CID

JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID की छापेमारी
JPSC घोटाले की जांच तेज: रांची समेत 5 जिलों में 18 जगह CID रेड, फोरेंसिक जांच शुरू

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने सोमवार को राज्य के पांच जिलों—रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद—में एक साथ 18 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पहले से दर्ज मामले की जांच के सिलसिले में स्थानीय पुलिस की सहायता से की गई।   अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त     सीआईडी की छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, अभ्यर्थियों की OMR शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट और अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं। जांच एजेंसी इन सभी सामग्रियों की तकनीकी और फोरेंसिक जांच कराएगी।     कई भर्ती परीक्षाओं में सफलता की जांच     जांच में सामने आया है कि मामले का आरोपी अभय तिवारी कई सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सफल हुआ था। इनमें वर्ष 2018 की पुलिस अवर निरीक्षक परीक्षा, भारतीय नौसेना भर्ती परीक्षा (2013), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) भर्ती परीक्षा (2014), IRB कांस्टेबल भर्ती, CRPF हेड कांस्टेबल परीक्षा, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) परीक्षा, JSSC PGT शिक्षक भर्ती, JSSC CGL परीक्षा तथा JPSC की ACF, FRO, FSO और 11वीं से 13वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा शामिल हैं।     भर्ती एजेंसियों से मांगा गया रिकॉर्ड     सीआईडी ने संबंधित भर्ती एजेंसियों से आरोपी के आवेदन पत्र, चयन प्रक्रिया, मूल्यांकन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। इन रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच की जाएगी कि कहीं विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में किसी संगठित नेटवर्क के जरिए गड़बड़ी तो नहीं की गई।     फोरेंसिक जांच से हो सकते हैं बड़े खुलासे     जांच एजेंसी का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच के बाद उन्हें भर्ती एजेंसियों से मिलने वाले रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। इससे परीक्षा अनियमितता मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     बोकारो में खाली मकान पर छापा     बोकारो में सीआईडी ने स्थानीय पुलिस के साथ सेक्टर-3 स्थित आवास संख्या-315 पर छापेमारी की। यह कार्रवाई सनत प्रकाश के आवास पर की गई, लेकिन जांच के दौरान कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। बोकारो एसपी नाथू सिंह मीना ने बताया कि संबंधित मकान करीब एक वर्ष से खाली पड़ा था।     हजारीबाग में पांच घंटे पूछताछ     हजारीबाग के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पौता गांव में सीआईडी ने एक व्यक्ति प्रदीप कुमार यादव को हिरासत में लेकर करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। वहीं, उसके भाई लालो यादव की तलाश जारी है। इससे पहले इसी मामले में बड़कागांव से सुमन सौरभ को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीआईडी ने स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में कई अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी जांच और पूछताछ की।     जांच जारी     सीआईडी का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट और भर्ती एजेंसियों से प्राप्त रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि किसी संगठित परीक्षा रैकेट या अनियमितता के ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
बोकारो के तीन लापता लोगों के लिए CID का ह्यू एंड क्राई नोटिस
झारखंड के तीन लापता लोगों की तलाश तेज, CID ने जारी किया ह्यू एंड क्राई नोटिस

रांची। झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बोकारो जिले से लापता तीन लोगों की तलाश तेज करते हुए उनके संबंध में ह्यू एंड क्राई (Hue and Cry) नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के जरिए झारखंड समेत देशभर के सभी पुलिस थानों, आउटपोस्ट और बीट अधिकारियों को तीनों की जानकारी भेजी गई है, ताकि उनका जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। सीआईडी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) मनोज कौशिक के निर्देश पर जारी नोटिस में सभी जोनल आईजी, रेंज डीआईजी और जिला पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही किसी भी विश्वसनीय सूचना मिलने पर तत्काल सीआईडी मुख्यालय को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।   जिन तीन लोगों की तलाश जारी     मुत्री देवी (65 वर्ष) – गोमिया थाना क्षेत्र, बोकारो से लापता।   कंचन देवी (46 वर्ष) – गांधी नगर ओपी, बेरमो क्षेत्र से लापता। गिरिश पासवान (64 वर्ष) – गांधी नगर ओपी, बेरमो क्षेत्र से लापता। सीआईडी ने तीनों के हुलिये, कपड़ों और संबंधित मामलों का विवरण नोटिस में जारी किया है, ताकि पहचान में आसानी हो सके।   आम लोगों से सहयोग की अपील     सीआईडी ने नागरिकों से अपील की है कि यदि इन तीनों में से किसी के बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या झारखंड सीआईडी को सूचना दें। पुलिस का मानना है कि जनसहयोग से लापता लोगों का जल्द पता लगाया जा सकता है।     क्या होता है ह्यू एंड क्राई नोटिस?     ह्यू एंड क्राई नोटिस पुलिस द्वारा जारी किया जाने वाला विशेष अलर्ट होता है। इसके माध्यम से किसी लापता व्यक्ति, फरार आरोपी या संदिग्ध की जानकारी देशभर के पुलिस नेटवर्क में साझा की जाती है, ताकि विभिन्न राज्यों की पुलिस भी उसकी तलाश कर सके।   इससे पहले रांची से लापता हुए मासूम अंश और अंशिका की तलाश के लिए भी सीआईडी ने ह्यू एंड क्राई नोटिस जारी किया था, जिसके बाद दोनों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया था।

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
JPSC PT Exam
JPSC PT परीक्षा जांच तेज, सफल 2204 अभ्यर्थियों की OMR शीट की होगी जांच; CID ने मांगी कार्बन कॉपी

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही सीआईडी ने पीटी परीक्षा में सफल हुए सभी 2204 अभ्यर्थियों की OMR शीट का मिलान कराने का फैसला किया है। इसके लिए अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा गया है।   CID ने जारी की सार्वजनिक अपील   सीआईडी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अभ्यर्थियों के पास मौजूद OMR शीट की कार्बन कॉपी का मिलान JPSC कार्यालय से जब्त मूल OMR शीट से किया जाएगा। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दोनों OMR शीट में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या विसंगति तो नहीं हुई है।   30 जुलाई से 5 अगस्त तक भेजनी होगी OMR कॉपी   सीआईडी ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 (विज्ञापन संख्या-01/2026) के सभी सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी भेजने का अनुरोध किया है। अभ्यर्थी OMR शीट की फोटो या PDF बनाकर व्हाट्सएप नंबर 9934309058 या complainjpsc-cid@jhpolice.gov.in पर भेज सकते हैं।   कार्बन कॉपी नहीं होने पर बताना होगा कारण   सीआईडी ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों के पास OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं है, उन्हें अपना रोल नंबर भेजने के साथ इसकी अनुपलब्धता का स्पष्ट कारण भी व्हाट्सएप या ईमेल के माध्यम से बताना होगा। इससे जांच एजेंसी प्रत्येक मामले का अलग-अलग सत्यापन कर सकेगी।   विसंगति मिलने पर होगी पूछताछ   जांच एजेंसी का कहना है कि अभ्यर्थियों से प्राप्त कार्बन कॉपी का JPSC से जब्त मूल OMR शीट से मिलान किया जाएगा। यदि किसी भी अभ्यर्थी की OMR शीट में अंतर या छेड़छाड़ के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित अभ्यर्थी को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। सीआईडी का मानना है कि इस प्रक्रिया से परीक्षा में कथित अनियमितताओं और संभावित फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
CID officials visit the residence of slain teacher and social activist Varun Biswas in North 24 Parganas as the 2012 murder case is reopened after 14 years.
14 साल बाद फिर खुली शिक्षक वरुण विश्वास हत्याकांड की फाइल, सीआईडी ने शुरू की नई जांच

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक वरुण विश्वास हत्याकांड में 14 साल बाद जांच ने नया मोड़ ले लिया है। उत्तर 24 परगना के गोबरडांगा निवासी और सुतिया सामूहिक दुष्कर्म कांड के मुख्य गवाह रहे वरुण विश्वास की हत्या की जांच दोबारा शुरू कर दी गई है। गुरुवार को सीआईडी की टीम उनके घर पहुंची और परिवार के सदस्यों से लंबी पूछताछ कर बयान दर्ज किए। परिवार की मांग पर दोबारा शुरू हुई जांच वरुण विश्वास के परिवार ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। परिवार का कहना था कि पिछले 14 वर्षों में मामले की सही तरीके से जांच नहीं हुई। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सीआईडी ने दोबारा जांच शुरू कर दी है। परिवार ने लगाया गंभीर आरोप वरुण विश्वास के परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी हत्या एक सुनियोजित साजिश थी। परिवार का दावा है कि इस मामले में तत्कालीन हाबरा विधायक और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। वरुण के बड़े भाई असित विश्वास ने कहा कि वर्षों तक उन्हें न्याय नहीं मिला और कई बार दबाव तथा धमकियों का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई जांच में वास्तविक दोषियों का पता चल सकेगा। 2012 में हुई थी गोली मारकर हत्या 5 जुलाई 2012 को गोबरडांगा रेलवे स्टेशन के पास 38 वर्षीय शिक्षक वरुण विश्वास की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वरुण विश्वास उत्तर 24 परगना के सुतिया क्षेत्र में हुए चर्चित सामूहिक दुष्कर्म कांड के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं में शामिल थे। वे पीड़ितों को न्याय दिलाने के अभियान का अहम चेहरा बनकर उभरे थे। सीआईडी ने जुटाए नए साक्ष्य सीआईडी अधिकारियों ने परिवार से घटना से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी ली और पुराने दस्तावेजों व बयानों की भी समीक्षा शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब नए सिरे से पूरे मामले की पड़ताल करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। परिवार को न्याय की उम्मीद परिवार का कहना है कि 14 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद उन्हें उम्मीद जगी है कि इस बार निष्पक्ष जांच होगी और हत्या के पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे में लाया जाएगा। यह मामला एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून-व्यवस्था के बीच चर्चा का विषय बन गया है।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
Dr. Rajkumar
रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफा मंजूर , डॉ डीके सिन्हा डॉ. बने नए प्रभारी

रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में CID जांच के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने विभागीय मंत्री इरफान अंसारी की मंजूरी के बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। साथ ही रिम्स के सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ. दीपेंद्र कुमार (डीके) सिन्हा को अगले आदेश तक संस्थान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।   सीआईडी की दो टीमों ने की थी जांच 24 जून को CID की दो अलग-अलग टीमें रिम्स पहुंची थीं। जांच का केंद्र वर्ष 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एमबीबीएस नामांकन और सफाई कार्य से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के आरोप थे। जांच के दौरान अधिकारियों ने रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार, डीन, चिकित्सा अधीक्षक सहित कई अधिकारियों से पूछताछ की और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। CID टीम आवश्यक अभिलेखों और शिकायतों से जुड़े दस्तावेजों की प्रतियां भी अपने साथ ले गई।   इस्तीफे पर दिनभर बनी रही चर्चा रिम्स में पूरे दिन डॉ. राजकुमार के इस्तीफे की चर्चा होती रही, हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर मीडिया से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, रिम्स के प्रो. डी.आर. शिशिर कुमार ने कहा कि संस्थान में CID की कार्रवाई से वे आहत हैं। देर शाम स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने डॉ. राजकुमार का इस्तीफा मिलने और उसे स्वीकार किए जाने की पुष्टि की।   पहले भी रद्द हो चुका है नामांकन गौरतलब है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांकन के मामले में रिम्स प्रशासन पहले ही एमबीबीएस और बीडीएस की एक-एक छात्रा का दाखिला रद्द कर चुका है। जिला प्रशासन की जांच में दोनों के जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे। अब CID की जांच के बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Bihar Police Parade Hajipur
हाजीपुर में 145 सिपाहियों की भव्य दीक्षांत परेड, राष्ट्रसेवा की ली शपथ

पटना, एजेंसियां। बिहार के हाजीपुर स्थित पुलिस केंद्र में शुक्रवार को 145 सिपाहियों की भव्य दीक्षांत परेड का आयोजन किया गया। यह परेड आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और सीआईडी (CID) के उन प्रशिक्षु सिपाहियों के बुनियादी प्रशिक्षण पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई, जिन्होंने सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा किया। समारोह में प्रशिक्षुओं ने अनुशासन, ऊर्जा और उत्कृष्ट तालमेल के साथ आकर्षक परेड प्रस्तुत की, जिसने उपस्थित अधिकारियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों का ध्यान आकर्षित किया।   डीआईजी ने दिलाई कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी की शपथ मुख्य अतिथि के रूप में तिरहुत क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक Chandan Kumar Kushwaha ने परेड का निरीक्षण किया और सभी प्रशिक्षुओं को कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की शपथ दिलाई। उन्होंने जवानों से जीवनभर सत्य, न्याय और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।   प्रशिक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हुए सम्मानित कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण अवधि में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सिपाहियों को सम्मानित भी किया गया। अधिकारियों ने उन्हें पुरस्कार प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।   देशभक्ति के माहौल में गर्व से झूमे अभिभावक समारोह में बिहार सहित विभिन्न राज्यों से आए अभिभावक भी मौजूद रहे। अपने परिजनों को वर्दी में परेड करते देख उनका गर्व और उत्साह देखने लायक था। पूरा पुलिस केंद्र देशभक्ति और उत्साह के माहौल से भर गया।   कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधीक्षक Vikram Sihag ने सभी प्रशिक्षुओं को सफल प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे भविष्य में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर पुलिस विभाग की गरिमा को बढ़ाएंगे।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Jharkhand ATS
झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा फेरबदल: अब सीआईडी की निगरानी में काम करेगा एटीएस

आतंकवाद और संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने बदली रणनीति, एटीएस की कार्यप्रणाली में होगा बदलाव। रांची। झारखंड पुलिस की आंतरिक सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा ने एक औपचारिक आदेश जारी कर राज्य के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के नियंत्रण में लाने का निर्देश दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और आतंकी तंत्र को और अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।   एकीकृत जांच और प्रशासनिक नियंत्रण इस नए आदेश के अनुसार, एटीएस अब पूरी तरह से प्रशासनिक और परिचालन (operational) दृष्टिकोण से सीआईडी के दिशा-निर्देशों का पालन करेगी। अभी तक एटीएस जिन भी मामलों की जांच कर रही थी, अब वे सभी सीआईडी की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत संचालित होंगे। इसमें जांच अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से लेकर केस की प्रगति रिपोर्ट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया सीआईडी प्रमुख की निगरानी में होगी।   रणनीति के पीछे की वजह झारखंड में वर्ष 2015 में एटीएस का गठन किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य स्लीपर सेल का भंडाफोड़ करना, संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी और आतंकी वारदातों को रोकना था। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की पुरानी अधिसूचनाओं का हवाला देते हुए, प्रशासन का मानना है कि एटीएस और सीआईडी के बीच बेहतर तालमेल न केवल केस को सुलझाने में तेजी लाएगा, बल्कि संगठित अपराध के आर्थिक तंत्र को तोड़ने में भी सक्षम होगा।   अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हालांकि पूरा प्रशासनिक नियंत्रण सीआईडी के अधीन कर दिया गया है, लेकिन कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में जवाबदेही तय रखी गई है। निर्देश के मुताबिक, आतंकी गतिविधियों से निपटने और विशेष अभियानों के दौरान एटीएस के पुलिस अधीक्षक (SP) अभियान पुलिस महानिरीक्षक (IG) के प्रति जवाबदेह होंगे। वहीं, दैनिक कामकाज और जांच से जुड़ी गोपनीयता और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए वे सीआईडी के साथ मिलकर काम करेंगे।   सुरक्षा परिदृश्य पर प्रभाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य में सुरक्षा के 'अंडरवर्ल्ड' और विदेश से संचालित होने वाले आपराधिक गिरोहों के खिलाफ एक ठोस कदम साबित हो सकता है। प्रशासनिक स्तर पर पुलिस विभागों के बीच समन्वय में आने वाली बाधाओं को दूर कर एक केंद्रीय तंत्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है। एटीएस को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपनी जांच और ऑपरेशन्स के दौरान उच्च स्तर की गोपनीयता बनाए रखें, क्योंकि आने वाले समय में राज्य की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां अधिक जटिल हो सकती हैं। यह पुनर्गठन झारखंड पुलिस के लिए एक नए युग की शुरुआत जैसा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को एक ही छत के नीचे लाकर अपराध के हर स्तर पर वार करने की तैयारी है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Crime news
विदेश में छुपे गैंगस्टरों को इंटरपोल-NCB ने 4 श्रेणियों में बांटा, CID ने 24 जिलों के SP से मांगी रिपोर्ट

रांची। ऐसे अपराधी जो झारखंड से भाग कर विदेशों में छुपे हैं और वहीं से अपना आपराधिक साम्राज्य चला रहे हैं, अब उनकी खैर नहीं है। ऐसे गैंगस्टरों और अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य की CID और केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरी तरह से रेस हैं। झारखंड से विदेश फरार अपराधियों को प्रत्यर्पण संधि के तहत वापस भारत लाने के लिए इंटरपोल और NCB ( नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत फरार अपराधियों को अपराध की प्रकृति के आधार पर चार विशेष श्रेणियों में विभाजित किया गया है। सीआईडी मुख्यालय ऐसे सभी अपराधियों का डेटा बेस तैयार कर रहा है। इसमें सभी जिलों के एसपी भी सहयोग कर रहे हैं। इसे डेटा बेस को सीआईडी की ओर से इंटरपोल को भेजा जायेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा सके। 4 श्रेणियों में बांटे गए अपराधी इंटरपोल और एनसीबी ने अपराधियों को उनके द्वारा किए गए अपराधों के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया है.  श्रेणी 1 : काउंटर टेररिज्म (आतंकवाद विरोधी मामले) और संगठित अपराध  श्रेणी 2 : नारकोटिक्स (नशीले पदार्थों और ड्रग्स की तस्करी) से संबंधित अपराध श्रेणी 3 : आर्थिक अपराध ( वित्तीय धोखाधड़ी ) श्रेणी 4 : साइबर क्राइम, मानव तस्करी और अन्य गंभीर मामले। अपराधियों की कुंडली तैयार करने के लिए 6 मुख्य बिंदु  विदेशों में छिपे अपराधियों को कानूनी रूप से दबोचने के लिए CID बेहद पुख्ता सबूत जुटा रही है। 24 जिलों के एसपी से निम्नलिखित छह मुख्य बिंदुओं पर अपराधियों का प्रोफाइल मांगा गया है।  फरार अपराधी का पूरा नाम और उसका स्थायी – अस्थायी पता।  पिता का नाम और अपराधी की सही जन्म तिथि। अपराधी का पासपोर्ट नंबर और उसका हालिया रंगीन (कलर) फोटोग्राफ।  फरार अपराधी के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों (केस) का पूरा विवरण। अपराधी का वर्तमान लोकेशन या वह किस देश/जगह पर छिपा है, इसकी जानकारी संबंधित केस में वांटेड अपराधी का फिंगरप्रिंट (यदि पुलिस रिकॉर्ड में उपलब्ध हो)। झारखंड के 3 बड़े गैंगस्टर जो विदेश से चला रहे हैं गैंग झारखंड पुलिस के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती  तीन गैंगस्टर बने हुए हैं, जो विदेश में  बैठकर झारखंड में रंगदारी, हत्या और धमकी का सिंडिकेट चला रहे हैं।  प्रिंस खान (धनबाद) : धनबाद के वासेपुर का रहने वाला कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान इस सूची में सबसे ऊपर है। पुलिस इनपुट के अनुसार, वह वर्तमान में पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहीं से धनबाद के कोयलांचल क्षेत्र में अपना रंगदारी का नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। राहुल दुबे (रामगढ़) : मूल रूप से रामगढ़ जिले का रहने वाला राहुल दुबे भी विदेश से ही अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। जांच एजेंसियां लगातार इसके वर्तमान लोकेशन को ट्रैक करने का प्रयास कर रही हैं। राहुल सिंह (लातेहार) : लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र का निवासी राहुल सिंह भी विदेश फरार है। इसके पहले अजरबैजान में छिपे होने की पुख्ता जानकारी थी, लेकिन हालिया इनपुट के अनुसार वह अब वहां से भी भाग निकला है। पुलिस उसकी नई लोकेशन का पता लगा रही है। पंजाब का ड्रग्स तस्कर दलजिंदर’ इंग्लैंड फरार इन तीन गैंगस्टरों के अलावा, मूल रूप से पंजाब का रहने वाला दलजिंदर सिंह पलामू जिले में दर्ज ड्रग्स तस्करी (नारकोटिक्स) के एक बड़े मामले में वांछित है। झारखंड पुलिस को खुफिया जानकारी मिली है कि वह वर्तमान में इंग्लैंड में शरण लिए हुए है। CID इसकी भी श्रेणी तय कर प्रत्यर्पण की तैयारी में जुटी है।

anjali kumari जून 11, 2026 0
TMC leader Abhishek Banerjee faces CID notice in alleged forged signature investigation in West Bengal.
फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन, CID ने कोलकाता आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन जारी किया है। जांच एजेंसी की टीम ने उनके कोलकाता स्थित आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा। सूत्रों के अनुसार, CID एक ऐसे मामले की जांच कर रही है, जिसमें विधानसभा से जुड़े एक दस्तावेज पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित दस्तावेज में कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता संदिग्ध है। मामले की जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर रही है। क्या है पूरा मामला? विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक दस्तावेज को लेकर सवाल उठे। कुछ विधायकों ने दावा किया कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इसके बाद मामले की शिकायत जांच एजेंसियों तक पहुंची और CID ने जांच शुरू की। जांच के दौरान कुछ विधायकों के बयान दर्ज किए गए हैं। एजेंसी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। CID ने जारी किया तीसरा नोटिस जांच एजेंसी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को पहले भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए थे। निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने के बाद अब उन्हें तीसरा नोटिस जारी किया गया है। CID अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए उनका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस नए समन पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विवाद भी तेज मामले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जांच को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। आगे क्या? अब सभी की नजर इस बात पर है कि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसी के समक्ष कब पेश होते हैं और CID की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Mamata Banerjee CID
ममता बनर्जी के घर पहुंची सीआईडी की टीम, फर्जी हस्ताक्षर मामले में जांच तेज

कोलकाता, एजेंसियां। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक घमासान के बीच मंगलवार को एक नया मोड़ सामने आया। फर्जी हस्ताक्षर विवाद की जांच के सिलसिले में CID की टीम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। हालांकि, पार्टी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी का हवाला देते हुए जांच टीम को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। CID अधिकारियों के साथ कालीघाट थाना पुलिस और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं। जांच एजेंसी उन आरोपों की पड़ताल कर रही है, जिनमें दावा किया गया है कि TMC विधायक दल से जुड़े एक प्रस्ताव पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। क्या है पूरा विवाद? बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि नेता विपक्ष बनाए जाने से संबंधित प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए। आरोप सीधे अभिषेक बनर्जी के लेटरहेड से जुड़े दस्तावेजों पर लगाए गए हैं। इसी मामले की जांच के तहत CID लगातार सबूत जुटा रही है। पार्टी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान इस विवाद ने TMC के भीतर चल रही गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है। शिकायत करने वाले विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाए जाने के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसकी सुनवाई जल्द होने वाली है। राजनीतिक असर पर नजर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल फर्जी हस्ताक्षर तक सीमित नहीं है, बल्कि TMC के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर चल रही खींचतान का संकेत भी देता है। अब सबकी नजर CID जांच और अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है, जो इस मामले की दिशा तय कर सकती है।

Unknown जून 9, 2026 0
Digital arrest in Ranchi
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 38 लाख उड़ा लिया ठग

रांची। रांची से साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और उससे 38 लाख 62 हजार 982 रुपये ठग लिए। मामले की शिकायत मिलने के बाद CID झारखंड  के साइबर क्राइम थाना ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहित कुमार जैन, संजीव कुमार मिश्रा और लोकेश महतो के रूप में हुई है। तीनों आरोपी जमशेदपुर के रहने वाले बताए जा रहे हैं। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके पास से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी बरामद किए हैं।   फोन और वीडियो कॉल से दिया गया धमकी का झांसा पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसे फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया। कॉल करने वालों ने खुद को केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताया और कहा कि वह एक गंभीर मामले में फंस चुका है। ठगों ने उसे गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाया।इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” में होने की बात कहकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। डर और दबाव के कारण पीड़ित ने बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए कुल 38,62,982 रुपये उनके बताए खातों में भेज दिए।   डिजिटल फुटप्रिंट से आरोपियों तक पहुंची पुलिस शिकायत मिलने के बाद CID साइबर क्राइम थाना ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट और बैंक ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया, जिसके आधार पर आरोपियों की पहचान हो सकी।इसके बाद पुलिस ने जमशेदपुर के घाटशिला और कदमा थाना की मदद से छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फिलहाल उनसे पूछताछ कर रही है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा हो सकता है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों, हैंडलरों और म्यूल खातों की पहचान करने में जुटी है।अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड के मामलों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें और ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

Unknown मार्च 14, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0