Congress leadership

Karnataka Congress leaders Siddaramaiah and D.K. Shivakumar amid chief minister leadership discussions
कर्नाटक में मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार, आज कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक

Karnataka में मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक हलचल जारी है। कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक आज शाम 4 बजे होने जा रही है, जिसमें सत्ता हस्तांतरण और नई कैबिनेट के गठन को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच चर्चाएं तेज मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के नाम को लेकर पिछले कुछ समय से अटकलें चल रही हैं। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यतींद्र को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को आश्वस्त किया है कि आवश्यकता पड़ने पर उनके बेटे Yathindra Siddaramaiah को संगठन या सरकार में कोई उपयुक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है। बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया नई सरकार और मंत्रिमंडल में अपने करीबी नेताओं को स्थान दिलाने के प्रयास में हैं। साथ ही उन्होंने यतींद्र को भी किसी महत्वपूर्ण भूमिका में शामिल किए जाने की पैरवी की है। कैबिनेट सूची अभी अंतिम नहीं सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया ने अब तक नई कैबिनेट में शामिल किए जाने वाले नेताओं की अंतिम सूची कांग्रेस नेतृत्व को नहीं सौंपी है। संभावना है कि वह शनिवार को सूची को अंतिम रूप देकर Randeep Singh Surjewala को सौंप सकते हैं। इसके बाद मंत्रिमंडल के स्वरूप और शक्ति संतुलन की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है। CLP बैठक पर टिकी नजरें आज की कांग्रेस विधायक दल की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि: मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर चर्चा हो सकती है। नई कैबिनेट के संभावित नामों पर विचार हो सकता है। संगठन और सरकार में शक्ति संतुलन का खाका तैयार किया जा सकता है। कांग्रेस नेतृत्व का अंतिम संदेश विधायकों तक पहुंचाया जा सकता है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है, इसलिए कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Siddaramaiah meets Karnataka Governor after submitting resignation amid Congress leadership change
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की शुरुआत, राज्यपाल ने स्वीकार किया सिद्धारमैया का इस्तीफा

कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। अब राज्य में नए मुख्यमंत्री के चयन और नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। कांग्रेस में पिछले कई महीनों से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देश का पालन करते हुए छोड़ा मुख्यमंत्री पद सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया है और पार्टी के फैसले का सम्मान किया है। इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी की ओर से उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी रुचि राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है और वह कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय बने रहना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक के रूप में उनका कार्यकाल अभी दो वर्ष बाकी है और वह जनता के बीच रहकर अपनी राजनीतिक भूमिका जारी रखेंगे। 2023 में सत्ता में वापसी के बाद शुरू हुआ था दूसरा कार्यकाल सिद्धारमैया ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला था। कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर राज्य में सत्ता वापसी की थी और सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था, जबकि डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब उनके इस्तीफे के साथ ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। इस्तीफे के बाद समर्थकों में भावुकता, कई जगह हुए विरोध प्रदर्शन मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले के बाद सिद्धारमैया समर्थकों में नाराजगी और भावुकता देखने को मिली। 28 मई को राज्य के कई हिस्सों में समर्थकों ने प्रदर्शन किया और नेतृत्व परिवर्तन के फैसले पर सवाल उठाये। बेंगलुरु स्थित सिद्धारमैया के सरकारी आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक जमा हुए। कई समर्थकों ने उनसे इस्तीफा वापस लेने की अपील की। इस दौरान माहौल काफी भावुक नजर आया। सिद्धारमैया बाहर आये और समर्थकों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने लोगों से शांत रहने और पार्टी के फैसले का सम्मान करने की अपील की। डीके शिवकुमार के आवास के बाहर जश्न, समर्थकों ने मनायी खुशी जहां एक तरफ सिद्धारमैया समर्थकों में निराशा थी, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आवास के बाहर जश्न का माहौल देखने को मिला। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए उनके समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं और जश्न मनाया। कई कांग्रेस नेता और विधायक भी शिवकुमार को बधाई देने उनके आवास पहुंचे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर समर्थन जताया और नेतृत्व परिवर्तन को कांग्रेस के लिए नया अध्याय बताया। दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ अहम बैठकों की संभावना इस्तीफे के तुरंत बाद सिद्धारमैया दिल्ली के लिए रवाना हो गए। माना जा रहा है कि वह कांग्रेस आलाकमान के साथ नए मुख्यमंत्री के चयन और मंत्रिमंडल गठन को लेकर चर्चा करेंगे। उधर, डीके शिवकुमार भी बाद में दिल्ली पहुंचे। वर्तमान में वह उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में होने वाली बैठकों में विधायक दल के नए नेता के चयन, मंत्रिमंडल के स्वरूप और प्रदेश संगठन में संभावित बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। नए मुख्यमंत्री के नाम पर कांग्रेस के अंतिम फैसले का इंतजार कर्नाटक में अब सबसे बड़ी नजर कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर टिकी हुई है। हालांकि डीके शिवकुमार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, लेकिन पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में सत्ता और संगठन दोनों को संतुलित रखने की रणनीति के तहत फैसला ले सकता है। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 29, 2026 0
Congress leaders Siddaramaiah, D K Shivakumar and Mallikarjun Kharge during meeting over Karnataka leadership issue
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा फिर तेज, खरगे ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के साथ की बैठक

Karnataka में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने दोनों नेताओं के साथ अहम बैठक की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, खरगे ने सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ Thiruvananthapuram से Bengaluru लौटने के बाद राज्य के ऊर्जा मंत्री K. J. George के आवास पर चर्चा की। सत्ता संघर्ष की अटकलें फिर तेज कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता साझाकरण और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं। पिछले साल नवंबर में कांग्रेस सरकार के आधे कार्यकाल पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा रही है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने को लेकर अंदरखाने खींचतान जारी है। बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? सूत्रों के अनुसार, केरल में नई कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से लौटने के बाद नेताओं की यह अनौपचारिक बैठक हुई। इस दौरान राज्य के हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेता नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान से स्पष्ट रुख चाहते हैं। कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल मधुगिरी से कांग्रेस विधायक K. N. Rajanna ने भी संकेत दिया कि नेतृत्व के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा हुई होगी। उन्होंने कहा, “खरगे, राहुल गांधी, सिद्धारमैया और शिवकुमार सभी केरल में मौजूद थे, तो फिर वहीं चर्चा क्यों नहीं हुई?” राहुल गांधी ने भी मांगी रिपोर्ट सूत्रों के मुताबिक Rahul Gandhi ने राज्य की राजनीतिक स्थिति और अंदरूनी समीकरणों को लेकर वरिष्ठ नेताओं, जिनमें के.जे. जॉर्ज भी शामिल हैं, से फीडबैक मांगा था। कांग्रेस के अंदर अब पार्टी महासचिव K. C. Venugopal के अवकाश से लौटने का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दिल्ली में भी अहम बैठकों का दौर शुरू हो सकता है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Tej Pratap Yadav speaking to media, criticizing Congress leadership and backing Priyanka Gandhi
कांग्रेस नेतृत्व पर सियासी घमासान: तेज प्रताप यादव बोले–‘राहुल गांधी से नहीं चल पाएगी पार्टी, प्रियंका गांधी को मिले कमान’

पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस को बेहतर तरीके से सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। ‘प्रियंका गांधी ही संभाल सकती हैं पार्टी’ तेज प्रताप यादव ने कहा, “कांग्रेस को सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं, वो इंदिरा गांधी जैसी हैं। राहुल गांधी से पार्टी चलने वाली नहीं है।” उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यात्रा करने से या बुलेट पर बैठने से कुछ नहीं होता, असली सवाल यह है कि उनका मकसद क्या है?” राहुल के बयान पर पलटवार तेज प्रताप का यह बयान राहुल गांधी द्वारा नीतीश कुमार को “समझौता किया हुआ नेता” कहे जाने के बाद आया है। बिहार की राजनीति में हालिया बदलाव–जहां नीतीश कुमार के अलग होने के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने–को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। पहले भी उठ चुके हैं सवाल राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर यह पहली बार सवाल नहीं उठे हैं। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व नेता शकील अहमद ने भी पार्टी के अंदर आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में फैसले सीमित दायरे में लिए जाते हैं और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका कम हो गई है। बढ़ती राजनीतिक बहस तेज प्रताप यादव और अन्य नेताओं के बयानों से यह साफ है कि कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बहस अब पार्टी के बाहर भी तेज हो गई है। प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग अब विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ से भी उठने लगी है, जिससे कांग्रेस की आंतरिक चुनौतियां और गहरी होती दिख रही हैं।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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