Cricket Updates

Abhishek Sharma batting during IPL 2026 match, celebrating boundary amid BCCI fine controversy
IPL 2026: जीत के बाद भी मुश्किल में अभिषेक शर्मा, BCCI ने लगाया जुर्माना और दिया डिमेरिट पॉइंट

IPL2026 में सनराइजर्स हैदराबाद की शानदार जीत के बाद टीम के युवा ऑलराउंडर अभिषेक शर्मा मुश्किलों में घिर गए हैं। BCCI ने उन पर IPL आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की है। क्या है पूरा मामला? कोलकाता के ईडन गार्डन्स में कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले में अभिषेक शर्मा ने आचार संहिता का उल्लंघन किया। इस पर कार्रवाई करते हुए BCCI ने उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना काट लिया और साथ ही एक डिमेरिट पॉइंट भी दे दिया। यह उल्लंघन IPL कोड ऑफ कंडक्ट के अनुच्छेद 2.3 (लेवल-1 अपराध) के तहत माना गया। खिलाड़ी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है, जिसके बाद मैच रेफरी का फैसला अंतिम और बाध्यकारी होता है। मैच में कैसी रही अभिषेक की पारी? हालांकि विवाद के बावजूद अभिषेक शर्मा का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने ट्रेविस हेड के साथ मिलकर टीम को तेज शुरुआत दिलाई। दोनों ने 5.4 ओवर में 82 रन जोड़े अभिषेक शर्मा – 21 गेंदों में 48 रन (4 छक्के, 4 चौके) ट्रेविस हेड – 21 गेंदों में 46 रन इस मजबूत शुरुआत ने सनराइजर्स हैदराबाद को बड़े स्कोर तक पहुंचने की नींव दी। मैच का पूरा हाल सनराइजर्स हैदराबाद ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 226/8 का बड़ा स्कोर बनाया। हेनरिक क्लासेन – 52 रन नितीश रेड्डी – 39 रन जवाब में कोलकाता नाइटराइडर्स की टीम 16 ओवर में 161 रन पर सिमट गई। अंगकृष रघुवंशी – 52 रन रिंकू सिंह – 35 रन फिन एलन – 28 रन गेंदबाजी में जयदेव उनादकट ने 3 विकेट लेकर अहम भूमिका निभाई। जीत के बीच लगा झटका जहां एक तरफ सनराइजर्स हैदराबाद ने सीजन की पहली जीत दर्ज की, वहीं दूसरी ओर अभिषेक शर्मा पर लगा जुर्माना टीम के लिए एक झटका माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे के मैचों में वह अपने प्रदर्शन के साथ अनुशासन पर भी कितना ध्यान देते हैं।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Glenn Maxwell in Australia jersey amid news of central contract exclusion and career uncertainty
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज ऑलराउंडर पर संकट? ग्लेन मैक्सवेल को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर किया गया

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में बड़ा फैसला सामने आया है, जहां Cricket Australia ने 2026–27 सीजन के लिए जारी सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट से अनुभवी ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल को बाहर कर दिया है। इस कदम ने उनके इंटरनेशनल करियर के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या खत्म हो रहा है मैक्सवेल का करियर? 37 वर्षीय ग्लेन मैक्सवेल पिछले कुछ समय से टेस्ट और वनडे टीम से दूर चल रहे थे। आखिरी टेस्ट मैच: 2017 ODI से संन्यास: 2025 T20 टीम में जगह भी अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया अब भविष्य की टीम बनाने पर ध्यान दे रहा है। ऑस्ट्रेलिया का नया फोकस Australia ने इस बार 21 खिलाड़ियों की सूची जारी की है, जिसमें टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता दी गई है। आने वाले समय में टीम को: बांग्लादेश न्यूजीलैंड भारत इंग्लैंड के खिलाफ महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज खेलनी हैं, इसलिए चयनकर्ताओं ने रेड-बॉल स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों पर भरोसा जताया है। मैक्सवेल के लिए क्यों मुश्किल हुई राह? टेस्ट टीम में लंबे समय से बाहर T20 वर्ल्ड कप 2026 में खास प्रदर्शन नहीं फिटनेस और अनुशासन से जुड़े मुद्दे टीम अब युवा खिलाड़ियों की ओर देख रही है इन सभी कारणों ने ग्लेन मैक्सवेल की स्थिति कमजोर कर दी। टीम में और कौन से बड़े बदलाव? उभरते खिलाड़ी ब्रेंडन डॉगेट को पहली बार कॉन्ट्रैक्ट माइकल नेसर और टॉड मर्फी की वापसी चोट के कारण झाय रिचर्डसन बाहर सैम कोंस्टास खराब फॉर्म के चलते ड्रॉप यह सूची साफ संकेत देती है कि ऑस्ट्रेलिया टेस्ट टीम को मजबूत करने के मिशन पर है। क्या अभी खत्म नहीं हुआ सब कुछ? हालांकि ग्लेन मैक्सवेल के लिए रास्ता कठिन जरूर हुआ है, लेकिन T20 फॉर्मेट में वापसी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर वह घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो चयनकर्ता एक बार फिर उन्हें मौका दे सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Sourav Ganguly  discussing cricket leadership and coaching approach during a match or event
गांगुली की दो टूक सलाह: ‘रूखे होने की जरूरत नहीं’

भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर नेतृत्व शैली और व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने टीम इंडिया के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर को लेकर बेबाक राय रखते हुए साफ संदेश दिया है कि आक्रामकता जरूरी है, लेकिन उसमें रूखापन नहीं होना चाहिए। एक इंटरव्यू के दौरान सौरव गांगुली ने कहा कि गौतम गंभीर एक स्वाभाविक प्रतिस्पर्धी हैं और जीत के लिए उनका जुनून काबिल-ए-तारीफ है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए रूखा या कठोर व्यवहार जरूरी नहीं है। गांगुली ने कहा कि उन्होंने गंभीर के साथ खेला है और वह जानते हैं कि वह एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उनका आक्रामक रवैया कई बार विवादों का कारण बन जाता है। टीम कल्चर को लेकर की तारीफ जहां एक ओर गांगुली ने गंभीर के व्यवहार पर सुझाव दिया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने उनकी कोचिंग स्टाइल की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि गंभीर टीम में “टीम फर्स्ट” का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, जहां व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज्यादा सामूहिक सफलता पर जोर दिया जाता है। ICC जीत के बाद बढ़ी जिम्मेदारी गौतम गंभीर हाल ही में भारत को ICC Champions Trophy 2025 और ICC T20 World Cup 2026 जिताने वाले पहले हेड कोच बने हैं। इन सफलताओं ने उन्हें एक मजबूत कोच के रूप में स्थापित किया है, लेकिन गांगुली के मुताबिक असली परीक्षा अभी बाकी है। 2027 वर्ल्ड कप और टेस्ट क्रिकेट होगी असली चुनौती गांगुली का मानना है कि 2027 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाला वनडे वर्ल्ड कप गंभीर के लिए असली कसौटी होगा, जहां परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण होंगी। साथ ही उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि पिच पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने के बजाय संतुलित विकेट पर खेलना बेहतर होगा। उनका मानना है कि अच्छी पिच बेहतर परिणाम लाती है और टीम के प्रदर्शन को भी निखारती है। आने वाले दौरे पर नजरें IPL 2026 के बाद भारतीय टीम अफगानिस्तान और आयरलैंड के खिलाफ सीरीज खेलेगी, इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर लंबी व्हाइट-बॉल सीरीज होगी। यह दौर गंभीर के लिए अपनी रणनीति और नेतृत्व को और मजबूत करने का मौका होगा।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Jasprit Bumrah bowling in Indian jersey highlighting BCCI contract changes
BCCI कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बदलाव: जसप्रीत बुमराह के लिए नए विकल्पों पर विचार

भारतीय क्रिकेट में सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट संरचना को लेकर एक अहम बदलाव देखने को मिला है, जिसका सीधा असर टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह पर पड़ा है। हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपने वार्षिक रिटेनरशिप सिस्टम में A+ कैटेगरी को समाप्त करने का निर्णय लिया, जिसके बाद अब बुमराह के कॉन्ट्रैक्ट की समीक्षा की संभावना जताई जा रही है। A+ कैटेगरी हटने से क्या बदला? अब तक A+ ग्रेड में शामिल खिलाड़ियों को सालाना ₹7 करोड़ की राशि मिलती थी। यह श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए आरक्षित थी, जो तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और T20) में लगातार टीम का हिस्सा होते थे। A+ कैटेगरी समाप्त होने के बाद बुमराह को ग्रेड A में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां सालाना ₹5 करोड़ का प्रावधान है। इससे उनकी आय में करीब ₹2 करोड़ की कमी आई है। फैसले के पीछे की वजह इस बदलाव का मुख्य कारण टीम संयोजन में आया परिवर्तन है। विराट कोहली, रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा के T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद बुमराह ही ऐसे खिलाड़ी बचे थे, जो तीनों फॉर्मेट में नियमित रूप से खेल रहे थे। ऐसे में A+ कैटेगरी का संतुलन बिगड़ने लगा, जिसके चलते बोर्ड ने इसे समाप्त करना अधिक व्यावहारिक समझा। बुमराह के लिए विशेष योजना? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BCCI के भीतर इस बात पर चर्चा चल रही है कि बुमराह जैसे अहम खिलाड़ी की आय में कमी होना उचित नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड वैकल्पिक उपायों पर विचार कर रहा है, जिससे उनके योगदान के अनुरूप आर्थिक संतुलन बनाए रखा जा सके। अन्य खिलाड़ियों पर भी असर इस संरचनात्मक बदलाव का प्रभाव केवल बुमराह तक सीमित नहीं है। अक्षर पटेल, केएल राहुल, हार्दिक पांड्या, ऋषभ पंत और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ी भी विभिन्न ग्रेड में पुनर्व्यवस्थित किए गए हैं, जिससे उनकी सैलरी संरचना प्रभावित हुई है। आगे क्या संकेत? यदि BCCI बुमराह के लिए विशेष प्रावधान या संशोधित कॉन्ट्रैक्ट मॉडल लाता है, तो यह भविष्य में खिलाड़ियों के मूल्यांकन के तरीके को बदल सकता है। खासतौर पर उन खिलाड़ियों के लिए, जो एक से अधिक फॉर्मेट में टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर, यह बदलाव भारतीय क्रिकेट में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को अधिक संतुलित और प्रदर्शन आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
BCCI introduces new training rules before IPL 2026
IPL 2026 से पहले BCCI के सख्त नियम: पिच और प्रैक्टिस को लेकर नई गाइडलाइन लागू

  Indian Premier League (IPL) 2026 के आगाज से पहले Board of Control for Cricket in India (BCCI) ने टीमों के अभ्यास सत्र और पिच के इस्तेमाल को लेकर नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। 28 मार्च से शुरू होने वाले टूर्नामेंट से पहले जारी इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य पिच की गुणवत्ता बनाए रखना और अभ्यास सत्रों को अधिक व्यवस्थित बनाना है।   नेट और पिच के इस्तेमाल पर सख्त नियम नए नियमों के तहत किसी भी टीम को उस पिच या नेट पर अभ्यास करने की अनुमति नहीं होगी, जिस पर पहले कोई दूसरी टीम अपना नेट सत्र कर चुकी हो। यदि दो टीमें लगातार अभ्यास करती हैं, तो दोनों को अलग-अलग और नई पिच उपलब्ध कराई जाएगी। यहां तक कि अगर पहली टीम अपना अभ्यास जल्दी समाप्त कर दे, तब भी दूसरी टीम उसी नेट या रेंज-हिटिंग विकेट का उपयोग नहीं कर सकेगी।   दोनों टीमों को मिलेंगे दो-दो नेट अभ्यास सत्र के दौरान दोनों टीमों को दो-दो नेट उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि रेंज-हिटिंग के लिए मुख्य स्क्वायर पर एक अतिरिक्त नेट दिया जाएगा। यदि अभ्यास समय को लेकर कोई विवाद होता है, तो ऐसी स्थिति में मेहमान टीम को प्राथमिकता देने का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि घरेलू टीम को अपने पसंदीदा अभ्यास समय का पहला विकल्प मिलेगा, लेकिन अगर मेहमान टीम ने पिछला मैच खेला हो या लंबी यात्रा करके आई हो, तो उसके अनुरोध को प्राथमिकता दी जा सकती है।   मैच से चार दिन पहले मुख्य पिच पर रोक पिच की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह भी तय किया गया है कि किसी भी फ्रेंचाइज़ी के पहले घरेलू मुकाबले से चार दिन पहले तक मुख्य पिच पर न तो अभ्यास सत्र होंगे और न ही अभ्यास मैच खेले जाएंगे। इस दौरान यदि घरेलू टीम को अभ्यास की जरूरत हो, तो राज्य क्रिकेट संघ को वैकल्पिक मैदान मुफ्त में उपलब्ध कराना होगा।   अभ्यास मैचों की भी सीमा टीमें चाहें तो अभ्यास मैच खेल सकती हैं, लेकिन उनकी संख्या अधिकतम दो ही होगी और इसके लिए पहले से बोर्ड को सूचित करना अनिवार्य होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि अभ्यास मैच उस पिच पर न खेले जाएं, जिस पर आधिकारिक मुकाबला होना है। इसके अलावा, अगर कोई टीम फ्लडलाइट में अभ्यास मैच आयोजित करना चाहती है, तो उसकी अवधि अधिकतम साढ़े तीन घंटे तक ही सीमित रखी गई है। BCCI के मुताबिक इन नए नियमों का मकसद पिच की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना और सभी टीमों को अभ्यास के लिए समान और निष्पक्ष अवसर देना है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0