मेलबर्न, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने 2027 में भारत के खिलाफ होने वाली पांच टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले पारंपरिक वार्म-अप मैच नहीं खेलने का फैसला किया है। मुख्य कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने कहा है कि टीम अभ्यास मैच के बजाय भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाएगी। अभ्यास मैच की जगह विशेष प्रशिक्षण शिविर मैकडोनाल्ड के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया भारत दौरे से पहले ऐसा स्थान तलाश रहा है जहां खिलाड़ी उपमहाद्वीप की परिस्थितियों के करीब रहकर तैयारी कर सकें। टीम के पास भारत और UAE में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के विकल्प हैं。 कोच का मानना है कि किसी एक स्थान पर भारतीय परिस्थितियों और मौसम को दोहराते हुए लगातार अभ्यास करना पारंपरिक अभ्यास मैच खेलने से ज्यादा उपयोगी हो सकता है। हालांकि, प्रशिक्षण शिविर का अंतिम स्थान अभी तय नहीं किया गया है। 2023 में भी अपनाया था यही तरीका ऑस्ट्रेलिया ने 2023 के भारत दौरे से पहले भी अभ्यास मैच के बजाय बेंगलुरु के पास अलूर में विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया था। वहां टीम ने स्पिन के अनुकूल पिचों पर अभ्यास किया था। हालांकि, उस दौरे की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के लिए अच्छी नहीं रही थी। नागपुर में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पारी और 132 रन से हराया था और चार टेस्ट की सीरीज 2-1 से अपने नाम की थी। 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होगी सीरीज भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2027 की पांच टेस्ट मैचों की सीरीज 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होगी। इसके बाद मुकाबले चेन्नई, गुवाहाटी, रांची और अहमदाबाद में खेले जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत में टेस्ट सीरीज जीतने की बड़ी चुनौती होगी। टीम ने भारत में आखिरी बार 2004 में टेस्ट सीरीज जीती थी। मैकडोनाल्ड के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया इस लंबे इंतजार को खत्म करने की कोशिश करेगा। खिलाड़ियों की तैयारी पर भी रहेगा फोकस भारत दौरे से पहले ऑस्ट्रेलिया का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहेगा। टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज के बाद जल्द ही भारत का दौरा करना है। ऐसे में टीम प्रबंधन खिलाड़ियों की तैयारी और कार्यभार को ध्यान में रखते हुए विशेष योजना बना रहा है। मैकडोनाल्ड ने संकेत दिया है कि भारत दौरे के लिए चुने जाने वाले कुछ खिलाड़ी न्यूजीलैंड सीरीज के बाद बिग बैश लीग के मुकाबलों की बजाय भारत की परिस्थितियों के लिए तैयारी को प्राथमिकता दे सकते हैं।
भारतीय वायुसेना का एक विशेष दल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘एक्स पिच ब्लैक 2026’ में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन से रवाना हुआ यह दल अब ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) बेस पर आयोजित अभ्यास में भाग ले रहा है। यह सैन्य अभ्यास 7 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 19 देशों की वायु सेनाएं शामिल हैं। राफेल समेत कई आधुनिक विमान दिखाएंगे दम इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना अपने अत्याधुनिक लड़ाकू और रणनीतिक विमानों के साथ हिस्सा ले रही है। इनमें शामिल हैं: राफेल लड़ाकू विमान – आधुनिक हथियारों और उन्नत तकनीक से लैस भारत के प्रमुख फाइटर जेट। सी-17 ग्लोबमास्टर-III – भारी सैन्य उपकरण और सैनिकों के रणनीतिक परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाला विमान। आईएल-78 एयर टैंकर – हवा में उड़ान के दौरान लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की क्षमता वाला विशेष विमान। इनके साथ भारतीय दल में अनुभवी पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन और सैन्य रणनीतिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा रक्षा सहयोग ‘एक्स पिच ब्लैक’ दुनिया के सबसे बड़े और जटिल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों में गिना जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना, संयुक्त सैन्य अभियानों का अभ्यास करना और आधुनिक युद्ध तकनीकों का आदान-प्रदान करना है। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। कलाईकुंडा एयरबेस की अहम भूमिका इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में पश्चिम बंगाल का कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय दल इसी सामरिक एयरबेस से उड़ान भरकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचा है। कलाईकुंडा भारतीय वायुसेना के प्रमुख रणनीतिक ठिकानों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों के संचालन के लिए जाना जाता है। चौथी बार ‘पिच ब्लैक’ में भारत की भागीदारी भारतीय वायुसेना इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में भी ‘एक्स पिच ब्लैक’ युद्धाभ्यास का हिस्सा रह चुकी है। वर्ष 2026 में लगातार चौथी बार इस अभ्यास में शामिल होकर भारत अपनी बढ़ती सैन्य क्षमता, वैश्विक साझेदारी और परिचालन दक्षता का प्रदर्शन कर रहा है। भारतीय वायुसेना की यह भागीदारी न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सैन्य ताकत को प्रदर्शित करेगी, बल्कि मित्र देशों के साथ सामरिक सहयोग को भी नई मजबूती देगी।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को पैसे दिए गए थे। आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी मांगने और आरोप वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं को भेजा पत्र कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा कि 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया गया था। पत्र में कहा गया कि सिडनी से चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था सामुदायिक सहयोग से की गई थी और इसका खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने। क्या था कांग्रेस का आरोप? कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं, जिनमें पवन खेड़ा भी शामिल थे, ने आरोप लगाया था कि यह एक "मैनेज्ड इवेंट" था। उनका दावा था कि लोगों को पैसे देकर कार्यक्रम में बुलाया गया और उनके लिए विशेष चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था की गई। कांग्रेस नेताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया था। आयोजकों ने आरोपों को बताया निराधार कार्यक्रम के आयोजकों में शामिल अमित करंथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार और निराशाजनक हैं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी लोग अपनी इच्छा से पहुंचे थे और किसी को भी पैसे देकर नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोगों ने अपने यात्रा, रहने और अन्य खर्च स्वयं वहन किए। कुछ लोगों की यात्रा व्यवस्था स्थानीय भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों और सामुदायिक सहयोग से हुई थी। 30 हजार लोगों ने लिया था हिस्सा आयोजकों के अनुसार, 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन ने भी लोगों को संबोधित किया। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते संबंधों तथा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान का उत्सव था। माफी की मांग आयोजकों ने अपने पत्र में कांग्रेस नेताओं से मांग की है कि वे भीड़ को "पैसे देकर जुटाई गई" बताने वाले आरोप वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उनका कहना है कि इस तरह के आरोपों से कार्यक्रम में शामिल हजारों भारतीय मूल के लोगों और स्वयंसेवकों का अपमान हुआ है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी छह दिवसीय तीन देशों की यात्रा पूरी कर भारत लौट आए हैं। इस दौरे के दौरान भारत ने रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते किए। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की लगभग 40 वर्षों बाद न्यूजीलैंड की पहली द्विपक्षीय यात्रा भी रही। तीनों देशों के साथ रणनीतिक रिश्ते हुए मजबूत इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर अहम सहमति बनी। दोनों देशों ने भारत में विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की खरीद से जुड़े रक्षा सहयोग को भी आगे बढ़ाया। ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री ने अपने समकक्ष एंथनी अल्बनीज़ के साथ वार्ता कर रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, निवेश और व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। वहीं न्यूजीलैंड में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ बैठक में मुक्त व्यापार, कृषि, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। इंडो-पैसिफिक पर रहा खास फोकस पूरे दौरे के दौरान भारत ने एक्ट ईस्ट नीति, महासागर (MAHASAGAR) विज़न और मुक्त एवं सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस यात्रा से भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति मिलेगी और क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली/मेलबर्न, एजेंसियां। भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) से संबोधित करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित टी-20 प्रतियोगिता बिग बैश लीग (BBL) के शुरुआती मुकाबले पहली बार भारत में आयोजित किए जाएंगे। यह क्रिकेट इतिहास का एक अनूठा अवसर होगा, जब किसी प्रमुख विदेशी फ्रेंचाइजी लीग के आधिकारिक मैच भारतीय मैदानों पर खेले जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दिसंबर में चेन्नई में आयोजित होने वाले 'जी-डे नमस्ते' समारोह के दौरान बिग बैश लीग के शुरुआती मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा। इस फैसले से भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को अपने देश में बिग बैश का रोमांच देखने का अवसर मिलेगा, जबकि ऑस्ट्रेलियाई लीग को दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने इस अवसर पर इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप का भी शुभारंभ किया। इस रोडमैप का उद्देश्य दोनों देशों के बीच खेलों में दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करना है। नई साझेदारी के तहत नई साझेदारी के तहत खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, कोचिंग, खेल अनुसंधान और आधुनिक खेल अवसंरचना के विकास में सहयोग बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों के खिलाड़ी और विशेषज्ञ अनुभव साझा करेंगे, जिससे खेल प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बिग बैश लीग के मुकाबलों का आयोजन क्रिकेट के वैश्विक विस्तार की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। इससे न केवल भारत-ऑस्ट्रेलिया खेल संबंध और मजबूत होंगे, बल्कि भारतीय दर्शकों को विश्वस्तरीय फ्रेंचाइजी क्रिकेट का नया अनुभव भी मिलेगा। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह घोषणा किसी बड़े उत्सव से कम नहीं मानी जा रही है।
फिरोजाबाद, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में डेढ़ साल के मासूम आरव की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने महज 41 दिनों के भीतर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। जनपद न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत ने इस जघन्य अपराध को "दुर्लभ से दुर्लभतम" श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड का आदेश दिया। क्या है मामला? यह घटना 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई थी। आरोप के अनुसार, रिश्ते का चाचा विराज एकतरफा प्रेम के कारण बच्चे की मां पर शादी का दबाव बना रहा था। महिला द्वारा इंकार किए जाने और बच्चे का हवाला देने से नाराज होकर उसने डेढ़ वर्षीय आरव को जमीन पर कई बार पटककर उसकी हत्या कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। पुलिस ने घटना के छह घंटे के भीतर आरोपी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मात्र छह दिनों में 13 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। अदालत ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई की और गुरुवार को आरोपी को दोषी करार देने के बाद शुक्रवार को सजा सुनाई। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अपराध की क्रूरता को देखते हुए माना कि इस मामले में मृत्युदंड से कम कोई अन्य सजा न्यायोचित नहीं होगी। फैसला आने के बाद आरव की मां ने क्या कहा? फैसला आने के बाद आरव की मां रति ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि बेटे के हत्यारे को कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताते हुए कहा कि अब उनके बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी। वहीं प्रशासन ने भी इस मामले में त्वरित जांच और सुनवाई को न्याय व्यवस्था की प्रभावी कार्यप्रणाली का उदाहरण बताया।
मुंबई: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा सात सदस्यीय समिति गठित किए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए नए राजनीतिक एजेंडे ला रही है। UCC को बताया ध्यान भटकाने की कोशिश कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि महाराष्ट्र में पुल गिरने, खराब सड़कों, बाढ़ और महंगाई जैसे गंभीर मुद्दे लोगों को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय UCC जैसे विषयों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के असली सवालों से बचने की कोशिश कर रही है। विधानसभा में भाषा को लेकर भी साधा निशाना सुप्रिया श्रीनेत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर विधानसभा में विपक्ष के नेताओं के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवालों का जवाब तथ्यों और तर्कों से दिया जाना चाहिए, न कि अपमानजनक टिप्पणियों से। कांग्रेस ने मांग की कि यदि मुख्यमंत्री ने अनुचित भाषा का प्रयोग किया है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। पुल और सड़कों की स्थिति पर उठाए सवाल कांग्रेस ने राज्य में लगातार सामने आ रहे पुल गिरने और खराब सड़कों से जुड़े मामलों का भी मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि सरकार को बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर प्राथमिकता देनी चाहिए। रायगढ़ में बाढ़ और सिलेंडर बहने का मामला भी उठाया कांग्रेस ने रायगढ़ जिले में बाढ़ के दौरान रसोई गैस सिलेंडरों के बह जाने की घटना का भी उल्लेख किया। पार्टी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि सरकार आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही है। सरकार पर लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार विकास, महंगाई, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर जवाब देने के बजाय नए राजनीतिक विवाद खड़े कर रही है। पार्टी ने कहा कि जनता अब राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान चाहती है। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चेन्नई, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित बिग बैश लीग (BBL) के इतिहास में पहली बार उद्घाटन मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से बाहर आयोजित किया जाएगा। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने घोषणा की है कि दिसंबर 2026 में बीबीएल के नए सीजन का पहला मैच चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा। इस फैसले को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते क्रिकेट सहयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। पहली बार ऑस्ट्रेलिया से बाहर होगा BBL का उद्घाटन मैच अब तक बिग बैश लीग के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में ही खेले जाते रहे हैं। लेकिन इस बार क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने लीग के वैश्विक विस्तार की रणनीति के तहत उद्घाटन मैच भारत में कराने का फैसला लिया है। इससे भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को पहली बार अपने देश में BBL का रोमांच देखने का अवसर मिलेगा। चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में होगा मुकाबला उद्घाटन मैच के लिए चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम को चुना गया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, भारत में बिग बैश की लोकप्रियता और चेन्नई के समृद्ध क्रिकेट इतिहास को देखते हुए इस शहर का चयन किया गया है। मैच के लिए बीसीसीआई और स्थानीय क्रिकेट संघ के साथ तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संबंधों को मिलेगा नया आयाम क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों को और मजबूत करेगा। भारतीय दर्शकों के बीच बिग बैश लीग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और भारत में मैच आयोजित होने से लीग को नया वैश्विक दर्शक वर्ग मिलने की उम्मीद है। दुनिया भर के स्टार खिलाड़ी आएंगे नजर उद्घाटन मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय स्टार खिलाड़ी मैदान पर उतर सकते हैं। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को विश्व स्तरीय टी20 खिलाड़ियों का खेल करीब से देखने का मौका मिलेगा, जिससे इस मैच को लेकर उत्साह काफी बढ़ गया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की वैश्विक रणनीति का हिस्सा क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि लीग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। यदि भारत में यह आयोजन सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य देशों में भी बिग बैश लीग के मुकाबले आयोजित किए जा सकते हैं।
मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंच गए हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने एयरपोर्ट पर उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगे अहम मुद्दों पर मंथन मेलबर्न में प्रधानमंत्री मोदी भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, निवेश, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच कई नए समझौतों और सहयोगी परियोजनाओं पर भी सहमति बनने की संभावना है। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम रहेगा खास आकर्षण दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय समुदाय के लिए आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए भारत की वैश्विक भूमिका, भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों पर अपने विचार साझा करेंगे। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा और कौशल विकास कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर्यटन ग्रीन एनर्जी और सप्लाई चेन इन क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और नई परियोजनाओं के जरिए दोनों देश आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी। स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी नई पहल की उम्मीद है। रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत भारत और ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से करीब आए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई दिशा विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊर्जा देगा। व्यापार, निवेश, शिक्षा, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहयोग में बढ़ती साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।
बीजिंग/वॉशिंगटन: चीन ने सोमवार को प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु पनडुब्बी (Nuclear Submarine) से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। चीन ने इसे अपनी नियमित सैन्य अभ्यास गतिविधि का हिस्सा बताया है। परमाणु पनडुब्बी से हुआ मिसाइल परीक्षण चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नेवी ने स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे परमाणु पनडुब्बी से एक रणनीतिक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया। चीनी सेना का दावा है कि मिसाइल में डमी (बिना विस्फोटक) वारहेड लगाया गया था और उसने प्रशांत महासागर के खुले समुद्री क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य पर सफलतापूर्वक निशाना साधा। चीन का कहना है कि यह उसकी वार्षिक सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों का हिस्सा था और संबंधित देशों को इसकी पूर्व सूचना दे दी गई थी। अमेरिका ने जताई गंभीर चिंता अमेरिकी विदेश विभाग ने परीक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन के इस कदम पर उसकी करीबी नजर थी। अमेरिका ने कहा कि जब दुनिया परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रयास कर रही है, तब चीन अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि बीजिंग का बिना पर्याप्त पारदर्शिता के परमाणु क्षमताओं का विस्तार वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी उठाए सवाल जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन के मिसाइल परीक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां एशिया-प्रशांत की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकती हैं। न्यूजीलैंड ने भी चीन से अधिक पारदर्शिता बरतने और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सैन्य कदमों पर स्पष्ट जानकारी साझा करने की अपील की है। हथियार नियंत्रण वार्ता की अपील अमेरिका ने चीन से परमाणु हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का आग्रह किया है। साथ ही अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और अंतरिक्ष प्रक्षेपणों की नियमित जानकारी साझा करने की व्यवस्था अपनाने की भी मांग की है। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने रक्षा दायित्वों का पालन करता रहेगा। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे रणनीतिक मिसाइल परीक्षण अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच यह परीक्षण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। टाटा समूह ने नेतृत्व परिवर्तन और डिजिटल विस्तार की रणनीति के तहत नई पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने की दिशा में अहम कदम उठाया है। समूह की फैशन रिटेल कंपनी ट्रेंट की प्रमुख ब्रांड ‘वेस्टसाइड’ के ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की कमान अब नोएल टाटा की बेटी माया टाटा संभालेंगी। हालांकि कंपनी की ओर से इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन इसे टाटा समूह की दीर्घकालिक उत्तराधिकार योजना और डिजिटल कारोबार को मजबूत करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। डिजिटल कारोबार को मिलेगी नई दिशा 37 वर्षीय माया टाटा ने अपने करियर की शुरुआत टाटा कैपिटल से की थी। इसके बाद उन्होंने टाटा डिजिटल में काम करते हुए ई-कॉमर्स, ऑनलाइन रिटेल, ग्राहक अधिग्रहण और डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालन का व्यापक अनुभव हासिल किया। टाटा नियो, बिगबास्केट, क्रोमा और टाटा 1एमजी जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने का अनुभव उन्हें वेस्टसाइड की ओमनीचैनल और ई-कॉमर्स रणनीति का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाता है। उनका मुख्य लक्ष्य वेस्टसाइड की ऑनलाइन मौजूदगी को मजबूत करना और ब्रांड का वैश्विक विस्तार करना होगा। नई पीढ़ी को मिल रही बड़ी जिम्मेदारियां नोएल टाटा वर्तमान में ट्रेंट के चेयरमैन हैं और नवंबर 2026 में इस पद से हटने की संभावना है। माना जा रहा है कि वे माया के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। वहीं उनके बेटे नेविल टाटा पहले से ट्रेंट के स्टार बाजार हाइपरमार्केट डिवीजन की कमान संभाल रहे हैं, जबकि बेटी लिआ टाटा इंडियन होटल्स कंपनी (ताज) में वाइस प्रेसिडेंट हैं। तीनों भाई-बहन टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी संस्थाओं के बोर्ड का भी हिस्सा हैं। वेस्टसाइड का तेजी से विस्तार ट्रेंट की कुल आय में लगभग 40 प्रतिशत योगदान वेस्टसाइड का है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का राजस्व करीब 19,700 करोड़ रुपये रहा। कंपनी हर साल लगभग 50 नए स्टोर खोलने की योजना पर काम कर रही है और उसके स्टोरों की संख्या बढ़कर 321 शहरों में 1,286 हो चुकी है। माया टाटा की नियुक्ति से संकेत मिलते हैं कि टाटा समूह आने वाले वर्षों में ई-कॉमर्स, डिजिटल इंटीग्रेशन और भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक पहचान दिलाने पर विशेष जोर देगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 में आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम का सामना छह बार की विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से होगा। लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाला यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए लगभग 'करो या मरो' जैसा है, क्योंकि इस मैच का नतीजा सेमीफाइनल की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। भारतीय टीम ने अब तक अपने चार में से तीन मुकाबले जीतकर मजबूत स्थिति बनाई है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत उसे बिना किसी समीकरण के सीधे सेमीफाइनल में पहुंचा देगी। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया अपने चारों लीग मैच जीतकर पहले ही शानदार लय में है। भारत के सामने बड़ी चुनौती कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम को बल्लेबाजी और फील्डिंग दोनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। उपकप्तान स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, रिचा घोष और दीप्ति शर्मा से बड़ी पारियों की उम्मीद रहेगी, जबकि गेंदबाजी में रेणुका सिंह और स्पिन आक्रमण पर अहम जिम्मेदारी होगी। लॉर्ड्स की पिच और मौसम लॉर्ड्स की पिच पर तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों को मदद मिलने की संभावना है। यहां लक्ष्य का पीछा करने वाली टीमों का रिकॉर्ड बेहतर रहा है, इसलिए इस मैच में टॉस भी अहम भूमिका निभा सकता है। मौसम साफ रहने की संभावना है और बारिश की आशंका बहुत कम है। सेमीफाइनल का समीकरण भारत की जीत उसे सीधे सेमीफाइनल में पहुंचा देगी। हार की स्थिति में टीम की उम्मीदें अन्य मुकाबलों के परिणाम और नेट रन रेट पर निर्भर हो सकती हैं। ऐसे में आज का मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे महत्वपूर्ण मैच माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में लगातार दो जीत के साथ शानदार शुरुआत करने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम को तीसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के हाथों छह विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने न सिर्फ भारत की जीत की लय तोड़ी, बल्कि सेमीफाइनल की दौड़ को भी बेहद रोमांचक बना दिया है। अब भारतीय टीम के लिए आगे का हर मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा हो गया है। ग्रुप-ए में कांटे की टक्कर भारत ने अपने पहले दो मुकाबलों में पाकिस्तान और नीदरलैंड्स को हराकर चार अंक जुटाए थे। हालांकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार के बाद टीम तीन मैचों में दो जीत और एक हार के साथ चार अंकों पर दूसरे स्थान पर है। ग्रुप-ए में ऑस्ट्रेलिया तीन मैचों में तीन जीत के साथ छह अंकों पर शीर्ष पर बना हुआ है। वहीं दक्षिण अफ्रीका भी चार अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, लेकिन उसका नेट रन रेट भारत से कम है। बांग्लादेश भी दो जीत और एक हार के साथ चार अंक लेकर चौथे स्थान पर मौजूद है, जबकि पाकिस्तान और नीदरलैंड्स सेमीफाइनल की दौड़ से लगभग बाहर हो चुके हैं। भारत के लिए क्या हैं सेमीफाइनल के समीकरण? भारतीय टीम को अब अपने बाकी दो मुकाबले ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के खिलाफ खेलने हैं। सेमीफाइनल की उम्मीदों को मजबूत बनाए रखने के लिए भारत को दोनों मैच जीतना बेहद जरूरी होगा। यदि भारत दोनों मुकाबले जीतता है तो अंतिम चार में जगह लगभग सुनिश्चित हो सकती है। अगर भारत, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश में से प्रत्येक टीम एक-एक मैच जीतती और एक-एक हारती है, तो फैसला नेट रन रेट के आधार पर होगा। ऐसे में भारत के लिए सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत भी अहम होगी। ऑस्ट्रेलिया पर भी रहेगा दबाव हालांकि ऑस्ट्रेलिया फिलहाल शीर्ष पर है, लेकिन यदि वह अपने शेष दोनों मैच हार जाता है तो ग्रुप की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। ऐसे में ग्रुप-ए में सेमीफाइनल की जंग आखिरी लीग मुकाबलों तक रोमांचक बनी रहने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।