंचे। बैठक में ये रहे शामिल बैठक में लोकसभा सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी मौजूद रहे। लोकसभा में TMC के अभी 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। इससे पहले 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। इस गुट ने ऋतब्रत को अपना नेता बनाया है। बैठक की तस्वीर वायरल न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, टीएमसी के 20 सांसदों की रविवार देर रात दिल्ली के एक अज्ञात स्थान पर अनौपचारिक बैठक भी हुई। इसमें सांसदों ने मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया। सोमवार को इस बैठक की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई। कई TMC सांसद एक मेज के आसपास बैठे दिखाई दे रहे हैं। उस समय एक सांसद के फोटो खींचने पर विवाद भी हुआ। सूत्रों का दावा है कि तस्वीर में जितने सांसद दिख रहे हैं, वास्तविक संख्या उससे कहीं अधिक थी। सुखेंदु का दावा- TMC के लोग ममता से नाराज TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर ने आज सुबह ही राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी। त्यागपत्र में उन्होंने ममता के 15 साल के अराजक शासन को पार्टी की हार का नतीजा बताया और भाजपा की तारीफ की थी। राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन ने सुखेंदु शेखर का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। सुखेंदु ने इस्तीफे के बाद मीडिया से कहा था ममता मनमाने ढंग से पार्टी चला रही थीं, इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल 2029 तक था। अब सीट खाली हो चुकी है, अब इस पर उपचुनाव कराया जा सकता है। बागी विधायक ऋतब्रत ने सुखेंदु का किया समर्थन सुखेंदु शेखर के इस्तीफे पर बंगाल में TMC के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ सुखेंदु की निजी बात नहीं है। मैंने सुखेंदु से सीधे बात नहीं की है, लेकिन टीवी पर उनके बयान देखे और सुने हैं। मैं उनकी बातों से सहमत हूं। राज्यसभा के कामकाज को लेकर सुखेंदु की बात काफी हद तक सही है। संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है। टीमएसी पहुंची हाईकोर्ट उधर, टीएमसी ने बागी नेता रीताब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाए जाने के विधानसभा स्पीकर के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने तारीख तय नहीं की है। लोकसभा सांसद काकोली घोष भी पार्टी से इस्तीफा दे चुकी काकोली घोष ने दावा किया कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला साथी सांसदों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि सांसदों ने NDA के साथ जाने का फैसला किया है। उनका मानना है कि यही जनता के जनादेश के अनुरूप है। काकोली ने 27 मई को टीएमसी छोड़ दी है, लेकिन सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया था। प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे लेटर में काकोली ने लिखा था कि मानसिक संघर्ष और लंबे चिंतन के बाद यह फैसला लिया है। 28 साल पुरानी TMC में बगावत तृणमूल कांग्रेस (TMC) में 28 साल के इतिहास में पहली बार औपचारिक तौर पर टूट सामने आई है। बुधवार को 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी।

Unknown जून 9, 2026 0
West Bengal government announces statewide census survey beginning August 2026 for development planning
बंगाल में 1 अगस्त से जनगणना अभियान शुरू,  शुभेंदु अधिकारी बोले-विकास के लिए जनगणना जरूरी

पश्चिम बंगाल में लंबे इंतजार के बाद जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने 1 अगस्त 2026 से व्यापक जनगणना अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है, जो फरवरी 2027 तक चलेगा। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और विकास संबंधी जरूरतों का सटीक आकलन करना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जनगणना को विकास और प्रशासनिक योजना निर्माण के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में राज्य की जनसंख्या और जनसांख्यिकीय स्वरूप में बड़े बदलाव आए हैं, जिनका अद्यतन आंकड़ा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी है। अगस्त से शुरू होगा घर-घर सर्वे सरकार की ओर से जारी प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, अगस्त के पहले सप्ताह से प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करना शुरू करेंगे। यह अभियान राज्य के सभी जिलों, नगर निगम क्षेत्रों, नगरपालिकाओं और ग्रामीण इलाकों में चलाया जाएगा। प्रशासन ने फरवरी 2027 तक डेटा संग्रह का मुख्य चरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद आंकड़ों का सत्यापन और विश्लेषण किया जाएगा। डिजिटल तकनीक का होगा इस्तेमाल इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। प्रगणकों को टैबलेट और मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनके माध्यम से डेटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी कम होगा। इसके लिए जून और जुलाई के दौरान हजारों सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और फील्ड स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनगणना फॉर्म बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी और नेपाली भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को जानकारी देने में सुविधा हो। विकास योजनाओं की बेहतर योजना पर जोर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जनगणना के जरिए प्राप्त आंकड़े राज्य की कल्याणकारी योजनाओं, खाद्य वितरण, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि सटीक जनसंख्या आंकड़ों के बिना विकास योजनाओं की वास्तविक जरूरतों का आकलन करना कठिन हो जाता है। सरकार का उद्देश्य संसाधनों के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है। विपक्ष ने उठाए सवाल सरकार इस अभियान को पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे लेकर आशंकाएं व्यक्त की हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि डेटा संग्रह की प्रक्रिया का इस्तेमाल नागरिकता और पहचान से जुड़े विवादित मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जनगणना एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया है और इसका किसी राजनीतिक एजेंडे से संबंध नहीं है। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां विशेषज्ञों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों, दुर्गम पहाड़ी इलाकों और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में सटीक आंकड़े जुटाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा डिजिटल डेटा संग्रह व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करना भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि आधुनिक तकनीक और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की मदद से इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा। पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित जनगणना को राज्य की भविष्य की विकास नीतियों और संसाधन वितरण की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कवायद के रूप में देखा जा रहा है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Suvendu Adhikari talking about ‘Detect, Delete and Deport mission
शुभेंदु अधिकारी का ‘Detect, Delete and Deport’ मिशन शुरू, 9 संदिग्ध घुसपैठिये डिटेंशन सेंटर में भेजे गये

Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार ने ‘Detect, Delete and Deport’ यानी 3D नीति लागू करते हुए संदिग्ध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार का दावा है कि अब अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें सरकारी रिकॉर्ड से हटाया जायेगा और फिर सीमा सुरक्षा बल को सौंपकर वापस भेजा जायेगा। मालदा में बना पहला डिटेंशन सेंटर Malda राज्य का पहला जिला बन गया है, जहां अवैध विदेशी नागरिकों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाया गया है। यह केंद्र इंगलिश बाजार के चंदन पार्क इलाके में स्थापित किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गजोले के पांडुआ क्षेत्र से पकड़ी गयी 3 महिलाओं और 6 नाबालिगों समेत कुल 9 संदिग्ध बांग्लादेशियों को यहां रखा गया है। सभी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डिटेंशन सेंटर लाया गया। सीसीटीवी और पुलिस निगरानी में रखा गया सेंटर अधिकारियों ने बताया कि डिटेंशन सेंटर में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। यहां सीसीटीवी निगरानी के साथ 12 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गयी है। इसके अलावा नागरिक सुरक्षा कर्मी और स्वयंसेवक भी मौजूद हैं। भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गयी है। क्या है ‘Detect, Delete and Deport’ नीति? राज्य सरकार की इस नीति का मकसद अवैध घुसपैठ रोकना और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है। Detect (पहचान) खुफिया एजेंसियों और जिला प्रशासन की मदद से उन लोगों की पहचान की जायेगी, जो बिना वैध दस्तावेजों के राज्य में रह रहे हैं। Delete (हटाना) जिन लोगों के दस्तावेज वैध नहीं होंगे, उनके नाम मतदाता सूची, राशन कार्ड और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से हटाये जायेंगे। Deport (निर्वासन) पकड़े गये लोगों को Border Security Force को सौंपा जायेगा, जो बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के साथ समन्वय कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगी। जिलों में बनेंगे होल्डिंग सेंटर राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश दिये हैं। इन केंद्रों में उन विदेशी नागरिकों को रखा जायेगा, जो जेल से रिहा हो चुके हैं या अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में पकड़े गये हैं। CAA को लेकर भी सरकार का बड़ा बयान नबान्न में वरिष्ठ अधिकारियों और BSF अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग Citizenship Amendment Act के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जायेगा। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण वर्षों तक केंद्र के निर्देशों की अनदेखी की गयी। अब राज्य सरकार सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की बात कह रही है। सीमा क्षेत्रों में पुलिस को मिले विशेष निर्देश राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को सीमावर्ती जिलों के सभी थानों में इस नीति को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया गया है। अब स्थानीय पुलिस संदिग्ध विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेते ही इसकी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों और BSF को देगी, ताकि निर्वासन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके।  

surbhi मई 26, 2026 0
Suvendu Adhikari oath ceremony preparations at Brigade Parade Ground amid speculation over Mamata Banerjee’s attendance
Suvendu Adhikari Oath: क्या शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण में शामिल होंगी ममता बनर्जी?

Suvendu Adhikari Oath: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है. भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी 9 मई 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इस भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है. इसी बीच सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यह बना हुआ है कि क्या निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगी या नहीं. क्या कहता है प्रोटोकॉल? संवैधानिक रूप से ऐसा कोई नियम नहीं है, जो किसी निवर्तमान मुख्यमंत्री को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बाध्य करता हो. यह पूरी तरह राजनीतिक परंपरा, शिष्टाचार और व्यक्तिगत-राजनीतिक संबंधों पर निर्भर करता है. भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में कई बार सत्ता छोड़ने वाले मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नए नेतृत्व के शपथ समारोह में शामिल होकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान जताते रहे हैं. हालांकि कई मामलों में राजनीतिक मतभेदों या तनावपूर्ण रिश्तों के कारण पूर्व मुख्यमंत्री समारोह से दूरी भी बनाते रहे हैं. अभी तक नहीं आया कोई आधिकारिक बयान फिलहाल तृणमूल कांग्रेस या ममता बनर्जी की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हालिया चुनावी मुकाबले और भाजपा-टीएमसी के बीच बढ़े तीखे टकराव को देखते हुए ममता बनर्जी के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना कम दिखाई दे रही है. बंगाल में गरमाया राजनीतिक माहौल शपथ ग्रहण से पहले पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल लगातार गरमाया हुआ है. 7 मई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा भंग करने की अधिसूचना जारी की थी. इसके बाद से नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई. हालांकि ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार किया था, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था के तहत नई सरकार के शपथ लेने तक वह कार्यवाहक भूमिका में मानी जा रही हैं. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में तैयारियां पूरी भाजपा इस शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने में जुटी हुई है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विशाल मंच, सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रबंधन की विशेष तैयारियां की गई हैं. कार्यक्रम में लाखों समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है. ड्रोन निगरानी, नो-फ्लाई जोन और कई ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किए गए हैं.  

surbhi मई 9, 2026 0
Amit Shah addressing BJP leaders in Kolkata after Suvendu Adhikari’s victory over Mamata Banerjee in Bhabanipur
अमित शाह का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला, बोले- शुभेंदु दा ने घर में घुसकर हराया

Amit Shah on Mamata Banerjee Bhabanipur Loss: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी की हार के बाद बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इस बार शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को उनके ही घर में घुसकर हराया है. “नंदीग्राम में गई थीं चुनौती देने, अब भवानीपुर में मिली हार” कोलकाता में भाजपा नेताओं और विधायकों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी के पुराने बयान का जिक्र किया. शाह ने कहा कि 2021 में ममता बनर्जी खुद शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में चुनाव लड़ने गई थीं और इसे अपनी राजनीतिक ताकत बताया था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “दीदी कहती थीं कि वह शुभेंदु के गढ़ में जाकर लड़ रही हैं. लेकिन इस बार शुभेंदु दा ने उनके अपने घर भवानीपुर में जाकर उन्हें हरा दिया.” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान अमित शाह का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. भाजपा समर्थक इसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत बता रहे हैं, जबकि टीएमसी समर्थकों ने शाह के बयान को राजनीतिक उकसावे वाला करार दिया है. भवानीपुर में कैसे बदला चुनावी समीकरण? भवानीपुर सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने यहां बड़ा उलटफेर करते हुए ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. मतगणना के शुरुआती राउंड में ममता बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के चरणों में शुभेंदु अधिकारी लगातार आगे निकलते गए और अंत में निर्णायक जीत दर्ज की. “भ्रष्टाचार और परिवारवाद से तंग आ चुकी है जनता” अमित शाह ने दावा किया कि भवानीपुर की जनता ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ वोट दिया है. उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा की जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत है. “शेरनी से भीगी बिल्ली” वाले बयान पर बढ़ा विवाद अपने भाषण में शाह ने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत तंज कसते हुए कहा कि जो नेता खुद को बंगाल की “शेरनी” बताती थीं, अब हार के बाद “भीगी बिल्ली” बन गई हैं. इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. टीएमसी नेताओं ने शाह की भाषा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इसे चुनावी जवाब बता रही है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Suvendu Adhikari with BJP leaders amid discussions over West Bengal cabinet formation and deputy CM posts
शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट को लेकर चर्चाएं तेज, दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल बन सकते हैं डिप्टी सीएम!

Suvendu Adhikari Cabinet List Viral: पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. इसी बीच उनके संभावित मंत्रिमंडल को लेकर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. वायरल हो रही एक कथित कैबिनेट लिस्ट में कई बड़े भाजपा नेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को डिप्टी चीफ मिनिस्टर बनाए जाने की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है. दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी वायरल सूची के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. बताया जा रहा है कि उन्हें पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग के साथ पश्चिमांचल उन्नयन मामलों की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है. दिलीप घोष ने इस बार खड़गपुर सदर सीट से जीत दर्ज की है. वहीं भाजपा की फायरब्रांड नेता अग्निमित्रा पॉल को भी डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है. संभावित सूची में उनके पास उद्योग, वाणिज्य, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग जाने की बात कही जा रही है. अग्निमित्रा पॉल आसनसोल दक्षिण सीट से लगातार दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं. स्पीकर पद के लिए राहुल सिन्हा का नाम चर्चा में सोशल मीडिया पर वायरल सूची में भाजपा नेता राहुल सिन्हा को विधानसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर बनाए जाने की संभावना जताई गई है. वहीं तापस रॉय को डिप्टी स्पीकर बनाया जा सकता है. हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल सिन्हा को हाल ही में राज्यसभा भेजा गया है, ऐसे में उनके स्पीकर बनने की संभावना कम नजर आती है. कई नए चेहरों को मिल सकता है मौका सूत्रों के मुताबिक भाजपा इस बार अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल तैयार करना चाहती है. उत्तर बंगाल, जंगलमहल और दक्षिण बंगाल से कई नेताओं को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है. महिला नेताओं और युवा चेहरों को भी अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा भव्य शपथ ग्रहण शुभेंदु अधिकारी शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं. भाजपा इसे बंगाल की राजनीति में “नए युग की शुरुआत” के रूप में पेश कर रही है. हालांकि, अब तक भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में वायरल हो रही सूची की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Suvendu Adhikari addressing supporters after defeating Mamata Banerjee in a key Bengal election battle
कौन हैं नंदीग्राम के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी? जिन्होंने 2 बार ममता बनर्जी को हराकर बदल दी बंगाल की राजनीति

Who is Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है. भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. इसके साथ ही बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है. कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी आज उनके सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं. नंदीग्राम से शुरू हुआ ‘जायंट किलर’ का सफर शुभेंदु अधिकारी को बंगाल की राजनीति में ‘जायंट किलर’ कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी दो बड़ी चुनावी जीत हैं. 2021: नंदीग्राम में ममता को दी मात साल 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश को चौंका दिया था. यह चुनाव बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बना था. 2026: भवानीपुर में फिर हराया इसके बाद 2026 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर भी हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. भवानीपुर को ममता का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन शुभेंदु ने वहां भी जीत दर्ज कर टीएमसी के अभेद्य किले को ढहा दिया. छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर जिले के कारकुली गांव में जन्मे शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. शुभेंदु ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कोंटाई में की और बाद में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए किया. उन्होंने छात्र राजनीति के जरिए अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. शुरुआती दौर में वे कांग्रेस छात्र संगठन से जुड़े रहे. 1995 में वे पहली बार पार्षद बने और धीरे-धीरे बंगाल की राजनीति में अपनी पहचान मजबूत करते गए. आरएसएस से मिला संगठन और अनुशासन का प्रशिक्षण कम लोग जानते हैं कि शुभेंदु अधिकारी ने युवावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखाओं में भी प्रशिक्षण लिया था. माना जाता है कि इसी दौरान उनके भीतर संगठन क्षमता और अनुशासन की मजबूत नींव पड़ी, जिसने आगे चलकर उनकी राजनीतिक शैली को आकार दिया. नंदीग्राम आंदोलन ने बना दिया बड़ा चेहरा 2007 का नंदीग्राम आंदोलन शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए इस आंदोलन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और देखते ही देखते वे बंगाल की राजनीति के बड़े नेता बन गए. इसी आंदोलन ने उन्हें जमीनी नेता की पहचान दिलाई. क्यों टूटा ममता बनर्जी से रिश्ता? एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. वे टीएमसी सरकार में परिवहन और पर्यावरण मंत्री भी रहे. लेकिन समय के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ने लगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका और परिवारवाद की राजनीति से शुभेंदु नाराज थे. आखिरकार 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया. भाजपा में आने के बाद वे बंगाल में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे. विपक्ष के नेता के रूप में लगातार रहे आक्रामक भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने विपक्ष के नेता के रूप में ममता सरकार को लगातार घेरा. एसएससी भर्ती घोटाला, संदेशखाली विवाद और आरजी कर अस्पताल मामले जैसे मुद्दों पर उन्होंने सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन किया. कई बार विधानसभा में हंगामे के कारण उन्हें निलंबन का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद को बंगाल में भाजपा के सबसे आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया. बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत भाजपा नेतृत्व लंबे समय से बंगाल में ऐसे चेहरे की तलाश में था, जिसकी जड़ें बंगाल की मिट्टी से जुड़ी हों और जो राज्य की संस्कृति को समझता हो. शुभेंदु अधिकारी इस कसौटी पर पूरी तरह फिट बैठे. अब मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बंगाल में भाजपा सरकार को स्थिर और मजबूत बनाना होगी. शुभेंदु की ताजपोशी को सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Suvendu Adhikari leaving residence in saffron kurta for Bengal CM oath ceremony in Kolkata
Suvendu Adhikari Oath LIVE: शुभेंदु अधिकारी आज लेंगे बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ, ब्रिगेड ग्राउंड में भव्य तैयारी

Suvendu Adhikari आज पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. कोलकाता के ऐतिहासिक Brigade Parade Ground में होने वाला यह समारोह राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. पहली बार बंगाल में भाजपा सरकार बनने जा रही है और इसे लेकर कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है. घर से रवाना हुए शुभेंदु अधिकारी भगवा कुर्ते में शुभेंदु अधिकारी अपने आवास से शपथ ग्रहण समारोह के लिए रवाना हुए. उनके स्वागत के लिए घर के बाहर बड़े काफिले की व्यवस्था की गई थी. ब्रिगेड ग्राउंड के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. पूरे इलाके को कई सुरक्षा सेक्टरों में बांटा गया है और ड्रोन से निगरानी की जा रही है. अमित शाह की मौजूदगी में चुने गए विधायक दल के नेता शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की मौजूदगी में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई थी, जिसमें शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया. भाजपा के 206 नवनिर्वाचित विधायकों ने उनके नाम का समर्थन किया. समारोह में शामिल होंगे पीएम मोदी समेत कई दिग्गज शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, अमित शाह और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. इसके अलावा करीब 20 राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी कोलकाता पहुंच चुके हैं. Pushkar Singh Dhami, Conrad Sangma, Samrat Choudhary और Rekha Gupta जैसे नेता समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंचे. भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह उत्तर बंगाल, आरामबाग, गोघाट और गंगासागर समेत कई इलाकों से हजारों भाजपा कार्यकर्ता ब्रिगेड मैदान की ओर रवाना हुए हैं. सियालदह स्टेशन पर भाजपा की ओर से विशेष सहायता शिविर लगाए गए हैं. समर्थक ढोल-नगाड़ों और नारों के साथ समारोह में पहुंच रहे हैं. बंगाल में ‘डबल इंजन’ सरकार का दावा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम Eknath Shinde ने कहा कि बंगाल में अब डबल इंजन की सरकार चलेगी और राज्य में विकास, रोजगार और बेहतर कानून-व्यवस्था देखने को मिलेगी. वहीं यूपी के डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya ने इसे “40 साल की काली रात के बाद नया सूर्योदय” बताया. सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे खास शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी. पुरुलिया छऊ नृत्य की विशेष प्रस्तुति रखी गई है. कई सांस्कृतिक हस्तियां और उद्योग जगत के बड़े नाम भी समारोह में शामिल होंगे. सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम ब्रिगेड ग्राउंड और आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. कार्यक्रम स्थल को 35 सेक्टरों में बांटा गया है. हर सेक्टर की निगरानी आईपीएस अधिकारियों के जिम्मे है. पुलिस ने साफ किया है कि बिना जांच किसी को प्रवेश नहीं मिलेगा. बैग, बोतल और छाते ले जाने पर रोक लगाई गई है. नंदीग्राम और भवानीपुर की जीत बनी सबसे बड़ी ताकत भाजपा नेतृत्व शुभेंदु अधिकारी की इस ताजपोशी को उनकी बड़ी राजनीतिक जीत मान रहा है. पहले Nandigram में और फिर भवानीपुर में Mamata Banerjee को कड़ी चुनौती देने के बाद पार्टी ने उन्हें बंगाल की कमान सौंपने का फैसला किया है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घर भी जाएंगे शुभेंदु सूत्रों के मुताबिक शपथ ग्रहण के बाद शुभेंदु अधिकारी Kalighat Kali Temple और Syama Prasad Mukherjee के आवास पर भी जाएंगे. बुधवार को विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम होगा.  

surbhi मई 9, 2026 0
Suvendu Adhikari addressing BJP workers in Nandigram after Bengal election victory in 2026
ममता के गढ़ में जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा, बोले- BJP का वोट शेयर 60% तक ले जाएंगे

Suvendu Adhikari Mission 60 Percent Vote: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है. नंदीग्राम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि भाजपा आने वाले समय में बंगाल में अपना वोट शेयर 46 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक ले जायेगी. बंगाल में विकास की राजनीति का दावा शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब विकास की राजनीति को नई गति मिलेगी. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में ऐसा विकास होगा कि भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को करीब 46 प्रतिशत वोट मिले हैं और आने वाले वर्षों में यह समर्थन 60 प्रतिशत के पार पहुंच सकता है. शुभेंदु ने इसे भाजपा के “दीर्घकालिक राजनीतिक मिशन” का हिस्सा बताया. 10 दिन में छोड़ेंगे एक सीट भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत दर्ज करने के बाद अब शुभेंदु अधिकारी को नियम के मुताबिक एक सीट छोड़नी होगी. इस पर उन्होंने कहा कि वे अगले 10 दिनों के भीतर एक सीट से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने कहा कि किस सीट को बरकरार रखा जायेगा, इसका फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा. शुभेंदु ने कहा कि वे दोनों क्षेत्रों की जनता के आभारी हैं और किसी भी क्षेत्र की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे. “2011 के परिवर्तन का हिस्सा था, अब असली परिवर्तन होगा” अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने 2011 के राजनीतिक बदलाव का भी जिक्र किया, जब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर वाममोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभायी थी. उन्होंने कहा कि वह 2011 के परिवर्तन का हिस्सा थे, लेकिन अब बंगाल में “वास्तविक परिवर्तन” का दौर शुरू होगा. शुभेंदु ने दावा किया कि भाजपा ऐसा काम करेगी कि राज्य में पार्टी की सरकार “100 साल तक” बनी रहे. कार्यकर्ताओं से शांति बनाये रखने की अपील भाजपा नेता ने पार्टी कार्यकर्ताओं से फिलहाल विजय जुलूस और उत्सव से दूरी बनाये रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही आधिकारिक रूप से जश्न मनाया जाये. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अनुशासन और शांति बनाये रखने को कहा. साथ ही टीएमसी शासन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी. नंदीग्राम में पूजा और शहीद कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. इसके अलावा उन्होंने चुनावी हिंसा में मारे गये भाजपा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य के हर वर्ग और क्षेत्र तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाया जायेगा. शुभेंदु के “मिशन-60” बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गयी है और विपक्षी दलों में हलचल बढ़ गयी है.  

surbhi मई 7, 2026 0
BJP leaders protesting after the murder of Suvendu Adhikari’s aide Chandranath Rath in West Bengal
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड पर BJP का बड़ा हमला, ममता बनर्जी और अभिषेक की गिरफ्तारी की मांग

Suvendu Adhikari PA Murder: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. भाजपा नेताओं ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने लगाया बड़ी साजिश का आरोप भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हिंसा फैलाने की पहले से तैयारी की गयी थी. मिश्रा ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग नवीन मिश्रा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति चरम पर पहुंच गयी है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य में हिंसा और बढ़ सकती है. भाजपा नेताओं का कहना है कि बंगाल में लोकतांत्रिक माहौल खत्म होता जा रहा है और विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. राजीव कुमार की भूमिका पर भी उठाये सवाल भाजपा नेता ने पूर्व पुलिस अधिकारी और वर्तमान राज्यसभा सांसद राजीव कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाये. उन्होंने डीजीपी और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) से मांग की कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाये. मिश्रा ने दावा किया कि जिस इलाके में यह हत्या हुई, वह बांग्लादेश सीमा के करीब है और इस घटना में कई बड़े लोगों की संलिप्तता हो सकती है. उन्होंने पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और सबूतों से छेड़छाड़ रोकने की मांग की. चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद इलाके में तनाव चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद मध्यमग्राम और उत्तर 24 परगना जिले में तनाव का माहौल है. इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया. भाजपा ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए एक अधिकार प्राप्त समिति गठित की जाये, ताकि निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी हो सके और दोषियों की पहचान हो सके. TMC की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है. हालांकि, पार्टी पहले भी चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को खारिज करती रही है और कई घटनाओं को स्थानीय विवाद या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताया है. फिलहाल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.  

surbhi मई 7, 2026 0
Suvendu Adhikari and Mamata Banerjee during the high-profile Nandigram 2021 election battle in West Bengal.
नंदीग्राम 2021: कैसे शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को दी मात? जानिए पूरा विश्लेषण

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2021 का नंदीग्राम चुनाव सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में से एक रहा। इस सीट पर बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया था। आइए जानते हैं वे अहम कारण, जिनकी वजह से यह परिणाम सामने आया। 1. रणनीति का बड़ा फर्क: रैली vs संगठन ममता बनर्जी ने अपने कुल खर्च का 89.5% बड़ी रैलियों और जनसभाओं पर लगाया शुभेंदु अधिकारी ने जमीनी संगठन, लोकल नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स पर ज्यादा ध्यान दिया नतीजा: लोकल स्तर पर बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई 2. खर्च कम, लेकिन असरदार ममता बनर्जी: ₹21.88 लाख खर्च शुभेंदु अधिकारी: ₹23.62 लाख खर्च शुभेंदु ने ममता से करीब ₹1.74 लाख ज्यादा खर्च किया लेकिन असली फर्क खर्च की रणनीति ने डाला, न कि सिर्फ रकम ने 3. फंडिंग और उपयोग में अंतर ममता के पास कुल ₹40 लाख का फंड, लेकिन उन्होंने सिर्फ 54.7% खर्च किया शुभेंदु के पास ₹21.02 लाख, लेकिन उन्होंने 112% तक खर्च किया (अतिरिक्त संसाधनों के साथ) शुभेंदु ने आक्रामक निवेश मॉडल अपनाया 4. लोकल नेटवर्क और कैडर की ताकत ममता के पास 116 वाहन और 1,400+ कार्यकर्ता शुभेंदु को मिला BJP का मजबूत राष्ट्रीय कैडर और संगठन बूथ स्तर पर बेहतर मैनेजमेंट ने चुनाव का रुख बदला 5. वोट और प्रति वोट खर्च ममता बनर्जी: 41,505 वोट | ₹52.73 प्रति वोट खर्च शुभेंदु अधिकारी: 43,461 वोट | ₹54.36 प्रति वोट खर्च मामूली अंतर, लेकिन निर्णायक जीत 6. अंदरूनी फूट भी बनी वजह TMC में स्थानीय स्तर पर मतभेद शुभेंदु पहले TMC में थे, जिससे उन्हें स्थानीय समीकरणों की गहरी समझ थी

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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