पटना: बिहार में मानसून के बीच मौसम के अचानक बदले मिजाज ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। राज्य के बांका, लखीसराय और पटना जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से कुल 9 लोगों की मौत हो गई। लगातार हो रही वज्रपात की घटनाओं के बीच इन हादसों ने ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की और सभी मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है। बांका में 5, लखीसराय में 3 और पटना में एक मौत मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वज्रपात की सबसे अधिक घटनाएं बांका जिले में हुईं, जहां 5 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा लखीसराय में 3 और पटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं के बाद संबंधित इलाकों में शोक का माहौल है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 4-4 लाख रुपये मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वज्रपात में जान गंवाने वाले सभी लोगों के आश्रितों को तत्काल चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को राहत और सहायता से जुड़ी कार्रवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया गया है। खराब मौसम में घर से बाहर नहीं निकलने की अपील घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब मौसम खराब हो और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका हो, तब लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। खासकर खेतों, खुले मैदानों और अन्य खुले स्थानों में मौजूद लोगों को मौसम में बदलाव के संकेत मिलते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाने की सलाह दी गई है। पेड़ और बिजली के खंभों से रहें दूर वज्रपात के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। मानसून के दौरान बिहार में वज्रपात की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। 9 मौतों के बाद फिर बढ़ी चिंता बिहार में एक ही दिन में तीन जिलों में 9 लोगों की मौत ने मानसून के दौरान वज्रपात से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बारिश कमजोर होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर गरज-चमक वाले बादल बन रहे हैं, जिससे अचानक बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में किसानों, मजदूरों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मौसम खराब होते ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचना जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। खबर का सार कुल मौतें: 9 बांका: 5 मौतें लखीसराय: 3 मौतें पटना: 1 मौत मुआवजा: प्रत्येक मृतक के आश्रित को 4 लाख रुपये मुख्यमंत्री की अपील: खराब मौसम में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थान पर रहें।
बिहार में मॉनसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर जरूर हुई हैं, लेकिन मौसम पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। बुधवार, 12 अगस्त को राज्य के 18 जिलों में आंधी, गरज-चमक और वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इन जिलों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले 24 घंटे के दौरान बिहार के किसी भी हिस्से में भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। 18 जिलों में आंधी और वज्रपात का येलो अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार को पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरजते बादलों के साथ बिजली चमकने और करीब 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। सीमावर्ती और उत्तर-पूर्वी इलाकों में कुछ जगहों पर बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रह सकती हैं। हालांकि फिलहाल राज्य में व्यापक स्तर पर भारी बारिश की स्थिति के संकेत नहीं हैं। पटना में कैसा रहेगा मौसम? राजधानी पटना में बुधवार को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन तेज या लगातार बारिश की संभावना कम बताई गई है। पटना में अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। ऐसे में बादल छाए रहने के बावजूद लोगों को उमस और गर्मी से पूरी तरह राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मॉनसून कमजोर पड़ा तो बढ़ा तापमान मंगलवार को बिहार में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर रहने का असर तापमान पर भी दिखाई दिया। कई जिलों में अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुपौल मंगलवार को राज्य का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा पटना, समस्तीपुर, नालंदा, वाल्मीकि नगर, छपरा, मोतिहारी, सीवान, वैशाली, अरवल, कैमूर, औरंगाबाद, गया, शेखपुरा, मुंगेर, मधेपुरा, पूर्णिया और अररिया समेत कई जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। भारी बारिश नहीं, लेकिन बिजली का खतरा बरकरार मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में मॉनसूनी गतिविधियां कमजोर रह सकती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। स्थानीय स्तर पर बादल बनने के कारण अचानक आंधी, बारिश और वज्रपात की स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर किसानों, खेतों में काम करने वाले लोगों और खुले क्षेत्रों में रहने वालों को सावधानी बरतने की जरूरत है। गरज-चमक शुरू होने पर खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए और तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। बिहार में आज कैसा रहेगा मौसम? कुल मिलाकर बुधवार को बिहार का मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। राज्य में भारी बारिश से फिलहाल राहत रहेगी, लेकिन 18 जिलों में आंधी, तेज हवाओं और वज्रपात का खतरा बना रहेगा। पटना समेत कई इलाकों में बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने के आसार हैं। मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट और चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
बिहार मौसम अपडेट 4 अगस्त 2026: बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। मंगलवार, 4 अगस्त को मौसम विभाग ने पूरे राज्य के लिए बारिश और खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। राज्य के ज्यादातर जिलों में येलो अलर्ट, जबकि कुछ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर वज्रपात की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन 10 जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मंगलवार को बिहार के पूर्वी चंपारण, वैशाली, समस्तीपुर, अररिया, किशनगंज, कटिहार, सीवान, सारण, भोजपुर और बक्सर में भारी बारिश हो सकती है। इन इलाकों में बारिश के साथ तेज हवा और बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है। मौसम में बदलाव से पिछले दिनों महसूस हो रही उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आंधी, बिजली और तेज बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी। अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बिहार में अगले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ होने के आसार कम हैं। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश जारी रह सकती है। कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ जिलों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रह सकती हैं। 5 और 6 अगस्त को भी उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों में दिनभर मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। इस दौरान स्थानीय स्तर पर गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी बनी बारिश की वजह मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली पूर्वी हवाएं बिहार की ओर बढ़ रही हैं। वायुमंडल में नमी की मात्रा अधिक होने और स्थानीय स्तर पर तेजी से बादल बनने के कारण राज्य के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखी जा रही हैं। इसी वजह से कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ वज्रपात की स्थिति भी बन रही है। सामान्य से अब भी कम हुई है बारिश बारिश की गतिविधियां बढ़ने के बावजूद बिहार में अब तक कुल बारिश सामान्य से कम रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि तक राज्य में करीब 422 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक लगभग 299 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यानी राज्य में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 29 प्रतिशत कम बताया गया है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज होने पर बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। हाल के दिनों में वज्रपात की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है। कई जिलों में ठनका गिरने से करीब 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेना और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना जरूरी है। लोगों के लिए जरूरी सावधानी बारिश और गरज-चमक के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तेज आंधी या वज्रपात की स्थिति में खुले मैदान, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा टालना बेहतर रहेगा। बिहार में फिलहाल मानसून की गतिविधियां बनी हुई हैं और अगले कुछ दिनों तक कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
बिहार में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश और बादलों की आवाजाही के बीच मौसम विभाग ने शुक्रवार, 31 जुलाई को 25 जिलों के लिए बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में तेज बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम खराब रहने के दौरान बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। खासकर आंधी और वज्रपात की स्थिति में पेड़, बिजली के खंभे और खुले मैदान से दूरी बनाए रखना जरूरी होगा। इन 25 जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को बिहार के 25 जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इनमें कैमूर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, सारण, सिवान, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, वैशाली, समस्तीपुर, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका और जमुई शामिल हैं। इन जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर वज्रपात की स्थिति भी बन सकती है। 7 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का खतरा मानसून की सक्रियता को देखते हुए पूर्वी चंपारण, सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार, बांका और कैमूर में मौसम का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है। इन सात जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है। ऐसे में इन इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। उत्तर और पूर्वी बिहार में ज्यादा सक्रिय मानसून मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय बिहार में मौसम का प्रभाव सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है। उत्तर और पूर्वी बिहार में बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली हवाएं पहुंच रही हैं। इससे वातावरण में नमी बढ़ रही है और बादल बनने के साथ बारिश की गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। वहीं मध्य और दक्षिण बिहार में नमी वाली हवाओं का प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम है। इसके कारण कुछ इलाकों में बादल तो बन रहे हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो पा रही है। कई जगहों पर उमस और गर्मी भी महसूस की जा रही है। अगले 3-4 दिनों तक जारी रह सकता है बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार बिहार में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। 1 अगस्त को अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर को छोड़कर राज्य के बाकी जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 2, 3 और 4 अगस्त को भी बिहार के अलग-अलग हिस्सों में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी हुई है। इस दौरान कुछ इलाकों में मौसम अचानक बदल सकता है और तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग की चेतावनी को हल्के में न लें मानसून के दौरान आंधी और वज्रपात का खतरा अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में मौसम खराब होने पर खुले मैदान, खेत, तालाब, नदी और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहना ज्यादा बेहतर है। बिहार में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदलता रहने वाला है। ऐसे में खासकर अलर्ट वाले जिलों के लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
Bihar Rain Alert, 29 July 2026: बिहार में बुधवार को मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। पटना समेत आसपास के इलाकों में सुबह से ही काले बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने राज्य के 13 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रभावित इलाकों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। कुछ जिलों में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में धूप और उमस का असर भी देखने को मिल सकता है। शाम के समय कई जगहों पर बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन 13 जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग ने बुधवार को सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, बक्सर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में बारिश के साथ मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका है। तेज हवा की स्थिति में खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना बेहतर होगा। फिर सक्रिय हो सकता है मानसून मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक दो-तीन दिनों के अंतराल के बाद पटना और आसपास के क्षेत्रों में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। उत्तर तटीय ओडिशा और उससे सटे गंगीय पश्चिम बंगाल के ऊपर बना गहरा अवदाब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। मौसम प्रणाली का प्रभाव अगले एक-दो दिनों में बिहार के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार अगले 24 घंटे के दौरान पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में मेघगर्जन, वज्रपात और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मंगलवार को उमस के बाद बदला मौसम मंगलवार को पटना में दिनभर तेज धूप और उमस ने लोगों को परेशान किया। हालांकि शाम होते-होते मौसम बदला और कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ करीब 10 मिनट तक बारिश हुई। बारिश के बाद चली ठंडी हवा से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली। मंगलवार को पटना का अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री की गिरावट थी। वहीं न्यूनतम तापमान 29.2 डिग्री सेल्सियस रहा। आज पटना में भी बारिश के आसार बुधवार को पटना में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। बारिश होने से शहर में उमस से राहत मिल सकती है। हालांकि, गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी जाती है। मौसम विभाग की चेतावनी क्यों जरूरी? बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका होने पर खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभे और जलभराव वाले स्थान जोखिम भरे हो सकते हैं। मौसम खराब होने के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना और स्थानीय प्रशासन व मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखना जरूरी है।
बिहार में मॉनसून की रफ्तार अब भी धीमी बनी हुई है। जुलाई का महीना खत्म होने के करीब है, लेकिन राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश का इंतजार जारी है। इसी बीच मौसम विभाग ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 के लिए राज्य के 23 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक, तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। इन 23 जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार जिन जिलों में मौसम बिगड़ सकता है, उनमें शामिल हैं: पूर्वी चंपारण पश्चिमी चंपारण गोपालगंज सीवान सारण बक्सर भोजपुर अरवल कैमूर रोहतास औरंगाबाद सुपौल अररिया किशनगंज सहरसा मधेपुरा पूर्णिया कटिहार खगड़िया भागलपुर मुंगेर बांका जमुई इन जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है। क्यों बदल रहा है मौसम? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मॉनसूनी ट्रफ की स्थिति लगातार बदलने के कारण बिहार में मौसम अस्थिर बना हुआ है। नमी मौजूद होने के बावजूद व्यापक और लगातार बारिश नहीं हो पा रही है। दिन में तेज धूप के कारण उमस बढ़ जाती है, जबकि शाम या रात में अचानक बादल बनने से कुछ इलाकों में तेज हवा और हल्की बारिश देखने को मिल रही है। पटना का मौसम राजधानी पटना में आज भी मौसम सामान्य रहने की संभावना है। सुबह धूप खिली रही और दोपहर में उमस बढ़ सकती है। फिलहाल राजधानी में भारी बारिश के आसार नहीं हैं, हालांकि बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। अगले तीन दिनों का पूर्वानुमान मौसम विभाग के अनुसार 29, 30 और 31 जुलाई तक भी बिहार में ऐसा ही मिलाजुला मौसम बने रहने की संभावना है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, तेज हवा और गरज-चमक हो सकती है, लेकिन फिलहाल राज्य में कहीं भी व्यापक या अत्यधिक भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।
बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन पूरे राज्य में बारिश का वितरण समान नहीं है। जहां सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है, वहीं दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, आज कई इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा, गरज-चमक और भारी बारिश की संभावना है। लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने सीमांचल और उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना वाले जिले: कटिहार किशनगंज अररिया मधेपुरा ऑरेंज अलर्ट जारी: पूर्णिया सहरसा सुपौल मधेपुरा मौसम विभाग का कहना है कि 16 और 17 जुलाई को भी राज्य के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। पटना का मौसम राजधानी पटना में दिनभर बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से पटना के लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह धूप निकलने के बाद दोपहर तक बादल छाने की संभावना बनी हुई है। आसपास के जिलों में भी मौसम का यही रुख देखने को मिल सकता है। मानसून सक्रिय, लेकिन बारिश असमान मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिहार में मानसून सक्रिय है, लेकिन इसकी गति अपेक्षाकृत धीमी है। यही कारण है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का पैटर्न अलग दिखाई दे रहा है। उत्तर बिहार और सीमांचल में लगातार वर्षा से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। कई नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, दक्षिण बिहार में कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती प्रभावित हो रही है। पिछले 24 घंटे का मौसम बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। प्रमुख जिले: बेगूसराय बगहा समस्तीपुर पूर्वी चंपारण पटना के कुछ हिस्से वहीं, बुधवार को राज्य का अधिकतम तापमान 36 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। कैमूर सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लोगों के लिए सलाह भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेला गया मुकाबला अब सिर्फ रोमांचक जीत के लिए नहीं, बल्कि रेफरिंग और VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) से जुड़े विवादों के कारण भी सुर्खियों में है। अर्जेंटीना ने 0-2 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई, लेकिन मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर दोनों देशों के फैंस आमने-सामने आ गए हैं। VAR के फैसलों पर मचा विवाद विवाद की शुरुआत दूसरे हाफ में उस समय हुई जब मिस्र के मुस्तफा जिको का गोल VAR समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया। फ्रांसीसी रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सिए ने गोल बनने से पहले अर्जेंटीना के खिलाड़ी लिसांद्रो मार्टिनेज पर फाउल होने का हवाला देते हुए गोल अमान्य घोषित किया। इसके अलावा इंजरी टाइम में मिस्र को पेनल्टी नहीं मिलने और अर्जेंटीना के तीसरे गोल से पहले कथित फाउल को नजरअंदाज किए जाने पर भी सवाल उठे। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लगाए आरोप मैच के बाद मिस्र और अर्जेंटीना के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग वीडियो साझा कर एक-दूसरे के दावों को चुनौती दी। मिस्र के फैंस का आरोप है कि रेफरी और VAR ने उनकी टीम के साथ नाइंसाफी की, जबकि अर्जेंटीना के समर्थकों का कहना है कि सभी फैसले फुटबॉल के नियमों के अनुरूप लिए गए। फाउल और यलो कार्ड के आंकड़ों को लेकर भी बहस तेज हो गई है। मैच में मिस्र को चार यलो कार्ड मिले, जबकि अर्जेंटीना के खिलाफ 13 फाउल दर्ज होने के बावजूद कोई यलो कार्ड नहीं दिखाया गया। विशेषज्ञों की राय बंटी मैच के बाद सामने आए अलग-अलग कैमरा एंगल और रिप्ले देखने के बाद कई फुटबॉल विशेषज्ञों ने पेनल्टी नहीं देने के फैसले को तकनीकी रूप से सही बताया। उनका कहना है कि अर्जेंटीना के खिलाड़ी जूलियन अल्वारेज पहले गेंद तक पहुंचे थे। हालांकि, कई पूर्व खिलाड़ियों और विश्लेषकों ने माना कि कुछ फैसलों ने विवाद को जन्म दिया और इससे रेफरिंग पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में यह मुकाबला फीफा विश्व कप 2026 के सबसे चर्चित और विवादित मैचों में शामिल हो गया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में इस बार मानसून की शुरुआत समय पर होने के बावजूद बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई है। 11 जून को राज्य में मानसून के प्रवेश के बाद से 6 जुलाई तक केवल 102.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 230.1 मिमी होनी चाहिए थी। यानी अब तक राज्य में 56 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं, जुलाई के पहले छह दिनों में सिर्फ 15 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य 66.8 मिमी के मुकाबले 77 प्रतिशत कम है। हालांकि, मौसम विभाग ने 12 जुलाई तक कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। क्यों कमजोर पड़ा मानसून? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार मानसून की सक्रियता लंबे समय तक कमजोर रही। बंगाल की खाड़ी से पर्याप्त नमी नहीं मिलने और मानसूनी ट्रफ की अनुकूल स्थिति नहीं बनने से राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश नहीं हो सकी। इसके अलावा, जून के दौरान बंगाल की खाड़ी में मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित नहीं हुआ, जिससे वर्षा की गतिविधियां सीमित रहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो जैसी परिस्थितियों के कारण भी मानसून प्रभावित हुआ और राज्य में व्यापक बारिश के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में 'पॉकेट रेन' देखने को मिली। खेती और जल संसाधनों पर असर बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर कृषि पर पड़ रहा है। धान की रोपनी अब तक लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे है और किसान सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भर होने लगे हैं। यदि जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश होती है तो धान उत्पादन प्रभावित हो सकता है और भूजल स्तर पर भी दबाव बढ़ेगा। मौसम विभाग का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है तो बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। फिलहाल राज्य के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
पटना: बिहार में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आज से राज्य के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो सकता है। जहां सीमांचल और उत्तर बिहार के कुछ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, वहीं दक्षिण बिहार के कई जिले अभी भी गर्मी और हीट वेव जैसी परिस्थितियों का सामना करेंगे। मौसम विभाग ने अलग-अलग जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। इन 6 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार सीमांचल और उत्तर-पूर्वी बिहार के छह जिलों में भारी बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना है। भारी बारिश की चेतावनी वाले जिले: Madhubani Supaul Araria Kishanganj Purnia Katihar इन जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। साथ ही बिजली गिरने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की भी संभावना जताई गई है। 14 जिलों में हीट वेव जैसी स्थिति दूसरी ओर दक्षिण और मध्य बिहार के कई जिलों में अभी भी उमस भरी गर्मी और हीट वेव जैसी स्थिति बनी रह सकती है। मौसम विभाग ने जिन जिलों के लिए चेतावनी जारी की है, उनमें शामिल हैं: Buxar Bhojpur Patna Begusarai Arwal Jehanabad Nalanda Sheikhpura Lakhisarai Nawada Gaya Aurangabad Kaimur Rohtas हालांकि इन इलाकों में भी बादल छाए रहने, गरज के साथ छींटे पड़ने और बिजली चमकने की संभावना बनी हुई है। बिहार में क्यों दिख रहा है दो तरह का मौसम? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार राज्य में फिलहाल दो अलग-अलग मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाएं पहुंच रही हैं, जिससे बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। वहीं मध्य और दक्षिण बिहार में अभी भी गर्म और शुष्क हवाओं का प्रभाव बना हुआ है, जिसके कारण लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर बिहार से पूर्वी बिहार तक ट्रफ रेखा सक्रिय है। इसके प्रभाव से अगले कुछ दिनों में दक्षिण बिहार में भी मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। लोगों के लिए जरूरी सलाह मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें। बिजली चमकने पर पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। तेज गर्मी वाले जिलों में पर्याप्त पानी पीते रहें। किसानों को मौसम अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मानसून बिहार के और अधिक हिस्सों में सक्रिय हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट और गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।