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Devotees puja Lord Hanuman with flowers and sindoor on Telugu Hanuman Jayanti festival
कब है तेलुगु हनुमान जयंती 2026? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

हनुमान जयंती भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाती है। जहां उत्तर भारत में यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, वहीं आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेलुगु हनुमान जयंती ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व 12 मई (मंगलवार) को मनाया जाएगा। तिथि और मुहूर्त दशमी तिथि प्रारंभ: 11 मई 2026, दोपहर 3:24 बजे दशमी तिथि समाप्त: 12 मई 2026, दोपहर 2:52 बजे तेलुगु परंपरा के अनुसार, इस दिन व्रत, पूजा और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। 41 दिनों की दीक्षा परंपरा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व सिर्फ एक दिन का नहीं होता, बल्कि 41 दिनों की दीक्षा के रूप में मनाया जाता है। इस दीक्षा की शुरुआत: 2 अप्रैल 2026 समापन: 12 मई 2026 (हनुमान जयंती) भक्त इस अवधि में संयम, व्रत और विशेष पूजा का पालन करते हैं। दक्षिण भारत में हनुमान जी का महत्व हनुमान जी को भक्ति, शक्ति और संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। रामायण के अनुसार, कर्नाटक के अंजनाद्रि पर्वत को उनका जन्मस्थान माना जाता है। दक्षिण भारत में हनुमान जी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है: कर्नाटक: हनुमंथा, आंजनेय आंध्र-तेलंगाना: हनुमंतुडु, आंजनेयुडु तमिलनाडु: आंजनेयार पूजा विधि (सरल तरीके से) सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें पूजा स्थान को साफ कर दीपक जलाएं हनुमान जी को सिंदूर, चोला, फूल, फल, पान, गुड़-चना अर्पित करें हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें अंत में आरती कर प्रसाद बांटें विशेष महत्व तेलुगु हनुमान जयंती पर की गई पूजा से साहस, शक्ति और संकटों से मुक्ति की प्राप्ति मानी जाती है। अगर आप दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती मनाना चाहते हैं, तो 12 मई 2026 का दिन बेहद खास है। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता लाती है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Devotees worship Maa Baglamukhi with yellow flowers, turmeric garlands and traditional rituals on Jayanti
बगलामुखी जयंती 2026: आज मां पीताम्बरा की पूजा, जानें क्यों पड़ा यह दिव्य नाम

आज श्रद्धा से मनाई जा रही बगलामुखी जयंती आज, 24 अप्रैल 2026 को देशभर में Baglamukhi Jayanti श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि मां बगलामुखी की आराधना से शत्रु बाधाएं दूर होती हैं, वाणी में शक्ति आती है और जीवन में विजय प्राप्त होती है। दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी को आठवां स्थान प्राप्त है। मां बगलामुखी को क्यों कहते हैं पीताम्बरा? मां बगलामुखी को 'पीताम्बरा देवी' के नाम से भी जाना जाता है। 'पीत' यानी पीला और 'अम्बर' यानी वस्त्र। मान्यता है कि देवी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है और वे सदैव पीले वस्त्र धारण करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में जब भयंकर तूफान से सृष्टि संकट में पड़ गई थी, तब भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुई थीं। उस समय उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी और पीतवर्ण था। यही कारण है कि उन्हें पीताम्बरा कहा जाता है। पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व मां बगलामुखी की आराधना में पीले रंग का विशेष स्थान है। भक्त पूजा के दौरान: पीले वस्त्र धारण करते हैं पीले फूल अर्पित करते हैं हल्दी की माला चढ़ाते हैं पीले नैवेद्य का भोग लगाते हैं धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीला रंग ऊर्जा, समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। बगलामुखी जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष तिथि का समय इस प्रकार है: अष्टमी तिथि प्रारंभ: 23 अप्रैल 2026, रात 8:49 बजे अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026, शाम 7:21 बजे उदया तिथि: 24 अप्रैल 2026 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक मां बगलामुखी की पूजा से क्या मिलता है? धार्मिक मान्यता है कि मां बगलामुखी की कृपा से शत्रुओं पर विजय मिलती है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली बनती है। विशेष रूप से न्यायालय, प्रतियोगी परीक्षा और विवादों में सफलता के लिए उनकी पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Goddess Brahmacharini idol with diya, flowers and fruits during Navratri Day 2 worship rituals
नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद, जानें पूरी विधि, मंत्र और भोग

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। 20 मार्च 2026 को जैसे ही इस पावन दिन की शुरुआत होती है, घर-घर में पूजा के साथ उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बन जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को तप, संयम और साधना की देवी माना जाता है, जिनकी आराधना से जीवन में शांति, ज्ञान और स्थिरता आती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ग्रहों के संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर चंद्र और मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने में इस दिन की पूजा लाभकारी मानी जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का महत्व और ज्योतिषीय संबंध मां ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जो कठोर तपस्या और आत्मसंयम का प्रतीक है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र कमजोर हो या मानसिक अशांति बनी रहती हो, तो इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से मन स्थिर होता है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है। विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। मां का दिव्य स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत सरल और शांत होता है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल रखती हैं। यह रूप तपस्या, ज्ञान और त्याग का प्रतीक है। ज्योतिष में सफेद रंग को चंद्र का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस दिन सफेद या पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा सामग्री सफेद या पीले फूल   घी का दीपक   चंदन, रोली, अक्षत   धूप-दीप   पान-सुपारी   फल (विशेषकर सेब, नाशपाती, पीले फल)   पूजा विधि प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें   पूजा स्थल को साफ कर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें   दीपक जलाकर मां को फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें   शांत मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ पूजा करें   जल्दबाजी से बचें, भाव और ध्यान सबसे महत्वपूर्ण होते हैं   मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः” “दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥” ज्योतिष मान्यता है कि इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से चंद्र और मंगल ग्रह संतुलित होते हैं, जिससे जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आती है। भोग और विशेष अर्पण मां ब्रह्मचारिणी को फल अत्यंत प्रिय हैं। सेब, नाशपाती और पीले फल चढ़ाना शुभ माना जाता है। साथ ही सफेद और पीले फूल अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Devotees gathered at Mahavir Mandir Patna
रामनवमी 2026: पटना के महावीर मंदिर में रात 2 बजे खुलेंगे पट, 15 काउंटरों से मिलेगा नैवेद्यम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम बिहार की राजधानी पटना में रामनवमी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस साल 27 मार्च को पड़ने वाले इस पावन पर्व पर महावीर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। रात 2 बजे खुलेंगे मंदिर के पट, होगी विशेष आरती रामनवमी के अवसर पर 27 मार्च को महावीर मंदिर के पट रात 2 बजे ही खोल दिए जाएंगे। इसके बाद करीब 15 मिनट तक भगवान बजरंगबली की विशेष आरती होगी। आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और प्रसाद चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि देर रात तक भक्तों का आना-जाना जारी रहेगा। श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुविधा देने के लिए प्रशासन ने कई इंतजाम किए हैं: लंबी कतारों के लिए बैरिकेडिंग धूप से बचाव के लिए छावनी पेयजल और शर्बत की व्यवस्था मोबाइल शौचालय मेडिकल कैंप एलईडी स्क्रीन के जरिए लाइव पूजा प्रसारण महिला-पुरुष के लिए अलग लाइन, बाहर लगेंगे काउंटर भारी भीड़ को देखते हुए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग लाइन बनाई जाएगी। ये कतार वीर कुंवर सिंह पार्क से लेकर महावीर मंदिर तक जाएगी। मंदिर परिसर के बाहर से लेकर पार्क तक 15 नैवेद्यम लड्डू काउंटर लगाए जाएंगे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर के अंदर कोई काउंटर नहीं रखा जाएगा। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रामनवमी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रहेगी। पुलिस बल के साथ-साथ करीब 100 से 120 प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात किए जाएंगे। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष रणनीति तैयार की है। 24 हजार किलो नैवेद्यम लड्डू का लक्ष्य महावीर मंदिर के प्रसिद्ध नैवेद्यम लड्डू की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर तैयारी की गई है। शुरुआत में 18 हजार किलो लड्डू तैयार रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर 6 हजार किलो अतिरिक्त लड्डू बनाए जाएंगे। इस तरह कुल 24 हजार किलो नैवेद्यम लड्डू की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। आस्था और व्यवस्था का संगम पटना में रामनवमी का पर्व हर साल विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार भी प्रशासन और मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तैयारियों में जुटे हैं, ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो और वे शांतिपूर्ण माहौल में पूजा-अर्चना कर सकें।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Devotees performing Sheetala Ashtami puja with neem leaves and offerings to Goddess Sheetala
Sheetala Ashtami 2026: आज शीतला अष्टमी का पावन व्रत, आरोग्य की देवी माता शीतला की पूजा से मिलता है स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

  हिंदू धर्म में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे कई स्थानों पर बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन आरोग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा की कामना के साथ माता शीतला की पूजा और व्रत के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से रोग-दोष दूर होते हैं और परिवार को स्वास्थ्य एवं सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतला माता को देवी दुर्गा का ही एक पावन रूप माना जाता है। वे रोगों से रक्षा करने वाली और स्वास्थ्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं। विशेष रूप से चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए प्राचीन समय से ही शीतला माता की पूजा की जाती रही है।   शीतला अष्टमी व्रत और पूजा विधि शीतला अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं को प्रातःकाल जल्दी उठकर ठंडे जल से स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में एक चौकी स्थापित कर उस पर माता शीतला की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा के दौरान माता को पुष्प, नीम की पत्तियां, हल्दी, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही गंगाजल छिड़ककर पूजा स्थल को शुद्ध किया जाता है। शीतला माता को ठंडा और एक दिन पूर्व बनाया गया भोजन विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए पूजा में मालपुआ, मिठाई, दही, और बासी भोजन (बसोड़ा) का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद भक्तों को शीतला माता की व्रत कथा और स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही देवी का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती कर पूजा संपन्न की जाती है। पूजा के समापन पर एक लोटे में गंगाजल या शुद्ध जल लेकर उसमें नीम की पत्तियां डालकर घर के सभी कमरों और परिवार के सदस्यों पर छिड़कना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि का वातावरण बना रहता है।   शीतला माता के प्रमुख मंत्र पूजा के दौरान माता शीतला के इन मंत्रों का जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है- ॐ शीतलायै नमः।   ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।   शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः॥   वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनी-कलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्॥ इन मंत्रों के जप से देवी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों को रोगों से मुक्ति तथा मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।   शीतला अष्टमी पर करें ये विशेष उपाय शास्त्रों के अनुसार शीतला माता को शीतल वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए इस दिन ठंडे जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि मौसम के बदलाव के दौरान शरीर के तापमान को संतुलित रखने में यह सहायक होती है। इसके अलावा शीतला अष्टमी की पूजा में हल्दी अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के बाद हल्दी का तिलक स्वयं लगाकर परिवार के अन्य सदस्यों को भी लगाना चाहिए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार हल्दी शुद्धता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु शीतला अष्टमी के दिन सच्चे मन से माता शीतला की पूजा-अर्चना और व्रत करते हैं, उन्हें स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0