साउथ सुपरस्टार थलापति विजय 22 जून 2026 को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। सक्रिय फिल्मी करियर से संन्यास की घोषणा के बाद यह उनका पहला जन्मदिन है, जिसे लेकर फैंस के बीच खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इस खास मौके पर निर्देशक एटली ने सोशल मीडिया पर विजय के लिए एक भावुक संदेश साझा किया। एटली ने खास तस्वीर के साथ दी जन्मदिन की शुभकामनाएं निर्देशक एटली ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर थलापति विजय के साथ एक पुरानी और खास तस्वीर साझा की। तस्वीर में दोनों ब्लैक आउटफिट में नजर आ रहे हैं और एटली सुपरस्टार को गले लगाते दिखाई दे रहे हैं। फोटो के साथ एटली ने बेहद संक्षिप्त लेकिन दिल छू लेने वाला संदेश लिखा, "Happy Birthday Anna." एटली की इस पोस्ट पर फैंस ने भी जमकर प्यार बरसाया और अपने पसंदीदा स्टार को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। विजय और एटली की सुपरहिट जोड़ी थलापति विजय और एटली ने अब तक तीन सफल फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी जोड़ी को तमिल सिनेमा की सबसे सफल निर्देशक-अभिनेता जोड़ियों में गिना जाता है। 'थेरी' से हुई थी शुरुआत साल 2016 में रिलीज हुई 'थेरी' दोनों की पहली फिल्म थी। इस एक्शन ड्रामा में विजय के साथ सामंथा रुथ प्रभु और एमी जैक्सन नजर आई थीं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी। 'मर्सल' ने बनाई नई पहचान इसके बाद दोनों ने 'मर्सल' में साथ काम किया। फिल्म में विजय ने एक डॉक्टर और जादूगर की दोहरी जिंदगी को पर्दे पर शानदार अंदाज में पेश किया। फिल्म में एस.जे. सूर्या, काजल अग्रवाल, सामंथा और नित्या मेनन भी अहम भूमिकाओं में थीं। 'बिगिल' ने भी जीता दिल विजय और एटली की तीसरी फिल्म 'बिगिल' थी, जो एक स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा थी और दर्शकों को काफी पसंद आई। 'जना नायकन' होगी विजय की आखिरी फिल्म थलापति विजय जल्द ही अपनी अंतिम फिल्म 'जना नायकन' में दिखाई देंगे। एच. विनोथ के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में बॉबी देओल, पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज पहले पोंगल 2026 के लिए तय थी, लेकिन बाद में इसे आगे बढ़ा दिया गया। एटली की अगली फिल्म में दिखेंगे अल्लू अर्जुन वहीं, निर्देशक एटली इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'राका' पर काम कर रहे हैं। इस बड़े बजट की फिल्म में अल्लू अर्जुन मुख्य भूमिका में हैं, जबकि दीपिका पादुकोण भी अहम किरदार निभा रही हैं। फिल्म का फर्स्ट लुक पहले ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा चुका है।
रांची। झारखंड से राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता बैद्यनाथ राम सोमवार को अपने परिवार के साथ रांची जिले के तमाड़ स्थित प्रसिद्ध मां सोलहभुजी दिउड़ी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने झारखंड की सुख-समृद्धि, शांति, विकास और जनकल्याण की कामना की। 'जनता की सेवा करने की शक्ति मिले' पूजा के बाद मीडिया से बातचीत में बैद्यनाथ राम ने कहा कि मां दिउड़ी उनकी गहरी आस्था का केंद्र हैं और वह समय-समय पर यहां दर्शन के लिए आते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद सबसे पहले मां के दरबार में पहुंचकर उन्होंने आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना है कि उन्हें जनता की सेवा करने की शक्ति मिले और वे अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन कर सकें। बैद्यनाथ राम ने कहा कि पार्टी नेतृत्व और जनता ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्यसभा में झारखंड के विकास, जनहित और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को पूरी मजबूती के साथ उठाएंगे। विधायक विकास कुमार मुंडा भी रहे मौजूद इस अवसर पर तमाड़ विधायक विकास कुमार मुंडा भी बैद्यनाथ राम के साथ मंदिर पहुंचे। उनके साथ झामुमो के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे। सभी ने नवनिर्वाचित सांसद को जीत की बधाई दी और मां सोलहभुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम राज्यसभा सांसद के आगमन को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बुंडू डीएसपी ओम प्रकाश के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा, जबकि तमाड़ थाना प्रभारी दुलाल कुमार महतो ने सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की। प्रशासन की देखरेख में दर्शन और पूजा-अर्चना शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
रामगढ़। एक दोस्त का जन्मदिन मनाकर घर लौट रहे दो युवकों की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। यह हृदयविदारक हादसा रामगढ़ जिले के बासल थाना क्षेत्र स्थित सियारी टोला के पास हुआ। दुर्घटना के बाद दोनों युवक पूरी रात घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़े रहे, लेकिन अंधेरा और सुनसान इलाका होने के कारण किसी को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। बुधवार सुबह स्थानीय लोगों की नजर पड़ने पर घटना का खुलासा हुआ। जन्मदिन मनाकर लौट रहे थे दोनों दोस्त जानकारी के अनुसार, सौंदा डी निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ संदीप कुमार का मंगलवार को जन्मदिन था। जन्मदिन के अवसर पर वह अपने मित्र राहुल कुमार के साथ पतरातू डैम के समीप एक होटल में जश्न मनाने गया था। देर रात दोनों बाइक से अपने घर लौट रहे थे। अनियंत्रित बाइक दीवार से टकराई बताया जा रहा है कि सियारी टोला के पास पहुंचते ही उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। तेज रफ्तार के कारण बाइक डिवाइडर पार कर सड़क से काफी दूर जा पहुंची और एक अर्धनिर्मित मकान की दीवार से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। पूरी रात सड़क किनारे पड़े रहे घायल हादसे के बाद दोनों युवक सड़क से लगभग 100 फीट दूर जा गिरे। रात का समय और कम आवाजाही होने के कारण किसी को दुर्घटना की भनक नहीं लगी। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उधर, देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजन उनकी तलाश करते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। सुबह हुआ हादसे का खुलासा बुधवार सुबह जब ग्रामीण उस रास्ते से गुजरे तो उन्होंने दोनों युवकों को सड़क किनारे पड़ा देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की और परिजनों को सूचना दी। शवों की पहचान होते ही परिवार में कोहराम मच गया। इलाके में शोक की लहर घटना की खबर फैलते ही सौंदा डी और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल बन गया। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल रामगढ़ भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में बाइक के अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त होने की बात सामने आई है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।