BJP Protest

BJP leaders protesting after the murder of Suvendu Adhikari’s aide Chandranath Rath in West Bengal
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड पर BJP का बड़ा हमला, ममता बनर्जी और अभिषेक की गिरफ्तारी की मांग

Suvendu Adhikari PA Murder: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. भाजपा नेताओं ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने लगाया बड़ी साजिश का आरोप भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हिंसा फैलाने की पहले से तैयारी की गयी थी. मिश्रा ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग नवीन मिश्रा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति चरम पर पहुंच गयी है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य में हिंसा और बढ़ सकती है. भाजपा नेताओं का कहना है कि बंगाल में लोकतांत्रिक माहौल खत्म होता जा रहा है और विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. राजीव कुमार की भूमिका पर भी उठाये सवाल भाजपा नेता ने पूर्व पुलिस अधिकारी और वर्तमान राज्यसभा सांसद राजीव कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाये. उन्होंने डीजीपी और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) से मांग की कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाये. मिश्रा ने दावा किया कि जिस इलाके में यह हत्या हुई, वह बांग्लादेश सीमा के करीब है और इस घटना में कई बड़े लोगों की संलिप्तता हो सकती है. उन्होंने पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और सबूतों से छेड़छाड़ रोकने की मांग की. चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद इलाके में तनाव चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद मध्यमग्राम और उत्तर 24 परगना जिले में तनाव का माहौल है. इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया. भाजपा ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए एक अधिकार प्राप्त समिति गठित की जाये, ताकि निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी हो सके और दोषियों की पहचान हो सके. TMC की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है. हालांकि, पार्टी पहले भी चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को खारिज करती रही है और कई घटनाओं को स्थानीय विवाद या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताया है. फिलहाल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.  

surbhi मई 7, 2026 0
BJP protest
बीजेपी ने भोजपुरी-मगही हटाने पर ने सरकार को घेरा

रांची। झारखंड में JTET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर भाषा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य सरकार के फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है और बीजेपी ने इसे लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। दरअसल, JTET के लिए बनाई गई नई नियमावली में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद से ही अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों में नाराजगी बढ़ गई है। बीजेपी ने बताया अन्याय बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह फैसला लाखों युवाओं के साथ अन्याय है। उनका आरोप है कि जिन इलाकों में बड़ी संख्या में लोग भोजपुरी और मगही बोलते हैं, वहां इन भाषाओं को बाहर कर देना गलत है। पार्टी नेताओं ने इसे “भेदभावपूर्ण” निर्णय बताते हुए कहा कि इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा और उन्हें परीक्षा में नुकसान झेलना पड़ेगा। कई जिलों के छात्र नाराज पलामू, गढ़वा, लातेहार और संथाल परगना जैसे इलाकों के कई अभ्यर्थियों ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि अपनी मातृभाषा में परीक्षा देने का मौका छिन जाने से उनकी तैयारी और प्रदर्शन दोनों पर असर पड़ेगा। बीजेपी ने यह भी सवाल उठाया है कि जब सीमावर्ती इलाकों में ओड़िया और बंगाली जैसी भाषाओं को शामिल किया गया है, तो फिर भोजपुरी और मगही को क्यों बाहर रखा गया। इस मुद्दे पर न सिर्फ विपक्ष, बल्कि कुछ अन्य नेताओं ने भी चिंता जताई है। माना जा रहा है कि अगर सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह विवाद और बढ़ सकता है।

Anjali Kumari मई 2, 2026 0
Protesters arguing inside Lenskart store in Mumbai over religious symbols policy controversy
लेंसकार्ट स्टोर में हंगामा: बीजेपी नेता के नेतृत्व में विरोध, कंपनी ने बदले नियम

मुंबई: Mumbai में Lenskart के एक शोरूम में उस समय हंगामा हो गया, जब बीजेपी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्टोर में पहुंचकर कर्मचारियों के साथ बहस की और धार्मिक प्रतीकों को लेकर विरोध जताया। क्या हुआ शोरूम में? बताया जा रहा है कि Nazia Elahi Khan के नेतृत्व में कुछ लोग स्टोर में पहुंचे और: कर्मचारियों को तिलक लगाया कलाई पर कलावा बांधा “जय श्री राम” के नारे लगाए इस दौरान उन्होंने स्टोर मैनेजमेंट से कथित तौर पर हिंदू प्रतीकों पर रोक को लेकर सवाल किए। विवाद की जड़ क्या है? यह विवाद एक कथित ग्रूमिंग पॉलिसी दस्तावेज के वायरल होने के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि: बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक है जबकि हिजाब की अनुमति दी गई है इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ विरोध शुरू हो गया। कंपनी ने दी सफाई, बदले नियम विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal की कंपनी Lenskart ने सफाई दी कि: वायरल दस्तावेज पुराना है मौजूदा नीति अलग है इसके बाद कंपनी ने नया ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी किया, जिसमें अब कर्मचारियों को: बिंदी, तिलक, सिंदूर कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति दे दी गई है। कंपनी ने मांगी माफी कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे इसका खेद है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करती है। विवाद अभी भी जारी नए नियम लागू होने के बावजूद यह मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अलग-अलग संगठनों की ओर से कंपनी के खिलाफ विरोध जारी है।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Parliament protest after Women Reservation Bill fails in Lok Sabha
महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम: BJP-NDA का देशव्यापी प्रदर्शन ऐलान, विपक्ष पर ‘महिला विरोधी’ होने का आरोप

  लोकसभा में बिल गिरने के बाद भाजपा का पलटवार, कल से देशभर में आंदोलन शुरू महिला आरक्षण बिल संसद में पास न होने के बाद अब देश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों ने विपक्ष के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोलते हुए देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया और गिर गया। हर जिले में प्रदर्शन की तैयारी पार्टी सूत्रों के मुताबिक, BJP ने अपने सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे देश के हर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश पहुंचाना है कि विपक्ष ने महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के ऐतिहासिक मौके को रोक दिया। महिला मोर्चा संभालेगा मोर्चा इस आंदोलन में BJP महिला मोर्चा की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। पार्टी की महिला नेता और कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर अभियान चलाकर महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाएंगी। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक, हर माध्यम से इस मुद्दे को उठाने की रणनीति बनाई गई है। चुनावी राज्यों में बनेगा बड़ा मुद्दा भाजपा इस मुद्दे को आगामी चुनावों में भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। पार्टी इसे महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। वोटिंग में क्या हुआ था? लोकसभा में हुए मतदान में बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 230 सांसद इसके खिलाफ रहे। संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण बिल पारित नहीं हुआ। सरकार का दावा बनाम विपक्ष का रुख BJP और NDA का कहना है कि यह बिल महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। वहीं, विपक्ष इसे विवादित मुद्दों से जोड़कर पेश करने का आरोप लगा रहा है। अब यह मुद्दा संसद से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और गरमा सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
BJP leaders marching to Election Commission office alleging voter intimidation in West Bengal elections 2026
बंगाल चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप तेज: बीजेपी का चुनाव आयोग तक मार्च, TMC पर धमकी के आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने Election Commission of India से मुलाकात कर राज्य में चुनावी माहौल को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मतदाताओं को डराकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। क्या है पूरा मामला? बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपी याचिका में दावा किया कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं को घर-घर जाकर धमकाया जा रहा है। इस मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि: लोगों को बीजेपी को वोट न देने के लिए दबाव डाला जा रहा है चुनाव प्रक्रिया को “हाईजैक” करने की कोशिश हो रही है मतदाताओं को डराकर और दबाकर प्रभावित किया जा रहा है ममता सरकार पर सीधे आरोप रिजिजू ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए कहा कि: पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को धमका रहे हैं पिछले चुनावों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए राज्य का पुलिस और प्रशासन TMC के प्रभाव में काम कर रहा है चुनाव आयोग का जवाब चुनाव आयोग ने बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि: राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे कब होंगे चुनाव? पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर: मतदान: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक संवेदनशील बनता दिख रहा है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
Jharkhand Vidhan Sabha building in Ranchi during political protest over Nal-Jal scheme issue.
झारखंड विधानसभा के बाहर भाजपा का हंगामा: नल-जल योजना में भ्रष्टाचार का आरोप, हेमंत सरकार के खिलाफ नारेबाजी

  सदन शुरू होने से पहले गरमाया सियासी माहौल झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। मुख्य विपक्षी दल Bharatiya Janata Party के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया और राज्य की Hemant Soren सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक हाथों में भगवा रंग की तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उनका आरोप था कि राज्य में जल प्रबंधन की स्थिति बेहद खराब है और सरकार लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने में विफल रही है।   नल-जल योजना पर लगाए गंभीर आरोप भाजपा विधायकों ने सरकार की नल-जल योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य में “घर-घर नल” लगाने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। विधायकों का दावा है कि योजना कागजों पर तो बड़ी दिखती है, लेकिन हकीकत में कई जगहों पर नल लगे होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच रहा है।   पोस्टरों के जरिए सरकार पर साधा निशाना प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने पोस्टरों और नारों के माध्यम से भी सरकार पर निशाना साधा। पोस्टरों पर लिखे नारों में शामिल थे- “हेमंत सरकार पानी दो, पानी दो!” “नल-जल योजना हुई फेल, जिम्मेदार को भेजो जेल।” “नल में जल नहीं, जल में है घोटाला। पानी के नाम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला।” इन नारों के जरिए विपक्ष ने सरकार पर पानी की समस्या को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।   सदन के भीतर भी मुद्दा उठाने की तैयारी भाजपा विधायकों ने कहा कि नल-जल योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। विपक्षी दल ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर जोर-शोर से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा।   पानी की समस्या को लेकर बढ़ा सियासी दबाव राज्य में कई इलाकों में पेयजल की समस्या को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में नल-जल योजना को लेकर उठे सवालों ने झारखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और विधानसभा के अंदर इस मुद्दे पर क्या बहस होती है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
BJP MLAs protest in Jharkhand Assembly over DJ ban during Ram Navami processions.
रामनवमी में DJ प्रतिबंध पर झारखंड विधानसभा में हंगामा, सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

  झारखंड में रामनवमी जुलूस के दौरान चलंत डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा के भीतर और बाहर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने इस फैसले के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया, जबकि सरकार ने साफ कहा कि यह कदम अदालत के आदेशों के पालन के तहत उठाया गया है।   विधानसभा परिसर में भाजपा का प्रदर्शन रामनवमी जुलूस में डीजे पर रोक को लेकर भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में विरोध जताया। उनका आरोप है कि सरकार हिंदू त्योहारों के समय अनावश्यक पाबंदियां लगाकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है। भाजपा विधायक रोशनलाल ने कहा कि रामनवमी करोड़ों हिंदुओं की आस्था का पर्व है और जुलूस में डीजे पर प्रतिबंध लगाना अनुचित है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि हर बार हिंदू त्योहारों के समय ही इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जो तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाता है।   सदन के अंदर भी गूंजे नारे विपक्ष का विरोध केवल विधानसभा परिसर तक सीमित नहीं रहा। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराने लगे। इस दौरान भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर रामनवमी के जुलूस में डीजे नहीं बजाने दिया जाएगा तो क्या हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारीबाग में प्रशासन लोगों को जुलूस के दौरान डीजे बजाने से रोकने के लिए दबाव बना रहा है।   हजारीबाग की रामनवमी का दिया हवाला भाजपा विधायकों ने कहा कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में अपनी भव्यता और परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां कई दिनों तक धार्मिक जुलूस, अखाड़ा प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। ऐसे में डीजे पर प्रतिबंध लगाने से इस परंपरा पर असर पड़ेगा।   सरकार ने कहा-सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि प्रशासन केवल न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश के अनुसार रात 10 बजे के बाद तेज ध्वनि वाले डीजे और लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं है। इसलिए प्रशासन इसी नियम का पालन सुनिश्चित करा रहा है।   ‘यह किसी धर्म विशेष का मुद्दा नहीं’ संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी सदन में कहा कि यह मामला किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है। उन्होंने बताया कि अदालत के निर्देश के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक तेज ध्वनि वाले साउंड सिस्टम पर प्रतिबंध लागू है और सरकार केवल उसी का पालन कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग देकर समाज का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।   सड़क से सदन तक बढ़ा विवाद रामनवमी जैसे धार्मिक और आस्था से जुड़े पर्व के दौरान डीजे प्रतिबंध का मामला अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। सड़क से लेकर विधानसभा तक उठ रही आवाजों के बीच यह मुद्दा फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है और आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज होने की संभावना है।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0