अमरावती, एजेंसियां। आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले से समुद्र में मछली पकड़ने गई एक नाव के लापता होने से हड़कंप मच गया है। नाव में सवार आठ मछुआरे तय समय पर वापस नहीं लौटे हैं। नाव 3 अगस्त को ओडलारेवु से रवाना हुई थी और मछुआरों के पास करीब 15 दिनों का डीजल और राशन मौजूद था। उन्हें 13 अगस्त तक वापस लौटना था, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला है। 3 अगस्त को समुद्र में गई थी नाव जानकारी के मुताबिक, कोमारागिरी पटनम गांव निवासी कोपनाटी रामकृष्ण वर्मा नाव के मालिक और चालक हैं। नाव 3 अगस्त को वैनेतेय नदी और समुद्र के संगम के रास्ते मछली पकड़ने के लिए रवाना हुई थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नाव विशाखापत्तनम से पारादीप के बीच के समुद्री क्षेत्र की ओर गई हो सकती है। मछुआरों के पास करीब 15 दिनों का राशन और डीजल था। हालांकि, नाव में मौजूद मोबाइल फोन और GPS सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हो रही है। 13 अगस्त तक लौटना था, 4 दिन बाद मिली जानकारी नाव को 13 अगस्त तक वापस लौटना था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी जब मछुआरे नहीं लौटे तो परिवारों की चिंता बढ़ गई। करीब चार दिन बाद नाव मालिक के परिवार ने ओडलारेवु तटीय सुरक्षा पुलिस और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोनसीमा के जिलाधिकारी आर. महेश कुमार ने विशाखापत्तनम स्थित भारतीय तटरक्षक बल से मदद मांगी है। तटरक्षक बल की मदद से तलाश शुरू जिलाधिकारी ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को भारतीय तटरक्षक बल के साथ समन्वय कर खोज और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को नाव की संभावित दिशा, आखिरी संपर्क और समुद्र में उसके संभावित मार्ग से जुड़ी जानकारी जुटाने को कहा गया है। इसके अलावा नाव मालिक, मछुआरों के परिवार और अन्य मछुआरों से भी जरूरी जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नाव की संभावित लोकेशन का पता लगाया जा सके। परिवारों को अपनों की वापसी का इंतजार फिलहाल नाव और उसमें सवार आठों मछुआरों की सही लोकेशन की जानकारी नहीं मिल सकी है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और तटरक्षक बल समेत संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क में है। परिवारों की उम्मीद अब खोज और बचाव अभियान पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि समुद्र में लापता हुई नाव आखिर कहां है और उसमें सवार आठों मछुआरे सुरक्षित हैं या नहीं।
अमरावती, एजेंसियां। भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आंध्र प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। मसौदा सूची में करीब 44.80 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह कार्रवाई मतदाता सूची को अपडेट करने और मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके नामों को हटाने की प्रक्रिया के तहत की गई है। SIR के बाद लाखों नाम सूची से बाहर विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के विवरण का व्यापक सत्यापन किया गया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के ड्राफ्ट रोल में करीब 44.80 लाख नाम कम हुए हैं। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से तैयार मसौदा सूची अब आगे की जांच और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के लिए उपलब्ध है। मतदाताओं को दावे और आपत्ति का मौका ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी होने के बाद पात्र मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच सकते हैं। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट गया है या मतदाता सूची में किसी जानकारी को लेकर आपत्ति है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। अंतिम सूची 3 अक्टूबर को होगी जारी आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को जारी किए जाने का कार्यक्रम है। ड्राफ्ट रोल और अंतिम सूची के बीच की अवधि में दावों एवं आपत्तियों पर कार्रवाई की जाएगी। मतदाताओं से नाम जांचने की अपील निर्वाचन प्रक्रिया के लिहाज से मतदाता सूची में नाम होना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में मतदाताओं से अपील की गई है कि वे ड्राफ्ट रोल में अपना नाम और अन्य विवरण जरूर जांच लें तथा आवश्यकता होने पर समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में करीब ₹18,000 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इसके बाद वह कर्नाटक के मैसूरु पहुंचकर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। भोगपुरम एयरपोर्ट का करेंगे उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी आंध्र प्रदेश के भोगपुरम (विजयनगरम) में अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। करीब ₹5,600 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट राज्य में पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने में मदद करेगा। सेमीकंडक्टर और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश में सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। करीब ₹460 करोड़ से अधिक निवेश वाली इस परियोजना को भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा कुरनूल क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं और ट्रांसमिशन सिस्टम का भी शुभारंभ किया जाएगा। सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं की सौगात प्रधानमंत्री इस दौरे में आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। करीब ₹1,880 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजनाओं से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होने और यात्रा समय कम होने की उम्मीद है। मैसूरु में विवेक स्मारक का करेंगे उद्घाटन आंध्र प्रदेश के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मोदी कर्नाटक के मैसूरु जाएंगे। यहां वह स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र – विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र युवाओं के लिए शिक्षा, नेतृत्व विकास, योग, ध्यान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। दक्षिण भारत के विकास पर केंद्र का फोकस प्रधानमंत्री का यह दौरा आंध्र प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी, सेमीकंडक्टर उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा और सड़क ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं कर्नाटक में युवा विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस रहेगा।
हनोई, एजेंसियां। वियतनाम के लोकप्रिय पर्यटन स्थल फू क्वोक द्वीप के पास शनिवार को भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक स्पीडबोट हादसे का शिकार हो गई। तकनीकी खराबी के कारण समुद्र में नाव पलटने से 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई, जबकि 21 लोगों को सुरक्षित बचाकर अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद भारतीय दूतावास, वियतनाम प्रशासन और स्थानीय बचाव एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। तकनीकी खराबी बनी हादसे की वजह वियतनाम के फू क्वोक विशेष आर्थिक क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार, दोपहर करीब एक बजे ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी की स्पीडबोट में अचानक तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण वह समुद्र में पलट गई। दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद पर्यटक नौकाएं और बचाव दल मौके पर पहुंचे। एन थोई पोर्ट बॉर्डर गार्ड स्टेशन ने राहत अभियान के लिए 35 अधिकारियों के साथ दो जहाज तैनात किए हैं, जबकि नौसेना और तटरक्षक बल भी अभियान में सहयोग कर रहे हैं। 32 भारतीय पर्यटक थे सवार भारतीय दूतावास के अनुसार, स्पीडबोट में 32 भारतीय पर्यटक और चार क्रू सदस्य सवार थे। हादसे में जान गंवाने वालों में पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। भारतीय दूतावास ने मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी देते हुए पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए हनोई और वियतनाम में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। आंध्र प्रदेश सरकार ने शुरू की निगरानी हादसे में आंध्र प्रदेश के कई पर्यटकों के शामिल होने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार भी सक्रिय हो गई है। एनआरआई सशक्तिकरण एवं संबंध राज्य मंत्री कोंडापल्ली श्रीनिवास ने बताया कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और यह पता लगाया जा रहा है कि हादसे में आंध्र प्रदेश के कितने लोग प्रभावित हुए हैं। इस बीच भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर प्रभावित परिवारों से आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करने की अपील की है।
आंध्र प्रदेश के खनन और औद्योगिक विकास को नई गति देने वाली जोंनागिरी गोल्ड माइनिंग परियोजना का बुधवार को औपचारिक शुभारंभ होने जा रहा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू कुरनूल जिले के तुग्गली मंडल स्थित जोंनागिरी पहुंचकर देश के बड़े निजी क्षेत्र के गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट के पहले गोल्ड प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन करेंगे। राज्य सरकार के अनुसार, यह परियोजना आंध्र प्रदेश को देश के प्रमुख सोना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। 405 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित हुआ प्रोजेक्ट जोंनागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट को जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है। इस परियोजना पर कुल 405 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। खनन क्षेत्र और प्रोसेसिंग यूनिट का ट्रायल रन पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। उद्घाटन के बाद यहां व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। KGF के बाद गोल्ड उत्पादन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा जोंनागिरी भारत में सोने की खनन गतिविधियों का सबसे प्रसिद्ध केंद्र लंबे समय तक कर्नाटक का कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF) रहा है। अब आंध्र प्रदेश का जोंनागिरी क्षेत्र देश के गोल्ड मैप पर नई पहचान बनाने की तैयारी में है। सरकार का दावा है कि यह देश का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट है, जो भविष्य में भारत के सोना उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। 1,500 एकड़ क्षेत्र में होगा परियोजना का विस्तार राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए कुल 1,500 एकड़ भूमि आवंटित की है। पहले चरण में लगभग 600 एकड़ क्षेत्र में खनन गतिविधियां शुरू की जाएंगी, जबकि दूसरे चरण में परियोजना का विस्तार शेष क्षेत्र में किया जाएगा। खनन और प्रोसेसिंग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा पहले ही तैयार किया जा चुका है। पहले साल 400 किलो सोना उत्पादन का लक्ष्य परियोजना के पहले वर्ष में लगभग 400 किलोग्राम सोने के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद अगले वर्ष उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर करीब 900 किलोग्राम तक पहुंचाने की योजना है। लंबी अवधि में प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ने के साथ यह परियोजना प्रतिवर्ष लगभग 2 टन सोने का उत्पादन करने में सक्षम हो सकती है। 700 लोगों को मिलेगा रोजगार राज्य सरकार के अनुसार, इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 700 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार को होगी करोड़ों रुपये की रॉयल्टी आय सोने के उत्पादन पर राज्य सरकार को 4 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होगी। अनुमान के मुताबिक, पहले वर्ष 400 किलोग्राम सोना उत्पादन होने पर सरकार को करीब 57 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिल सकती है। वहीं, उत्पादन 900 किलोग्राम तक पहुंचने पर रॉयल्टी आय बढ़कर लगभग 144 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। खनन और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा जोंनागिरी गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट को आंध्र प्रदेश में खनन क्षेत्र के विस्तार, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के घरेलू सोना उत्पादन को भी नई दिशा देगी।
अमेरिका के कैलिफोर्निया में पढ़ाई कर रहे 26 वर्षीय भारतीय छात्र मोहम्मद कुमेल शेख का ग्रेजुएशन के एक दिन बाद कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। इस घटना से उनके दोस्तों और परिवार में शोक की लहर है। कुमेल ने एक दिन पहले ही गोल्डन गेट यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद कुमेल शेख आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि उन्हें नींद में ही हार्ट अटैक आया, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। ग्रेजुएशन का जश्न, अगले दिन मातम कुमेल के दोस्त और फंडरेजर अभियान के आयोजक रवि तेजा नन्नापनेनी ने बताया कि एक दिन पहले ही सभी ने उनके साथ ग्रेजुएशन वॉक का जश्न मनाया था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह उनके साथ आखिरी मुलाकात होगी। उन्होंने लिखा कि मोहम्मद बड़े सपने लेकर अमेरिका आए थे और अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। उनके अचानक निधन से उन्हें जानने वाले सभी लोग सदमे में हैं। पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए जुटाई जा रही मदद दोस्तों ने कुमेल के पार्थिव शरीर को भारत भेजने और अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ऑनलाइन फंडरेजर शुरू किया है। अपील में कहा गया है कि उनका परिवार निम्न-मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि से आता है और पहले से शिक्षा ऋण के बोझ से जूझ रहा है। दोस्तों का कहना है कि आर्थिक मदद से परिवार को अचानक आए खर्चों और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सहारा मिल सकेगा। दोस्तों ने बताया दयालु और मददगार इंसान रवि तेजा ने कुमेल को बेहद विनम्र, दयालु और मददगार व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा अपने दोस्तों के साथ खड़े रहते थे और हर किसी की मदद करने के लिए तैयार रहते थे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।