मुजफ्फरपुर, एजेंसियां। बिहार विधानसभा उपचुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सीतामढ़ी के पूर्व सांसद अर्जुन राय ने आरजेडी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण करेंगे। तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवाल प्रेस वार्ता में अर्जुन राय ने कहा कि आरजेडी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व में पार्टी की कार्यशैली और वैचारिक दिशा बदल गई है। उनके अनुसार, यह फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी का नहीं बल्कि राजनीतिक सोच और सिद्धांतों का है। बीजेपी की नीतियों से प्रभावित होने का दावा अर्जुन राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की नीतियों से वह प्रभावित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के कई फैसलों, विशेषकर अनुच्छेद 370 हटाने और बिहार में परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि देशहित में लिए गए इन निर्णयों ने उन्हें भाजपा के करीब आने के लिए प्रेरित किया। उत्तर बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है असर अर्जुन राय उत्तर बिहार के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और सीतामढ़ी तथा आसपास के इलाकों में उनका अच्छा राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में उनका आरजेडी छोड़कर भाजपा में जाने का फैसला उत्तर बिहार के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल उनके इस्तीफे पर आरजेडी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
देवघर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को आंदोलनों में शामिल करने के बजाय उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें, ताकि वे भविष्य में आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें। 'शिक्षा से ही मिली पहचान' निशिकांत दुबे ने कहा कि वह स्वयं गांव के एक स्कूल से पढ़कर देश के सांसद बने हैं और आज भी नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ाती है और युवाओं को अपना भविष्य बनाने पर ध्यान देना चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान के काम की सराहना सांसद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उनके अनुसार, उन्होंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि छात्रों के बीच बने भ्रम को दूर करने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में नीट परीक्षा को पहले से अधिक पारदर्शी और बेहतर तरीके से आयोजित कराया गया। कभी-कभी अभिभावकों को भी बच्चों की भावनाओं के आगे झुकना पड़ता है और इसी भावना के तहत यह निर्णय लिया गया। JPSC मामले में झारखंड सरकार पर हमला निशिकांत दुबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामले में राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धांधली के कारण आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को हटाया गया, लेकिन अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पोड़ैयाहाट में डीएसओ की गिरफ्तारी और मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च और विरोध प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने देशभर में कांग्रेस के खिलाफ जवाबी प्रदर्शन करने का फैसला किया है। पार्टी ने सभी राज्यों की इकाइयों को कांग्रेस कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। राहुल गांधी को बनाया मुख्य निशाना भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। पार्टी नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में किया गया प्रदर्शन पूरी तरह राजनीतिक था और जनता को गुमराह करने का प्रयास है। भाजपा ने इसे "प्रायोजित आंदोलन" करार देते हुए कांग्रेस पर युवाओं की भावनाओं के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया। देशभर में कांग्रेस कार्यालयों का होगा घेराव भाजपा के अनुसार, राज्य इकाइयों को जिला और प्रदेश स्तर पर कांग्रेस कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी कार्यकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी करेंगे और कांग्रेस से छात्रों के मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की अपील करेंगे। राजनीतिक टकराव हुआ तेज NEET विवाद को लेकर पहले से जारी सियासी घमासान के बीच भाजपा के इस फैसले से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
बीरभूम, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में अवैध बालू तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री और मयूरेश्वर के विधायक दुध कुमार मंडल ने गुरुवार को खुद सड़क पर उतरकर अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। मंत्री ने बिना वैध दस्तावेजों के बालू लेकर जा रहे करीब 12 से 14 डंपरों को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में बालू माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया, जबकि स्थानीय लोगों ने मंत्री के कदम का स्वागत किया। शिकायतों के बाद मंत्री ने संभाली कमान जानकारी के अनुसार, मंत्री को पिछले कई दिनों से अवैध बालू तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि कई वाहन बिना आवश्यक अनुमति और वैध कागजात के बालू का परिवहन कर रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री स्वयं सड़क पर पहुंचे और संदिग्ध डंपरों की जांच शुरू कराई। इस दौरान कई वाहनों को रोका गया और दस्तावेजों की जांच में अनियमितता मिलने पर उन्हें तत्काल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। घटनास्थल पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा मंत्री की कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने हालात को जल्द ही नियंत्रित कर लिया। पकड़े गए सभी डंपरों की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। अवैध कारोबार पर नहीं होगी कोई रियायत कृषि मंत्री दुध कुमार मंडल ने स्पष्ट कहा कि जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में लापरवाही बरती गई तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। मंत्री की इस पहल के बाद स्थानीय लोगों ने भी अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की चर्चित अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंपा। इससे पहले जून में उन्होंने ईमेल के माध्यम से इस्तीफा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन संसदीय नियमों के तहत उसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब उनके औपचारिक इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। ईमेल नहीं, खुद पहुंचकर दिया इस्तीफा जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक अपने पति और फिल्म निर्माता निशपाल सिंह के साथ दिल्ली पहुंचीं और राज्यसभा सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा के कारण वह पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी थीं। देश लौटने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया। हाल ही में ली थी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ कोयल मल्लिक ने इसी वर्ष 6 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि उन्हें बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है और वह पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह पार्टी के लिए सक्रिय दिखाई दी थीं, लेकिन उसके बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गई थीं। भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अब तक न तो भाजपा की ओर से और न ही कोयल मल्लिक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि कोयल मल्लिक अपनी नई राजनीतिक दिशा का ऐलान करती हैं तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच बुधवार को अहम बैठक हुई। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन के पुनर्गठन, नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और आगामी राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। संगठन विस्तार पर हुआ मंथन सूत्रों के अनुसार, बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया गया। इसमें नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और विभिन्न राज्यों में संगठन को सशक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। चुनावी राज्यों पर विशेष फोकस बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। पार्टी नेतृत्व ने चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान बताया जा रहा है कि बैठक में हुई चर्चाओं के आधार पर भाजपा संगठन में जल्द ही नए पदाधिकारियों और जिम्मेदारियों को लेकर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को नई दिशा देने की तैयारी में है।
रांची। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के समापन सत्र में झारखंड को करीब 99,639 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ औद्योगिक साझेदारी विकसित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के लिए ऐसा माहौल तैयार कर रही है, जिससे उद्योगों के साथ-साथ राज्य और स्थानीय युवाओं को भी स्थायी लाभ मिल सके। बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार नवाचार, तकनीक और शोध आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए बिजली आपूर्ति, परिवहन संपर्क, आधारभूत ढांचे और कुशल मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि राज्य ने देश को बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी दिए हैं और अब इसी प्रतिभा को झारखंड के विकास से जोड़ने का समय है। रोजगार सृजन और उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा कार्यक्रम में उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के भीतर ही रोजगार के अवसर बढ़ाना है, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने स्वीकार किया कि पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड के पास अपार संभावनाएं हैं, लेकिन अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है। उद्योगों और सरकार के सहयोग से समावेशी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के दौरान जिंदल स्टील, रूंगटा ग्रुप, टाटा स्टील, वरुण बेवरेजेज समेत कई प्रमुख औद्योगिक समूहों ने निवेश में रुचि दिखाई। सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव जिंदल स्टील की ओर से 40 हजार करोड़ रुपये और एंबिशियस सीमेंट की ओर से 30 हजार करोड़ रुपये का रहा। सरकार का मानना है कि इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से झारखंड में औद्योगिक विकास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा ऐन वक्त पर उम्मीदवार बदलने से सियासी माहौल गर्म हो गया है। पहले भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित किया। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष और अन्य दलों ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। प्रशांत किशोर ने भाजपा पर साधा निशाना जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर सीट से उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा के फैसले को जनता के डर का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि जो भाजपा पूरे देश में दूसरे दलों के उम्मीदवारों को अपनी ओर लाने का दावा करती है, उसे अब अपने ही गढ़ में उम्मीदवार बदलना पड़ रहा है। प्रशांत किशोर ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा जिस बांकीपुर को अपना मजबूत किला बताती थी, वहां अब उसे चुनाव लड़ाने के लिए उम्मीदवार तक नहीं मिल रहा है। आरजेडी ने भी भाजपा को घेरा राष्ट्रीय जनता दल ने भी भाजपा के इस फैसले को उसकी कमजोरी करार दिया। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हार के डर से अपने ही पुराने कार्यकर्ता की "बलि" चढ़ा दी। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है और यही वजह है कि भाजपा को उम्मीदवार बदलना पड़ा। 30 जुलाई को मतदान, मुकाबला हुआ त्रिकोणीय बांकीपुर सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित है। इस बार भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, महागठबंधन की ओर से आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता और जन सुराज के प्रशांत किशोर के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के साथ चुनावी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार ‘बंटी’ ने नामांकन दाखिल किया। इसके बाद आयोजित एनडीए की सभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, विजय सिन्हा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय ऐसे लोग भी वोट मांगने आते हैं, जिनका बिहार और उसकी राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने मतदाताओं से ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की। एनडीए ने जताया जीत का भरोसा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बांकीपुर से एक समर्पित कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहा है और एनडीए पहले की तरह इस सीट पर भी बड़ी जीत दर्ज करेगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने बिजली, सड़क और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वहीं, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि जनता ने हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए पर भरोसा जताया था और इस बार भी बांकीपुर में जीत का नया रिकॉर्ड बनेगा। राजद और जन सुराज भी मैदान में राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता ने भी गुरुवार को नामांकन दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर की जनता बदलाव चाहती है और इस बार राजद को समर्थन मिलेगा। कांग्रेस ने भी महागठबंधन के तहत राजद उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे और लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प नामांकन के दौरान एक रोचक घटना भी देखने को मिली, जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी मंच से उम्मीदवार अभिषेक कुमार का नाम लेने के बजाय बार-बार दूसरे नेता आशीष सिन्हा का नाम लेते रहे। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। इस सीट पर 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। प्रशांत किशोर की एंट्री और प्रमुख दलों के आमने-सामने होने से यह उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है।
पटना, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अभिषेक कुमार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। अभिषेक कुमार भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी के संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके नाम की घोषणा के साथ ही बांकीपुर का उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो गया है। राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई सीट बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। भाजपा इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी भी कई वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल समेत कई बड़े नेता चुनावी रणनीति पर लगातार बैठकें कर रहे हैं। प्रशांत किशोर से सीधी टक्कर इस उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का चुनाव केवल एक सीट का उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला बन सकता है। 30 जुलाई को मतदान निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। सभी प्रमुख दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन में चल रहे बदलावों के बीच अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम के गठन के बाद केंद्र सरकार में भी बदलाव की संभावना पर मंथन चल रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक किसी भी फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर रहेगा जोर सूत्रों के अनुसार, संभावित फेरबदल में क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जा सकती है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कुछ राज्यों से नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव माना जा रहा है। पहले भाजपा संगठन, फिर कैबिनेट विस्तार की संभावना पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, भाजपा पहले अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर सकती है। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार का रास्ता साफ हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल यह चर्चा राजनीतिक और मीडिया सूत्रों पर आधारित है और अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर ही लिया जाएगा।
चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। 2031 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी एक वीडियो संदेश के माध्यम से अन्नामलाई ने कहा कि उनकी नई राजनीतिक पार्टी वर्ष 2031 में होने वाले Tamil Nadu Legislative Assembly Election 2031 में भाग लेगी। उन्होंने संकेत दिया कि नई पार्टी तमिलनाडु की राजनीति में एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के रूप में उभरेगी और राज्य के विकास तथा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देगी। वैचारिक मतभेद बने अलगाव की वजह अन्नामलाई ने अपने बयान में कहा कि पिछले लगभग 18 महीनों से पार्टी नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद चल रहे थे। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी सोच और पार्टी नेतृत्व के दृष्टिकोण में अंतर था। इसी कारण उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया और स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया। आईपीएस अधिकारी से राजनीतिक नेता तक का सफर पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने वर्ष 2020 में Bharatiya Janata Party का दामन थामा था। इसके बाद उन्हें 2021 में तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने 2025 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास किया, हालांकि चुनावी स्तर पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। नई पारी पर टिकी राजनीतिक नजरें अन्नामलाई को तमिलनाडु में भाजपा का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनका पार्टी से अलग होना और नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी नई पार्टी भविष्य में तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण बना सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अन्नामलाई अपनी नई पार्टी की आधिकारिक घोषणा कब करते हैं और वह राज्य की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। बंगाल की 293 सीटों पर वोटों की गिनती जारी है। एक सीट (फालता) पर 21 मई को फिर से चुनाव होगा। शुरुआती रुझान में भाजपा 105 और टीएमसी 125 सीटों पर आगे चल रही है। झाड़ग्राम में भाजपा चारों सीटों पर आगे चल रही है। झाड़ग्राम इस चुनाव में काफी चर्चा में रहा। पीएम मोदी ने यहां एक दुकान पर रुककर झालमुड़ी खाई थी। भवानीपुर में ममता आगे भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी आगे हैं। नंदीग्राम से सुवेंदु बनर्जी को बढ़त है। राज्य में ममता बनर्जी 15 साल से सत्ता में हैं। वहीं आरजी कर रेप विक्टिम की मां रत्ना देबनाथ को बढ़त है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।