नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्तर पर पिछले 36 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन को वापस लिया जा रहा है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की। सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ आंदोलन सीजेपी ने कहा कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और आंदोलन से जुड़ी अन्य प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है। इन फैसलों के बाद संगठन ने आंदोलन को अपनी बड़ी जीत बताते हुए औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की। आंदोलन के समापन के साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर समेत विभिन्न शहरों में चल रहे धरने और प्रदर्शन भी खत्म होने लगे। 36 दिन के आंदोलन का हुआ समापन पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन देश के कई राज्यों तक फैल गया था। इस दौरान हजारों छात्रों ने प्रदर्शन में भाग लिया और कई दौर की बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। आंदोलन समाप्त होने के बाद सीजेपी नेताओं ने इसे युवाओं की लोकतांत्रिक जीत बताया और कहा कि भविष्य में भी शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज जारी रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपने के बाद CJP (Cockroach Janata Party) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे देशभर के छात्रों और युवाओं के आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत है। 'झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए' अभिजीत दिपके ने अपने बयान में कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। हमने कर दिखाया।" उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन और देशभर के युवाओं की एकजुटता ने सरकार को बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया। उनके अनुसार यह उन छात्रों की जीत है, जो पिछले कई दिनों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे थे। दिपके ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय कराना था। उन्होंने सभी छात्रों, अभिभावकों और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह सफलता पूरे देश के युवाओं की है। 'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई' अभिजीत दिपके ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह संघर्ष का अंत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब CJP की मांगें केवल मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने सरकार से पेपर लीक के सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त कार्रवाई, प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में व्यापक और स्थायी सुधार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने, प्रदर्शन के दौरान घायल छात्रों को मुआवजा, और पेपर लीक व परीक्षा विवादों के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की मांग दोहराई। दिपके ने कहा कि जब तक इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बातचीत के लिए उनकी पार्टी के प्रतिनिधियों को बुलाया, लेकिन चर्चा के बजाय उन्हें कई घंटों तक आवास पर ही नजरबंद रखा गया। दीपके के अनुसार, इस दौरान उनके प्रतिनिधियों के फोन भी ले लिए गए, जिससे पार्टी का उनसे संपर्क टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के बहाने उन्हें उलझाया गया, जबकि बाहर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि यदि भीड़ को नियंत्रित करना उद्देश्य था तो पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्र घायल हुए और इस कार्रवाई से अनावश्यक हिंसा हुई। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप दीपके ने दिल्ली पुलिस के कुछ पुरुष कर्मियों पर महिला प्रदर्शनकारियों और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार तथा हिंसा का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ बल प्रयोग किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सोनम वांगचुक जारी रखेंगे अनशन दीपके ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो अनशन समाप्त करने पर विचार कर रहे थे, अब इसे जारी रखेंगे। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई से वांगचुक आहत हैं और उन्होंने अपनी पत्नी के माध्यम से संदेश भेजकर अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है। सीजेपी ने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन फिलहाल समाप्त नहीं होगा और संगठन जल्द ही अपने अगले आंदोलन की रणनीति की घोषणा करेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनका आंदोलन और तेज हो गया है। उनके सहयोगी और Coackroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शनिवार को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि वांगचुक को अस्पताल ले जाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा और उनकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। 'आंदोलन नहीं रुकेगा' भूख हड़ताल शुरू करने के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और नागरिकों की आवाज़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जंतर-मंतर पर बढ़ा तनाव शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को बिगड़ती सेहत के चलते जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। दिपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई और शांतिपूर्ण आंदोलन को बाधित करने की कोशिश हुई। 20 जुलाई का 'चलो संसद' मार्च रहेगा जारी अभिजीत दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा। उन्होंने समर्थकों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की। सरकार से बातचीत की मांग आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार को जल्द संवाद शुरू करना चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि सोनम वांगचुक को केवल चिकित्सकीय सलाह और अदालत के निर्देश के आधार पर अस्पताल ले जाया गया है। फिलहाल सभी की निगाहें आंदोलन के अगले चरण और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
नई दिल्ली: डिजिटल संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे, दिल्ली की सीमाओं तथा अन्य संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस महीने की शुरुआत में समर्थकों और छात्रों से दिल्ली में आयोजित होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने अपने समर्थकों से 6 जून को दिल्ली एयरपोर्ट पर उनसे मिलने का भी आह्वान किया था। सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस को कोई औपचारिक अनुमति आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर एहतियातन सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। राजधानी में बढ़ाई गई सुरक्षा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली जिले समेत कई रणनीतिक स्थानों पर 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। आईजीआई एयरपोर्ट, प्रमुख रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और दिल्ली की सीमाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा प्रमुख बाजारों, चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। एयरपोर्ट परिसर के बाहर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है, जबकि दिल्ली की सीमाओं और मध्य दिल्ली की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर वाहनों की जांच भी तेज कर दी गई है। अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने का दावा सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया है कि अभिजीत दीपके दिल्ली पहुंच चुके हैं और इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर भी साझा की है। रांका के अनुसार, दीपके दिल्ली पुलिस से प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए संबंधित थाने जाएंगे, जिसके बाद जंतर-मंतर पर धरना आयोजित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि यह दिन भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और संगठन अपने मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना चाहता है। वरिष्ठ अधिकारियों ने की समीक्षा शुक्रवार को पुलिस उपायुक्त (आईजीआई) विचित्र वीर समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने एयरपोर्ट और आसपास के इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा हालात का आकलन किया गया और सभी फील्ड इकाइयों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। जिला पुलिस इकाइयों को पर्याप्त संख्या में बल तैयार रखने और पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए रखने के लिए कहा गया है। खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संस्थानों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। पुलिस का कहना है कि आम नागरिकों की सुरक्षा और यात्रियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। साथ ही राजधानी में कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।