Amarnath Yatra Bus Accident: जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में मंगलवार (28 जुलाई) को अमरनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं से भरी एक बस हादसे का शिकार हो गई। यह दुर्घटना कंगन क्षेत्र के हरिगंवन इलाके में हुई, जहां एक तीखे मोड़ पर चालक बस से नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद बस सड़क से फिसलकर एक मकान से जा टकराई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तथा सुरक्षा बल तुरंत राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। टला बड़ा हादसा अधिकारियों के मुताबिक, बस मकान से टकराने के बाद सिंध नदी की ओर बढ़ गई थी, लेकिन सौभाग्य से वह नदी में गिरने से पहले ही रुक गई। यदि बस नदी में गिर जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। दुर्घटना के समय मकान में कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। हालांकि, मकान को काफी नुकसान पहुंचा है। कई श्रद्धालु हुए घायल हादसे में बस में सवार कई श्रद्धालु घायल हुए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अधिकांश यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि कुछ को गंभीर चोट लगने की भी सूचना है। स्थानीय लोगों, पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों ने तुरंत बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। घायलों का इलाज जारी है और सभी की स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किया पोस्ट घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसे न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया है। वीडियो में दुर्घटनाग्रस्त बस, मौके पर मौजूद सुरक्षा बल और राहत-बचाव अभियान साफ देखा जा सकता है। अमरनाथ यात्रा जारी, 3,823 श्रद्धालुओं का नया जत्था रवाना दूसरी ओर, अमरनाथ यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। सोमवार (27 जुलाई) को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से 12वां जत्था रवाना हुआ। इस जत्थे में 3,823 श्रद्धालु शामिल थे, जिन्हें 140 वाहनों के काफिले के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में बालटाल मार्ग के लिए रवाना किया गया। श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे लगाए। अधिकारियों के अनुसार, अब तक जम्मू आधार शिविर से 1.27 लाख से अधिक श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। हादसे के बाद भी यात्रा सामान्य रूप से जारी है, जबकि दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर में वार्षिक अमरनाथ यात्रा लगातार सुचारु रूप से जारी है। हाल ही में अनंतनाग में हुए आतंकी हमले के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती, निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है। इसके बावजूद यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शांतिपूर्वक जारी है और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर रहे हैं। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा का बहुस्तरीय घेरा प्रशासन ने बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान पूरे यात्रा मार्ग पर तैनात हैं। ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और आधुनिक निगरानी उपकरणों के जरिए संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अनंतनाग हमले के बाद बढ़ी सतर्कता अनंतनाग में पुलिसकर्मी पर हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे कश्मीर घाटी में तलाशी अभियान तेज कर दिया है। यात्रा मार्ग से जुड़े क्षेत्रों में वाहनों की जांच, पहचान सत्यापन और गश्त बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक नहीं होने दी जाएगी। हजारों श्रद्धालु कर रहे हैं बाबा बर्फानी के दर्शन श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अनुसार, यात्रा के दौरान अब तक लाखों श्रद्धालु पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना हुआ है। मौसम अनुकूल रहने के कारण यात्रा सुचारु रूप से आगे बढ़ रही है और प्रशासन स्वास्थ्य, भोजन तथा आवास जैसी आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहा है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से की अपील जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से केवल आधिकारिक काफिलों के साथ यात्रा करने, सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के दौरान शनिवार को एक सड़क हादसा हो गया। उधमपुर जिले में बालटाल जा रही श्रद्धालुओं की कार सड़क किनारे खड़े एक डंपर से टकरा गई। हादसे में कम से कम चार श्रद्धालु घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, यह दुर्घटना जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर संगूर चौक के पास हुई। बालटाल की ओर जा रही टोयोटा इनोवा सड़क किनारे खड़े डंपर से पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी हादसे के बाद स्थानीय पुलिस और राहत टीम ने तुरंत बचाव अभियान चलाया। सभी चार घायल श्रद्धालुओं को उधमपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। फिलहाल सभी घायलों की स्थिति पर डॉक्टरों की निगरानी रखी जा रही है। हादसे की जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने घटना का मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कार सड़क किनारे खड़े डंपर से पीछे से टकराई, हालांकि हादसे की सटीक वजह का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन लगातार सतर्क है। इस हादसे के बाद भी अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है।
रियलिटी शो Lock Upp 2: Sach Ya Saza में अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेया कालरा ने अभिनेता कुशल टंडन को लेकर बड़ा दावा किया है। शो के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि कुशल ने उन्हें सोशल मीडिया पर मैसेज किए थे, जबकि उस समय उनका नाम अभिनेत्री शिवांगी जोशी के साथ जोड़ा जा रहा था। हालांकि, इन आरोपों पर अब तक कुशल टंडन और शिवांगी जोशी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रमोशनल शूट के बाद आए मैसेज शो में सह-प्रतियोगी शिल्पा शिंदे से बातचीत के दौरान श्रेया कालरा ने बताया कि उन्होंने टीवी शो Barsatein – Mausam Pyaar Ka के प्रमोशनल वीडियो में कुशल टंडन के साथ काम किया था। श्रेया के अनुसार, शूटिंग पूरी होने के बाद कुशल ने उन्हें इंस्टाग्राम पर मैसेज करना शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय वह खुद भी एक रिश्ते में थीं और बाद में उन्हें पता चला कि कुशल और शिवांगी जोशी के बीच भी रिश्ता था। इसके बाद उन्होंने कुशल से बातचीत आगे नहीं बढ़ाई। शिवांगी से मुलाकात के दौरान क्या हुआ? श्रेया ने यह भी दावा किया कि बाद में जब उनकी मुलाकात शिवांगी जोशी से हुई, तब अभिनेत्री ने बताया कि कुशल ने कहा था कि सोशल मीडिया पर सबसे पहले श्रेया ने ही उन्हें मैसेज और फॉलो किया था। श्रेया ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने शिवांगी को अपनी पूरी चैट दिखाई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने कभी भी फ्लर्ट या बातचीत की शुरुआत नहीं की थी। ब्रेकअप का भी किया जिक्र श्रेया कालरा ने शो में यह भी दावा किया कि कुछ महीनों बाद कुशल टंडन ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए शिवांगी जोशी से अपने अलग होने की जानकारी साझा की थी। गौरतलब है कि कुशल ने वर्ष 2025 में सोशल मीडिया पर अपने ब्रेकअप की पुष्टि की थी, हालांकि बाद में वह पोस्ट हटा दी गई थी। क्या बोले कुशल और शिवांगी? फिलहाल श्रेया कालरा के इन आरोपों पर कुशल टंडन या शिवांगी जोशी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। Lock Upp 2 में बढ़ रहा है विवाद Lock Upp 2: Sach Ya Saza इन दिनों अपने विवादित खुलासों और कंटेस्टेंट्स के व्यक्तिगत बयानों को लेकर लगातार चर्चा में है। शो में कई प्रतिभागी अपने निजी जीवन से जुड़े अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे दर्शकों के बीच इसकी चर्चा बनी हुई है।
श्रीनगर, एजेंसियां। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन के भीतर पवित्र हिम शिवलिंग (बाबा बर्फानी) के लगभग पूरी तरह पिघल जाने से करोड़ों श्रद्धालुओं में चिंता और जिज्ञासा बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह किसी एक वजह से नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, कम बर्फबारी और गुफा क्षेत्र में बढ़ी मानवीय गतिविधियों का संयुक्त प्रभाव हो सकता है। प्राकृतिक प्रक्रिया पर पड़ा मौसम का असर वैज्ञानिकों के अनुसार अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया से बनता है। गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें कम तापमान में जमकर बर्फ का स्तंभ बनाती हैं। इस बार सर्दियों में अपेक्षाकृत कम बर्फबारी, अधिक तापमान और मौसम के बदलते पैटर्न के कारण शिवलिंग अपेक्षित आकार नहीं ले सका और जल्दी पिघल गया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या भी मानी जा रही वजह विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा के शुरुआती दिनों में ही रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु गुफा तक पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही, रोशनी, अस्थायी ढांचों और अन्य मानवीय गतिविधियों से गुफा के आसपास का तापमान प्रभावित हो सकता है, जिससे प्राकृतिक हिम शिवलिंग तेजी से पिघलने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इस संबंध में कोई अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। आस्था बरकरार, यात्रा जारी हिम शिवलिंग के अंतर्ध्यान होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। बड़ी संख्या में भक्त अब भी अमरनाथ गुफा पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि यात्रा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधाओं के पूरे इंतजाम किए गए हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वार्षिक अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपनी विशेष K9 डॉग स्क्वॉड टीमों को यात्रा मार्गों, बेस कैंपों और पवित्र गुफा क्षेत्र में तैनात किया है। इन विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर और ट्रैकर डॉग्स का मुख्य कार्य विस्फोटकों का पता लगाना, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करना और यात्रा मार्गों को सुरक्षित बनाना है। क्या है यह चार पैरों वाले ‘K9 योद्धा’? CRPF के ये चार पैरों वाले ‘K9 योद्धा’ बम निरोधक दस्तों और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के साथ मिलकर बालटाल और पहलगाम मार्गों, ट्रांजिट कैंपों, काफिले के रास्तों, हेलीपैड तथा संवेदनशील स्थलों पर लगातार एंटी-सबोटाज जांच कर रहे हैं। इसके अलावा, कठिन पहाड़ी इलाकों में खोज एवं बचाव अभियानों के लिए भी इन डॉग्स को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए K9 टीमों के साथ निगरानी ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, फेसियल रिकग्निशन सिस्टम और आधुनिक सर्विलांस तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पूरे यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। पूर्व महानिरीक्षक आर.के. यादव के अनुसार CRPF के पूर्व महानिरीक्षक आर.के. यादव के अनुसार, K9 इकाइयों की तीव्र सूंघने की क्षमता उन्हें पारंपरिक तरीकों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से विस्फोटकों और छिपे हुए खतरों का पता लगाने में सक्षम बनाती है। यही वजह है कि हर संवेदनशील स्थान पर तीर्थयात्रियों के पहुंचने से पहले डॉग स्क्वॉड द्वारा गहन जांच की जा रही है। इस वर्ष की 57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने "ऑपरेशन शिव" के तहत एक लाख से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 670 से अधिक कंपनियां, सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बहु-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड में कार्य कर रही हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और शांतिपूर्ण वातावरण में बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के नाम एक विशेष पत्र लिखकर उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। पत्र में उन्होंने अमरनाथ यात्रा को भारत की आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक एकता और सेवा भाव का प्रतीक बताते हुए श्रद्धालुओं से पांच संकल्प लेने की अपील की है। यह संदेश यात्रा के दोनों आधार शिविरों बालटाल और नुनवान (पहलगाम) में श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। पीएम ने यात्रियों से लिए पांच संकल्प अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा नियमों का पालन करने, 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा देने और राष्ट्र सेवा की भावना के साथ यात्रा पूरी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बाबा बर्फानी की यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर है। स्थानीय लोगों से खरीदारी की भी अपील प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और स्थानीय कारोबारियों से खरीदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के लोगों की आजीविका को भी समर्थन मिलेगा। यात्रा से जुड़े सभी कर्मियों का जताया आभार प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर प्रशासन, सुरक्षा बलों, स्वास्थ्य कर्मियों और स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित, मंगलमय और सफल यात्रा की कामना करते हुए कहा कि अमरनाथ यात्रा देश की एकता और आध्यात्मिक शक्ति का जीवंत प्रतीक है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।