नई दिल्ली/लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब और व्यापक दायरे में की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित नई विशेष जांच टीम (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को शामिल किया जाएगा, जो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, आय-व्यय और ऑडिट रिकॉर्ड की गहन जांच करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बदली जांच की दिशा नई एसआईटी का गठन आईपीएस अधिकारी की अध्यक्षता में किया गया है। इसमें अयोध्या रेंज के आईजी और अयोध्या के एसएसपी पहले से शामिल हैं। अब कोर्ट के निर्देशानुसार एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी टीम में शामिल किया जाएगा, ताकि ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की विशेषज्ञ स्तर पर जांच हो सके। केवल चोरी नहीं, पूरे वित्तीय रिकॉर्ड की होगी जांच अब तक जांच का फोकस मुख्य रूप से चढ़ावे की कथित चोरी और धन की निकासी तक सीमित था। नई एसआईटी ट्रस्ट के गठन से अब तक के आय-व्यय, ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच करेगी, जिससे किसी संभावित अनियमितता का पता लगाया जा सके। पहली जांच में दर्ज हुई थी एफआईआर पहली एसआईटी की सिफारिश के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी और चिन्हित आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। फिलहाल मामले की विवेचना अयोध्या पुलिस कर रही है, जबकि नई एसआईटी पहले से जुटाए गए दस्तावेजों और प्रारंभिक रिपोर्ट का भी परीक्षण करेगी। गड़बड़ी मिलने पर बढ़ सकता है जांच का दायरा जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। एसआईटी ने शुरू की जांच नई एसआईटी ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक दस्तावेजों और पूर्व जांच रिपोर्टों का अध्ययन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में एसआईटी के अध्यक्ष भी अयोध्या पहुंचकर जांच की प्रगति की समीक्षा कर सकते हैं।
अयोध्या: राम मंदिर में कथित चंदा गड़बड़ी मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। विशेष जांच दल (SIT) को दिए गए लिखित बयान में उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बैंक ने कैश रूम से जुड़े अपने ही सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया, जिससे लापरवाही की स्थिति बनी। SBI की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंपत राय ने अपने बयान में कहा कि बैंक के कैश रूम (चेस्ट रूम) में प्रवेश और निकास के दौरान कर्मचारियों की तलाशी लेना अनिवार्य होता है। इसके अलावा बैंक कर्मचारियों की यूनिफॉर्म में जेब नहीं होनी चाहिए, ताकि नकदी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया। शुरुआत में कर्मचारियों को जेब वाली यूनिफॉर्म दी गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। राय का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन होता, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। 'बैंक ने अपने ही नियमों की अनदेखी की' चंपत राय ने सवाल उठाया कि जब सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश पहले से तय थे, तो उन्हें लागू क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों की सतर्कता से संभावित गड़बड़ियों को समय रहते रोका जा सकता था। ट्रस्ट में हुए बड़े बदलाव चंदा विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया गया है, जबकि प्रशासक गोपाल राव को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही ट्रस्ट ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति जल्द ही नए सीईओ के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगी। आठ गिरफ्तारियां, लाखों रुपये बरामद जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 79.85 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है। मामले की जांच अभी भी एसआईटी की निगरानी में जारी है। '45 साल का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी' चंपत राय ने कहा कि उन्होंने ट्रस्ट की इच्छा का सम्मान करते हुए अब तक इस मामले पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ चुकी है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा, "मैं 1991 से अयोध्या में सेवा कर रहा हूं। मेरा 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। मुझे विश्वास है कि जांच पूरी होने के बाद सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।" जांच जारी राम मंदिर चंदा विवाद की जांच फिलहाल एसआईटी कर रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी किस पर तय होती है। तब तक मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। सोमवार को हुई ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिए गए। यह फैसला मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच लिया गया है। अंतरिम महासचिव बनने के बाद कृष्ण मोहन का पहला बयान कार्यभार संभालने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि उन्हें नए महासचिव की नियुक्ति तक अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "जो कुछ भी हुआ है, उससे हम सभी बेहद दुखी हैं। इससे केवल ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं भी आहत हुई हैं।" कृष्ण मोहन ने स्वीकार किया कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कुछ कमियां थीं, जिनका कुछ लोगों ने कथित तौर पर फायदा उठाया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन खामियों को दूर कर व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। ट्रस्ट की छवि बहाल करना पहली प्राथमिकता अंतरिम महासचिव ने कहा कि हालिया घटनाक्रम से ट्रस्ट की साख प्रभावित हुई है और लोगों के मन में सवाल पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। महंत कमल नयन दास ने दी जानकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने बताया कि ट्रस्ट की बैठक में कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व महासचिव चंपत राय बैठक में उपस्थित नहीं थे, जबकि गोपाल राव को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। चंपत राय ने जांच पूरी होने तक पद छोड़ना उचित समझा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य पूरे घटनाक्रम से दुखी हैं। उनके अनुसार, मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है, जिसने ऐसी स्थिति पैदा होने दी। उन्होंने बताया कि चंपत राय का मानना था कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक उनके लिए महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने इस्तीफा दिया। स्वामी गोविंद देव गिरि ने यह भी बताया कि वरिष्ठ विधिवेत्ता के. पारासरन ने ट्रस्ट के संविधान का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी पदाधिकारी का इस्तीफा सौंपते ही प्रभावी माना जाता है। समय से पहले बुलाई गई थी बैठक ट्रस्ट की यह बैठक निर्धारित कार्यक्रम से पहले बुलाई गई थी। बैठक में वरिष्ठ संतों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और आध्यात्मिक नेताओं ने भाग लिया। इस दौरान ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे, पारदर्शिता और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ऐसे समय स्वीकार किए गए हैं, जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के मामले की जांच जारी है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ेगी तथा तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के दान की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारी कथित रूप से नकदी अपने कपड़ों, जेबों और यहां तक कि जूतों में छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश करते थे। हालांकि, जांच में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की चांदी की ईंटें और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं। CCTV फुटेज में सामने आईं 70 संदिग्ध घटनाएं एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं चिन्हित की गईं, जिनमें गिनती कक्ष के अंदर कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। रिपोर्ट के अनुसार, कई मौकों पर कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए देखा गया। सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी खामियां एसआईटी की रिपोर्ट में मंदिर के दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आई प्रमुख कमियां इस प्रकार हैं— गिनती कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी। कर्मचारियों को निजी सामान अंदर ले जाने से रोकने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। कई दानपात्रों की नकदी को एक साथ मिलाकर गिना जाता था, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हुई। मूल्यवान चढ़ावे के दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। छह मुख्य आरोपी चिन्हित, आठ गिरफ्तार प्रारंभिक जांच में एसआईटी ने छह लोगों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके नाम उजागर किए हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा शामिल हैं। अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों ने लगभग 78.94 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा 4 जून को गिनती कक्ष से करीब 2.25 लाख रुपये और बरामद हुए थे। एसआईटी के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद लेनदेन के संकेत मिले हैं, जिसकी वित्तीय जांच जारी है। ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित एसआईटी ने सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को खारिज किया है, जिनमें चांदी की ईंटें और मंदिर के आभूषण गायब होने की बात कही जा रही थी। जांच में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर के सभी आभूषण और मूल्यवान वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने मीडिया के सामने आभूषणों का प्रदर्शन भी किया और स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। विस्तृत जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच अवधि बढ़ाई गई उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को गठित एसआईटी के कार्यकाल को 1 जुलाई को 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया था। अब विस्तृत जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में आठ लोगों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों पर लगे आरोपों के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। अस्वस्थ होने के बावजूद उन्होंने बैठक में हिस्सा लिया और घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर भरोसा भी जताया। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के त्यागपत्रों पर विचार करना है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक की शुरुआत करते हुए दोनों के इस्तीफों पर चर्चा का प्रस्ताव रखा। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद रिक्त है। बैठक में ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्य मौजूद हैं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष स्वामी परमानंद, कृष्णमोहन और स्वामी गोविंद देव गिरी बैठक में शामिल हुए, जबकि नृपेंद्र मिश्र और वरिष्ठ अधिवक्ता के. पारासरन वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उत्तर प्रदेश सरकार के अपर प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए। संजय प्रसाद को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है, जिस पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। क्या है मामला? गौरतलब है कि 5 जून को पहली बार चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया था। इसके बाद 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया और अब तक जांच के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
अयोध्या, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर जहां विशेष जांच दल (SIT) मामले की गहन पड़ताल में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पहली बार सार्वजनिक रूप से पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जिम्मेदारी गोपाल राव की है और वे राम परंपरा का पालन नहीं करते तथा अनावश्यक विवाद खड़े करते हैं। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, सरकार अब आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन मकानों की जांच शुरू कर दी है, जिन्हें आरोपियों ने मंदिर में नौकरी के दौरान बनवाया और जिनमें निर्माण नियमों के उल्लंघन की आशंका है। बताया जा रहा है कि लवकुश मिश्रा के शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान और अनुकल्प मिश्रा के कौशलपुरी स्थित मकान पर कार्रवाई हो सकती है। इन मामलों में नोटिस जारी करने की तैयारी भी चल रही है। जांच एजेंसियां आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही हैं। आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ला का नोटों की गड्डियों के साथ एक वीडियो भी सामने आया है, जिसकी सत्यता की पुलिस जांच कर रही है। वहीं, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आरोपियों की नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका रही। अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये नकद, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गबन की राशि कहां-कहां पहुंची। इस बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए 15 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आगामी 6 जुलाई को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर के कथित दान गबन मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar ने स्पष्ट किया कि संगठन अपने अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष Champat Rai के खिलाफ किसी कार्रवाई पर तभी विचार करेगा, जब जांच रिपोर्ट सामने आएगी। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है और फिलहाल संगठन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। 'घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं' आलोक कुमार ने कहा कि दान से जुड़े कथित घोटाले की खबरें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले में किसी तरह का बचाव या बहाना बनाने का सवाल नहीं है। पुलिस और SIT को निष्पक्ष तरीके से हर पहलू की जांच करनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 'राम मंदिर ट्रस्ट के लिए VHP जिम्मेदार नहीं' VHP प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि राम मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी VHP की नहीं है। उन्होंने कहा कि चंपत राय भले ही VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति VHP ने नहीं की थी। इसलिए ट्रस्ट में उनकी भूमिका को संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता। 'चुनावी वजहों से मुद्दे को बढ़ाया जा रहा' आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि VHP, Rashtriya Swayamsevak Sangh और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस मामले से जोड़ने की कोशिशें राजनीतिक कारणों से की जा रही हैं। उनके अनुसार, अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है। VHP ने रखीं चार प्रमुख मांगें आलोक कुमार ने बताया कि VHP ने इस मामले में चार प्रमुख मांगें रखी हैं— तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो। मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन की जाए। दोषी पाए जाने वालों को चार से पांच महीने के भीतर सजा दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और किसी व्यक्ति पर औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं होते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। फिलहाल SIT को अपनी जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करनी है, जिसके बाद ट्रस्ट और संबंधित संगठनों द्वारा आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।
नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस विवाद में अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सवाल उठाते हुए मंदिर में चढ़ाए गए सोने, चांदी और नकद दान के हिसाब को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि मंदिर में आए हजारों करोड़ रुपये के दान और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी के संबंध में पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। '3500 करोड़ रुपये के कच्चे दान का हिसाब कहां है?' महुआ मोइत्रा ने कहा कि वर्ष 2020 में ऑडिट के दौरान यह चिंता जताई गई थी कि मंदिर में आने वाले "रॉ डोनेशन" (बिना रसीद वाले दान) का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये का ऐसा दान आया, जिसका पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिया गया दान किस प्रकार सुरक्षित रखा गया और उसका उपयोग कैसे किया गया। 1250 किलो सोना और 70 किलो चांदी को लेकर उठाए सवाल टीएमसी सांसद ने दावा किया कि मंदिर में चढ़ाए गए 1,250 किलो सोने, 70 किलो चांदी और लगभग 200 करोड़ रुपये नकद दान के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई एक-एक किलो वजन वाली 200 चांदी की ईंटों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने पूछा कि इन बहुमूल्य दानों का वर्तमान विवरण क्या है। 'सिर्फ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से जवाबदेही खत्म नहीं होती' महुआ मोइत्रा ने इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की कार्रवाई और अब तक हुई गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पूरे मामले की जवाबदेही तय नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो पूरे प्रशासनिक ढांचे की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। योगी सरकार और केंद्र पर भी साधा निशाना महुआ मोइत्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की थी। टीएमसी सांसद ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और ऐसे में दान की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सवाल उठाना राजनीतिक नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का विषय है। जांच जारी, ट्रस्ट ने आरोपों से किया इनकार इस बीच, कथित अनियमितताओं के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और नकदी भी बरामद होने का दावा किया गया है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले भी कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनके रखरखाव और रिकॉर्ड की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में दान में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े सभी आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल धन की चोरी नहीं हुई, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। इस बीच मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा? राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रावण ने केवल माता सीता का हरण किया था, लेकिन यहां राम मंदिर के दानपात्र से श्रद्धालुओं की आस्था ही लूट ली गई। उन्होंने कहा, "रावण ने माता जानकी का हरण किया था, जिसका परिणाम उसके पूरे परिवार के विनाश के रूप में सामने आया। करोड़ों लोगों द्वारा भगवान राम के मंदिर में श्रद्धा से दिए गए दान में चोरी करने वालों को कानून का दंड भी मिलेगा और ईश्वर का न्याय भी मिलेगा।" 'जांच आगे बढ़ेगी तो और लोग भी पकड़े जाएंगे' धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है। उनके अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर और भी बहुत कुछ कह सकते हैं, लेकिन फिलहाल इतना ही कहना चाहते हैं कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को अपने कृत्यों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा। आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में राम मंदिर दान गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। मामले की जांच जारी है और वित्तीय लेन-देन समेत अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले पर तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी राम मंदिर दान गबन प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। विपक्ष मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है। चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि उसे इस संबंध में किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नहीं है। योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच जारी, अदालत में तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, जब्त रकम और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
अयोध्या, एजेंसियां। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चढ़ावा चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस विवाद के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आरोपियों की कोर्ट में पेशी गुरुवार को गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला एवं सत्र न्यायालय फैजाबाद में पेश किया गया। पेशी से पहले सभी का पुलिस लाइन अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह के समक्ष सुनवाई हुई। एसपी सिटी और सीओ सिटी पूरे समय न्यायालय परिसर में मौजूद रहे। SIT जांच में बड़े खुलासे एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट लीक होने के बाद कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला कि सोशल मीडिया पर वायरल कई दावे बेबुनियाद हैं। अनुराग रस्तोगी द्वारा दान की गई चांदी की ईंटों का विवरण ट्रस्ट के अभिलेखों में दर्ज है। जुलाई 2020 में दो बार में कुल 38 किलो चांदी दान में मिली थी, जिसे गलाकर बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा गया। सियासी बयानबाजी तेज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि निष्पक्ष जांच होगी और सरकार ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सुभासपा नेता अरुण राजभर ने कहा कि योगी सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है और आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद के आलोक कुमार ने सुझाव दिया कि ट्रस्ट को अब एक सीईओ नियुक्त करना चाहिए।
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित गड़बड़ी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी (विशेष जांच दल) की प्रारंभिक जांच के आधार पर FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर यह कार्रवाई की गई। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत से पहले एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच में दान राशि के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया था। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। सभी 8 नामजद आरोपी गिरफ्तार सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उनसे पूछताछ की जा रही है और गिरफ्तारी से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। FIR में इन लोगों के नाम शामिल FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी मामले में शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला? पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की भी विस्तार से जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विशेष जांच की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। जांच जारी, अन्य लोगों की भूमिका भी होगी स्पष्ट पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और अन्य सबूतों की पड़ताल कर रही हैं। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ, एजेंसियां। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में 19 दिन बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए पुलिस ने आठ नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों और गणना प्रक्रिया में शामिल लोगों पर साजिश के तहत चढ़ावा राशि में हेराफेरी और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। बाथरूम में छिपाए जाते थे नोट, वर्षों से चल रहा था खेल जांच में सामने आया है कि आरोपी चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी अलग निकालकर नोटों की गड्डियां पहले बाथरूम में छिपाते थे। बाद में मौका मिलने पर रकम को मंदिर परिसर से बाहर ले जाकर एक मकान में आपस में बांट लिया जाता था। प्रारंभिक जांच के अनुसार यह पूरा खेल पिछले दो से तीन वर्षों से चल रहा था। पुलिस अब तक करीब 60 लाख रुपये बरामद कर चुकी है, जबकि पहले ट्रस्ट की कार्रवाई के दौरान भी बड़ी रकम बरामद हुई थी। टिन्नू और सुभाष की भूमिका सबसे अहम एसआईटी की जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पता चला कि पूरी साजिश में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। टिन्नू के पास गणना कक्ष की चाबी रहती थी और वह पूरी प्रक्रिया पर नजर रखता था। वहीं, सुभाष ड्यूटी तय करने और कर्मचारियों की तैनाती का जिम्मेदार था। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जांच का दायरा बढ़ेगा, गैंगस्टर की भी तैयारी पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान नए साक्ष्य मिलने पर आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी वरिष्ठ आईपीएस या पीपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की जा सकती है। पुलिस संगठित अपराध के एंगल से भी जांच कर रही है और विवेचना पूरी होने के बाद आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी है। इस बीच मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या पहुंचकर एसआईटी जांच पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे की अफवाहें भी दिनभर चर्चा में रहीं, हालांकि ट्रस्ट ने इन खबरों का खंडन करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। अब सभी की नजर पुलिस विवेचना और एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में हार का डर अभी से सताने लगा है, इसलिए उसके नेता अनर्गल और बेतुकी बातें कर रहे हैं। 'सपा का कोई सांसद बीजेपी के संपर्क में नहीं' दरअसल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी में शामिल होना चाहते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अवधेश प्रसाद ने कहा कि समाजवादी पार्टी का एक भी सांसद भाजपा में जाने का इच्छुक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रही है। 'अखिलेश यादव की लोकप्रियता से घबराई बीजेपी' सपा सांसद ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की बढ़ती लोकप्रियता और समाजवादी पार्टी के प्रति जनता के बढ़ते भरोसे को देखकर भाजपा घबरा गई है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में संभावित हार की आशंका से भाजपा के नेता बौखलाहट में बयानबाजी कर रहे हैं। राम मंदिर मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग अवधेश प्रसाद ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ा कथित चढ़ावा चोरी का मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट जनता के सामने लाई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है और सरकार को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।