स्वास्थ्य विभाग

रांची में JPSC-JSSC आंदोलन के धरना स्थल पर मेडिकल टीम की तैनाती
JPSC-JSSC आंदोलन: धरना स्थल पर 24 घंटे मेडिकल टीम रहेगी अलर्ट

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में जारी छात्र आंदोलन को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आंदोलन स्थल पर अतिरिक्त डॉक्टरों की 24x7 तैनाती सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में प्रदर्शनकारियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।   धरना स्थल पर डॉक्टरों की 24x7 तैनाती   स्वास्थ्य मंत्री ने RIMS के निदेशक डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा और रांची के सिविल सर्जन अमरेंद्र प्रसाद को निर्देश दिया है कि धरना स्थल पर पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती की जाए। अधिकारियों को नियमित रूप से मौके की स्थिति का जायजा लेने और इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देने को कहा गया है।   अस्पतालों में 10 बेड का विशेष वार्ड तैयार   आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों में 10 बेड का विशेष वार्ड बैकअप के तौर पर तैयार रखने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को किसी भी स्थिति में तत्काल उपचार और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।   बारिश और मौसमी बीमारियों को लेकर भी अलर्ट   बरसात के मौसम में मच्छरों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, कालाजार और डायरिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए भी विशेष तैयारियां रखने को कहा गया है। इसके लिए ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव और डिफॉगिंग की व्यवस्था प्रभावी तरीके से करने के निर्देश दिए गए हैं।   बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर   मंत्री ने बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखने को कहा है। किसी बच्चे में बुखार, बदन दर्द, सिर दर्द या प्लेटलेट्स में कमी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच और जरूरी चिकित्सा कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
लातेहार में आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के लिए e-KYC कराते लोग
Ayushman Bharat Health Account: लातेहार बना झारखंड में अव्वल, 20 हजार से ज्यादा लोगों की e-KYC पूरी

लातेहार। स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में चुनौतियों के बावजूद लातेहार जिला स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल पर लागू करने में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट यानी आभा कार्ड बनाने के मामले में लातेहार पूरे झारखंड में पहले स्थान पर पहुंच गया है।   10 अगस्त तक 20 हजार से ज्यादा लोगों की e-KYC   जिले में 1 जुलाई से 10 अगस्त तक 20 हजार से अधिक लोगों की आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट योजना के तहत e-KYC पूरी की जा चुकी है। वहीं, अब तक की ओवरऑल उपलब्धि देखें तो लातेहार में करीब 65 प्रतिशत लोगों का आभा कार्ड बनाया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जिले में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के बावजूद अधिकारी और कर्मचारी आपसी समन्वय से योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में जुटे हैं।   जन वितरण दुकानदारों को भी अभियान से जोड़ा गया   सिविल सर्जन डॉ. राजमोहन खलखो ने बताया कि जुलाई से अब तक आभा कार्ड बनाने के मामले में लातेहार राज्य में सबसे आगे है। उपायुक्त के निर्देशन में लक्ष्य पूरा करने के लिए जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि मरीजों को सुविधा देने वाली स्कैन एंड शेयर योजना में भी लातेहार पूरे राज्य में तीसरे स्थान पर है। जिले में 95 प्रतिशत से अधिक मरीजों का पर्चा डिजिटल तरीके से बनाया जा रहा है।   क्या है आभा कार्ड?   आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट यानी आभा कार्ड एक डिजिटल हेल्थ अकाउंट है, जिसमें व्यक्ति से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जा सकते हैं। आयुष्मान भारत योजना लातेहार के नोडल पदाधिकारी डॉ. रूद्र बर्मन और प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर मिनी रानी के अनुसार, आभा कार्ड से मरीज की पुरानी मेडिकल रिपोर्ट डिजिटल रूप में सुरक्षित रहती है। इससे इलाज के दौरान पुरानी रिपोर्ट आसानी से उपलब्ध हो जाती है और कई बार दोबारा जांच कराने की जरूरत भी कम हो सकती है।   सिविल सर्जन ने लोगों से की अपील   सिविल सर्जन ने जिले के लोगों से अपील की है कि जिन लोगों ने अभी तक अपना आभा कार्ड नहीं बनवाया है, वे इसे जल्द बनवा लें। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की सुविधा से जोड़ना है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन को लेकर डॉक्टरों की मांग
RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर रोक, 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र

रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में विभागाध्यक्षों के रोटेशन की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस फैसले से संस्थान के करीब 60 डॉक्टरों में नाराजगी है। डॉक्टरों ने मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य सचिव डॉ. अजय कुमार सिंह को पत्र लिखकर रोटेशन प्रक्रिया को लागू करने की मांग की है।   2021 में लिया गया था रोटेशन का फैसला     जानकारी के मुताबिक, रिम्स शासी परिषद की 52वीं बैठक 11 अक्टूबर 2021 को हुई थी। बैठक में विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी में हर तीन साल के बाद रोटेशन का फैसला लिया गया था। इसी व्यवस्था के तहत वर्ष 2021 से अलग-अलग विभागों में रोटेशन के आधार पर विभागाध्यक्ष नियुक्त किए जा रहे थे।   डॉक्टरों का कहना है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की गाइडलाइन में भी विभागाध्यक्ष के पद पर रोटेशन का प्रावधान है। इसी आधार पर रिम्स में यह प्रक्रिया लागू की गई थी।   प्रोफेसरों की बारी आने पर रोक का आरोप     डॉक्टरों का आरोप है कि अब जब अन्य प्रोफेसरों के विभागाध्यक्ष बनने की बारी आई, तो रोटेशन की प्रक्रिया पर अचानक रोक लगा दी गई। इस फैसले के विरोध में करीब 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजा है।   पत्र में डॉक्टरों ने रिम्स शासी परिषद के पुराने फैसले और NMC की गाइडलाइन का हवाला देते हुए रोटेशन व्यवस्था को जारी रखने की मांग की है।   हाईकोर्ट के निर्देश का भी दिया हवाला     डॉक्टरों के मुताबिक, विभागाध्यक्षों के रोटेशन से संबंधित मामले में 2022 में हाईकोर्ट का निर्देश भी आया था। ऐसे में उन्होंने संबंधित नियम और न्यायालय के निर्देश के अनुसार रोटेशन प्रक्रिया को लागू करने की मांग की है।     वरिष्ठ डॉक्टरों ने जताई थी आपत्ति     दूसरी ओर, सूत्रों के मुताबिक विभागाध्यक्षों के रोटेशन को लेकर कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर कथित तौर पर कहा था कि वे अपने से जूनियर डॉक्टर के अधीन काम करने में असहज महसूस करेंगे।   बताया जा रहा है कि इसके बाद रोटेशन के आधार पर विभागाध्यक्षों की नई अधिसूचना जारी नहीं करने का निर्देश रिम्स प्रबंधन को दिया गया। यह फैसला हाल में हुई रिम्स शासी परिषद की 65वीं बैठक में लिए गए निर्णय से जुड़ा बताया जा रहा है। अब 60 डॉक्टरों के पत्र के बाद विभागाध्यक्षों के रोटेशन को लेकर रिम्स में विवाद फिर गहरा गया है। निगाहें स्वास्थ्य विभाग और रिम्स प्रबंधन के अगले फैसले पर टिकी हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
रांची के नए सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद
रांची सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार का तबादला, डॉ. अमरेंद्र प्रसाद बने नए सिविल सर्जन

रांची। झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार का तबादला कर दिया है। उनकी जगह डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को रांची का नया सिविल सर्जन नियुक्त किया गया है। विभाग की ओर से किए गए इस बदलाव के बाद रांची जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी अब डॉ. अमरेंद्र प्रसाद संभालेंगे।   डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को मिली नई जिम्मेदारी   स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को रांची के सिविल सर्जन का दायित्व सौंपा गया है। उनके सामने जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने और अस्पतालों में व्यवस्थाओं को मजबूत रखने की जिम्मेदारी होगी।   स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल   रांची के सिविल सर्जन के तबादले के साथ झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने कई अन्य चिकित्सा अधिकारियों के स्तर पर भी बदलाव किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विभाग में बड़े स्तर पर चिकित्सकों और स्वास्थ्य अधिकारियों का तबादला किया गया है।   रांची की स्वास्थ्य व्यवस्था पर रहेगी नजर   नए सिविल सर्जन के सामने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखना अहम चुनौती होगी। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं, स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन और मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा.   स्वास्थ्य विभाग के इस फेरबदल के बाद अब डॉ. अमरेंद्र प्रसाद के कार्यभार संभालने और रांची की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आगे की प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
जमशेदपुर में 108 एंबुलेंस और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा
जमशेदपुर में 27 लाख आबादी पर मात्र 25 सरकारी एंबुलेंस, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

108 एंबुलेंस सेवा भी सीमित, मरीजों को समय पर वाहन नहीं मिलने की शिकायत; सिविल सर्जन ने मुख्यालय को भेजने की बात कही   जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 27 लाख की आबादी वाले जिले में मात्र 25 सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध होने की बात सामने आई है। वहीं, 108 एंबुलेंस सेवा की कई गाड़ियां भी सीमित संख्या में ही चालू हालत में हैं, जिससे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो रही है।   मरीजों को समय पर नहीं मिल रही एंबुलेंस   रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सरकारी एंबुलेंस के अलावा 108 सेवा की 16 एंबुलेंस चालू स्थिति में बताई गई हैं। इसके अलावा प्रसव और छोटे बच्चों के लिए अलग से ममता वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन सामान्य आपातकालीन मामलों में मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है।   एंबुलेंस नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी   कई मामलों में मरीजों के परिजनों ने शिकायत की है कि फोन करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। कुछ मरीजों को मजबूरी में निजी वाहन या अन्य साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। ऐसी घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।   सिविल सर्जन ने जांच और कार्रवाई की बात कही   जमशेदपुर के सिविल सर्जन ने एंबुलेंस व्यवस्था में सुधार को लेकर रिपोर्ट तैयार करने और खराब पड़ी एंबुलेंस की स्थिति की जानकारी लेने की बात कही है। उन्होंने मामले को स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय तक पहुंचाने और आवश्यक कार्रवाई की मांग करने की बात कही।   सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की तैयारी   झारखंड सरकार ने राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नई हाईटेक एंबुलेंस खरीदने की योजना भी बनाई है। इसका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों तक समय पर एंबुलेंस सेवा पहुंचाना है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
जमशेदपुर के मुसाबनी में चिकन पॉक्स का प्रकोप फैलने के बाद स्वास्थ्य जांच की प्रतीकात्मक तस्वीर
जमशेदपुर के मुसाबनी में चिकन पॉक्स का प्रकोप, 20 से ज्यादा मरीज मिले; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

जमशेदपुर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड में चिकन पॉक्स (छोटी चेचक) के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। क्षेत्र के बड़ाघाट धीवर टोला गांव में 20 से अधिक लोगों के संक्रमित होने की जानकारी मिली है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और मेडिकल टीम को प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है।   गांव में स्वास्थ्य टीम ने शुरू की जांच   मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों की जांच शुरू की। संक्रमित लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है और ग्रामीणों को संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।   संक्रमण रोकने के लिए लोगों को किया जा रहा जागरूक   स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि चिकन पॉक्स के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। संक्रमित मरीजों को अलग रखने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।   क्या हैं चिकन पॉक्स के लक्षण?   चिकन पॉक्स में आमतौर पर शरीर पर लाल दाने, खुजली, बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकती है।   स्वास्थ्य विभाग की निगरानी जारी   स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर नजर रखने के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर पहचान और सावधानी से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
Ranchi Hospital News
रांची के निजी अस्पताल में किशोर की मौत पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सख्त, ₹22 लाख के बिल और लापरवाही के आरोपों की जांच के आदेश

रांची। रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक किशोर की मौत और परिजनों से करीब ₹22 लाख का बिल वसूले जाने के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।    परिजनों ने लगाया लापरवाही और अधिक बिल वसूलने का आरोप   मृतक किशोर के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज में लापरवाही बरती और कई दिनों तक भर्ती रखने के बाद करीब 22 लाख रुपये का बिल थमा दिया। उनका कहना है कि उचित इलाज नहीं मिलने के कारण किशोर की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।    स्वास्थ्य विभाग को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश   मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को अस्पताल के इलाज, बिलिंग प्रक्रिया और चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा कर जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या मेडिकल प्रोटोकॉल के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।    निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर फिर उठे सवाल   इस घटना के बाद राज्य में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और इलाज की लागत को लेकर बहस तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मामलों में पारदर्शिता, समय पर इलाज और उचित बिलिंग सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने पर किसी भी स्तर पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Malaria Outbreak
तमाड़ के बेलबेड़ा में मलेरिया का प्रकोप, 336 लोगों की जांच में 160 संक्रमित मिले

रांची। रांची जिले के तमाड़ प्रखंड के बेलबेड़ा गांव में मलेरिया का संक्रमण तेजी से फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निगरानी और रोकथाम अभियान शुरू कर दिया है। अराहंगा पंचायत के टुंगरी टोला में 27 जून से चलाए जा रहे विशेष स्क्रीनिंग अभियान के तहत अब तक 336 लोगों की जांच की गई है, जिनमें 160 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें 16 मरीजों में बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और अन्य लक्षण मिले हैं, जबकि बाकी संक्रमितों का भी नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया जा रहा है।   मेडिकल टीम कर रही लगातार निगरानी सीएचसी प्रभारी डॉ. सावित्री कुजूर ने बताया कि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है। मेडिकल टीम रोजाना प्रभावित गांवों का दौरा कर रही है और मौके पर ही मलेरिया रोधी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और इलाज से बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।   बिना लक्षण वाले लोगों की भी हो रही जांच अराहंगा की सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) अनुलता भुतकुंवर ने बताया कि मेडिकल टीम केवल बुखार या अन्य लक्षण वाले लोगों की ही नहीं, बल्कि बिना लक्षण वाले ग्रामीणों की भी जांच कर रही है। इसका उद्देश्य संक्रमण की शुरुआती अवस्था में पहचान कर समय रहते इलाज शुरू करना है। शुरुआत में कुछ ग्रामीण जांच से हिचकिचा रहे थे, लेकिन जागरूकता अभियान के बाद अब लोग स्वयं आगे आकर जांच करा रहे हैं।   सावधानी बरतने की अपील स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर दवा वितरण के साथ लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, साफ-सफाई बनाए रखने और घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दे रही है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में स्क्रीनिंग, निगरानी और उपचार अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक संक्रमण पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ जाता।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Investigation into an alleged examination scam network linked to JPSC and JSSC exams in Jharkhand
झारखंड

JPSC नियुक्ति घोटाला: अभय तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक, दर्जनों परीक्षाएं जांच के घेरे में

kalpana अगस्त 13, 2026 0