Bihar Education News

Students celebrating Bihar Board 12th result 2026 with happiness, toppers list and marksheets in hand
बिहार बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 जारी: लड़कियों का दबदबा कायम, 85.19% छात्र सफल, जानें टॉपर्स की पूरी सूची

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने सोमवार को इंटरमीडिएट (कक्षा 12वीं) परीक्षा 2026 के परिणाम जारी कर दिए। इस वर्ष भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए परीक्षा में अपना दबदबा कायम रखा। बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल पास प्रतिशत 85.19% रहा। इसमें छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा-86.23% लड़कियां सफल रहीं, जबकि 84.09% लड़के परीक्षा में पास हुए। लड़कियों का शानदार प्रदर्शन इस साल टॉपर्स की सूची में भी छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। कुल 26 टॉपर्स में से 19 छात्राएं हैं, जो बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते महिला सशक्तिकरण की झलक पेश करता है। स्ट्रीम वाइज टॉपर्स साइंस: आदित्य प्रकाश अमन (समस्तीपुर) – 481 अंक (96.20%) आर्ट्स: निशु कुमारी (गया) – 489 अंक कॉमर्स: अदिति कुमारी (पटना) – 480 अंक रिकॉर्ड समय में रिजल्ट जारी बिहार बोर्ड ने एक बार फिर रिकॉर्ड कायम करते हुए लगातार 8वीं बार देश में सबसे पहले इंटर का रिजल्ट घोषित किया। इस बार महज 25 दिनों में कॉपियों का मूल्यांकन पूरा कर लिया गया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। परीक्षा और रिजल्ट से जुड़ी अहम जानकारी करीब 13 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं इस परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षाएं 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। जो छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं, वे 25 मार्च से 2 अप्रैल तक स्क्रूटनी या कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे करें रिजल्ट चेक छात्र अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट्स- interbiharboard.com bsebexam.com पर जाकर देख सकते हैं। इसके अलावा SMS और DigiLocker के माध्यम से भी परिणाम प्राप्त किया जा सकता है। टॉपर्स के लिए इनाम इस वर्ष टॉपर्स के लिए पुरस्कार राशि दोगुनी कर दी गई है- प्रथम स्थान: 2 लाख रुपये, लैपटॉप और किंडल द्वितीय स्थान: 1.5 लाख रुपये और लैपटॉप तृतीय स्थान: 1 लाख रुपये और लैपटॉप

surbhi मार्च 23, 2026 0
Students checking Bihar Board 12th result 2026 online after official announcement
Bihar Board Result 2026: आज दोपहर 1:30 बजे जारी होगा इंटर का रिजल्ट, फिर दोहराएंगी लड़कियां इतिहास?

पिछले साल तीनों स्ट्रीम में लड़कियों का रहा दबदबा, 13 लाख से ज्यादा छात्रों का इंतजार खत्म आज बिहार के लाखों छात्रों का इंतजार आज खत्म होने जा रहा है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) आज दोपहर 1:30 बजे इंटरमीडिएट (12वीं) का रिजल्ट जारी करेगा। रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और छात्र-छात्राएं बेसब्री से अपने परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल लड़कियों का रहा दबदबा पिछले कुछ वर्षों से बिहार बोर्ड के रिजल्ट में लड़कियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। साल 2025 में भी तीनों स्ट्रीम-आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स-में लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन किया था। आर्ट्स में अंकिता कुमारी (वैशाली) और शाकिब शाह (बक्सर) ने 94.6% के साथ संयुक्त टॉप किया साइंस में प्रिया जायसवाल ने पहला स्थान हासिल किया कॉमर्स में रोशनी कुमारी टॉपर रहीं इस बार भी उम्मीद जताई जा रही है कि लड़कियां बेहतर प्रदर्शन दोहरा सकती हैं। कितने छात्रों ने दी परीक्षा? साल 2026 में बिहार बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में कुल 28.30 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 10वीं (मैट्रिक): 15,12,687 परीक्षार्थी 12वीं (इंटर): 13,17,846 परीक्षार्थी कब हुई थी परीक्षा? इस वर्ष 12वीं की परीक्षाएं 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। परीक्षा राज्यभर के 1,762 केंद्रों पर दो शिफ्ट में हुई- पहली शिफ्ट: सुबह 9:30 से 12:45 दूसरी शिफ्ट: दोपहर 2:00 से शाम 5:15 कैसे चेक करें रिजल्ट? रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र बिहार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रोल नंबर और रोल कोड डालकर परिणाम देख सकते हैं।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Students checking Bihar Board 12th Result 2026 onlin
BSEB 12th Result 2026: जल्द होंगे टॉपर्स के इंटरव्यू, 20 मार्च के बाद आ सकता है बिहार बोर्ड इंटर का रिजल्ट

  बिहार के लाखों छात्रों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। Bihar School Examination Board (BSEB) ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की कॉपियों का मूल्यांकन पूरा कर लिया है और अब बोर्ड जल्द ही रिजल्ट घोषित करने की तैयारी में जुटा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार बोर्ड का 12वीं का रिजल्ट 20 मार्च के बाद जारी किया जा सकता है।   टॉपर्स के इंटरव्यू के बाद जारी होगा रिजल्ट बोर्ड की परंपरा के अनुसार परिणाम घोषित करने से पहले टॉपर्स का इंटरव्यू लिया जाता है। कॉपियों की जांच पूरी होने के बाद अब टॉप करने वाले छात्रों को बुलाकर उनकी कॉपियों का वेरिफिकेशन और इंटरव्यू लिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा।   ऑनलाइन जारी होगा परिणाम छात्र अपना रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट results.biharboardonline.com पर जाकर देख सकेंगे। रिजल्ट चेक करने के लिए छात्रों को रोल नंबर और रोल कोड दर्ज करना होगा।   रिजल्ट के साथ जारी होगी टॉपर्स लिस्ट बिहार बोर्ड रिजल्ट जारी करते समय राज्य के टॉपर्स की सूची भी जारी करता है। जो छात्र राज्य में शीर्ष स्थान हासिल करते हैं, उन्हें राज्य सरकार की ओर से सम्मानित किया जाता है।   टॉपर्स को मिलेगा नकद इनाम और लैपटॉप पिछले साल के पैटर्न के अनुसार- पहला स्थान पाने वाले छात्र को 2 लाख रुपये दूसरा स्थान पाने वाले को 1.5 लाख रुपये तीसरा स्थान पाने वाले को 1 लाख रुपये इसके अलावा टॉपर्स को लैपटॉप, किंडल ई-बुक रीडर, मेडल और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाता है। वहीं चौथे और पांचवें स्थान पर आने वाले छात्रों को 30-30 हजार रुपये, लैपटॉप और मेडल से सम्मानित किया जाता है।   पास होने के लिए जरूरी हैं 33% अंक बोर्ड परीक्षा में पास होने के लिए छात्रों को हर विषय में कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। अगर कोई छात्र एक या दो विषयों में फेल हो जाता है तो वह बोर्ड द्वारा आयोजित विशेष परीक्षा में शामिल होकर उसी साल परीक्षा पास कर सकता है। अब छात्रों और अभिभावकों की नजर बिहार बोर्ड की ओर से घोषित होने वाली रिजल्ट डेट पर टिकी हुई है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Bihar CM Nitish Kumar announces recruitment of 45,000 new teachers during Samriddhi Yatra.
बिहार में 45 हजार नए शिक्षकों की होगी बहाली, सीएम नीतीश कुमार का बड़ा ऐलान

  बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही 45 हजार नए शिक्षकों की भर्ती करने जा रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने यह घोषणा बुधवार को अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान अररिया दौरे में की। उन्होंने कहा कि इस बहाली से राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार आएगा।   बिहार में बढ़ी शिक्षकों की संख्या मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम किया है। पहले राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी थी, जिसे दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर बहाली की प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने बताया कि पहले नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति की गई और बाद में Bihar Public Service Commission के माध्यम से भी शिक्षकों की भर्ती की गई। इन प्रयासों के चलते आज बिहार में सरकारी शिक्षकों की संख्या बढ़कर 5 लाख 24 हजार से अधिक हो चुकी है। अब इसी क्रम में 45 हजार और शिक्षकों की बहाली की जाएगी।   बालिका शिक्षा पर सरकार का विशेष ज़ोर मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006 से ही सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। छात्राओं को साइकिल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के कारण स्कूलों में लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।   लालू-राबड़ी शासन पर साधा निशाना इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2005 से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और लोग शाम के बाद घर से निकलने से डरते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी कमज़ोर थी।   सड़कों के कारण कम हुआ सफर का समय मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में सड़कों और पुल-पुलियों का बड़े पैमाने पर निर्माण कराया है। इसका परिणाम यह हुआ कि अब राज्य के अधिकांश जिलों से पटना पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। पहले जहां कई जिलों से राजधानी पहुंचने में छह घंटे या उससे अधिक समय लगता था, वहीं अब दूरदराज के जिलों से भी करीब पांच घंटे में पटना पहुंचा जा सकता है।   महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। वर्ष 2015 में शुरू की गई Saat Nischay Yojana को बिहार के विकास की बड़ी पहल माना गया। इसके विस्तार के रूप में वर्ष 2020 में इसका दूसरा चरण Saat Nischay Yojana Phase-2 लागू किया गया। अब ‘सात निश्चय-3’ के तहत भी कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा, आधारभूत संरचना और महिलाओं के सशक्तिकरण के जरिए बिहार के समग्र विकास को गति देना है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Bihar Board students appearing for Class 9 and 11 annual examination in classroom.
Bihar Board Exam 2026: 11वीं की परीक्षा 16 मार्च से, 9वीं की 18 मार्च से शुरू - जारी हुआ पूरा शेड्यूल

बिहार बोर्ड ने जारी किया 9वीं और 11वीं परीक्षा कार्यक्रम बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने कक्षा 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षा 2026 का कार्यक्रम जारी कर दिया है। बोर्ड की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार 11वीं की वार्षिक परीक्षा 16 मार्च से 24 मार्च 2026 तक आयोजित की जाएगी। वहीं कक्षा 9वीं की वार्षिक परीक्षा 18 मार्च से 23 मार्च 2026 के बीच कराई जाएगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं राज्य के संबंधित विद्यालयों में ही आयोजित होंगी और इसके लिए सभी स्कूलों को आवश्यक निर्देश भेज दिए गए हैं। दो पालियों में होगी परीक्षा बिहार बोर्ड के अनुसार परीक्षाएं दो पालियों में आयोजित की जाएंगी। पहली पाली: सुबह 9:30 बजे से 12:45 बजे तक दूसरी पाली (11वीं): दोपहर 2:00 बजे से 5:15 बजे तक दूसरी पाली (9वीं): दोपहर 2:00 बजे से 4:45 बजे तक हालांकि कुछ विषयों की परीक्षा दूसरी पाली में 2:00 बजे से 5:15 बजे तक भी आयोजित की जा सकती है। परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रों को 15 मिनट का कूल-ऑफ टाइम दिया जाएगा, ताकि वे प्रश्न पत्र को ध्यान से पढ़ सकें। प्रायोगिक परीक्षाओं की तिथि भी तय बोर्ड ने प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षाओं की तारीख भी घोषित कर दी है। 11वीं की प्रायोगिक परीक्षा: 25 मार्च से 28 मार्च 2026 9वीं की प्रायोगिक परीक्षा: 24 मार्च 2026 इन परीक्षाओं का आयोजन भी संबंधित विद्यालयों में ही किया जाएगा। पहले दिन इन विषयों की होगी परीक्षा 11वीं की परीक्षा के पहले दिन अलग-अलग संकाय के विद्यार्थियों के लिए अलग विषय निर्धारित किए गए हैं। पहली पाली में: विज्ञान संकाय – भौतिकी कला संकाय – दर्शनशास्त्र वाणिज्य संकाय – उद्यमिता वोकेशनल – फाउंडेशन कोर्स दूसरी पाली में: कला संकाय – राजनीति विज्ञान वाणिज्य – अकाउंटेंसी विज्ञान – रसायन शास्त्र वोकेशनल – इलेक्टिव विषय (ट्रेड पेपर-1) आज से भेजी जाएगी गोपनीय परीक्षा सामग्री बिहार बोर्ड ने जानकारी दी है कि आज से 12 मार्च तक सभी जिला शिक्षा कार्यालयों को गोपनीय परीक्षा सामग्री भेजी जाएगी। बोर्ड ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन सामग्रियों को समय पर केंद्रवार और विषयवार विद्यालयों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें, ताकि परीक्षा में किसी तरह की परेशानी न हो। कब आएगा 9वीं और 11वीं का रिजल्ट बिहार बोर्ड ने परिणाम को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। 11वीं कक्षा का रिजल्ट: 2 अप्रैल 2026 तक तैयार करना अनिवार्य 9वीं कक्षा का रिजल्ट: परीक्षा समाप्त होने के 7 दिनों के भीतर तैयार करना होगा बोर्ड का उद्देश्य है कि छात्रों को समय पर परिणाम मिल सके, ताकि उनकी अगली शैक्षणिक प्रक्रिया बिना देरी के पूरी हो सके।  

surbhi मार्च 6, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0