हार्ट अटैक

Mamata Banerjee News
ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका? राज्यसभा सांसद के इस्तीफे की अटकलें तेज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में तीन राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब एक और सांसद के इस्तीफे की चर्चाओं ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा सांसद रुक्मणी मलिक ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के उपसभापति को ई-मेल के माध्यम से भेजा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।   राज्यसभा में संख्या बल घटने की आशंका सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ और राज्यसभा सांसद पार्टी से दूरी बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो उच्च सदन में पार्टी का संख्या बल और प्रभाव दोनों कमजोर हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे इस्तीफे केवल संख्यात्मक नुकसान नहीं हैं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व संबंधी चुनौतियों का भी संकेत देते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 20 सांसद अलग-अलग समय पर पार्टी छोड़ चुके हैं या अन्य दलों में शामिल हो चुके हैं।   संगठन में भी बढ़ी चुनौती राज्यसभा के घटनाक्रम के साथ-साथ टीएमसी संगठन के भीतर भी संकट गहराता दिख रहा है। ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट समानांतर संगठन खड़ा करने में सक्रिय है। इस गुट ने पहले ही नई वर्किंग कमेटी का गठन कर खुद को "असली तृणमूल" बताया है और संबंधित दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपने का दावा किया है। अब राज्य और जिला स्तर पर नई संगठनात्मक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।   नेतृत्व पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है कि कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय बैठक में राज्य अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के नामों पर मंथन किया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सांसदों का पलायन जारी रहता है और समानांतर संगठन अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर संघर्ष आने वाले समय में और तेज हो सकता है। फिलहाल पार्टी की ओर से इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Person performing strength training exercises to build chest and back muscles, highlighting their potential link to better heart health.
मजबूत छाती और पीठ की मांसपेशियां हार्ट अटैक का खतरा 31% तक घटा सकती हैं? नए अध्ययन में सामने आए अहम संकेत

शोध में मांसपेशियों की गुणवत्ता और हृदय स्वास्थ्य के बीच मिला मजबूत संबंध दिल की बीमारियां दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में एक नए अध्ययन ने संकेत दिया है कि सिर्फ स्वस्थ खानपान और कार्डियो एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि छाती और पीठ की मजबूत व स्वस्थ मांसपेशियां भी हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि मांसपेशियों की गुणवत्ता किसी व्यक्ति की समग्र फिटनेस और लंबे समय तक हृदय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। क्या कहता है नया अध्ययन? यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Radiology में प्रकाशित हुआ है। इसमें 1,722 वयस्कों को शामिल किया गया, जिनकी औसत आयु 57 वर्ष थी। सभी प्रतिभागियों का कोरोनरी कंप्यूटेड टोमोग्राफी एंजियोग्राफी (CCTA) स्कैन किया गया, जिससे हृदय की धमनियों की स्थिति का आकलन किया जाता है। शोधकर्ताओं ने इन लोगों के स्वास्थ्य पर लगभग 10 वर्षों तक नजर रखी। 31% तक कम हुआ हार्ट अटैक का जोखिम अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों की छाती और पीठ की मांसपेशियों की गुणवत्ता बेहतर थी, उनमें हार्ट अटैक का खतरा काफी कम पाया गया। मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार रहे— मांसपेशियों की गुणवत्ता में हर 10 अंकों की बढ़ोतरी पर हार्ट अटैक का जोखिम 31% तक कम हुआ। अगले 10 वर्षों में मृत्यु का जोखिम 39% तक कम पाया गया। उम्र, लिंग और धमनियों में कैल्शियम जमाव जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी यह संबंध बना रहा। मांसपेशियों का आकार नहीं, गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण शोध की सबसे अहम बात यह रही कि मांसपेशियों का बड़ा आकार नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता अधिक मायने रखती है। स्वस्थ मांसपेशियों में वसा कम होती है और वे स्कैन में अधिक घनी दिखाई देती हैं। इसके विपरीत, केवल अधिक मांसपेशियां होने से समान लाभ नहीं मिला। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी मांसपेशियां इस बात का संकेत हैं कि व्यक्ति नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करता है और उसकी जीवनशैली अपेक्षाकृत स्वस्थ है। AI ने आसान बनाया विश्लेषण इस अध्ययन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का भी उपयोग किया गया। AI सॉफ्टवेयर ने हार्ट स्कैन के दौरान छाती और पीठ की मांसपेशियों, वसा, हड्डियों और अन्य अंगों का कुछ ही सेकंड में विश्लेषण किया। जहां किसी रेडियोलॉजिस्ट को यह काम करने में कई घंटे लग सकते थे, वहीं AI ने प्रति स्कैन एक मिनट से भी कम समय में यह प्रक्रिया पूरी कर दी। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक हृदय रोग के जोखिम की पहचान को और आसान बना सकती है। क्या मजबूत मांसपेशियां सीधे हार्ट अटैक से बचाती हैं? विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल संबंध (Association) दिखाता है। इससे यह साबित नहीं होता कि मजबूत मांसपेशियां सीधे हार्ट अटैक को रोकती हैं। संभव है कि जिन लोगों की मांसपेशियां बेहतर होती हैं, वे नियमित व्यायाम करते हों, उनका वजन नियंत्रित हो और उनकी जीवनशैली अधिक स्वस्थ हो। यही सभी कारक मिलकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। मांसपेशियों की गुणवत्ता कैसे बढ़ाएं? विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर मांसपेशियां बनाने के लिए घंटों जिम में समय बिताना जरूरी नहीं है। सप्ताह में 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना भी पर्याप्त हो सकता है। इन एक्सरसाइज से फायदा मिल सकता है— पुश-अप्स चेस्ट प्रेस रो (Rows) प्लैंक रेजिस्टेंस बैंड एक्सरसाइज बॉडीवेट वर्कआउट इसके साथ ही रोजाना पैदल चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी एरोबिक गतिविधियां भी हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती हैं। विशेषज्ञों की सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत और सक्रिय मांसपेशियां स्वस्थ जीवनशैली का संकेत हैं। इसलिए केवल वजन कम करने पर नहीं, बल्कि शरीर की ताकत और फिटनेस बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ आदतें लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Heart Attack
Heart Attack आने से पहले शरीर क्या संकेत देता है? इन शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें

नई दिल्ली, एजेंसियां।  हार्ट अटैक (Heart Attack) दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। अच्छी बात यह है कि कई मामलों में शरीर हार्ट अटैक आने से पहले कुछ चेतावनी संकेत देता है। यदि इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाए, तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और कुछ लोगों में बिना स्पष्ट चेतावनी के भी हार्ट अटैक हो सकता है।   हार्ट अटैक क्या होता है?   हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों (Coronary Arteries) में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और उनका नुकसान शुरू हो जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।   Heart Attack से पहले दिखने वाले 10 प्रमुख संकेत 1. सीने में दर्द या दबाव   यह हार्ट अटैक का सबसे सामान्य लक्षण है। सीने में भारीपन, जकड़न या दबाव महसूस होना। दर्द कुछ मिनट तक रह सकता है या बार-बार आ-जा सकता है। कई लोग इसे गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। 2. सांस लेने में तकलीफ यदि बिना किसी विशेष कारण के सांस फूलने लगे या हल्का काम करने पर भी सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे गंभीरता से लें।   3. बाएं हाथ, कंधे, गर्दन या जबड़े में दर्द हार्ट अटैक का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। दर्द फैल सकता है: बाएं हाथ में दोनों कंधों में गर्दन जबड़े पीठ 4. अत्यधिक पसीना आना   यदि ठंडे वातावरण में भी अचानक बहुत ज्यादा पसीना आने लगे और उसके साथ बेचैनी महसूस हो, तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।   5. अचानक कमजोरी या थकान   कई लोगों, विशेषकर महिलाओं में, हार्ट अटैक से कुछ दिन या हफ्ते पहले असामान्य थकान महसूस हो सकती है।   6. मतली, उल्टी या अपच जैसा महसूस होना   कुछ मरीजों को लगता है कि उन्हें गैस या एसिडिटी है, जबकि वास्तव में यह हार्ट अटैक का शुरुआती संकेत हो सकता है।   7. चक्कर आना   अचानक चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना या संतुलन बिगड़ना भी चेतावनी संकेत हो सकता है।   8. बेचैनी या घबराहट   कुछ लोगों को हार्ट अटैक से पहले बिना किसी स्पष्ट कारण के बहुत ज्यादा बेचैनी या घबराहट महसूस होती है।   9. पीठ में दर्द   महिलाओं में कभी-कभी हार्ट अटैक का दर्द पीठ या कंधे में भी महसूस हो सकता है।   10. नींद में परेशानी   कुछ अध्ययनों के अनुसार हार्ट अटैक से पहले कई लोगों को लगातार नींद न आने या बेचैनी की समस्या हो सकती है।   महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग हो सकते हैं   महिलाओं में हमेशा सीने में तेज दर्द नहीं होता। इन लक्षणों पर भी ध्यान दें: अत्यधिक थकान सांस फूलना मतली गर्दन या जबड़े में दर्द पीठ दर्द इसी कारण महिलाओं में हार्ट अटैक की पहचान कई बार देर से होती है।   किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?   हाई ब्लड प्रेशर डायबिटीज हाई कोलेस्ट्रॉल धूम्रपान मोटापा नियमित व्यायाम न करना तनाव परिवार में हृदय रोग का इतिहास बढ़ती उम्र हार्ट अटैक से बचने के उपाय   रोज़ कम से कम 30 मिनट पैदल चलें। धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें। संतुलित आहार लें। ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। पर्याप्त नींद लें। तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। कब तुरंत अस्पताल जाएं?   यदि इनमें से कोई लक्षण 5–10 मिनट से अधिक समय तक बना रहे या बढ़ता जाए, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सेवा लें। स्वयं वाहन चलाकर अस्पताल जाने के बजाय एम्बुलेंस बुलाना अधिक सुरक्षित हो सकता है।

abhishek singh जून 25, 2026 0
वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

रांची। पत्रकारिता जगत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। IDTV इंद्रधनुष के वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार (58 )का हृदयाघात (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन से परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को दीपेश कुमार अपने कार्यालय में कार्य कर रहे  थे। इसी दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। सहकर्मियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शाम में उनके एक मात्र सुपुत्र जयेश कुमार के द्वारा हरमू के मुक्ति धाम में मुखाग्नि दी गई।  पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने समर्पण, निष्पक्ष कार्यशैली और सरल व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने वाले दीपेश कुमार ने लंबे समय तक मीडिया जगत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दीपेश कुमार अपने हंसमुख स्वभाव, सकारात्मक सोच और युवा पत्रकारों के मार्गदर्शक के रूप में भी जाने जाते थे। उनके साथ काम करने वाले सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने न केवल एक कुशल संपादक, बल्कि एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में सभी के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उनके निधन की सूचना मिलते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें याद करते हुए शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उनके निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति और शोकाकुल परिवार को इस विकट समय में संबल प्रदान करें।

anjali kumari जून 24, 2026 0
Indian student Mohammed Kumail Sheikh dies of cardiac arrest a day after graduating in California
अमेरिका में भारतीय छात्र की मौत, ग्रेजुएशन के अगले दिन 26 वर्षीय युवक को आया हार्ट अटैक

अमेरिका के कैलिफोर्निया में पढ़ाई कर रहे 26 वर्षीय भारतीय छात्र मोहम्मद कुमेल शेख का ग्रेजुएशन के एक दिन बाद कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। इस घटना से उनके दोस्तों और परिवार में शोक की लहर है। कुमेल ने एक दिन पहले ही गोल्डन गेट यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद कुमेल शेख आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि उन्हें नींद में ही हार्ट अटैक आया, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। ग्रेजुएशन का जश्न, अगले दिन मातम कुमेल के दोस्त और फंडरेजर अभियान के आयोजक रवि तेजा नन्नापनेनी ने बताया कि एक दिन पहले ही सभी ने उनके साथ ग्रेजुएशन वॉक का जश्न मनाया था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह उनके साथ आखिरी मुलाकात होगी। उन्होंने लिखा कि मोहम्मद बड़े सपने लेकर अमेरिका आए थे और अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। उनके अचानक निधन से उन्हें जानने वाले सभी लोग सदमे में हैं। पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए जुटाई जा रही मदद दोस्तों ने कुमेल के पार्थिव शरीर को भारत भेजने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ऑनलाइन फंडरेजर शुरू किया है। अपील में कहा गया है कि उनका परिवार निम्न-मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि से आता है और पहले से शिक्षा ऋण के बोझ से जूझ रहा है। दोस्तों का कहना है कि आर्थिक मदद से परिवार को अचानक आए खर्चों और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सहारा मिल सकेगा। दोस्तों ने बताया दयालु और मददगार इंसान रवि तेजा ने कुमेल को बेहद विनम्र, दयालु और मददगार व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा अपने दोस्तों के साथ खड़े रहते थे और हर किसी की मदद करने के लिए तैयार रहते थे।  

surbhi मई 9, 2026 0
Tamil Nadu election news
तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर: कांग्रेस ने डीएमके से तोड़ा गठबंधन, TVK को दिया समर्थन

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। Indian National Congress ने लंबे समय से चले आ रहे अपने सहयोगी Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) से गठबंधन तोड़ दिया है और अब Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस फैसले से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।   विजय की पार्टी को मिला बड़ा समर्थन एक्टर से नेता बने Vijay की पार्टी TVK ने इस चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया है। सरकार गठन की प्रक्रिया के बीच कांग्रेस का समर्थन मिलने से TVK की स्थिति और मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि विजय अब सरकार बनाने के प्रमुख दावेदार बन गए हैं।   कांग्रेस ने बताई गठबंधन की शर्त कांग्रेस ने साफ किया है कि TVK को दिया गया समर्थन केवल सरकार गठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य के चुनाव—जैसे लोकसभा, राज्यसभा और स्थानीय निकाय चुनाव में भी यह गठबंधन जारी रह सकता है। हालांकि पार्टी ने यह शर्त रखी है कि इस गठबंधन में भाजपा या उसके किसी सहयोगी दल को शामिल नहीं किया जाएगा।   केंद्र में बना रहेगा ‘INDIA’ गठबंधन दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु में DMK से अलग होने के बावजूद कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर ‘INDIA’ गठबंधन में DMK के साथ उसके संबंध बने रह सकते हैं। यानी राज्य और केंद्र की राजनीति में अलग-अलग समीकरण देखने को मिल सकते हैं।   बदले राजनीतिक समीकरण इस घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह से नई दिशा दे दी है। जहां पहले DMK-कांग्रेस गठबंधन मजबूत माना जाता था, वहीं अब TVK-कांग्रेस का नया समीकरण उभरकर सामने आया है।

Unknown मई 6, 2026 0
Illustration of heart arteries showing bypass surgery and stent procedure comparison in coronary artery disease treatment
कोरोनरी आर्टरी डिजीज के इलाज में नई बहस: CABG और PCI के नतीजों में क्या कहती है ताजा स्टडी?

हृदय रोग के इलाज में लंबे समय से यह सवाल बना हुआ है कि सर्जरी बेहतर है या स्टेंटिंग। हालिया रिसर्च ने इस बहस को नई दिशा दी है। Coronary Artery Disease के इलाज में Coronary Artery Bypass Graft (CABG) और Percutaneous Coronary Intervention (PCI) के बीच तुलना करने वाली एक व्यापक स्टडी से कई अहम निष्कर्ष सामने आए हैं। क्या कहती है स्टडी? यह अध्ययन कई रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स पर आधारित है, जिनमें कम से कम 3 साल का फॉलो-अप शामिल था। मुख्य फोकस था–मृत्यु दर (all-cause mortality), जबकि सेकेंडरी पैरामीटर्स में हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसे गंभीर इवेंट्स और दोबारा इलाज (revascularisation) शामिल थे। मृत्यु दर में बड़ा अंतर नहीं स्टडी के अनुसार, CABG और PCI के बीच कुल मृत्यु दर में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया। रिलेटिव रिस्क: 0.90 95% कॉन्फिडेंस इंटरवल: 0.78–1.04 हालांकि, जिन मरीजों में आर्टरी ब्लॉकेज कम जटिल था (SYNTAX स्कोर 23 से कम), उनमें CABG से मृत्यु का जोखिम कुछ कम देखा गया। गंभीर हार्ट इवेंट्स में CABG आगे भले ही मृत्यु दर लगभग समान रही, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर्स में CABG बेहतर साबित हुआ: मेजर कार्डियोवैस्कुलर और सेरेब्रोवैस्कुलर इवेंट्स (MACCE) का जोखिम कम रिलेटिव रिस्क: 0.75 दोबारा प्रक्रिया (revascularisation) की जरूरत आधी तक कम (RR: 0.50) यह फायदे अलग-अलग मरीज समूहों में भी समान रूप से देखे गए। इलाज के फैसले पर क्या असर? यह निष्कर्ष डॉक्टरों और मरीजों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर लक्ष्य सिर्फ जीवन बचाना है, तो दोनों विकल्प लगभग समान हैं लेकिन लंबे समय में जटिलताओं और दोबारा इलाज से बचना है, तो CABG बेहतर विकल्प हो सकता है क्या होना चाहिए अगला कदम? विशेषज्ञों का मानना है कि हर मरीज के लिए एक ही इलाज सही नहीं हो सकता। इलाज का चयन करते समय मरीज की स्थिति, आर्टरी की जटिलता और व्यक्तिगत जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Illustration of heart tissue damage after heart attack showing activity of natural killer immune cells
हार्ट अटैक के नुकसान में ‘नेचुरल किलर सेल्स’ की बड़ी भूमिका: नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन में यह सामने आया है कि Natural Killer Cells (NK Cells) हार्ट अटैक के बाद दिल को होने वाले नुकसान को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। यह खोज Myocardial Infarction के बाद शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को समझने में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। हार्ट अटैक और इम्यून सिस्टम का कनेक्शन दुनियाभर में हार्ट अटैक हार्ट फेलियर का एक प्रमुख कारण है। अब तक माना जाता था कि दिल को नुकसान केवल ब्लड सप्लाई रुकने (इस्कीमिया) से होता है, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि शरीर का इम्यून सिस्टम भी इस नुकसान को बढ़ा सकता है। खासतौर पर NK Cells जैसे साइटोटॉक्सिक इम्यून सेल्स की भूमिका अब तक स्पष्ट नहीं थी। कैसे बढ़ता है दिल को नुकसान? रिसर्च के अनुसार, हार्ट अटैक के तुरंत बाद NK Cells तेजी से एक्टिव हो जाते हैं और दिल के क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंच जाते हैं। एक्टिव होने के बाद ये सेल्स Granzyme B नामक जहरीला प्रोटीन छोड़ते हैं, जो दिल की मांसपेशियों की कोशिकाओं को Apoptosis के जरिए नष्ट कर देता है। इससे होता है: दिल की कोशिकाओं का ज्यादा नुकसान दिल की संरचना में खराब बदलाव (वेंट्रिकुलर रिमॉडलिंग) दिल की कार्यक्षमता में गिरावट प्रयोगों से मिले ठोस सबूत रिसर्च में यह भी साबित हुआ कि NK Cells केवल मौजूद नहीं होते, बल्कि सक्रिय रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। जब NK Cells को हटाया या कम किया गया, तो दिल की कोशिकाओं की मौत कम हुई और हार्ट फंक्शन बेहतर हुआ। वहीं, NK Cells को ज्यादा एक्टिव करने पर दिल को नुकसान और बढ़ गया और हार्ट फेलियर का खतरा तेजी से बढ़ा। दिल से बाहर भी असर यह अध्ययन यह भी बताता है कि NK Cells केवल दिल तक सीमित नहीं हैं। ये बोन मैरो को भी प्रभावित करते हैं और शरीर में अन्य इम्यून सेल्स के उत्पादन को बढ़ाते हैं, जिससे पूरे शरीर में सूजन बढ़ सकती है। मानव हृदय ऊतकों के विश्लेषण में भी ऐसे ही संकेत मिले, जिससे यह संभावना मजबूत होती है कि यह मैकेनिज्म इंसानों में भी लागू हो सकता है। भविष्य की इलाज की दिशा हालांकि यह अध्ययन अभी मुख्य रूप से जानवरों पर आधारित है, लेकिन यह एक नई उम्मीद जगाता है। अगर NK Cells को नियंत्रित किया जाए, तो: हार्ट अटैक के बाद नुकसान कम किया जा सकता है दिल की रिकवरी बेहतर हो सकती है हार्ट फेलियर का खतरा घटाया जा सकता है फिलहाल, इस दिशा में और रिसर्च की जरूरत है ताकि इसे सुरक्षित रूप से मरीजों पर लागू किया जा सके।  

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0