प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक में देश की एनर्जी सिक्योरिटी, आर्थिक सुधारों और “विकसित भारत 2047” के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया। चार घंटे से ज्यादा चली इस हाई लेवल बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। माना जा रहा है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले यह बैठक सरकार की योजनाओं और नीतियों की समीक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी। “विकसित भारत 2047” सिर्फ नारा नहीं : पीएम मोदी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अब सरकार का पूरा फोकस योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने और सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा फायदा जनता तक समय पर पहुंचना चाहिए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी खत्म की जानी चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट तनाव पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात पर निर्भर है और पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का संकट सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव करना होगा। उन्होंने बायोगैस, ग्रीन एनर्जी और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर तेजी से काम करने पर जोर दिया। अल्टरनेटिव फ्यूल पर बढ़ेगा फोकस प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए देश को बायोगैस, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी और वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रहेगा। लालफीताशाही खत्म करने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक सुधारों पर भी खास जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी फाइलें “एक टेबल से दूसरी टेबल” तक बेवजह नहीं घूमनी चाहिए। उन्होंने प्रक्रियाओं को आसान बनाने और फैसलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने योजनाओं की निगरानी और फीडबैक सिस्टम को मजबूत करने पर भी बल दिया, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। नौ अहम क्षेत्रों की समीक्षा बैठक में अर्थव्यवस्था, कृषि, श्रम, ऊर्जा, विदेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार और कॉरपोरेट मामलों समेत नौ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए गए। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और उनके जमीनी असर की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंचाई जाए। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कैबिनेट फेरबदल और बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि बैठक का मुख्य फोकस शासन, विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
नौ वर्षों की उपलब्धियों पर बोले मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ‘UP को बदलने के 9वें वर्ष’ कार्यक्रम में राज्य के विकास मॉडल और सुशासन की उपलब्धियों को विस्तार से सामने रखा। लखनऊ में आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब तेजी से विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई है। सात शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल बनी नई ताकत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश की बढ़ती क्षमता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, रोजगार और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। किसानों को निशुल्क पानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगभग 50 लाख हेक्टेयर भूमि तक किसानों को निशुल्क सिंचाई जल उपलब्ध करा रही है। नहरों के विस्तार और ट्यूबवेल नेटवर्क को मजबूत करने से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना है। कानून-व्यवस्था में सुधार का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले नौ वर्षों में किए गए प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
Suvendu Adhikari के मुख्यमंत्री बनते ही West Bengal में कानून-व्यवस्था और सीमा सुरक्षा को लेकर बड़े फैसलों का दौर शुरू हो गया है। अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में शुभेंदु सरकार ने गौ-तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया। सरकार ने Border Security Force (BSF) को बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी (Fencing) के लिए जमीन हस्तांतरण की मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि जब तक सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी, तब तक अंतरराष्ट्रीय गौ-तस्करी और घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल रहेगा। गौ-तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कहा कि बंगाल में अब तस्करों और अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान सीमा पर बाड़बंदी का काम लंबे समय तक अटका रहा, जिसकी वजह से तस्करी का नेटवर्क मजबूत होता गया। अब सरकार का दावा है कि BSF को जमीन मिलने के बाद सीमा पर तेजी से बाड़ लगाने का काम पूरा किया जाएगा, जिससे तस्करी के प्रमुख रास्ते बंद हो सकेंगे। ‘नार्को-टेरर’ और तस्करी के गठजोड़ पर नजर राज्य सरकार का कहना है कि गौ-तस्करी से आने वाला पैसा सिर्फ अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सुरक्षा से जुड़े खतरे भी पैदा हो रहे हैं। इसी को देखते हुए गृह विभाग को निर्देश दिया गया है कि तस्करी में शामिल बड़े नेटवर्क और कथित सरगनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। सरकार इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मान रही है। सीमावर्ती जिलों पर खास फोकस कैबिनेट बैठक में सीमावर्ती जिलों में तेजी से बदलते जनसंख्या पैटर्न को भी गंभीर विषय बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा मजबूत करना राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए जरूरी है। भूमि एवं राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि BSF को जमीन सौंपने की प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए ताकि बाड़बंदी के काम में और देरी न हो। केंद्र के साथ संयुक्त अभियान की तैयारी राज्य सरकार अब केंद्र सरकार के साथ मिलकर संयुक्त अभियान (Joint Operation) चलाने की तैयारी में भी है। इसके तहत सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और अवैध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जाएगा। इसके अलावा जनगणना और केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को तेजी से लागू करने का फैसला भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक संदेश भी साफ भाजपा सरकार के इस फैसले को राजनीतिक तौर पर भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने लगातार सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और गौ-तस्करी को बड़ा मुद्दा बनाया था। अब सत्ता में आने के बाद सरकार ने पहली कैबिनेट में ही इस दिशा में बड़ा फैसला लेकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि बंगाल में कानून-व्यवस्था और सीमा प्रबंधन को लेकर नई नीति अपनाई जाएगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने रविवार को अपने दूसरे कार्यकाल का मंत्रिमंडल विस्तार किया। राजधानी लखनऊ के लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। किन नेताओं को मिली जगह? मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 6 नए नेताओं को शामिल किया गया। इनमें: Manoj Pandey – कैबिनेट मंत्री Bhupendra Singh Chaudhary – कैबिनेट मंत्री Hansraj Vishwakarma – राज्य मंत्री Kailash Rajput – राज्य मंत्री Krishna Paswan – राज्य मंत्री Surendra Diler – राज्य मंत्री को शपथ दिलाई गई। दो राज्य मंत्रियों को मिला स्वतंत्र प्रभार इसके अलावा: Ajit Singh Pal Somendra Tomar को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश 2027 विधानसभा चुनाव से करीब आठ महीने पहले हुए इस विस्तार को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। नए मंत्रियों में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सरकार में पहले 54 मंत्री थे, जो अब बढ़कर 60 हो गए हैं। कौन हैं भूपेंद्र चौधरी? पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Singh Chaudhary पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में गिने जाते हैं। वे पहले भी पंचायती राज मंत्री और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और लंबे समय से Rashtriya Swayamsevak Sangh तथा भाजपा से जुड़े रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार पर नेताओं की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मंत्री Daya Shankar Singh ने कहा कि मंत्रिपरिषद में खाली पदों को भरते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary ने इसे खुशी की बात बताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित फैसलों पर अब अमल हो रहा है। वहीं मंत्री Suresh Kumar Khanna ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और डबल इंजन सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रही है। मंत्री Sanjay Nishad ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि भाजपा सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है।
केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) को लेकर राजनीतिक बहस के बीच अब देश की पूर्व राष्ट्रपति Pratibha Patil ने इसका समर्थन किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर इस विधेयक को “ऐतिहासिक” और “परिवर्तनकारी कदम” बताया है। उनके इस पत्र को राजनीतिक तौर पर सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। “लोकतंत्र को मजबूत करेगा यह कदम” Pratibha Patil ने अपने पत्र में कहा कि यह संवैधानिक संशोधन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी और संतुलित बनाएगा। उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेगा, जिससे निर्णय प्रक्रिया में विविधता आएगी। महिलाओं की भागीदारी से बदलेगा नीति निर्माण पूर्व राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के अलग-अलग अनुभव और दृष्टिकोण नीति निर्माण को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाएंगे। उनके अनुसार: महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने से सामाजिक मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जाएगा नीतियां अधिक संतुलित और समावेशी बनेंगी लोकतंत्र में वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा ग्रामीण और वंचित महिलाओं को मिलेगा लाभ Pratibha Patil ने विश्वास जताया कि यह अधिनियम खासकर ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगा। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा और वे समाज में अधिक सक्रिय भागीदारी कर सकेंगी। “लंबे समय का सपना होगा साकार” अपने पत्र के अंत में उन्होंने इस पहल को “लंबे समय से संजोए गए सपने को साकार करने” की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने इस विधेयक को ऐतिहासिक असमानताओं को कम करने और एक अधिक समान व समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में निर्णायक बताया। राजनीतिक मायने पूर्व राष्ट्रपति का यह समर्थन ऐसे समय में आया है, जब महिला आरक्षण बिल को लेकर देश में राजनीतिक मतभेद देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में Pratibha Patil का यह पत्र सरकार के पक्ष में एक मजबूत नैतिक और राजनीतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बढ़ती बहस के बीच यह समर्थन बताता है कि यह सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि भारत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
गांधीनगर/अहमदाबाद, 31 मार्च 2026: Narendra Modi आज गुजरात दौरे पर हैं, जहां वे राज्य को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सड़क, रेलवे, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में ये प्रोजेक्ट्स राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने वाले माने जा रहे हैं। सम्राट संप्रति म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री Samrat Samprati Museum का उद्घाटन करेंगे, जो जैन धर्म की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। यह म्यूजियम सम्राट संप्रति के नाम पर है, जो अहिंसा और धर्म प्रचार के लिए प्रसिद्ध रहे। सड़क और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स Ahmedabad-Dholera Expressway का उद्घाटन (₹5,100 करोड़ से अधिक) इदर-बडोली बाईपास और NH-754K अपग्रेड का शिलान्यास गांधीनगर-कोबा-एयरपोर्ट रोड पर फ्लाईओवर प्रोजेक्ट इन प्रोजेक्ट्स से ट्रैफिक जाम में कमी और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। रेलवे कनेक्टिविटी को बढ़ावा रेल सेक्टर में भी कई अहम प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित किए जाएंगे: कनालूस-जामनगर और राजकोट-कनालूस डबलिंग गांधीधाम-आदिपुर सेक्शन अपग्रेड हिम्मतनगर-खेड़ब्रह्मा गेज कन्वर्जन इसके साथ ही नई ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिससे यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी। ऊर्जा और शहरी विकास में बड़ा निवेश 4.5 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता वाला पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट (₹3,650 करोड़) 5,300 करोड़ रुपये के 44 अर्बन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स ये परियोजनाएं राज्य में ऊर्जा क्षमता और शहरी ढांचे को मजबूत करेंगी। स्वास्थ्य और पर्यटन सेक्टर को बढ़ावा अहमदाबाद और गांधीनगर के अस्पतालों में 858 बेड की नई सुविधाएं Rani ki Vav में लाइट एंड साउंड शो Sharmishtha Lake में वॉटर स्क्रीन प्रोजेक्शन इन प्रोजेक्ट्स का मकसद स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाना है। क्या है इस दौरे का बड़ा संदेश? प्रधानमंत्री का यह दौरा साफ संकेत देता है कि केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विरासत-तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास पर जोर दे रही है।
असम: प्रधानमंत्री Narendra Modi के असम दौरे का शनिवार को दूसरा दिन है। PM सुबह Silchar पहुंचे, जहां उन्होंने करीब ₹23,550 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। अपने संबोधन में उन्होंने असम के विकास, नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। PM मोदी ने कहा कि सिलचर को बराक घाटी का गेटवे कहा जाता है, जहां इतिहास, भाषा, संस्कृति और उद्यम ने मिलकर एक अनोखी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यहां बांग्ला, असमिया और विभिन्न जनजातीय परंपराओं की आवाज सुनाई देती है और यही विविधता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है। कांग्रेस पर तीखा हमला प्रधानमंत्री मोदी ने आरोप लगाया कि Indian National Congress ने लंबे समय तक असम और नॉर्थ ईस्ट को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीतियों ने यहां के युवाओं को गुमराह किया और उन्हें हिंसा व आतंकवाद के रास्ते पर धकेल दिया। PM ने कहा कि भाजपा की सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों, स्कॉलरशिप और कौशल विकास के नए अवसर खोले हैं। उनके मुताबिक, आज असम विकास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है और भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी अहम भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। “कांग्रेस झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री चला रही” प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सोशल मीडिया के जरिए गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने “झूठी रील बनाने की इंडस्ट्री” खोल रखी है। उन्होंने युवाओं से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि कांग्रेस के पास देश के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं है। नॉर्थ ईस्ट को मिला नया कनेक्शन मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों ने नॉर्थ ईस्ट को दिल्ली से और दिल से दूर रखा था, लेकिन भाजपा की “डबल इंजन सरकार” ने इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से मजबूती से जोड़ा है। उनके मुताबिक आज नॉर्थ ईस्ट दक्षिण एशिया को जोड़ने वाला सेतु बनता जा रहा है। किसानों और चाय बागान श्रमिकों का जिक्र प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के विकास में किसानों और चाय बागान श्रमिकों का बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत असम के किसानों को अब तक हजारों करोड़ रुपये की सहायता मिल चुकी है। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि चाय बागानों में काम करने वाले हजारों परिवारों को भूमि अधिकार देकर उन्हें सुरक्षा और सम्मान देने का ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। बराक वैली बनेगी विकास का नया केंद्र मोदी ने कहा कि आने वाले समय में बराक वैली केवल कृषि उत्पादन के लिए ही नहीं बल्कि कृषि शिक्षा और रिसर्च के लिए भी जानी जाएगी। यहां नए एग्रीकल्चर कॉलेज के निर्माण की शुरुआत की गई है, जिससे युवाओं को कृषि स्टार्टअप और आधुनिक खेती के क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में रेलवे कनेक्टिविटी और इलेक्ट्रिफिकेशन पर तेजी से काम हो रहा है और इसका बड़ा फायदा बराक घाटी को मिलेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह क्षेत्र टूरिज्म, उद्योग और कृषि विकास का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने आज Haridwar, Uttarakhand में 1,129 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर “जन-जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल” शीर्षक से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य सरकार के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक राज्य स्तरीय प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें सरकार की प्रमुख उपलब्धियों और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में उत्तराखंड सरकार द्वारा पिछले चार वर्षों में किए गए विकास कार्यों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की झलक दिखाई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी भाग लिया और राज्य के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।