नई दिल्ली, एजेंसियां। ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon ने अपने बड़े शॉपिंग इवेंट ग्रेट फ्रीडम सेल 2026 की घोषणा कर दी है। यह सेल 7 अगस्त 2026 से Amazon.in पर शुरू होगी। इस बार कंपनी ने ग्राहकों के खरीदारी अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नए AI आधारित शॉपिंग टूल्स भी शामिल किए हैं, जो ग्राहकों को बेहतर प्रोडक्ट खोजने और सही डील चुनने में मदद करेंगे। AI फीचर्स से मिलेगी स्मार्ट शॉपिंग की सुविधा अमेज़न इस सेल में अपने AI शॉपिंग असिस्टेंट Rufus को और बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है। यह AI टूल ग्राहकों को प्रोडक्ट की जानकारी, तुलना, कीमतों का विश्लेषण और खरीदारी से जुड़े सुझाव देने में मदद करेगा। कंपनी का उद्देश्य है कि ग्राहक हजारों विकल्पों में से अपनी जरूरत के अनुसार सही प्रोडक्ट आसानी से चुन सकें। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स पर मिलेंगे बड़े ऑफर ग्रेट फ्रीडम सेल 2026 में स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण और अन्य कैटेगरी में भारी छूट मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा ग्राहकों को बैंक ऑफर, नो-कॉस्ट EMI, एक्सचेंज ऑफर और Amazon Pay से जुड़े लाभ भी दिए जाएंगे। Prime मेंबर्स को मिल सकता है शुरुआती एक्सेस रिपोर्ट्स के अनुसार, Amazon Prime ग्राहकों को सेल में आम यूजर्स से पहले खरीदारी का मौका मिल सकता है। कंपनी बड़ी संख्या में प्रोडक्ट्स पर विशेष डील और शुरुआती एक्सेस की सुविधा देने की तैयारी कर रही है। AI और ई-कॉमर्स के नए दौर की शुरुआत टेक विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शॉपिंग फीचर्स आने वाले समय में ऑनलाइन खरीदारी के तरीके को बदल सकते हैं। अमेज़न का लक्ष्य सिर्फ डिस्काउंट देना नहीं, बल्कि AI की मदद से ग्राहकों को तेज, आसान और व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव देना है। ग्रेट फ्रीडम सेल 2026 में कंपनी इसी दिशा में नए प्रयोग कर रही है।
हैदराबाद, एजेंसियां। वीवो की सब-ब्रांड iQOO ने भारतीय बाजार में अपना नया बजट 5G स्मार्टफोन iQOO Z11 Lite 5G लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन को उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर पेश किया है, जो कम कीमत में बड़ी बैटरी, दमदार परफॉर्मेंस और AI फीचर्स वाला फोन चाहते हैं। यह स्मार्टफोन MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर, 6500mAh बैटरी और 120Hz रिफ्रेश रेट डिस्प्ले के साथ आता है। iQOO Z11 Lite 5G में 6.74 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz और पीक ब्राइटनेस 1200 निट्स है। डिस्प्ले को TÜV Rheinland Low Blue Light सर्टिफिकेशन भी मिला है, जिससे लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान आंखों पर कम असर पड़ता है। स्मार्टफोन में 6nm आधारित MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है। इसके साथ 6GB तक LPDDR4X रैम और 256GB तक UFS 2.2 स्टोरेज मिलती है। एक्सटेंडेड रैम फीचर की मदद से रैम को 6GB तक बढ़ाया जा सकता है, जबकि माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए स्टोरेज को 2TB तक एक्सपैंड किया जा सकता है। यह फोन Android 16 आधारित OriginOS 6 पर चलता है। फोटोग्राफी के लिए फोन में 50 मेगापिक्सल का Sony IMX852 प्राइमरी कैमरा और सेकेंडरी सेंसर दिया गया है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलता है। कैमरा ऐप में नाइट मोड, पोर्ट्रेट, पैनोरामा, डॉक्यूमेंट स्कैन, टाइम-लैप्स और स्लो मोशन जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6500mAh बैटरी है, जो 44W फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, डुअल-बैंड Wi-Fi, ब्लूटूथ 5.4, USB Type-C, GPS और OTG जैसे फीचर्स दिए गए हैं। सुरक्षा के लिए साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर मौजूद है। ड्यूरेबिलिटी के लिहाज से स्मार्टफोन को IP65 रेटिंग, मिलिट्री-ग्रेड मजबूती और Swiss SGS फाइव-स्टार ड्रॉप रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन मिला है। कीमत और उपलब्धता iQOO Z11 Lite 5G को तीन वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। 4GB + 128GB वेरिएंट की कीमत ₹19,499, 6GB + 128GB वेरिएंट की कीमत ₹21,499 और 6GB + 256GB वेरिएंट की कीमत ₹24,499 रखी गई है। लॉन्च ऑफर के तहत ये वेरिएंट क्रमशः ₹17,999, ₹19,999 और ₹22,999 में खरीदे जा सकेंगे। चुनिंदा Axis Bank और SBI कार्ड पर ₹1,500 का इंस्टेंट डिस्काउंट और तीन महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का विकल्प भी मिलेगा। यह स्मार्टफोन 30 जुलाई से iQOO ई-स्टोर, Amazon, Vivo एक्सक्लूसिव स्टोर्स और चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स पर Midnight Blue और Solar Flame कलर ऑप्शन में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते दौर में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भारत को AI डेवलपमेंट, रिसर्च, डेटा सेंटर और टैलेंट के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रही हैं। देश में बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी संख्या में टेक विशेषज्ञों की मौजूदगी ने भारत को वैश्विक AI इकोसिस्टम में अहम स्थान दिलाया है। AI टैलेंट में भारत की मजबूत स्थिति भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि कई वैश्विक कंपनियां भारत में अपने AI रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर का विस्तार कर रही हैं। बड़ी टेक कंपनियों का बढ़ा निवेश Google, Microsoft, Amazon और अन्य वैश्विक टेक कंपनियां भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, AI प्लेटफॉर्म और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं। कंपनियां भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि AI इनोवेशन और डेवलपमेंट के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रही हैं। सरकार का AI मिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत सरकार भी AI क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। IndiaAI मिशन के तहत AI रिसर्च, कंप्यूटिंग क्षमता, स्टार्टअप और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। स्टार्टअप सेक्टर में AI का विस्तार भारत में AI आधारित स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि, फाइनेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत AI इनोवेशन के बड़े केंद्रों में शामिल हो सकता है। चुनौतियां भी बनी हुई हैं हालांकि AI क्षेत्र में भारत के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग संसाधन, डेटा सुरक्षा और कुशल AI प्रोफेशनल्स की जरूरत शामिल है। इन क्षेत्रों में तेजी से सुधार के साथ भारत वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए 8,900 AI इंजीनियरों की नई टीम बनाने का ऐलान किया है। कंपनी का उद्देश्य एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए AI आधारित समाधान तैयार करना और वैश्विक स्तर पर OpenAI, Microsoft, Amazon तथा Anthropic जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना है। AI इंजीनियर सीधे ग्राहकों के साथ करेंगे काम TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन ने बताया कि नई टीम में शामिल इंजीनियर केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे सीधे ग्राहकों के साथ मिलकर उनकी जरूरत के मुताबिक AI समाधान विकसित करेंगे। कंपनी इन्हें "Forward Deployed Engineers" के रूप में तैयार कर रही है, ताकि AI प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू किया जा सके। AI कारोबार को नई ऊंचाई देने की रणनीति कंपनी का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसी को देखते हुए TCS बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों को AI, मशीन लर्निंग और जनरेटिव AI तकनीकों में प्रशिक्षित कर रही है। कंपनी पहले ही लाखों कर्मचारियों को AI से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग दे चुकी है और अब विशेषज्ञ इंजीनियरों की अलग टीम तैयार की जा रही है। वैश्विक AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि TCS का यह कदम भारतीय आईटी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। AI तकनीक में बढ़ते निवेश के साथ भारतीय कंपनियां अब केवल आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वैश्विक AI नवाचार और एंटरप्राइज समाधान के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फेस्टिव सीजन में स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए एक नई स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। टेक्नोलॉजी रिसर्च फर्म Techarc की रिपोर्ट के अनुसार, अमेज़न और फ्लिपकार्ट की हालिया फेस्टिव सेल में दिखाई गई अधिकांश छूट वास्तविक बचत नहीं थी। अध्ययन में दावा किया गया कि सेल से पहले स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ा दी गई थीं और सेल के दौरान दिए गए डिस्काउंट केवल उसी बढ़ोतरी की भरपाई कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्ट के अनुसार, 10 प्रमुख ब्रांडों के 50 स्मार्टफोन मॉडल्स का विश्लेषण किया गया। इसमें एंट्री-लेवल से लेकर प्रीमियम फ्लैगशिप डिवाइस तक शामिल थे। स्टडी में लॉन्च प्राइस, जून 2026 की सामान्य कीमत और फेस्टिव सेल के दौरान की प्रभावी कीमत की तुलना की गई। नतीजों में सामने आया कि ट्रैक किए गए 68 प्रतिशत स्मार्टफोन जून 2026 में अपनी लॉन्च कीमत से औसतन 9.9 प्रतिशत महंगे बिक रहे थे, जबकि केवल 12 प्रतिशत मॉडल ही सामान्य बाजार ट्रेंड के अनुसार सस्ते हुए। फेस्टिव सेल के दौरान फ्लिपकार्ट पर औसतन 5.5 प्रतिशत और अमेज़न पर 2.3 प्रतिशत डिस्काउंट का दावा किया गया। हालांकि लॉन्च कीमत से तुलना करने पर पाया गया कि अधिकांश फोन अब भी फ्लिपकार्ट पर औसतन 3.7 प्रतिशत और अमेज़न पर 7.1 प्रतिशत अधिक कीमत पर बिक रहे थे। दोनों प्लेटफॉर्म पर तीन में से एक से भी कम स्मार्टफोन ऐसे थे, जिनकी कीमत वास्तव में लॉन्च प्राइस से कम हुई। स्टडी में फ्लिपकार्ट की डिस्काउंटिंग को अमेज़न की तुलना में अधिक पारदर्शी बताया गया। फ्लिपकार्ट पर 33 प्रतिशत लिस्टिंग्स में वास्तविक छूट मिली, जबकि अमेज़न पर यह आंकड़ा 30 प्रतिशत रहा। वहीं बिना वास्तविक मूल्य कटौती वाली लिस्टिंग्स अमेज़न पर 40 प्रतिशत और फ्लिपकार्ट पर 18 प्रतिशत दर्ज की गईं। Techarc के संस्थापक फैसल के अनुसार Techarc के संस्थापक फैसल के अनुसार, वैश्विक स्तर पर मेमोरी और अन्य कंपोनेंट्स की बढ़ी लागत के कारण कंपनियों ने पहले कीमतें बढ़ाईं और बाद में उसी अंतर को डिस्काउंट के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सेल में खरीदारी से पहले मौजूदा कीमत के साथ-साथ उत्पाद की लॉन्च कीमत और पिछले कुछ महीनों की प्राइस हिस्ट्री भी जरूर जांचनी चाहिए, तभी वास्तविक बचत का सही अंदाजा लगाया जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी नए वित्त वर्ष की शुरुआत में लगभग 5,000 कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते निवेश और बिजनेस रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है। वर्तमान में कंपनी में दुनिया भर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और संभावित छंटनी कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से भी कम होगी। सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स डिवीजन पर सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार सबसे अधिक प्रभाव सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स (गेमिंग) डिवीजन पर पड़ सकता है। विशेष रूप से एक्सबॉक्स कारोबार में नई नेतृत्व टीम के आने के बाद संगठनात्मक बदलाव तेज हुए हैं। कंपनी कई पुराने पदों को समाप्त कर टीमों का पुनर्गठन कर सकती है, ताकि कारोबार को नई रणनीति के अनुरूप ढाला जा सके। एआई निवेश के लिए घटाए जा रहे परिचालन खर्च विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट पिछले कुछ वर्षों से ओपनएआई के साथ मिलकर एआई डेटा सेंटर, कोपायलट और अन्य जनरेटिव एआई तकनीकों पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। इन परियोजनाओं पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के लिए कंपनी अन्य परिचालन लागत में कटौती कर रही है। जिन कार्यों को अब एआई और ऑटोमेशन के जरिए अधिक दक्षता से किया जा सकता है, वहां मानव संसाधन की आवश्यकता कम की जा रही है। पूरी टेक इंडस्ट्री में बदल रहा रोजगार का स्वरूप माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026 में मेटा, अमेजन, ओरेकल और लिंक्डइन जैसी कई प्रमुख टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी हैं। उद्योग जगत का मानना है कि एआई के बढ़ते उपयोग से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। भविष्य में कंपनियां कम कर्मचारियों और अधिक ऑटोमेशन के साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं, जिससे तकनीकी क्षेत्र में रोजगार का स्वरूप लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को 100% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, जो अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल सर्विसेज टैक्स (Digital Services Tax - DST) लागू करेंगे। इस बयान के बाद वैश्विक व्यापार जगत में नई हलचल शुरू हो गई है। फिलहाल यह चेतावनी मुख्य रूप से यूरोपीय देशों को लेकर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति व्यापक रूप से लागू होती है तो भारत जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। क्या है डिजिटल सर्विसेज टैक्स? डिजिटल सर्विसेज टैक्स (DST) वह कर है, जिसे कुछ देश बड़ी डिजिटल कंपनियों—जैसे Google, Meta, Amazon और Apple—की स्थानीय डिजिटल आय पर लगाते हैं। अमेरिका लंबे समय से ऐसे टैक्स का विरोध करता रहा है और इसे अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण मानता है। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने कहा कि यदि कोई देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लागू करता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले सामान पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसा कदम मौजूदा व्यापार समझौतों से ऊपर माना जाएगा। भारत पर क्या होगा असर? भारत फिलहाल इस चेतावनी का सीधा लक्ष्य नहीं है, लेकिन इसका असर कई तरीकों से पड़ सकता है: यदि अमेरिका इस नीति का दायरा बढ़ाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय आईटी और टेक कंपनियों के लिए वैश्विक कारोबारी माहौल अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार तनाव बढ़ने पर वैश्विक सप्लाई चेन और निवेश प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर भारतीय निर्यातकों पर भी पड़ सकता है। शेयर बाजार में टेक और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ क्या मानते हैं? अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फिलहाल भारत के लिए तत्काल खतरे की स्थिति नहीं है, क्योंकि ट्रंप की ताज़ा चेतावनी मुख्य रूप से यूरोपीय देशों के डिजिटल टैक्स को लेकर है। हालांकि यदि यह विवाद आगे बढ़ता है, तो वैश्विक व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव देखा जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सैमसंग ने भारत में अपनी लोकप्रिय Galaxy M सीरीज के नए स्मार्टफोन Samsung Galaxy M47 5G के लॉन्च की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन के लिए एक समर्पित माइक्रोसाइट भी लाइव कर दी है, जिससे इसके डिजाइन, कुछ प्रमुख फीचर्स और उपलब्धता की जानकारी सामने आई है। Galaxy M47 5G को 2023 में लॉन्च हुए Galaxy M44 का सक्सेसर माना जा रहा है और इसकी बिक्री ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon के जरिए की जाएगी। प्रीमियम डिजाइन और नया कैमरा मॉड्यूल Galaxy M47 5G का डिजाइन पहले के मुकाबले अधिक प्रीमियम बनाया गया है। फोन के पीछे फ्लैट बैक पैनल दिया गया है, जबकि पिल-शेप रियर कैमरा मॉड्यूल इसे नया लुक देता है। इस मॉड्यूल में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप और LED फ्लैश मिलेगा। डिजाइन की झलक हाल ही में लॉन्च हुए Galaxy A57 और Galaxy A37 से मिलती-जुलती है। फोन के दाईं ओर पावर बटन और वॉल्यूम रॉकर दिए गए हैं। कंपनी ने फिलहाल रेड कलर वेरिएंट की पुष्टि की है। Snapdragon 6 Gen 3 और Android 16 का मिलेगा साथ लीक जानकारी के अनुसार Galaxy M47 5G को Geekbench पर मॉडल नंबर SM-M476B के साथ देखा गया है। इसमें Qualcomm का Snapdragon 6 Gen 3 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है, जिसमें 2.4GHz तक की स्पीड वाले परफॉर्मेंस कोर और 1.8GHz एफिशिएंसी कोर होंगे। ग्राफिक्स के लिए Adreno 710 GPU और कम से कम 8GB रैम मिलने की संभावना है। यह स्मार्टफोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलेगा। Geekbench AI के OpenCL टेस्ट में इसे 2,256 अंक मिले हैं, जो इसकी बेहतर ग्राफिक्स क्षमता का संकेत देते हैं। लॉन्च डेट और कीमत का इंतजार Samsung ने Galaxy M47 5G को "Next Level Monster" टैगलाइन के साथ टीज किया है, जिससे इसके दमदार प्रदर्शन और लंबी बैटरी लाइफ का संकेत मिलता है। हालांकि कंपनी ने अभी इसकी लॉन्च डेट, कीमत और बाकी स्पेसिफिकेशन्स का खुलासा नहीं किया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में फोन से जुड़ी सभी अहम जानकारियां आधिकारिक रूप से सामने आ जाएंगी।
टेक्नोलॉजी जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां Amazon ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी Globalstar के अधिग्रहण की घोषणा की है। इस डील के साथ ही Amazon ने Apple के साथ साझेदारी भी की है, जिससे iPhone और Apple Watch में सैटेलाइट फीचर्स को और मजबूत किया जाएगा। क्या है Amazon की बड़ी योजना? Amazon इस अधिग्रहण के जरिए अपने लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) नेटवर्क को मजबूत करना चाहता है। कंपनी अपने Project Kuiper और Amazon Leo नेटवर्क के साथ Globalstar की तकनीक को जोड़कर एक बड़ा सैटेलाइट इकोसिस्टम तैयार करेगी। डील 2027 तक पूरी होने की उम्मीद 2028 से नए Direct-to-Device (D2D) सैटेलाइट सिस्टम की शुरुआत दुनिया भर में करोड़ों डिवाइसेस को कनेक्ट करने का लक्ष्य यह तकनीक स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट से जोड़ने में सक्षम बनाएगी, जिससे बिना मोबाइल नेटवर्क के भी कॉल, मैसेज और डेटा सेवाएं मिल सकेंगी। iPhone और Apple Watch को क्या मिलेगा फायदा? Apple के साथ नई साझेदारी के तहत: iPhone 14 और उससे नए मॉडल्स Apple Watch में मिलने वाले सैटेलाइट फीचर्स जारी रहेंगे और बेहतर होंगे। इन फीचर्स में शामिल हैं: Emergency SOS via Satellite मैसेजिंग और लोकेशन शेयरिंग Find My और रोडसाइड असिस्टेंस Globalstar पहले से ही Apple डिवाइसेस को सैटेलाइट सपोर्ट देता है, और अब Amazon इस इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा। क्यों है यह डील अहम? यह अधिग्रहण कई मायनों में गेमचेंजर साबित हो सकता है: दूर-दराज और नेटवर्क-फ्री इलाकों में कनेक्टिविटी आपातकाल (जैसे प्राकृतिक आपदा) में बेहतर नेटवर्क सपोर्ट मोबाइल नेटवर्क पर निर्भरता कम Amazon का लक्ष्य है कि दुनिया के उन हिस्सों तक इंटरनेट और कम्युनिकेशन पहुंचाया जाए, जहां अभी नेटवर्क नहीं है। भविष्य की झलक Amazon का अगला D2D सैटेलाइट नेटवर्क हजारों सैटेलाइट्स के जरिए काम करेगा, जिससे आने वाले समय में मोबाइल कनेक्टिविटी का पूरा ढांचा बदल सकता है। यह डील दिखाती है कि टेक कंपनियां अब सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को अगले बड़े डिजिटल रिवोल्यूशन के रूप में देख रही हैं। Amazon और Apple की यह साझेदारी सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं, बल्कि भविष्य की कनेक्टिविटी की दिशा तय करने वाला कदम है। आने वाले वर्षों में यह तकनीक स्मार्टफोन यूजर्स के अनुभव को पूरी तरह बदल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।