deepika pandey singh

National Stakeholder Consultation
दिल्ली में मौजूद थे वित्त मंत्री, लेकिन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन से रहे गायब

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर दिल्ली दौरे पर होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया। हालांकि वित्त मंत्री ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी और न ही इससे संबंधित कोई पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो दिनों से रांची से बाहर हैं, इसलिए कार्यक्रम की जानकारी भी उन्हें नहीं मिल सकी।   वहीं, सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस कोटे से मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और डॉ. इरफान अंसारी शामिल हुए। दूसरी ओर, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में वरिष्ठ मंत्री की गैरमौजूदगी को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।   कांग्रेस नेतृत्व से की मुलाकात सरकारी कार्यक्रम से दूर रहने के बावजूद वित्त मंत्री ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय का दौरा किया। यहां उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान संगठन और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय, विकास योजनाओं की प्रगति तथा चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए वादों को लागू करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार और संगठन मिलकर विकास कार्यों को गति दे रहे हैं तथा जनहित से जुड़े वादों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।   विभागीय पत्राचार पर भी उठाया सवाल वित्त मंत्री ने हाल ही में सरकारी वाहन लौटाने को लेकर विभाग के संयुक्त सचिव पंकज सिंह द्वारा भेजे गए पत्र पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने इस संबंध में विभागीय सचिव से स्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन अब तक उन्हें कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में विभागीय स्तर पर समन्वय और संवाद को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Muzaffarpur BDO Suicide Case
मुजफ्फरपुर BDO सुसाइड केस: कथित प्रेम संबंध और मानसि प्रताड़ना के बीच पत्नी की मौत, जांच तेज

पटना, एजेंसियां। बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आए चर्चित बीडीओ सुसाइड केस ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जाले प्रखंड के बीडीओ मनोज कुमार की पत्नी अमृता कुमारी की जहरीला पदार्थ खाने से मौत के मामले में पुलिस कथित प्रेम संबंध, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों की जांच कर रही है। मामले में बेगूसराय में तैनात महिला दारोगा अनु कुमारी का नाम भी सामने आया है। पुलिस दोनों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।   2020 में शुरू हुआ कथित संबंध, शादी के बाद बढ़ा विवाद पुलिस जांच के अनुसार, मनोज कुमार और अनु कुमारी की मुलाकात वर्ष 2020 में मुजफ्फरपुर की एक कोचिंग संस्था में हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच कथित रूप से नजदीकियां बढ़ीं। इसी दौरान मनोज कुमार ने दिसंबर 2022 में अमृता कुमारी से विवाह किया। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद अमृता को पति के कथित संबंधों की जानकारी मिली, जिसके बाद परिवार में लगातार तनाव बना रहा।   वीडियो कॉल और डिजिटल सबूत जांच के केंद्र में मृतका के परिजनों का आरोप है कि घटना वाले दिन बीडीओ और महिला दारोगा ने अमृता से वीडियो कॉल पर बात की और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोप है कि लगातार तनाव और अपमान के कारण अमृता ने जहरीला पदार्थ खा लिया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।   परिजनों ने पुलिस को एक पेन ड्राइव भी सौंपी है, जिसमें कथित चैट, तस्वीरें और वीडियो कॉल से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है। पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
Deepika Pandey Singh
झारखंड की पंचायतों की बदलेगी तस्वीर, 16वें वित्त आयोग से मिलेंगे ₹14,231 करोड़

रांची। झारखंड की पंचायतों को 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल 14,231 करोड़ रुपये की अनुदान राशि मिलेगी। यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान सामने आई। इस राशि में 11,385 करोड़ रुपये बेसिक ग्रांट और 2,846 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में दिए जाएंगे। कार्यशाला में राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने झारखंड का पक्ष रखते हुए केंद्र सरकार से अनुदान राशि समय पर जारी करने और 15वें वित्त आयोग की बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की।   समय पर फंड मिलने से विकास योजनाओं को मिलेगी गति मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पंचायतों को समय पर अनुदान नहीं मिलने से ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से परफॉर्मेंस ग्रांट के वितरण में भी उदारता बरतने का आग्रह किया। उनके अनुसार, 16वें वित्त आयोग की यह राशि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को अधिक सक्षम बनाएगी तथा स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और जनसेवाओं में तेजी आएगी।   राजस्व क्षमता बढ़ाने में सहयोग की जरूरत मंत्री ने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों में पंचायतों की अपनी राजस्व संग्रहण क्षमता अभी सीमित है। ऐसे में वित्त आयोग को केवल प्रदर्शन के आधार पर अनुदान  तय करने के बजाय राज्यों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने पंचायतों की वित्तीय व्यवस्था मजबूत करने, राजस्व संग्रहण बढ़ाने और तकनीकी क्षमता विकसित करने के लिए अतिरिक्त सहयोग की मांग की।   अनुदान के उपयोग को लेकर उठाए सवाल दीपिका पांडेय सिंह ने यह भी कहा कि पूर्व वित्त आयोगों की बची हुई राशि के उपयोग या उसे वापस करने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। इससे नई अनुदान राशि प्राप्त करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ सकती हैं। उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। कार्यशाला में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल तथा झारखंड पंचायती राज निदेशक बी. राजेश्वरी भी मौजूद रहीं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Pradhan Mantri Awas Yojana
1.20 लाख नहीं, 2 लाख मिले, दीपिका पांडेय सिंह ने PM आवास योजना की राशि बढ़ाने की उठाई मांग

रांची। झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को 1.20 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी है। उन्होंने यह प्रस्ताव नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने रखा।   बढ़ती निर्माण लागत का दिया हवाला दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि निर्माण सामग्री और मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि के कारण मौजूदा सहायता राशि में गुणवत्तापूर्ण पक्का घर बनाना कठिन हो गया है। उनका कहना था कि यदि सहायता राशि 2 लाख रुपये कर दी जाए तो ग्रामीण गरीब परिवारों को मजबूत और टिकाऊ आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।   फैब्रिकेटेड मकानों और एकमुश्त भुगतान का सुझाव मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आधुनिक फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले घरों के निर्माण को बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार, इससे कम समय में मजबूत और गुणवत्तापूर्ण मकान तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही उन्होंने लाभुकों को किस्तों के बजाय पूरी राशि एकमुश्त देने की मांग की, ताकि धन की कमी के कारण निर्माण कार्य बीच में न रुके।   अबुआ आवास योजना और मनरेगा को जोड़ने की पहल दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना के तहत घर बनाने वाले लाभार्थियों को मनरेगा के माध्यम से 90 दिनों की मजदूरी देने का प्रस्ताव भी रखा। उनका मानना है कि इससे गरीब परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी और ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।   ग्रामीण उद्योगों और महिला समूहों पर भी जोर सम्मेलन में मंत्री ने झारखंड में ग्रामीण उद्योगों के विस्तार और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि राज्य की करीब 32 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और पलाश व अदिवा जैसे ब्रांडों के माध्यम से अपने उत्पादों को पहचान दिला रही हैं। साथ ही बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत झारखंड के आम की दुबई, लंदन और इटली जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच को राज्य की बड़ी उपलब्धि बताया।   बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फैब्रिकेटेड आवास संबंधी सुझावों पर सकारात्मक रुख दिखाया और इन प्रस्तावों पर विचार करने का भरोसा जताया।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Deepika Pandey Singh
गोड्डा में विकास को मिली नई रफ्तार, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने 7 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का किया उद्घाटन-शिलान्यास

गोड्डा। गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह  ने 7 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचलाधिकारी आवास, कर्मचारी आवास, प्रखंड परिसर विकास और अन्य निर्माण कार्यों का उद्घाटन किया गया। वहीं 25.73 लाख रुपये की लागत से बनने वाले पार्किंग स्थल तथा 65.62 लाख रुपये की लागत वाले ईटहरी पंचायत के विवाह भवन का शिलान्यास भी किया गया।   बेहतर प्रशासन और सेवा वितरण पर जोर मंत्री ने कहा कि मजबूत आधारभूत संरचना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा वितरण की आधारशिला है। उन्होंने अधिकारियों से ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की अपील की।   भुस्का पहाड़ बनेगा नया पर्यटन केंद्र दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि मेहरमा के भुस्का पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। जल्द ही इस परियोजना का शिलान्यास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगैया पार्क को विकसित किया गया है, उसी तरह मेहरमा में भी नया पर्यटन केंद्र तैयार किया जाएगा।   पंचायतों को सशक्त बनाने की पहल मंत्री ने कहा कि पंचायतों को वर्षों से लंबित 15वें वित्त आयोग की राशि उपलब्ध कराई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिली है। साथ ही मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास, राशन और पेंशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।   डिजिटल सेवाओं का होगा विस्तार उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवाओं के विस्तार से ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, पेंशन, आवास और अन्य सरकारी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं। भविष्य में ड्राइविंग लाइसेंस और स्वास्थ्य बीमा जैसी सेवाओं के लिए भी पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में भी प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

abhishek singh जून 23, 2026 0
Pranav Jha Rajya Sabha
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा ने राज्यसभा चुनाव के लिए खरीदा पर्चा

रांची। झारखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार प्रणव झा ने आज नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत करते हुए नामांकन पत्र खरीदा। इस अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप, मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री दीपिका पांडे सिंह, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी, रियाज अंसारी, सुल्तान अहमद तथा उज्ज्वल प्रकाश तिवारी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Unknown जून 6, 2026 0
JTET Language Dispute
भोजपुरी-मगही विवादः 3 मंत्री समर्थन में, तो 4 का विरोध

रांची। Jharkhand JTET Dispute: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की जिलावार सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने का मामला पूरी तरह उलझ गया है। इस विवाद को सुलझाने के लिए गठित मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक बेनतीजा रही। पूर्व की पांच सदस्यीय कमेटी के विस्तार के बाद यह पहली बैठक थी, जिसमें मंत्रियों के बीच आपसी सहमति नहीं बन सकी। अब कमेटी अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपेगी, जिनका फैसला इस विषय पर अंतिम होगा। समर्थन में 3, तो विरोध में 4 मंत्री बैठक में कमेटी के भीतर भाषाई प्राथमिकताओं को लेकर मंत्रियों के बीच स्पष्ट विभाजन देखने को मिला। कमेटी में शामिल दो नए मंत्रियों- शिल्पी नेहा तिर्की और हफिजुल हसन अंसारी ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने पर कड़ी असहमति जताई। पहले से कमेटी में शामिल मंत्री सुदिव्य सोनू और योगेंद्र महतो पहले से ही इसके विरोध में थे। इसके साथ ही विरोध करने वाले मंत्रियों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। कमेटी के संयोजक व वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और मंत्री संजय सिंह यादव इन तीनों भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में डटे हैं। राधाकृष्ण किशोर ने चला नया दांव बैठक के दौरान सहमति न बनते देख कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने एक नया प्रस्ताव सामने रखा। उनका कहना था कि यदि ये तीन भाषाएं शामिल नहीं की जाती हैं, तो हिंदी को पेपर टू (Paper 2) में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि पलामू और गढ़वा में नागपुरी भाषा को सूची में शामिल किया गया है, जबकि वहां दो प्रतिशत आबादी भी इस भाषा को नहीं बोलती। उन्होंने जोर दिया कि राज्य का गठन जनजातीय भावना के साथ-साथ यहां के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के लिए सभी वर्गों को ध्यान में रखकर हुआ था। हालांकि, इस प्रस्ताव पर बाकी मंत्रियों ने साफ कहा कि पेपर वन (Paper 1) में हिंदी पहले से ही मौजूद है। किस मंत्री ने क्या तर्क दिया बैठक में कमेटी की नई सदस्य और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य में अभी स्पष्ट स्थानीय नीति नहीं है, ऐसे में भाषा से ही स्थानीय युवाओं के अधिकारों की रक्षा और बाहरी तत्वों पर नियंत्रण संभव है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) राज्य अपनी जरूरत और योग्य शिक्षकों की तलाश के लिए लेता है, वरना सीटेट (CTET) ही काफी था। जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाएं हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक हितों से जुड़ी हैं। जब स्कूलों में मगही, भोजपुरी और अंगिका की पढ़ाई ही नहीं होती, तो इन्हें परीक्षा में कैसे शामिल किया जा सकता है।” हफिजुल हसन अंसारी ने क्या कहा मंत्री हफिजुल हसन अंसारी ने कहा कि मगही, भोजपुरी और अंगिका बिहार की मूल भाषाएं हैं। जब खुद बिहार ने अपनी प्रशासनिक सेवा (BPSC) की परीक्षाओं में इन भाषाओं को शामिल नहीं किया है, तो झारखंड इन्हें अपनी परीक्षा में क्यों शामिल करें? इन्हें किसी भी हाल में शामिल नहीं किया जा सकता।” मंत्री सुदिव्य सोनू ने क्या कहा मंत्री सुदिव्य सोनू ने इस विवाद पर तर्क देते हुए कहा कि झारखंड राज्य का गठन जिन मूल भावनाओं और उद्देश्यों के लिए हुआ था, उसका हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने दलील दी कि मगही, भोजपुरी और अंगिका झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं हैं, इसलिए इन्हें शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है।” दीपिका पांडेय और राधाकृष्ण किशोर ने किया समर्थन हालांकि, दीपिका पांडेय सिंह इन 3 भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में दिखीं। उन्होंने कहा कि अंगिका, भोजपुरी और मगही को परीक्षा में शामिल किया जाना चाहिए। हर भाषा का अपना सम्मान होना चाहिए।” मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कमेटी की सदस्य और मंत्री दीपिका की बात का समर्थन किया। उन्होंने दलील दी कि राज्य में किसी भी क्षेत्र के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, परीक्षा में सबको समान अवसर मिलना चाहिए।” मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी रिपोर्ट कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट कर दिया है कि यह इस संबंध में आखिरी बैठक थी। उन्होंने कमेटी के सभी सदस्यों से कहा है कि यदि वे चाहें तो अपनी बातें लिखित रूप में एक-दो दिन के भीतर दे सकते हैं। इसके बाद मंत्रियों की इस भावना और लिखित दलीलों से अवगत कराते हुए पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेज दी जाएगी, जिसके बाद इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर से ही लिया जाएगा।

Unknown जून 4, 2026 0
JSLPS Initiative
JSLPS की पहल सफल, आम्रपाली आम को मिला मॉल और बड़े बाजारों तक पहुंचने का रास्ता

रांची। झारखंड के किसानों द्वारा उत्पादित आम्रपाली आम अब राज्य के बड़े शहरों और मॉल्स तक पहुंचेंगे। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में अपना मार्ट और गुमला जिले की एमवीएम बाघिमा पालकोट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (FPO) के बीच आम खरीद को लेकर समझौता किया गया है। पहले चरण में दो टन आम की खरीद समझौते के तहत पहले चरण में अपना मार्ट ने एफपीओ से दो टन आम्रपाली आम की खरीद की है। यह आम अब रांची समेत राज्य के विभिन्न शहरों में स्थित अपना मार्ट के स्टोर्स में उपलब्ध होंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह  की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर JSLPS के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) अनन्य मित्तल, अपना मार्ट के स्टेट सीईओ मनोज पांडेय और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि एफपीओ से आम खरीदने का यह सिलसिला भविष्य में भी जारी रहेगा। किसानों और महिला समूहों में खुशी गुमला जिले की एफपीओ से जुड़ी महिला किसान भगवती देवी, करुणा देवी और कुमवारी बरवा ने इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें अपने आम स्थानीय बाजारों में कम कीमत पर बेचने पड़ते थे, जिससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था। महिलाओं ने कहा कि इस बार अपना मार्ट से सीधे खरीद का ऑर्डर मिलने के कारण उन्हें अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिला है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त आय बच्चों की शिक्षा और खेती के विस्तार में सहायक साबित होगी। बिरसा हरित ग्राम योजना का दिख रहा असर JSLPS द्वारा संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फलदार पौधों की बागवानी को बढ़ावा दिया गया है। इसी योजना के अंतर्गत तैयार आम्रपाली आम अब संगठित बाजार तक पहुंच रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह पहल किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक एफपीओ को बाजार से जोड़ा जाए ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह की पहल से ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और झारखंड के कृषि उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होगा।

Unknown जून 4, 2026 0
Deepika Pandey Singh protest in Ranchi
रांची में एलपीजी किल्लत और बढ़ती तेल कीमतों के खिलाफ मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का विरोध

रांची। झारखंड विधानसभा के बाहर महागठबंधन की ओर से आयोजित विरोध-प्रदर्शन में झारखंड सरकार की मंत्री Deepika Pandey Singh भी शामिल हुईं। यह प्रदर्शन एलपीजी गैस की कथित किल्लत और पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ केंद्र सरकार के विरोध में किया गया। केंद्र सरकार पर साधा निशाना मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुक गए हैं और इसका असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज हर घर में यह चिंता है कि एलपीजी और पेट्रोल-डीज़ल की उपलब्धता और कीमतों का क्या होगा। एलपीजी संकट का असर उन्होंने कहा कि एलपीजी की कमी का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। जिन व्यापारियों का काम कमर्शियल गैस सिलेंडर पर निर्भर है, उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही घरों की रसोई पर भी इसका असर पड़ रहा है। सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल दीपिका पांडेय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल नारों और प्रतीकों की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्षी नेताओं ने कई बार गैस संकट को लेकर प्रधानमंत्री को आगाह किया, लेकिन इस पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। राहत की मांग मंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि एलपीजी की आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य की जाए और पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण किया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

Unknown मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0