झारखंड

राज्यसभा चुनाव तक कड़ी निगरानी में रहेंगे कांग्रेस विधायक

anjali kumari जून 15, 2026 0
Rajya Sabha elections
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रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने की पुख्ता तैयारी कर ली है। पार्टी किसी भी तरह की चूक नहीं चाहती। इससे बचने के लिए पार्टी विधायकों पर विशेष नजर बनाए हुए है और संगठन के वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं को विधायकों के साथ लगातार संपर्क में रहने और मतदान प्रक्रिया को लेकर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। साथ ही विधायकों की समस्याओं और सुझावों को पार्टी आलाकमान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

 

मुख्यमंत्री आवास में रात्रिभोज


कांग्रेस को झामुमो के समर्थन के बाद अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर भरोसा है। हालांकि पार्टी किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती और हर विधायक के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री आवास पर लगातार दो दिनों तक आयोजित रात्रिभोज की चर्चा भी तेज है। माना जा रहा है कि इन बैठकों के जरिए गठबंधन दलों के बीच बेहतर समन्वय और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।


कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक आ रहे रांची


राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक अजय शर्मा, नासिर हुसैन और प्रदेश प्रभारी के रांची पहुंचने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के साथ रात्रिभोज के दौरान उनकी महत्वपूर्ण बैठक भी हो सकती है, जिसमें चुनावी रणनीति और गठबंधन की मजबूती पर चर्चा होगी।


विधायकों के संपर्क में प्रदीप यादव


विधायक दल के नेता प्रदीप यादव लगातार कांग्रेस विधायकों के संपर्क में हैं। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि मतदान के दौरान कोई भी विधायक पार्टी लाइन से अलग न जाए। यही वजह है कि रांची से लेकर नई दिल्ली तक कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची से 13 राज्यों के दिव्यांगों को मिलेगी मदद, एलिम्को ने खोला पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय

रांची। दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) ने रांची के हिनू में अपना पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय शुरू किया है। इस कार्यालय के जरिए पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के 13 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के जरूरतमंद लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।   अब कानपुर जाने की जरूरत नहीं   सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन संचालित एलिम्को के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रवीण कुमार ने बताया कि कार्यालय खोलने का उद्देश्य जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक सहायक उपकरणों की पहुंच आसान बनाना है। पहले कई लोगों को सुविधाओं के लिए कानपुर स्थित एलिम्को मुख्यालय जाना पड़ता था। अब रांची कार्यालय के माध्यम से अधिकांश सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। यूडीआइडी कार्डधारकों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ देने की योजना है।   2.50 लाख लोगों तक पहुंचेगी सुविधा   एलिम्को के पूर्वी क्षेत्रीय प्रमुख अनुपम प्रकाश के अनुसार, रांची का भौगोलिक स्थान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए काफी अनुकूल है। यहां से सहायक उपकरणों की आपूर्ति के साथ पुनर्वास सेवाएं, आफ्टर-सेल्स सपोर्ट और राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय किया जा सकेगा।   एलिम्को के मुताबिक, नए क्षेत्रीय कार्यालय के सेवा दायरे में करीब 277 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के तहत लगभग 2.50 लाख दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक आ सकते हैं।   झारखंड में 1.29 लाख से अधिक उपकरण वितरित   झारखंड में अब तक एलिम्को की ओर से 46.79 करोड़ रुपये की लागत से 1.29 लाख से अधिक सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। इनमें व्हीलचेयर समेत दिव्यांगजनों की जरूरत के विभिन्न उपकरण शामिल हैं।   लाभार्थियों ने साझा किए अनुभव   कार्यक्रम के दौरान एलिम्को के उपकरणों से लाभान्वित लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। पलामू के विनय प्रसाद ने बताया कि व्हीलचेयर मिलने से उनका आवागमन आसान हुआ है। वहीं रामगढ़ की 70 वर्षीय जेठनी देवी को व्हीलचेयर के साथ घुटने और कमर के बेल्ट मिले, जिससे उनके दैनिक जीवन में काफी राहत मिली।   नए क्षेत्रीय कार्यालय के शुरू होने से उम्मीद है कि पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के दिव्यांगजनों तथा वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण और पुनर्वास सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।

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RIMS में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर रोक से 60 डॉक्टर नाराज, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव को लिखा पत्र

रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में विभागाध्यक्षों के रोटेशन की प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। संस्थान के करीब 60 डॉक्टरों ने इस फैसले का विरोध करते हुए स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजा है। डॉक्टरों ने रोटेशन व्यवस्था को लागू करने की मांग करते हुए एनएमसी की गाइडलाइन, रिम्स शासी परिषद के पुराने फैसले और हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया है। रिम्स शासी परिषद की 52वीं बैठक में वर्ष 2021 में विभागाध्यक्षों के रोटेशन का फैसला लिया गया था। इसके तहत प्रत्येक तीन वर्ष में विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी बदलने की व्यवस्था लागू की गयी थी। इसी आधार पर वर्ष 2021 से अलग-अलग विभागों में रोटेशन के तहत विभागाध्यक्षों की नियुक्ति की जा रही थी। प्रोफेसरों की बारी आते ही प्रक्रिया पर लगी रोक डॉक्टरों का आरोप है कि अब जब रोटेशन के तहत अन्य प्रोफेसरों को विभागाध्यक्ष बनने का अवसर मिलना था, तभी इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी। इससे कई डॉक्टरों में नाराजगी है। करीब 60 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य सचिव डॉ. अजय कुमार सिंह को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। डॉक्टरों ने अपने पत्र में कहा है कि एनएमसी की गाइडलाइन में विभागाध्यक्ष के पद पर रोटेशन व्यवस्था का प्रावधान है। साथ ही रिम्स की शासी परिषद भी पहले इस संबंध में निर्णय ले चुकी है। ऐसे में अचानक रोटेशन रोकने के फैसले पर उन्होंने सवाल उठाया है। 65वीं जीबी बैठक के बाद लिया गया फैसला सूत्रों के अनुसार, हाल में हुई रिम्स शासी परिषद की 65वीं बैठक में विभागाध्यक्षों के रोटेशन पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। इसके बाद रोटेशन के तहत विभागाध्यक्षों की नयी अधिसूचना जारी नहीं करने का निर्देश रिम्स प्रबंधन को दिया गया है। बताया जा रहा है कि कुछ सीनियर डॉक्टरों ने रोटेशन व्यवस्था को लेकर आपत्ति जतायी थी। उनका कहना था कि वे अपने से जूनियर डॉक्टर के अधीन काम करने में असहज महसूस करेंगे। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और रोटेशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गयी। हाईकोर्ट के निर्देश का भी दिया हवाला डॉक्टरों ने अपने पत्र में वर्ष 2022 में हाईकोर्ट की ओर से रोटेशन प्रक्रिया को लेकर दिये गये निर्देश का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि जब एनएमसी की गाइडलाइन और रिम्स जीबी का फैसला पहले से मौजूद है, तो रोटेशन व्यवस्था को बीच में रोकना उचित नहीं है। अब 60 डॉक्टरों के पत्र के बाद रिम्स में विभागाध्यक्षों के रोटेशन को लेकर फैसला अहम हो गया है। डॉक्टरों ने जल्द से जल्द प्रक्रिया बहाल करने और पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार विभागाध्यक्षों की नियुक्ति करने की मांग की है।  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
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ALIMCO Eastern Regional Office in Ranchi to provide assistive devices to persons with disabilities and senior citizens
रांची से 13 राज्यों के दिव्यांगों को मिलेगी मदद, एलिम्को ने खोला पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय

रांची: दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहायक उपकरणों की सुविधा अब पहले के मुकाबले और आसान होने जा रही है. भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) ने रांची के हिनू में अपना नया पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय शुरू किया है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन संचालित यह कार्यालय पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के 13 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. एलिम्को के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रवीण कुमार ने बताया कि रांची में क्षेत्रीय कार्यालय शुरू होने से जरूरतमंद लोगों को सहायक उपकरण प्राप्त करने के लिए दूर-दराज की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी. पहले कई मामलों में लोगों को अपनी जरूरतों और सेवाओं के लिए कानपुर स्थित एलिम्को मुख्यालय तक जाना पड़ता था. अब रांची से ही अधिकांश सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जायेगी. यूडीआइडी कार्डधारकों को मिलेगी प्राथमिकता नये क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों तक कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरणों की पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया जायेगा. यूडीआइडी (यूनिक डिसएबिलिटी आइडी) कार्डधारकों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ देने की योजना है. एलिम्को का उद्देश्य सिर्फ उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि लाभार्थियों को उपकरण के इस्तेमाल, रखरखाव और जरूरत पड़ने पर आफ्टर-सेल्स सपोर्ट उपलब्ध कराना भी है. इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांगजनों को विशेष फायदा मिलने की उम्मीद है. रांची से आसान होगी 13 राज्यों तक सेवा की पहुंच एलिम्को के पूर्वी क्षेत्रीय प्रमुख अनुपम प्रकाश ने कहा कि रांची की भौगोलिक स्थिति पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है. यहां से कई राज्यों तक सेवाओं का संचालन और समन्वय अपेक्षाकृत आसान होगा. क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से सहायक उपकरणों की आपूर्ति, पुनर्वास सेवाएं, आफ्टर-सेल्स सपोर्ट और राज्य सरकारों के साथ समन्वय को मजबूत किया जायेगा. इससे दिव्यांगजनों को अपनी जरूरत के अनुसार सेवाएं प्राप्त करने में कम समय लगेगा. 2.50 लाख दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंचने का लक्ष्य एलिम्को के अनुसार, नये कार्यालय का सेवा दायरा करीब 277 करोड़ रुपये का होगा. इसके तहत लगभग 2.50 लाख दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों तक उच्च गुणवत्ता वाले सहायक उपकरण पहुंचाने में मदद मिलेगी. झारखंड की बात करें तो अब तक राज्य में करीब 46.79 करोड़ रुपये की लागत से 1.29 लाख से अधिक सहायक उपकरण वितरित किये जा चुके हैं. इनमें व्हीलचेयर समेत दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के दैनिक जीवन को आसान बनाने वाले कई तरह के उपकरण शामिल हैं. उपकरण मिलने से बदली लाभार्थियों की जिंदगी कार्यक्रम के दौरान एलिम्को से उपकरण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किये. पलामू के विनय प्रसाद को व्हीलचेयर मिलने के बाद उनके लिए आने-जाने में काफी सुविधा हुई. वहीं रामगढ़ की 70 वर्षीय जेठनी देवी को व्हीलचेयर के साथ घुटने और कमर के बेल्ट उपलब्ध कराये गये, जिससे उन्हें रोजमर्रा के काम करने में राहत मिली. लाभार्थियों के अनुभवों से यह भी सामने आया कि सही सहायक उपकरण मिलने से दिव्यांगजनों और बुजुर्गों की न केवल शारीरिक गतिविधियां आसान होती हैं, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है. रांची कार्यालय से बढ़ेगी समावेशी सेवाओं की पहुंच एलिम्को का पूर्वी क्षेत्रीय कार्यालय शुरू होने से झारखंड समेत आसपास के राज्यों में दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकारी सहायता और पुनर्वास सेवाओं की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है. स्थानीय स्तर पर कार्यालय उपलब्ध होने से लाभार्थियों को जानकारी, उपकरण और बाद की सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी. नये कार्यालय को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने और पुनर्वास सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.  

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